नेमरा गांव में मंगलवार को होगा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार.
परवेज़ आलम.
The News Post4u.
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन के निधन की खबर से झारखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। 81 वर्षीय शिबू सोरेन का निधन रविवार रात दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में हुआ। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित अस्पताल पहुंचकर शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उनका जीवन जनजातीय समाज के कल्याण के लिए समर्पित रहा। उनके परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।”
सरकारी सूत्रों के अनुसार, शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर सोमवार शाम तक विशेष विमान से रांची लाया जाएगा। सबसे पहले उनके शव को बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से मोरहाबादी स्थित उनके आवास पर ले जाया जाएगा, जहां परिजन व करीबी उन्हें अंतिम बार श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे।
मंगलवार 5 अगस्त को सुबह उनका पार्थिव शरीर झामुमो के केंद्रीय कार्यालय में आम जनों के दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद करीब 11 बजे उन्हें झारखंड विधानसभा भवन ले जाया जाएगा, जहां राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
विधानसभा से उनका पार्थिव शरीर रामगढ़ जिले के उनके पैतृक गांव नेमरा ले जाया जाएगा, जहां मंगलवार दोपहर 3 बजे उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान और आदिवासी परंपराओं के अनुसार किया जाएगा। इस अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित झामुमो, कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों के नेता मौजूद रहेंगे। केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और सांसद-विधायक भी इस मौके पर उपस्थित रहेंगे।
नेमरा गांव में शोक का माहौल है। गांव की गलियां सूनी हैं, और शिबू सोरेन का आवास खामोशी में डूबा हुआ है। घर के आंगन में लगे वो पौधे, जिन्हें गुरुजी ने खुद अपने हाथों से लगाया था, आज जैसे उन्हें ही निहार रहे हों। आवास के भीतर वो झूला, जिस पर कभी शिबू सोरेन अपने परिजनों संग बैठा करते थे, आज खाली है — मानो उनका इंतजार कर रहा हो।
परिवार और ग्रामीणों की आंखें नम हैं, लेकिन गर्व भी है कि उनके गांव ने देश को एक ऐसा जननायक दिया जिसने झारखंड के अस्तित्व की लड़ाई लड़ी और आदिवासी अस्मिता को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया।
शिबू सोरेन सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, वे झारखंड के संघर्षों, परंपराओं और सपनों का प्रतीक थे। उनके जाने से एक युग का अंत हो गया है।







