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  • भाजपा 10 अगस्त को निकलेगी ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा

    ‘हर घर तिरंगा‘ अभियान को लेकर कार्यशाला.

    The News Post4U.

    गिरिडीह : पचंबा स्थित भाजपा कार्यालय, हरिचक में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर एक भव्य और संगठित जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष महादेव दुबे ने की।

     कार्यशाला का उद्देश्य.

    इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हर घर तिरंगा अभियान को ज़मीनी स्तर पर सफल बनाना और जिलेभर में इसकी प्रभावशाली तैयारी सुनिश्चित करना था।
    इस मौके पर भाजपा नेताओं ने भाजयुमो के कार्यकर्ताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया और अभियान को लेकर उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

    तैयारी का विस्तृत कार्यक्रम.

    जिलाध्यक्ष महादेव दुबे ने जानकारी दी कि 7 और 8 अगस्त को गिरिडीह जिले के सभी 34 मंडलों में मंडल स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। 10 अगस्त को गिरिडीह मुख्यालय सहित प्रमुख स्थलों पर भव्य तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी, जो जिले के इतिहास की सबसे बड़ी राष्ट्रभक्ति यात्रा साबित होगी। 10 अगस्त से 14 अगस्त तक जिलेभर के हर घर, हर दुकान, हर प्रतिष्ठान पर तिरंगा फहराने का आह्वान किया गया है।

    तिरंगा यात्रा का उद्देश्य.

    इस यात्रा का मकसद न केवल राष्ट्रप्रेम का संदेश फैलाना है, बल्कि भारत की आज़ादी के संघर्ष और वीर सपूतों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
    इस दौरान अंग्रेजों से लड़ी गई ऐतिहासिक लड़ाइयों, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और तिरंगे के गौरव को लेकर जनजागरूकता फैलाई जाएगी।

    भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष की अपील.

    भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज ने कार्यकर्ताओं से कहा कि“हर घर तिरंगा अभियान सिर्फ एक आयोजन नहीं, यह राष्ट्र की एकता और अखंडता का प्रतीक है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि गिरिडीह जिले के प्रत्येक घर, हर संस्थान, और हर गली में तिरंगा लहराए।” उन्होंने समाज के सभी वर्गों, सामाजिक संगठनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से भी संपर्क साधने का निर्देश दिया, ताकि यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले।

    दिए गए संगठनात्मक निर्देश.

    जिलाध्यक्ष महादेव दुबे ने कहा कि “भाजपा के संगठनात्मक दृष्टिकोण से जिले के सभी 34 मंडलों में कार्यशालाएं आयोजित होंगी। इसके लिए मंडल अध्यक्षों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
    यह तिरंगा यात्रा ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण होगी। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से गिरिडीह भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देशभक्ति केवल भावना नहीं, एक जीवंत कार्यनीति है। कार्यशालाओं से लेकर यात्रा और तिरंगा फहराने तक की योजना जिले में राष्ट्रप्रेम का वातावरण तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

    सैकड़ों कार्यकर्ता हुए शामिल.

    इस कार्यशाला में जिलेभर से सैकड़ों भाजपा नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे विनय सिंह, प्रदीप साहू, कामेश्वर पासवान, श्याम प्रसाद, नवीन सिन्हा, उदय सिंह, मनोज यादव, देवनाथ राणा, रंजीत राय, संगीता सेठ, मुकेश जलान, उषा कुमारी, पिंकी कुमारी, अमर सिन्हा, राजेश जायसवाल, मनोज शंघाई, रंजन सिन्हा, सुनील साव, अमित साव, राजेश गुप्ता, नगर अध्यक्ष हरमिंदर सिंह बग्गा, प्रदीप राय, अरविंद बर्नवाल, गंगाधर वर्मा, सौरभ सागर मिश्रा, संजय हाजरा, राजेंद्र राय, दीपक भारती, पवन साव, सुनीता विश्वकर्मा, सुरेश मंडल, विवेक गुप्ता, मिथुन चंद्रवंशी, सदानंद साहू, प्रदीप सिंह, दिनेश महतो, अजीत राणा, अजीत राम, अशोक केसरी, कृष्ण जी, अशोक राय, खिरोधर दास समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी।

     

  • दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा: नेमरा गांव में होगा अंतिम संस्कार

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    झारखंड आंदोलन के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और “दिशोम गुरु” के नाम से पहचाने जाने वाले शिबू सोरेन अब हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और सिद्धांत झारखंड की धरती पर अमर रहेंगे।

    विधानसभा परिसर में दी गई अंतिम श्रद्धांजलि.

    राज्य की राजधानी रांची के विधानसभा परिसर में जब शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर लाया गया, तो पूरा परिसर शोक और सम्मान में डूब गया।

    विधानसभा में गॉड ऑफ ऑनर.

    झारखंड विधानसभा परिसर में उन्हें राजकीय सम्मान (गॉड ऑफ ऑनर) दिया गया।
    राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और हजारों आम नागरिक उन्हें अंतिम बार श्रद्धांजलि देने पहुंचे। शोकाकुल वातावरण में ‘दिशोम गुरु अमर रहें’ के नारों ने माहौल को और भी भावुक बना दिया।

    नेमरा गांव में अंतिम संस्कार की तैयारी

    रामगढ़ के नेमरा गांव, जहां से शिबू सोरेन की जीवन यात्रा शुरू हुई थी, वहीं आज दोपहर 3 बजे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। यह वही गांव है, जहां एक 15 वर्षीय बालक ने अपने पिता की हत्या के बाद अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रतिज्ञा ली थी – और यहीं से झारखंड आंदोलन का बीज अंकुरित हुआ था।

    हेमंत सोरेन की भावुक पोस्ट:

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो खुद शिबू सोरेन के बेटे हैं, ने सोशल मीडिया पर लिखा –

    “मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुजर रहा हूँ। मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं, झारखंड की आत्मा का एक स्तंभ चला गया।”

    उन्होंने यह भी कहा:

    “मैं उन्हें सिर्फ बाबा नहीं कहता था। वे मेरे पथप्रदर्शक थे। मेरे विचारों की जड़ें उन्हीं से थीं। वो उस घने जंगल जैसे थे, जिसकी छांव ने हजारों-लाखों झारखंडियों को अन्याय की धूप से बचाया।”

    अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब.

    शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा जब नेमरा गांव के लिए रवाना हुई, तो सड़क के दोनों किनारों पर जनसागर उमड़ पड़ा। लोग बस एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे।
    हर कोने से उठती आवाज़ – “गुरुजी अमर रहें” – उनके प्रति लोगों के प्रेम और श्रद्धा को दर्शा रही थी।

    देश भर से आए राजनेता.

    इस दुखद घड़ी में देशभर से राजनीतिक हस्तियों ने शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी।
    विपक्ष के नेता राहुल गांधी, काँग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सांसद पप्पू यादव, संजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, मंत्री सुदिव्य कुमार,  फुरकान अंसारी, समेत कई दिग्गज नेता अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे हैं

    ओरमांझी में भी श्रद्धांजलि.

    रांची के ओरमांझी स्थित लाल बहादुर शास्त्री चौक पर भी भारी संख्या में लोग जुटे।
    पूर्व सांसद रामटहल चौधरी के नेतृत्व में झामुमो, कांग्रेस, भाजपा, आजसू, झाविमो समेत सभी दलों के कार्यकर्ता व आम नागरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद पार्थिव शरीर वाले वाहन पर बैठे हुए थे, और उनके पीछे-आगे सैकड़ों गाड़ियां – जैसे पूरी झारखंड सड़क पर उतर आई हो।

    संसद में भी दी गई श्रद्धांजलि.

    लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले स्पीकर ओम बिरला ने शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा –

    “वे सामाजिक न्याय और जनजातीय कल्याण के लिए हमेशा याद किए जाएंगे।”
    शिबू सोरेन आठ बार लोकसभा सांसद रहे और केंद्र में मंत्री व राज्य में मुख्यमंत्री भी।

    नेमरा तक 8 किलोमीटर पैदल यात्रा.

    अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग 8 किलोमीटर पैदल चलकर नेमरा गांव जा रहे हैं।
    शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा एक जनांदोलन जैसी दिख रही है – जो यह बताती है कि उन्होंने केवल राजनीति नहीं की, बल्कि लोगों के दिलों पर राज किया

    चर्च ने भी दी श्रद्धांजलि.

    जीईएल चर्च ऑफिस, रांची में बिशप सीमांत तिर्की समेत चर्च के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि दी। यह उनके सामाजिक समरसता और धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण को दर्शाता है

    संघर्षों की कहानी:

    हेमंत सोरेन ने कहा:

    “बचपन में मैं जब उनसे पूछता – ‘बाबा, आपको लोग दिशोम गुरु क्यों कहते हैं?’
    वे मुस्कुरा कर कहते – ‘क्योंकि बेटा, मैंने सिर्फ उनका दुख समझा और उनकी लड़ाई अपनी बना ली।’”

    शिबू सोरेन ने गरीबी, जमींदारी शोषण और आदिवासी उत्पीड़न के खिलाफ जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने आदिवासी समाज को न केवल पहचान दिलाई, बल्कि आवाज भी दी।

    भारत रत्न की मांग.

    मंत्री इरफान अंसारी ने कहा –

    “मैं राष्ट्रपति से अपील करता हूं कि गुरुजी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। उन्होंने गरीबों की लड़ाई लड़ी, वह वास्तव में इसके हकदार हैं।”

    अंतिम सलाम.

    झारखंड की आत्मा, आदिवासी अस्मिता की आवाज, और आंदोलन की जीवित किताब शिबू सोरेन अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन उनके विचार, उनके संघर्ष और उनकी छाया आने वाली पीढ़ियों को रास्ता दिखाती रहेगी।

    गुरुजी अमर रहें। दिशोम गुरु अमर रहें।

  • दिशोम गुरु शिबू सोरेन: झारखंड आंदोलन का जननायक, एक युग का अवसान

    *झारखंड के दिशोम गुरु: शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा

             *झारखंड आंदोलन के पुरोधा का अवसान

    * नेमरा से संसद तक: शिबू सोरेन की अमर गाथा   

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    11 जनवरी 1944 को झारखंड के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन का जीवन महज 15 वर्ष की उम्र में एक त्रासदी से बदल गया। उनके पिता शोबरन सोरेन, जो शिक्षक थे और महाजनी प्रथा के खिलाफ मुखर थे, की हत्या स्थानीय साहूकारों ने कर दी। यही घटना शिबू सोरेन के भीतर न्याय के लिए एक ऐसी आग जगा गई, जिसने उन्हें ताउम्र आदिवासी अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया।

    संघर्ष की शुरुआत और आंदोलन की जड़ें.

    गरीब किसान परिवार से आने वाले शिबू सोरेन ने हजारीबाग के गोला हाई स्कूल से मैट्रिक पास की। 1962 में रूपी सोरेन से विवाह किया। उनके चार संतानें हैं — तीन पुत्र और एक पुत्री। बड़े बेटे दुर्गा सोरेन का निधन 2009 में हुआ, बेटी अंजनी ओडिशा में पार्टी की कमान संभाल रही हैं, बसंत सोरेन विधायक हैं, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को सशक्त रूप में आगे बढ़ाया है।

    1970 के दशक में जब आदिवासी समाज महाजनी शोषण, जमीन हड़प और शराब माफिया के चंगुल में था, तब शिबू सोरेन ने गिरिडीह, पारसनाथ और धनबाद के जंगलों में भूमिगत रहकर आंदोलन छेड़ा। हर रात तीन-तीन बार ठिकाने बदलते, महाजनों के खिलाफ ‘धनकटी आंदोलन’ चलाते और जनसभाओं के माध्यम से आदिवासियों को संगठित करते।

    70 के दशक में, शिबू सोरेन गिरिडीह के पारसनाथ  जंगलों में छिपकर आंदोलन कर रहे थे। उनके आंदोलन की आवाज पटना से दिल्ली तक सुनाई दे रही थी। सरकार उन्हें मुख्यधारा में लाना चाहती थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इसके लिए गंभीर थीं। धनबाद के तत्कालीन डीसी के.बी. सक्सेना ने यह काम शुरू किया। टुंडी के तत्कालीन थाना प्रभारी बी. किचिंगिया ने इसे पूरा किया।

    पारसनाथ के जंगलों में भूमिगत रहकर आंदोलन.

    शिबू सोरेन 70 के दशक में पारसनाथ के जंगलों में भूमिगत रहकर आंदोलन कर रहे थे। उस समय बिहार और दिल्ली में भी उनके आंदोलन की चर्चा थी। सरकार चाहती थी कि शिबू सोरेन मुख्यधारा में शामिल हों। इंदिरा गांधी ने भी इस पर ध्यान दिया। धनबाद के डीसी के.बी. सक्सेना ने इसकी शुरुआत की। टुंडी के थाना प्रभारी बी. किचिंगिया ने इस काम को पूरा किया। शिबू सोरेन के पुराने साथियों का कहना है कि किचिंगिया ने सरकारी नौकरी में रहते हुए भी शिबू के आंदोलन में मदद की थी। किचिंगिया ने संवैधानिक नियमों का पालन करते हुए यह काम किया। शिबू सोरेन को भूमिगत जीवन छोड़कर राजनीति में लाने का श्रेय किचिंगिया को ही जाता है।

    राजनीतिक उदय और झारखंड आंदोलन की नींव.

    4 फरवरी 1972 को उन्होंने एके राय और विनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की। यह संगठन न केवल आदिवासी अधिकारों बल्कि अलग राज्य झारखंड के गठन के लिए भी प्रतिबद्ध था। शिबू सोरेन की आवाज़ पर हजारों आदिवासी एकत्र हो जाते थे। 15 नवंबर 2000 को जब झारखंड का गठन हुआ, तो इसमें सबसे बड़ा योगदान दिशोम गुरु का ही था।

    संसद से मुख्यमंत्री तक का सफर.

    • 1980 में पहली बार दुमका से लोकसभा पहुंचे।
    • 1989, 1991, 1996 और 2004, 2009, 2014 में भी सांसद चुने गए।
    • 2004 में केंद्र की यूपीए सरकार में कोयला मंत्री बने।
    • तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री भी बने, हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कार्यकाल अधिक लंबा नहीं हो सका।

    विवाद, जेल और फिर बेदाग वापसी.

    उनका जीवन संघर्षों से ही नहीं, विवादों से भी जुड़ा रहा। 1975 के चिरुडीह हत्याकांड और 1994 में अपने निजी सचिव शशिनाथ झा की हत्या के आरोपों ने उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया। 2006 में उन्हें उम्रकैद की सजा हुई, लेकिन बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने बरी कर दिया। इसके बावजूद उनकी जनप्रियता कभी कम नहीं हुई।

    2007 में जब उन्हें जेल ले जाया जा रहा था, तब उनके काफिले पर बम से हमला हुआ। वे बाल-बाल बचे।

    संघर्ष से सत्ता तक: सामाजिक-सांस्कृतिक भूमिका

    शिबू सोरेन का योगदान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने टुंडी और आसपास के इलाकों में आदिवासियों के लिए शिक्षा अभियान शुरू किया। टुंडी के एक महादेव मंदिर में आदिवासियों को प्रवेश दिलाने की ऐतिहासिक पहल की। वह सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने वाले नेता थे।

    राजनीति से मार्गदर्शक की भूमिका तक.

    लगभग चार दशकों तक झामुमो के अध्यक्ष रहे शिबू सोरेन ने अप्रैल 2025 में सक्रिय राजनीति से खुद को अलग कर पार्टी की कमान बेटे हेमंत सोरेन को सौंप दी। वे पार्टी के मार्गदर्शक बन गए।

    अंतिम दिन और राष्ट्र की श्रद्धांजलि.

    शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 की रात दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले एक महीने से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार अस्पताल में मौजूद रहे।

    सोमवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में अस्पताल पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें आदिवासी समाज का नायक बताते हुए श्रद्धांजलि दी।

    उनका पार्थिव शरीर रांची लाया गया, जहां मोरहाबादी स्थित आवास, झामुमो कार्यालय और विधानसभा में आम जन और नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। मंगलवार 5 अगस्त को दोपहर तीन बजे रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल, मंत्री, सांसद-विधायक समेत देशभर से आए नेताओं की उपस्थिति में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

    एक युग का अंत

    शिबू सोरेन सिर्फ नेता नहीं थे, वे आदिवासी चेतना, संघर्ष, आत्मसम्मान और राजनीतिक सशक्तिकरण के प्रतीक थे। झारखंड को उन्होंने सिर्फ राजनीतिक नक्शे पर नहीं रखा, बल्कि इसे इतिहास में सम्मान की जगह दिलाई। उनके निधन से झारखंड ही नहीं, देश ने एक जननायक खो दिया — और उनके साथ ही एक युग समाप्त हो गया।

     

  • झारखंड के जननायक शिबू सोरेन नहीं रहे: पूरे राज्य में शोक की लहर

    नेमरा गांव में मंगलवार को होगा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार.

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन के निधन की खबर से झारखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। 81 वर्षीय शिबू सोरेन का निधन रविवार रात दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में हुआ। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

    सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित अस्पताल पहुंचकर शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उनका जीवन जनजातीय समाज के कल्याण के लिए समर्पित रहा। उनके परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।”

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर सोमवार शाम तक विशेष विमान से रांची लाया जाएगा। सबसे पहले उनके शव को बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से मोरहाबादी स्थित उनके आवास पर ले जाया जाएगा, जहां परिजन व करीबी उन्हें अंतिम बार श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे।

    मंगलवार 5 अगस्त को सुबह उनका पार्थिव शरीर झामुमो के केंद्रीय कार्यालय में आम जनों के दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद करीब 11 बजे उन्हें झारखंड विधानसभा भवन ले जाया जाएगा, जहां राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

    विधानसभा से उनका पार्थिव शरीर रामगढ़ जिले के उनके पैतृक गांव नेमरा ले जाया जाएगा, जहां मंगलवार दोपहर 3 बजे उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान और आदिवासी परंपराओं के अनुसार किया जाएगा। इस अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित झामुमो, कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों के नेता मौजूद रहेंगे। केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और सांसद-विधायक भी इस मौके पर उपस्थित रहेंगे।

    नेमरा गांव में शोक का माहौल है। गांव की गलियां सूनी हैं, और शिबू सोरेन का आवास खामोशी में डूबा हुआ है। घर के आंगन में लगे वो पौधे, जिन्हें गुरुजी ने खुद अपने हाथों से लगाया था, आज जैसे उन्हें ही निहार रहे हों। आवास के भीतर वो झूला, जिस पर कभी शिबू सोरेन अपने परिजनों संग बैठा करते थे, आज खाली है — मानो उनका इंतजार कर रहा हो।

    परिवार और ग्रामीणों की आंखें नम हैं, लेकिन गर्व भी है कि उनके गांव ने देश को एक ऐसा जननायक दिया जिसने झारखंड के अस्तित्व की लड़ाई लड़ी और आदिवासी अस्मिता को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया।

    शिबू सोरेन सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, वे झारखंड के संघर्षों, परंपराओं और सपनों का प्रतीक थे। उनके जाने से एक युग का अंत हो गया है।

  • रोटरी क्लब ऑफ गिरिडीह कपल सत्र 2025-26 के नए अध्यक्ष व सचिव बने

    Chandan Pandey.

    The News Post4u.

    गिरिडीह: रोटरी क्लब ऑफ गिरिडीह कपल क्लब ने 12वें स्थापना दिवस के अवसर पर नए सत्र 2025-26 के लिए अध्यक्ष हरिंदर सिंह मोंगिया और सचिव अनित खंडेलवाल के नाम की औपचारिक घोषणा की। समारोह में रोटरी परिवार के सदस्यों ने नए नेतृत्व का जोरदार स्वागत किया और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके आगामी कार्यों के प्रति आशा जताई।

    नेतृत्व परिवर्तन का गरिमामय आयोजन.

    कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व अध्यक्ष सिद्धार्थ गौरीसरिया द्वारा क्लब कॉलर को नए अध्यक्ष हरिंदर मोंगिया को सौंपने के साथ हुई। इस प्रतीकात्मक प्रक्रिया के जरिए क्लब ने नए नेतृत्व को जिम्मेदारियां सौंपीं। इस दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस क्षण को ऐतिहासिक बनाया।

    मुख्य और विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति.

    इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डीजीई (डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट) रोटेरियन अनु नारंग और विशिष्ट अतिथि के रूप में एजी ज़ोन-8 रोटेरियन डॉ. आज़ाद समारोह में शामिल हुए। दोनों ने रोटरी के मूल उद्देश्यों और समाज सेवा की बदलती दिशा पर अपने विचार साझा किए।

    समाजसेवा को समर्पित विजन का अनावरण;.

    नवनिर्वाचित अध्यक्ष हरिंदर सिंह मोंगिया और सचिव अनित खंडेलवाल ने अपने संयुक्त संबोधन में कहा कि रोटरी क्लब केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है। उन्होंने वर्ष 2025-26 के लिए क्लब के विजन डॉक्यूमेंट का अनावरण करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

    क्या रहा खास.

    स्थापना दिवस के मौके पर न केवल नेतृत्व का परिवर्तन हुआ, बल्कि क्लब की अब तक की सामाजिक परियोजनाओं की भी जानकारी साझा की गई। साथ ही भविष्य में प्रस्तावित योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

    प्रमुख गणमान्य रहे मौजूद.

    कार्यक्रम में रोटरी क्लब परिवार के कई प्रमुख सदस्य और स्थानीय गणमान्य उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से गुणवंत सिंह मोंगिया, सतविंदर सिंह सलूजा, मुकेश जालान, चरणजीत सिंह, देवेंद्र सिंह, वैभव शाहबादी, डॉ. सुमन कुमार, अमित अग्रवाल, अभिषेक बगेड़िया, स्वाति बगेड़िया और विजय सिंह के नाम उल्लेखनीय हैं।
    रोटरी क्लब ऑफ गिरिडीह कपल के इस 12वें स्थापना समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्लब समाज की बेहतरी के लिए लगातार प्रतिबद्ध है। नए नेतृत्व से लोगों को आशा है कि वर्ष 2025-26 में क्लब सामाजिक सरोकारों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

  • व्यवहार न्यायालय परिसर में पॉक्सो एक्ट और मोटर वाहन दुर्घटना वाद पर वर्कशॉप का आयोजन

    परवेज़ आलम. The News Post4u.

    गिरिडीह :  व्यवहार न्यायालय परिसर में पॉक्सो अधिनियम 2012 और मोटर वाहन दुर्घटना वाद पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह वर्कशॉप विशेष रूप से उन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ और प्रभावी बनाने हेतु सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से रखी गई थी। इसका आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गिरिडीह द्वारा किया गया ।

     दीप प्रज्वलन के साथ हुआ उद्घाटन.

    कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें कई प्रमुख अतिथियों ने भाग लिया। इनमें मार्तंड प्रताप मिश्रा (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश), धनंजय कुमार (प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय),  मनोज कुमार झा (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश), उपायुक्त रामनिवास यादव, व  पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार शामिल थे।

     पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना उद्देश्य: न्यायमूर्ति मिश्रा.

    अपने संबोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मिश्रा ने कहा कि पॉक्सो और मोटर वाहन दुर्घटना से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य है। इससे पीड़ितों को त्वरित न्याय देने में मदद मिलेगी। उन्होंने सभी स्टेकहोल्डर्स से आग्रह किया कि वे इन दिशा-निर्देशों को गंभीरता से अपनाएं।

     उपायुक्त ने की सहभागिता की सराहना.

    उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा कि यह वर्कशॉप पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों, और अधिवक्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि कार्यशाला में साझा किए गए सुझावों और निर्देशों का पालन कर व्यवस्था को और बेहतर बनाएं।

    पुलिस अधीक्षक ने किया कर्तव्यों पर बल.

    एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि पॉक्सो और सड़क दुर्घटना जैसे मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी बेहद अहम होती है। उन्होंने अधिकारियों को उनके कर्तव्यों की विस्तार से जानकारी दी।

    तकनीकी सत्र: कानून की बारीकियों पर चर्चा.

    • न्यायाधीश राजेश कुमार बग्गा और हरिओम कुमार ने मोटर वाहन दुर्घटना वादों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला।
    • डीएसपी मो. कौसर अली ने “हिट एंड रन” मामलों में मुआवजा प्रक्रिया और जांच के नियमों पर विस्तार से जानकारी दी।
    • विशाल कुमार (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) और रीमा कुमारी (न्यायिक दंडाधिकारी) ने पॉक्सो मामलों में संवेदनशीलता और पीड़ितों से व्यवहार की व्याख्या की।

    वर्कशॉप में रही भारी सहभागिता.

    कार्यक्रम में गिरिडीह न्यायालय के न्यायिक पदाधिकारी, जिला प्रशासन के कार्यपालक अधिकारी, पुलिस विभाग के प्रतिनिधि, लोक अभियोजक, अधिवक्ता संघ के सदस्य, लीगल एड डिफेंस टीम, मध्यस्थ और न्यायालय कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी सुश्री स्मृति त्रिपाठी ने किया।

    इस तरह की कार्यशालाएं न केवल न्यायिक व्यवस्था को सशक्त बनाती हैं, बल्कि न्याय प्रक्रिया को पीड़ितों के लिए सहज, संवेदनशील और त्वरित बनाती हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार का यह प्रयास न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक अहम पहल है।

  • बरनवाल महिला समिति ने पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया सावन महोत्सव

    नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी शाम.

    संवाददाता The News Post4u.

    गिरिडीह : बरनवाल महिला समिति गिरिडीह की ओर से बरनवाल सेवा सदन में आयोजित सावन महोत्सव शनिवार को परंपरा, उत्सव और नारी शक्ति के रंग में रंगा नजर आया। इस आयोजन में समाज की सैकड़ों महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं और कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।

    दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत.

    कार्यक्रम का आरंभ समिति की अध्यक्षा ललिता बरनवाल और कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा महाराजा अहिबरण जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। इस सांस्कृतिक आयोजन की शुरुआत समिति की सदस्य रेनू बरनवाल द्वारा प्रस्तुत सुंदर गणेश वंदना नृत्य से हुई, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्र.

    इसके बाद समाज की महिलाएं — सरिता बरनवाल, अनीता बरनवाल, निशा बरनवाल और अन्य — ने एक से बढ़कर एक आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां दीं। विशेष आकर्षण रहा राधा-कृष्ण की जीवंत झांकी, जिसने उपस्थित सभी महिलाओं को भावविभोर कर दिया।

    प्रतियोगिताएं और पुरस्कार.

    कार्यक्रम को और रोचक बनाने के लिए लकी ड्रा और क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इन आयोजनों में विजयी महिलाओं को  पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिससे प्रतिभागियों का उत्साह और भी बढ़ गया।

    आपसी जुड़ाव और संस्कृति के संकल्प का उत्सव.

    सभा को संबोधित करते हुए समिति की अध्यक्षा ललिता बरनवाल ने कहा,

    “सावन महोत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। हम सबको चाहिए कि सावन को झूले और गीतों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे नारी शक्ति के उत्सव के रूप में मनाएं।”

    आयोजन में महिलाओं की अहम भागीदारी.

    महोत्सव को सफल बनाने में सरिता बरनवाल, सीमा बरनवाल, ज्योति बरनवाल, सुनीता बरनवाल, सोनी बरनवाल, कविता बरनवाल, रिंकी बरनवाल, नीलू बरनवाल, रंजीता बरनवाल, रेखा बरनवाल, रश्मि बरनवाल, किरण बरनवाल, शकुंतला बरनवाल और अन्य कई महिलाओं ने सक्रिय और सराहनीय योगदान दिया।

    इस आयोजन ने जहां सावन के पारंपरिक रंग को फिर से जीवंत किया, वहीं महिलाओं को एक साथ लाकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी दिया।

  • झारखंड : शिबू सोरेन की हालत गंभीर, वेंटिलेटर पर रखा गया

    लंबा राजनीतिक सफर, स्वास्थ्य पर संकट.

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    रांची: झारखंड की राजनीति में चार दशकों से अधिक समय तक अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की हालत इस समय बेहद नाजुक बताई जा रही है। उन्हें दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। जानकारी के मुताबिक, उन्हें जून के अंतिम सप्ताह में गंभीर किडनी संबंधी परेशानियों के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से अब तक उनका इलाज जारी है, लेकिन उनकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।

    हेमंत सोरेन ने दी थी जानकारी.

    शिबू सोरेन के बेटे और वर्तमान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 24 जून को अस्पताल पहुंचकर पिता के स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। हेमंत ने मीडिया से कहा था कि “पिता जी की तबीयत को लेकर चिकित्सकीय जांच चल रही है। स्थिति अभी स्थिर है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लग सकता है।”

    एक महीना से ज्यादा समय से अस्पताल में भर्ती.

    सूत्रों के मुताबिक, 81 वर्षीय शिबू सोरेन को लगभग पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती रखा गया है, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी देखभाल कर रही है। हालांकि डॉक्टरों ने उनकी रिकवरी को लेकर अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है।

    स्वास्थ्य के मोर्चे पर संकट के साथ-साथ पार्टी में चिंता.

    झामुमो के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है। पार्टी के वरिष्ठ नेता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई जा रही है। दूसरी ओर, राज्य के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन को भी ब्रेन स्ट्रोक के चलते दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों शीर्ष नेताओं की सेहत पार्टी के लिए एक बड़ा धक्का है।

    शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन: संघर्ष, सत्ता और सजा.

    शिबू सोरेन ने 18 वर्ष की उम्र में “संथाल नवयुवक संघ” की स्थापना की थी। इसके बाद 1972 में उन्होंने ए.के. रॉय और बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का गठन किया और इसके महासचिव बने। आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई में वह एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

    संसद और मंत्रालय

    • 1980 में पहली बार दुमका से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
    • 1989, 1991, 1996 में भी लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।
    • 2002 में राज्यसभा पहुंचे, लेकिन दुमका सीट से उपचुनाव जीतने पर इस्तीफा दे दिया।
    • 2004 में केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में कोयला मंत्री बने।

    विवादों और कानूनी मामलों में फंसे

    2004 में ही चिरुडीह हत्याकांड (1975 की घटना) में गिरफ्तारी वारंट जारी होने पर मंत्री पद छोड़ना पड़ा। गिरफ्तारी के बाद जेल गए और बाद में जमानत मिली।
    2006 में अपने निजी सचिव शशिनाथ झा के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी पाए गए। CBI के आरोपपत्र के अनुसार, झा झामुमो और कांग्रेस के बीच हुए कथित सौदे की जानकारी रखता था।

    • 5 दिसंबर 2006 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
    • हालांकि बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया।

    जानलेवा हमले से बाल-बाल बचे.

    2007 में जब उन्हें दुमका जेल ले जाया जा रहा था, तब उनके काफिले पर बम से हमला किया गया। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए थे।

    शिबू सोरेन न केवल झारखंड की राजनीति का एक स्तंभ रहे हैं, बल्कि उन्होंने आदिवासी समाज के हक और अस्तित्व की लड़ाई को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। आज जब उनकी तबीयत नाजुक है, तो सिर्फ उनका परिवार या पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरा राज्य उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है।

  • गिरिडीह:जल्द शुरू होगी शराब दुकानों की ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया,लक्ष्य 109 करोड़.

    संवाददाता The News Post4U

    गिरिडीह : झारखंड सरकार की नई उत्पाद नीति लागू होने के बाद गिरिडीह में भी शराब दुकानों की ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। इस संबंध में उत्पाद विभाग अधिकारियों ने नई व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ मीडिया से साझा कीं।

    उत्पाद अधीक्षक महेंद्र देव सिंह, निरीक्षक रवि रंजन और कुमार महेंद्र ने बताया कि आगामी तीन दिनों के भीतर जिले में शराब दुकानों के लिए ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

    बाहरी लोगों पर लगेगी रोक, स्थानीयों को प्राथमिकता.

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और स्थानीय सहभागिता आधारित बनाने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए विभागीय स्तर पर कड़ी निगरानी की व्यवस्था की गई है ताकि बाहरी लोगों की भागीदारी को सीमित किया जा सके।

    45 समूहों में होंगी 100 शराब दुकानें शामिल.

    जानकारी के अनुसार, जिले में इस बार 7 देशी शराब दुकानें और 93 कम्पोजिट दुकानें चिह्नित की गई हैं, जिन्हें 45 समूहों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक समूह में दो दुकानें शामिल होंगी। विभाग ने अनुमान जताया है कि एक समूह की औसत टेंडर राशि 4 करोड़ रुपये के आसपास हो सकती है।

    राजस्व लक्ष्य 109 करोड़ रुपये.

    उत्पाद विभाग ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 104 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी, जबकि इस वर्ष 109 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, नई नीति लागू होने से पहले ही चार महीने की राजस्व वसूली हो चुकी है, जिससे लक्ष्य को हासिल करना संभव लगता है।

    बिक्री पर 12% कमीशन, कोटा पूरा न करने पर जुर्माना.

    अधिकारियों ने बताया कि इस बार शराब दुकान संचालकों को बिक्री पर 12 प्रतिशत तक का कमीशन दिया जाएगा। हालांकि यदि कोई संचालक निर्धारित कोटा पूरा नहीं करता, तो उस पर 5 प्रतिशत का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

    नई नीति से पारदर्शिता.

    उत्पाद अधीक्षक ने उम्मीद जताई कि इस पूरी प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को आर्थिक अवसर मिलेंगे। साथ ही, नीति के बेहतर क्रियान्वयन से राजस्व वृद्धि और व्यवस्थागत सुधार संभव होगा।

  • राधास्वामी संगठन का सामाजिक परिवर्तन का संकल्प

    गढ़वा और पलामू से ‘आपकी संगठन, आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत

    संवाददाता The News Post4U

    राधास्वामी संगठन ने अपने विशेष जनसंपर्क कार्यक्रम ‘आपकी संगठन, आपके द्वार’ के तहत आज झारखंड के दो ज़िलों – गढ़वा और पलामू – से इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अभियान की अगुवाई झारखंड प्रदेश अध्यक्ष मुकेश कुमार सिन्हा ने की, जबकि इसे सफल बनाने में संगठन के सभी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

    हर अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का लक्ष्य.

    इस अवसर पर संगठन की मीडिया प्रभारी अनीशा सिन्हा ने बताया कि राधास्वामी संगठन का उद्देश्य है कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े हर व्यक्ति तक संगठन की योजनाओं की जानकारी पहुँचे, जिससे वह आर्थिक रूप से सशक्त बन सके।

    उन्होंने कहा कि आज भी कई ग्रामीण परिवार आर्थिक तंगी, बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई और आवास जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में राधास्वामी संगठन कन्यादान योजना, आवास योजना, छात्रवृत्ति योजना, वाहन योजना, गैस सब्सिडी योजना, और एफएमसीजी योजना जैसी योजनाओं के ज़रिए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहा है।

    आजादी के 78 साल बाद भी हालात जस के तस

    अनीशा सिन्हा ने कहा, “देश को आज़ाद हुए 78 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी गाँवों में झोपड़ियां हैं, बेटियों की शादी में कठिनाइयाँ हैं, बच्चों की शिक्षा अधूरी है। इन सबके बीच राधास्वामी संगठन आर्थिक और सामाजिक रूप से लोगों को मज़बूत करने में जुटा है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि संगठन का मुख्य उद्देश्य केवल योजनाएं देना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है — जहां सामाजिक कुरीतियों का अंत हो और हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन मिले।

    20 से 30 करोड़ सदस्यों का लक्ष्य.

    अनीशा सिन्हा ने बताया कि संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक शर्मा के नेतृत्व और मार्गदर्शन में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उनका सपना है कि पूरे भारतवर्ष में 20 से 30 करोड़ लोगों को संगठन से जोड़ा जाए, जिससे एक सशक्त सामाजिक आंदोलन खड़ा किया जा सके।

    उन्होंने कहा, “हम सभी कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम पहले भी तैयार थे, आज भी तैयार हैं और भविष्य में भी हर चुनौती के लिए तैयार रहेंगे।”

    एक सशक्त समाज की ओर बढ़ता कदम.

    राधास्वामी संगठन का यह अभियान केवल योजनाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जनचेतना आंदोलन बनकर उभर रहा है, जिसका लक्ष्य है — सशक्त, समृद्ध और कुरीति-मुक्त भारत।