Category: Jharkhand

  • गांडेय की तस्वीर बदलने की पहल — विधायक कल्पना सोरेन ने किया विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

    गिरिडीह (गांडेय) : गांडेय विधानसभा क्षेत्र में विकास की एक नई शुरुआत करते हुए स्थानीय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने बुधवार को कई महत्वपूर्ण योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन योजनाओं में चलंत चिकित्सा वाहन सेवा, सड़क निर्माण, स्वास्थ्य केंद्रों का सशक्तिकरण और पेयजल आपूर्ति की नई परियोजनाएं शामिल हैं। ये सभी योजनाएं जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं और इनका उद्देश्य क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करना है।

    कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने पर विधायक का स्वागत स्थानीय जनता और झामुमो पार्टी के नेताओं द्वारा गर्मजोशी से किया गया। फूल-मालाओं और पुष्पगुच्छ के साथ उनका अभिनंदन हुआ। मौके पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण, पार्टी कार्यकर्ता और प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे।

    जनसभा को संबोधित करते हुए विधायक कल्पना सोरेन ने कहा,

    “गांव-गांव तक विकास पहुँचाना और जनसेवा को मजबूती देना ही मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।”
    उन्होंने आगे कहा कि सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाना ही उनके कार्यकाल का मुख्य उद्देश्य है।

    निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का भी उद्घाटन

    इसी दिन गांडेय के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विजय शंकर चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का उद्घाटन भी विधायक कल्पना सोरेन ने किया। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर इस शिविर का शुभारंभ किया।शंकर नेत्रालय एवं ओल्ड जेवरियंस एलुमनाई ट्रस्ट के सहयोग से 9 दिवसीय निःशुल्क मोतियाबिंद सर्जरी शिविर की शुरुआत की गई, जहां हज़ारों ज़रूरतमंदों को मिलेगा मुफ़्त जाँच और ऑपरेशन का लाभ

    विधायक ने कहा:

    “गांडेय में पहली बार इस प्रकार का शिविर आयोजित किया गया है। इससे आम लोगों, विशेषकर गरीब और वंचित तबके को काफी लाभ मिलेगा।”
    उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की कि वे इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं और ज्यादा से ज्यादा लोग इस चिकित्सा सुविधा से जुड़ें।

    इस अवसर पर डीडीसी स्मृति कुमारी, सिविल सर्जन एस.पी. मिश्रा, बैरिस्टर फरदीन अहमद, , पूर्व विधायक केदार हाजरा, झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह ,सहित अन्य कई गणमान्य व्यक्ति एवं स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

  • रामनवमी को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की हाईलेवल बैठक, अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

    परवेज़ आलम 

    रामनवमी पर्व के मद्देनजर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को अपने आवासीय कार्यालय में राज्य की विधि-व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में सीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य में किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने या अशांति फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रामनवमी का उत्सव पूरे राज्य में आपसी प्रेम, सौहार्द और शांति के साथ संपन्न हो। इस समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव अलका तिवारी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, प्रधान सचिव गृह विभाग वंदना दादेल, डीजीपी अनुराग गुप्ता, एडीजी ऑपरेशन संजय आनंद राव लाटकर, आईजी ऑपरेशन एवी होमकर, आईजी स्पेशल ब्रांच प्रभात कुमार और जिलों के डीसी, एसएसपी, एसपी उपस्थित रहे.

    संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष चौकसी के निर्देश

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि रामनवमी के दौरान शोभायात्रा और अन्य धार्मिक आयोजन होते हैं, इसलिए कुछ क्षेत्रों में यह समय संवेदनशील हो जाता है। ऐसे चिन्हित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जाए। साथ ही सभी अखाड़ा समितियों को हाईकोर्ट द्वारा डीजे बजाने को लेकर दिए गए आदेश की प्रति अवश्य उपलब्ध कराई जाए।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोई अखाड़ा समिति हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन करती है, तो उसके खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की जाएगी, इसकी जानकारी पहले से उन्हें दे दी जाए। शोभायात्रा के दौरान CCTV और ड्रोन कैमरे से निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    बाइक रैली पर पूरी तरह रोक

    सीएम सोरेन ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में रामनवमी के अवसर पर शोभायात्राओं के साथ बाइक रैलियों की परंपरा शुरू हो गई है, जिसे किसी भी हाल में अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसी बाइक रैलियां आम जनता की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं, इसलिए इस पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

    कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश

    मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशासन को अलर्ट मोड में रहने को कहा और निर्देश दिए कि जुलूस या शोभायात्रा के दौरान कहीं भी किसी तरह की अशांति दिखे तो उसकी सूचना तत्काल पुलिस मुख्यालय और कंट्रोल रूम को दी जाए। छोटी घटनाओं पर भी नजर रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए म्यूजिक सिस्टम कुछ देर के लिए बंद कराया जाए।

    हजारीबाग और गिरिडीह में विशेष सुरक्षा व्यवस्था

    हाल ही में दो समुदायों के बीच हुई झड़प को देखते हुए हजारीबाग और गिरिडीह जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राज्य पुलिस मुख्यालय ने 25 डीएसपी रैंक के अधिकारियों की विशेष रूप से तैनाती की है जो 8 अप्रैल तक सुरक्षा की कमान संभालें रहेंगे ।

    हजारीबाग के लिए नियुक्त 20 डीएसपी में शामिल हैं:

    हीरालाल रवि, मजरुल होदा, संजय कुमार (1), सुनील कुमार रजवार, संदीप गुप्ता, दिलीप खलखो, सतीश झा, कुलदीप टोपनो, भूपेंद्र राउत, विजय रंजन कुमार, संजय कुमार (2), रोहित रजवार, मनोज राय, राजीव कुमार, रविंद्र सिंह, राजकुमार यादव, पूनम मिंज, अजय केसरी, राजेंद्र दुबे, मनीष चंद्रलाल।

    गिरिडीह के लिए नियुक्त 5 डीएसपी:

    तालो सोरेन, अनूप केरकेट्टा, बेनेडिक्ट मरांडी, कपिंद्र उरांव, प्रमोद सिंह।

    गिरिडीह में फ्लैग मार्च निकाला गया

    रामनवमी से पहले गिरिडीह में सुरक्षा का जायजा लेने के लिए एसपी डॉ. विमल कुमार के नेतृत्व में शुक्रवार को फ्लैग मार्च निकाला गया। यह मार्च शहर के बड़ा चौक, मुस्लिम बाजार, मौलाना आजाद चौक, कालीबाड़ी, मकतपुर चौक, कचहरी रोड, टावर चौक होते हुए कंट्रोल रूम तक पहुंचा। इस दौरान स्थानीय लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई। पुलिस ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है और किसी भी असामाजिक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।

    330 लोगों को दिया गया नोटिस

    रामनवमी के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए गिरिडीह ज़िले  के विभिन्न हिस्सों में 330 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। इनसे कहा गया है कि अगर किसी तरह की गड़बड़ी में उनकी संलिप्तता पाई गई तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • जमशेदपुर: सैनिक की पिटाई पर DGP का कडा ऐक्शन, पूरा थाना सस्पेंड

    सैनिक और उनके भाई की पिटाई और जेल भेजने के मामले में एक्शन ,

    जमशेदपुर के जुगसलाई थाना क्षेत्र में 14 मार्च को बागबेड़ा डीबी रोड निवासी सैनिक सूरज राय और उनके चचेरे भाई विजय राय के साथ हुए दुर्व्यवहार के मामले ने तूल पकड़ लिया था। इस घटना को लेकर पूर्व सैनिकों और सामाजिक संगठनों के विरोध के बाद अब पुलिस प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुये थाना आठ पुलिसकर्मी एक साथ निलंबित कर दिया है ।

    एसएसपी ने की कार्रवाई

    इस गंभीर मामले में जांच के बाद जमशेदपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) किशोर कौशल ने शुक्रवार को जुगसलाई थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सचिन कुमार दास सहित कुल आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में पांच दारोगा – दीपक कुमार महतो, तापेश्वर बैठा, शैलेंद्र कुमार नायक, कुमार सुमित, मंटू कुमार – और दो कांस्टेबल – शैलेश कुमार सिंह और शंकर कुमार – शामिल हैं।

    सभी निलंबित पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से गोलमुरी पुलिस लाइन में योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

    आईजी ने की थी जांच, रिपोर्ट डीजीपी को सौंपी गई

    घटना के बाद मामला राज्य पुलिस मुख्यालय तक पहुंचा था। डीजीपी के निर्देश पर रांची प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अखिलेश कुमार झा ने जमशेदपुर पहुंचकर पूरे मामले की जांच की। जांच के बाद उन्होंने अपनी विस्तृत रिपोर्ट डीजीपी को सौंप दी, जिसके आधार पर उक्त निलंबन की कार्रवाई की गई।

    पूर्व सैनिकों का आंदोलन, रक्षा मंत्रालय तक पहुंचा मामला

    घटना के बाद पूर्व सैनिकों में आक्रोश फैल गया था। उन्होंने इस कृत्य को सैनिक के सम्मान का अपमान बताते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। जुगसलाई थाना और उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया गया। पूर्व सैनिकों का आरोप था कि सैनिक की गिरफ्तारी के बाद सेना की स्थानीय यूनिट या जम्मू यूनिट को नियमानुसार कोई सूचना नहीं दी गई, जो रक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। मामला रक्षा मंत्रालय और आर्मी मुख्यालय तक भी पहुंचा। इसके बाद आर्मी के अधिकारी रांची से जमशेदपुर पहुंचे और मामले की जानकारी ली।

    घटना की असलियत आई सामने: निजी चालक के विवाद से शुरू हुआ मामला

    आईजी द्वारा की गई जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सूरज राय और विजय राय के साथ-साथ नीरज रजक नामक एक युवक की भी बिना किसी ठोस कारण के पिटाई की गई थी। दरअसल, घटना की शुरुआत थाना के निजी चालक अभिषेक उर्फ छोटू बिल्ला के बस्ती के एक युवक से हुए विवाद से हुई थी। यह युवक विजय राय का दोस्त था।

    इस विवाद की सूचना मिलने पर चालक ने अपने नजदीकी संबंधों का लाभ उठाते हुए जुगसलाई थाना प्रभारी को पूरे घटनाक्रम को बढ़ा-चढ़ाकर बताया और सूरज राय व विजय राय को थाने बुलवाया गया। थाने में चालक और सूरज राय के बीच बहस हुई, जिसके बाद सूरज, विजय और नीरज के साथ मारपीट की गई और आनन-फानन में सूरज व विजय को जेल भेज दिया गया।

    एक और विवाद: होली के दिन की घटना भी जुड़ी

    जांच में यह बात भी सामने आई कि घटना से पहले कपाली ओपी के पुलिसकर्मी सोनू कुमार होली के दिन अपनी पत्नी के साथ बागबेड़ा एमई स्कूल रोड होते हुए नया बस्ती पुल से गुजर रहे थे, जहां कुछ युवक शराब पी रहे थे। सोनू कुमार की गाड़ी को रास्ते में रोक दिया गया, जिसकी सूचना उन्होंने जुगसलाई थाना प्रभारी को दी। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही वह वहां से निकल गए। इसके बाद निजी चालक ने मौके पर पहुंचकर नीरज रजक के साथ मारपीट की।

    न्याय की ओर बढ़ता कदम

    इस पूरे मामले में पुलिस द्वारा की गई मनमानी और नियमों की अवहेलना सामने आने के बाद जबरदस्त जनदबाव बना। विरोध के बाद सूरज राय और विजय राय को अदालत से जमानत मिल गई। अब पुलिस प्रशासन द्वारा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई से स्पष्ट संदेश गया है कि कानून के रखवालों को भी नियमों का पालन करना होगा।

  • झारखंड, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 21 ठिकानों पर छापेमारी

    परवेज़ आलम

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को झारखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 21 स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर तहलका मचा दिया। सूत्रों के अनुसार, इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य मेडिकल सेक्टर में हो रहे कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग को उजागर करना है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई।

    ईडी के अभियान में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी

    संघीय जांच एजेंसी ने इस छापेमारी के दौरान केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा के साथ कई ठिकानों की तलाशी ली। अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी आयुष्मान भारत योजना से जुड़े एक बड़े घोटाले की जांच का हिस्सा है। ईडी की टीमों ने रांची, जमशेदपुर और कोलकाता सहित कई बड़े शहरों में छानबीन की।

    विधायक सरयू राय का समर्थन

    झारखंड के जमशेदपुर पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र के विधायक सरयू राय ने इस कार्रवाई का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से इस घोटाले की जांच की मांग कर रहे थे और अब ईडी के कदम से संतोष महसूस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य विभाग में पिछले पांच वर्षों में जो अनियमितताएं हुई हैं, उनकी गहराई तक जांच होनी चाहिए।

    हवाला डीलरों के ठिकानों पर भी छापेमारी

    सूत्रों की मानें तो झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी (JSAS) से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के ठिकानों के साथ-साथ कई थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) कंपनियों जैसे ‘एमडी इंडिया’, ‘सेफवे’ और ‘मेडी असिस्ट’ पर भी छापेमारी की गई। इसके अलावा, कोलकाता में हवाला डीलरों के कुछ ठिकानों पर भी ईडी की टीम पहुंची।

    रांची में कई स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी

    ईडी की टीमों ने झारखंड की राजधानी रांची के अशोक नगर, पीपी कंपाउंड, एदलहातू, बरियातू, लालपुर और चिरौंदी जैसे इलाकों में छापेमारी की। इसके अतिरिक्त, जमशेदपुर के राष्ट्रीय राजमार्ग-33 के किनारे स्थित मैंगो क्षेत्र में एक घर और एक नर्सिंग होम की तलाशी ली गई।

    सीएजी रिपोर्ट के बाद ईडी की जांच तेज

    आयुष्मान भारत योजना में कथित अनियमितताओं की जांच भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है। सीएजी की रिपोर्ट संसद में पेश होने के बाद ईडी ने इसे संज्ञान में लिया और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट (ECIR) दर्ज की। इसके बाद, स्वास्थ्य विभाग और झारखंड स्टेट हेल्थ सोसायटी से इस योजना में हुए घोटालों पर स्पष्टीकरण मांगा गया।

    फर्जी दावों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी

    ईडी को संदेह है कि आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पतालों के पैनल में फर्जीवाड़ा किया गया और फर्जी दावों के माध्यम से बड़े पैमाने पर धनशोधन हुआ। इस योजना के तहत भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गठजोड़ के जरिए अवैध रूप से धन अर्जित किया गया। गौरतलब है कि यह योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख स्वास्थ्य योजना है, जिसका उद्देश्य देशभर के नागरिकों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करना है।

    ईडी की छापेमारी से कई बड़े नामों पर गिरेगी गाज?

    ईडी की कार्रवाई के बाद कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि ईडी की टीमें सुबह 4 बजे से ही विभिन्न स्थानों पर सक्रिय थीं। बरियातू रोड स्थित श्यामा इनक्लेव, राधा गोविंद अपार्टमेंट, मोहराबादी स्थित बुधिया एजेंसी, सिंदुवार के ललिता ऑर्किड और अरविंद मार्क के रश्मि इनक्लेव सहित कई स्थानों पर छापेमारी की गई।

    फिलहाल, इस मामले में बन्ना गुप्ता या उनके निजी सचिव की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईडी अपनी जांच को और आगे बढ़ा रही है और जल्द ही और बड़े नामों के सामने आने की संभावना है।

     

  • झारखंड विधानसभा में उठा JNV के छात्र रामकुमार यादव की संदिग्ध मौत का मामला,

    विधायक मनोज कुमार यादव ने दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग की 

    झारखंड विधानसभा के शून्यकाल के दौरान बरही विधायक मनोज कुमार यादव ने जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) गांडेय के छात्र रामकुमार यादव की संदिग्ध मौत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए और मृतक छात्र के परिजनों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

    क्या है पूरा मामला?

    गौरतलब है कि 6 फरवरी को गिरिडीह जिले के जवाहर नवोदय विद्यालय, गांडेय में 11वीं कक्षा के छात्र रामकुमार यादव का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। इस घटना से क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया था। परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्कूल प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। हालांकि, अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

    विधानसभा में उठा मामला

    बरही के विधायक मनोज कुमार यादव ने इस मामले को विधानसभा में उठाते हुए सरकार से मांग की कि जल्द से जल्द इस घटना की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कठोर सजा दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए और उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए ताकि वे इस मुश्किल घड़ी में आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।

    सांसद प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों का समर्थन

    जिला सांसद प्रतिनिधि दिनेश प्रसाद यादव, राष्ट्रीय यादव सेना के जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र यादव और यादव महासभा के अध्यक्ष धनेश्वर यादव समेत कई सामाजिक संगठनों ने इस मांग का समर्थन किया। अधिवक्ता कामेश्वर यादव, सरजू यादव, राजेश यादव, राजेंद्र यादव और शिवशंकर यादव समेत गिरिडीह के अन्य न्यायप्रिय लोगों ने विधायक मनोज कुमार यादव की इस पहल की सराहना की और सरकार से जल्द कार्रवाई की अपील की।

    सरकार का आश्वासन

    सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि इस मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों को सख्त कानूनी सजा दी जाएगी। साथ ही, पीड़ित परिवार को उचित आर्थिक सहायता देने पर भी विचार किया जाएगा।

    इस घटना से पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला हुआ है, और लोग जल्द से जल्द न्याय की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार कब तक इस मामले में ठोस कदम उठाती है और रामकुमार यादव के परिवार को इंसाफ मिलता है या नहीं।

  • कला संगम के कलाकारों द्वारा नगर भ्रमण हेतु निकाली गई रंग यात्रा

    24 वां अखिल भारतीय बहुभाषी नाटक एवं लोकनृत्य,शास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता

    गिरिडीह : कला संगम के तत्वावधान में स्व. जे पी कुशवाहा 24 वां अखिल भारतीय बहुभाषी नाटक एवं स्व.  उमा रानी ताह स्मृति लोकनृत्य,  शास्त्रीय नृत्य प्रतियोगिता के चौथे दिन नाटक मंचन, शास्त्रीय नृत्य और लोक नृत्य की शुरुआत देशभर से आए कला संगम के सभी कलाकारों द्वारा नगर भ्रमण हेतु निकाली गई रंग यात्रा कर की गई ।

    सचिव सतीश कुंदन ने कहा कि कला हमेशा सवाल खड़े करती है और उसके जवाब के लिए कला हमारे सामने आती है। उन्होंने कला संगम को इस आयोजन के लिए एवं देशभर के कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन के लिए बहुत शुभकामनाएं दीं।

    संरक्षक राजेंद्र बगड़िया ने कला संगम की स्थापना के बारे में बताया। कार्यकारी अध्यक्ष पंकज ताह ने कहा कि गिरिडीह में कला भवन बनना चाहिए। उसके लिए उनके स्तर पर प्रयास किए गए हैं। संरक्षक सतविंदर सिंह सलूजा ने कहा कि मोबाइल से बच्चे गलत रास्ते पर चलने लगे हैं। उन्हें कला से जोड़ने से अच्छे संस्कार दिए जा सकते हैं।  स्मारिका के प्रधान संपादक ने कहा कि आने वाला समय आर्टिफीशियल इंटलीजेंस का है। इससे कला तो निखरेगी लेकिन रंगमंच प्रभावित होगा। इनके अलावा संरक्षक अजय सिन्हा मंटू, संयोजक चुन्नूकांत, मुख्य सलाहकार विशाल आनंद, संपादक सुनील मंथन शर्मा ने भी समारोह को संबोधित किया। मंच संचालन सचिव सतीश कुंदन ने किया।

    नाटकों ने झकझोरा तो शास्त्रीय व लोक नृत्य ने मनमोहा

    नाटकों की प्रस्तुति ने कभी मन को झकझोरा तो कभी मन को आनंदित किया। कलाकृति कला केंद्र नाटक पेश कर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया।

    बीच-बीच में शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। कई समूह लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों खूब मनोरंजन किया।

  • स्वास्थ्य विभाग में वेतन और EPF गड़बड़ी पर JLKM करेगा आंदोलन

    तीन चरणों में होगा विरोध प्रदर्शन

    रिपोर्ट  सुदर्शन

    गिरिडीह: स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों को वेतन कटौती और भविष्य निधि (EPF) में अनियमितताओं का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से चली आ रही इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। अब झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन के खिलाफ आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है।

    JLKM ने किया प्रशासन को आगाह

    JLKM के केंद्रीय सचिव नागेंद्र चंद्रवंशी ने जानकारी देते हुए बताया कि गिरिडीह स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को वेतन में कटौती और EPF में गड़बड़ी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में 18 जनवरी 2025 को संगठन ने गिरिडीह के उपायुक्त (DC), झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।

    तीन चरणों में होगा आंदोलन

    JLKM ने सरकार को चेतावनी देते हुए तीन चरणों में आंदोलन करने का निर्णय लिया है—

    1. 24 मार्च 2025 – सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारी काला बिल्ला लगाकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करेंगे। यह कदम सरकार और प्रशासन को चेतावनी देने के लिए उठाया जाएगा।
    2. 2 अप्रैल 2025 – प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ मशाल जुलूस निकाला जाएगा। यह जुलूस गिरिडीह शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए जिला प्रशासन पर दबाव बनाएगा।
    3. 7 अप्रैल 2025 – यदि सरकार अब भी निष्क्रिय रही, तो जिला मुख्यालय के सामने विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें जिले भर के आउटसोर्सिंग कर्मचारी शामिल होंगे।

    JLKM ने दी कड़ी चेतावनी

    नागेंद्र चंद्रवंशी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि कर्मचारियों की वेतन और EPF से जुड़ी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को आगाह किया कि अभी तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन यदि मांगे नहीं मानी गईं, तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।

    कर्मचारियों में गहरी नाराजगी, परिवारों पर असर

    आउटसोर्सिंग कर्मियों का कहना है कि वेतन में कटौती और EPF गड़बड़ी के कारण उनके जीवन-यापन में कठिनाई हो रही है। उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है, यहां तक कि बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है। कई कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।

    प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

    JLKM ने सवाल उठाया है कि अब तक सरकार और प्रशासन इस गंभीर समस्या पर चुप क्यों है? आखिर गरीब कर्मचारियों को उनका हक़ क्यों नहीं मिल रहा? सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया न आने के कारण नाराजगी और बढ़ गई है।

    आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श जारी

    JLKM के कार्यकर्ता और प्रभावित कर्मचारी लगातार बैठकें कर रहे हैं और भविष्य की रणनीति तैयार कर रहे हैं। यदि सरकार और प्रशासन अब भी निष्क्रिय रहे, तो आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बनाई जा रही है।

    अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेकर उचित कदम उठाती है या फिर कर्मचारियों को अपना हक़ पाने के लिए उग्र आंदोलन करना पड़ेगा।

     

  • गिरिडीह हिंसा : विधानसभा में भाजपा का हंगामा,मंत्री सुदिव्य कुमार ने सरकार की तरफ से संभाला मोर्चा

    परवेज़ आलम
    झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन गिरिडीह में होली के दौरान हुई हिंसा का मामला गरमा गया। इस मुद्दे पर विपक्षी दल भाजपा ने जमकर हंगामा किया और सरकार पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना पर तत्काल चर्चा की मांग करते हुए पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया। भाजपा विधायकों की मांग और हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। दुबारा सदन शुरू हुआ तो मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखते हुये कहा कि प्रशासन ने इस पूरे मामले में संयम से काम लिया और स्थिति को बिगड़ने से रोका। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस मामले को एकतरफा तरीके से पेश कर रही है।

    नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस की भूमिका पर सवाल
    बाबूलाल मरांडी ने विधानसभा में गिरिडीह हिंसा का मामला उठाया और कहा कि धनवार थाना क्षेत्र के घोड़थंभा में होली खेलने वाली युवाओं की टोली को पुलिस ने जबरन रोका। इसके बाद एक समुदाय के लोगों ने पेट्रोल बम, बोतलों और पत्थरों से हमला कर दिया। इस हिंसा में कई दुकानों और गाड़ियों में आग लगा दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस इस दौरान मूकदर्शक बनी रही और बाद में कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों से 40-40 लोगों को नामजद कर 11-11 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। मरांडी ने इस कार्रवाई को पक्षपातपूर्ण करार देते हुए कानून-व्यवस्था पर विशेष चर्चा की मांग की।

    सत्तापक्ष का जवाब और विपक्ष का विरोध
    संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने विपक्ष की मांग को खारिज करते हुए कहा कि गिरिडीह हिंसा पर चर्चा गृह विभाग की अनुदान मांगों के दौरान की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में राजनीति करना उचित नहीं है और सभी को संवेदनशीलता के साथ इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए।
    कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि जहां एक ओर इस हिंसा की निंदा होनी चाहिए, वहीं उन क्षेत्रों की सराहना भी की जानी चाहिए जहां हिंदू-मुस्लिम समुदायों ने मिलकर सौहार्दपूर्ण तरीके से होली मनाई। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे लोगों को विधानसभा से बधाई संदेश भेजा जाए, ताकि समाज में भाईचारे का संदेश जाए।

    भाजपा का हंगामा, कार्यवाही बाधित
    भाजपा विधायकों ने तुरंत चर्चा की मांग को लेकर सदन में हंगामा जारी रखा और वेल में आकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। हंगामे के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही बाधित हो गई और विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
    मंत्री इरफान अंसारी का भाजपा पर हमला
    गिरिडीह हिंसा पर जारी सियासी घमासान विधानसभा परिसर के बाहर भी जारी रहा। मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया कि वे इस घटना का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास गिरिडीह जाकर माहौल भड़काने का काम कर रहे हैं, जो उचित नहीं है।
    मंत्री अंसारी ने चेतावनी दी कि भाजपा नेताओं को झारखंड का माहौल बिगाड़ने नहीं दिया जाएगा और राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने भाजपा नेताओं के दबाव में आकर मुकदमा दर्ज किया है और वे इस मामले को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने उठाएंगे। उन्होंने कहा कि इस मामले में जो भी लोग दोषी हैं उन पर कार्रवाई होगी, भाईचारगी किसी भी सूरत में बिगड़ने नहीं दी जाएगी. गिरिडीह में माहौल बदल रहा है लगातार पुलिस प्रशासन के द्वारा नजर रखी जा रही है. दोनों पक्षों के लोग शांति चाहते हैं इसीलिए किसी को भी माहौल बिगड़ता की इजाजत नहीं दी जाएगी.

    सरकार और प्रशासन का पक्ष
    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि प्रशासन ने इस पूरे मामले में संयम से काम लिया और स्थिति को बिगड़ने से रोका। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस मामले को एकतरफा तरीके से पेश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि होली जुलूस में ऐसे कौन लोग शामिल थे जो पुलिस से हाथापाई कर रहे थे? उन्होंने प्रशासन की भूमिका को संतुलित बताते हुए कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    राजनीतिक उथल-पुथल जारी
    गिरिडीह हिंसा का मामला अब झारखंड की राजनीति में गर्माया हुआ है। एक तरफ भाजपा इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर है, तो दूसरी ओर सरकार विपक्ष पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगा रही है। गिरिडीह में स्थिति सामान्य करने के लिए प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन इस घटना से उपजा राजनीतिक विवाद फिलहाल थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

  • घोड़थम्भा : हिंसक झड़प के बाद अब स्थिति पूरी तरह सामान्य

    झारखंड के गिरिडीह जिले के घोड़थम्भा में होली  के दिन हुई हिंसक झड़प  के बाद अब स्थिति पूरी तरह  सामान्य है  । इलाके मे  पुलिस का कडा पहरा है ।  गिरिडीह एसपी डॉ. विमल कुमार खुद मौके पर मौजूद रह कर  माहौल को पुरसकुन बनाने मे लगे है ।  एसपी ने बताया कि पुलिस घटना को अंजाम देने वाले उपद्रवियों की पहचान कर रही है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा । उपद्रवियों की पहचान  के लिए सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है । इलाके मे पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस-प्रशासन की ओर से काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रण में किया जा सका। इस दौरान एसपी ने कहा कि किसी भी सूरत में शांति भंग करने वाले लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा स्थिति पूरी पुलिस प्रशासन के काबू में है। उन्होंने लोगों से अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। इधर डीडीसी स्मिता कुमारी ने बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने व्यवस्था ख़राब करने करने की कोशिश की थी, लेकिन अब सब कुछ सामान्य है। उन्होंने कहा, “कुछ दुकानों को जलाया गया है. कुछ बाइक और वाहनों में भी आग लगाई गई है. इसके पीछे जो भी वजह है, उसकी जांच की जा रही है.।

    गौरतलब है  कि होली के दिन दो पक्षों के  बीच गिरिडीह के घोड़थम्भा में विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था  जिसके बाद पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। उपद्रवियों ने दुकानों और वाहनों में आग लगा दी, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी

    घटना की जानकारी मिलते ही गिरिडीह एसपी डॉ. विमल कुमार के नेतृत्व में खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद सहित कई पुलिस थानों की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने काफी मशक्कत के बाद हालात पर काबू पाया और उपद्रवियों को खदेड़ा। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और अन्य थाना क्षेत्रों को भी अलर्ट किया गया है।

    प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह विवाद होली के जुलूस के दौरान भड़का। जुलूस में डीजे  बजाने को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई, जो जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गई। इसके बाद उपद्रवियों ने पथराव किया और दुकानों एवं वाहनों को आग के हवाले कर दिया।

    इस घटना पर सियासी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रशासन और सरकार को विफल करार देते हुए कहा कि त्योहारों के दौरान हिंसा एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। उन्होंने राज्य सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

    इधर जेएमएम के वरिष्ठ नेता इरशाद अहमद वारिस ने कहा कि कुछ शरारती तत्व हेमंत सरकार को  बदनाम करने के लिए पर्व की  आड़ ले कर माहौल खराब करने का प्रयास करते  है । उन्होने कहा कि हेमन्त 02 की सरकार ऐसे तत्वों से निबटना जानती है । उन्होने  पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच  की मांग करते हुये कहा कि दोषी बक्से न जाएं पर निर्दोष पर झूठे मुकदमे नही हो, पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए ।

     

  • झारखंड मुक्ति मोर्चा में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना !

    -परवेज़ आलम 

    जेएमएम के 13वें केंद्रीय महाधिवेशन मे झारखंड मुक्ति मोर्चा के  नेतृत्व परिवर्तन के कयास लगाए जा रहे हैं ।  विधायक कल्पना मूर्मु सोरेन व पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन की पुत्र वधू  को पार्टी में केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष  या महासचिव जैसे बड़े पद दिए जा सकते हैं । यह कदम पार्टी के संगठन को और धारदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इसके अलावा, केंद्रीय अध्यक्ष का चुनाव भी होगा, और पार्टी सूत्रों के अनुसार, शिबू सोरेन को एक बार फिर अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा झारखंड राज्य में एक क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी है, और अपने 13वें केंद्रीय महाधिवेशन की तैयारी में जुटा है। यह अधिवेसन 14-15 अप्रैल 2025 को रांची में आयोजित होगा, जो पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। झमुमो, जिसकी स्थापना 1972 में हुई थी, ने झारखंड को बिहार से अलग राज्य बनाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया और 2000 में इस लक्ष्य को प्राप्त किया। पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष शिबू सोरेन हैं, और कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन, जो वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री भी हैं, हैं।

    आयोजन की विस्तृत जानकारी

    महाधिवेशन का आयोजन रांची के खेलगांव स्थित इन्डोर स्टेडियम में होगा, और इसका प्रारम्भ 14 अप्रैल को, जो डॉ. भीमराव अम्बेकर के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है, पर होगा। यह दो-दिवसीय अधिवेसन 15 अप्रैल को समाप्त होगा।

    प्रतिनिधियों का विवरण

    महाधिवेशन में करीब 3900 प्रतिभागी भाग लेंगे, जो झारखंड के अलावा बिहार, प. बंगाल, ओडिशा, असम और तमिलनाडु जैसे अन्य प्रदेशों से आएंगे। इन प्रदेशों में झममो की सांगठनिक इकाइयां हैं, जो इस विस्तार को दर्शाती हैं। इसके अलावा, अंडमान-निकोबार से भी अतिथि के रूप में प्रतिभागी शामिल होंगे, जो इस महाधिवेशन को और अधिक व्यापक बनाता है।

    रजिस्ट्रेशन और तैयारी

    प्रतिभागियों का रजिस्ट्रेशन अप्रैल के पहले सप्ताह में शुरू होगा, ताकि व्यवस्था बनाने में आसानी हो। सदस्यता अभियान 31 मार्च 2025 तक चलेगा, और इसके बाद संगठन की इकाइयों का गठन होगा। यह प्रक्रिया पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर पूरी करने में करीब 30-35 दिन लगेंगे। अधिवेसन से पहले, 16 जनवरी 2025 से ही राज्य में पंचायत से लेकर जिला स्तर की कमेटियां भंग की जा चुकी हैं।

    चर्चा के मुख्य मुद्दे

    महाधिवेशन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसमें पार्टी की भविष्य की रणनीतियां शामिल हैं। विशेष रूप से, बिहार और प. बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए रणनीति बनाई जाएगी, क्योंकि पार्टी इन दोनों राज्यों में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहती है। इसके अलावा, देश की आर्थिक स्थिति, जो पार्टी के अनुसार खस्ताहाल है, और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना भी की जाएगी। पार्टी अगले तीन वर्षों के लिए अपनी कार्य-योजना भी प्रस्तुत करेगी।

    मणिपुर और असम के आदिवासियों के हित से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा होंगे, जिसमें हेमंत सोरेन की नेतृत्व क्षमता को रेखांकित किया जाएगा। हेमंत सोरेन को देश के आदिवासी समाज के लिए एक उम्मीद की किरण माना जाता है, खासकर उनके तानाशाही के खिलाफ संघर्ष के लिए।

    संगठनात्मक परिवर्तन और लक्ष्य

    महाधिवेशन में केंद्रीय समिति भंग की जाएगी, और संचालन मंडली व अध्यक्ष मंडली का गठन होगा। सदस्यता अभियान का लक्ष्य 60 लाख सदस्य बनाना है, जो पिछले 50 लाख के लक्ष्य से अधिक है। यह अभियान अब अपने अंतिम चरण में है, और इसके बाद संगठन पंचायत, प्रखंड और जिला कमेटियों के गठन में जुट जाएगा।

    ऐतिहासिक संदर्भ

    यह अधिवेसन 2021 के 12वें केंद्रीय महाधिवेसन से अलग है, जो कोविड-19 महामारी के कारण केवल एक दिन के लिए और 500 से कम प्रतिभागियों के साथ आयोजित हुआ था। इस बार, यह तीन दिनों तक चलेगा, और सात से आठ राज्यों के प्रतिभागी शामिल होंगे, जो इसकी व्यापकता को दर्शाता है।

    तालिका: अधिवेशन के मुख्य बिंदु

    राजनीतिक दल अधिवेशन मे पार्टी की रणनीति और भविष्य की दिशा तय करते है

    राजनीतिक दलों के केंद्रीय अधिवेशन किसी भी संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होते हैं, जहां नीतिगत फैसलों से लेकर नेतृत्व के चुनाव तक, विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के हालिया अधिवेशन में भी यही देखा गया, जहां पार्टी ने केंद्रीय नीतियों का विरोध करने से लेकर आगामी चुनावों की रणनीति तक कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए।

    नीतिगत चर्चा और विरोध के प्रस्ताव

    जेएमएम ने अपने अधिवेशन से पहले कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए, जिनमें जनजातीय अधिकारों की सुरक्षा और राज्य के विकास से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया। पार्टी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), समान नागरिक संहिता (UCC) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को खारिज करने का प्रस्ताव पारित किया, जिसकी संपुष्टि इसी अधिवेशन मे होनी है  । यह निर्णय झारखंड जैसे राज्यों में जनजातीय समुदायों के अधिकारों को सुरक्षित रखने की दिशा में पार्टी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    नेतृत्व चुनाव और निरंतरता

    राजनीतिक दलों के अधिवेशन नेतृत्व परिवर्तन और पुनर्निर्वाचन के लिए भी जाने जाते हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा में नेतृत्व की निरंतरता देखने को मिली, जब 2021 में शिबू सोरेन को लगातार 10वीं बार पार्टी अध्यक्ष के रूप में चुना गया। उनके पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कार्यकारी अध्यक्ष बने रहे। यह नेतृत्व की स्थिरता और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे की मजबूती को दर्शाता है।

    पार्टी कार्यकर्ताओं का एकीकरण

    अधिवेशन का एक प्रमुख उद्देश्य झारखंड के साथ-साथ बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों में पार्टी कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाना है । यह केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि इससे कार्यकर्ताओं के बीच संवाद और समन्वय को भी बल मिला।

    अधिवेशन आयोजित करने के प्रमुख कारण

    राजनीतिक दल समय-समय पर अधिवेशन आयोजित करते हैं, जिससे संगठनात्मक जरूरतों और बाहरी राजनीतिक चुनौतियों का समाधान निकाला जा सके।

    • आंतरिक संगठनात्मक आवश्यकताएँ: नेतृत्व परिवर्तन, नीति अद्यतन और पार्टी के भीतर संरचनात्मक बदलाव।
    • बाहरी राजनीतिक चुनौतियाँ: केंद्रीय सरकार की नीतियों के विरोध में रणनीति बनाना, जैसे कि भूमि अधिकारों से संबंधित मुद्दे।
    • संगठनात्मक मजबूती: कार्यकर्ताओं को संगठित करना, सदस्यता बढ़ाना और पार्टी की पकड़ को मजबूत करना।

    अधिवेशन के आयोजक और प्रमुख प्रतिनिधि

    झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा अधिवेशन का आयोजन किया जाता है, जिसमें पार्टी के अध्यक्ष, महासचिव और जिला एवं राज्य स्तरीय समितियाँ प्रमुख भूमिका निभाती हैं। प्रतिभागियों में सांसद, विधायक, मंत्री और प्रमुख कार्यकर्ता शामिल होते हैं। 13वें अधिवेशन के लिए भी यह योजना बनाई गई है  कि इसमें विभिन्न राज्यों से प्रतिनिधियों की भागीदारी होगी।

    नेतृत्व की स्थिरता और पार्टी का भविष्य

    जेएमएम जैसे क्षेत्रीय दलों में नेतृत्व की निरंतरता एक महत्वपूर्ण विषय है। शिबू सोरेन 1997 से अध्यक्ष बने हुए हैं और 2021 में 10वीं बार पुनर्निर्वाचित हुए, जिससे पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व पर उनकी पकड़ साफ दिखाई देती है। यह नेतृत्व परिवर्तन के उस प्रवृत्ति से भिन्न है जो अन्य कई क्षेत्रीय दलों में देखी जाती है। साथ ही, हेमंत सोरेन की भूमिका पार्टी की उत्तराधिकार योजना की ओर भी संकेत करती है।

    झामुमो का गठन और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

    झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना 19वीं सदी के महान आदिवासी योद्धा बिरसा मुंडा की जयंती पर हुई थी। बिरसा मुंडा ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया था, और उनकी याद में झारखंड राज्य का गठन भी 15 नवंबर 2000 को किया गया। पार्टी के प्रमुख संस्थापकों में बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन और कॉमरेड डॉ. एके रॉय शामिल थे। 4 फरवरी 1972 को पार्टी का औपचारिक संगठन किया गया, जिसमें बिनोद बिहारी महतो को अध्यक्ष और शिबू सोरेन को महासचिव बनाया गया। प्रारंभिक दौर में पार्टी ने आदिवासी, दलित और अन्य पिछड़े समुदायों के औद्योगिक एवं खनन श्रमिकों को अपने साथ जोड़ा।

    झामुमो का राजनीतिक संघर्ष और विकास

    झामुमो का प्रारंभिक दौर संघर्षों से भरा रहा। पार्टी ने औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में काम करने वाले आदिवासियों और दलितों के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई। इस बीच, शिबू सोरेन के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से नज़दीकियों के कारण पार्टी में असंतोष पनपा और इसके कुछ युवा नेताओं ने ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) का गठन किया। 1980 में, झामुमो नेता बिनोद बिहारी महतो ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के विरोध में “झामुमो (बी)” नामक एक अलग गुट बनाया। हालांकि, 1990 में यह गुट वापस झामुमो में शामिल हो गया। 1987 में निर्मल महतो की हत्या के बाद पार्टी में उथल-पुथल मची, लेकिन राम दयाल मुंडा के नेतृत्व में आदिवासी संगठनों को एकजुट कर झारखंड अलग राज्य की मांग को फिर से गति दी गई। 1988-89 में झामुमो और आजसू ने मिलकर कई आर्थिक नाकाबंदियां और आंदोलन किए, जिससे राज्य निर्माण की मांग को मजबूती मिली।

    झारखंड राज्य का गठन और झामुमो की भूमिका 

    2000 में बिहार विधानसभा ने झारखंड राज्य निर्माण के लिए विधेयक पारित किया और 15 नवंबर 2000 को झारखंड भारत का 28वां राज्य बना। इसके बाद झामुमो ने कई राजनीतिक गठबंधन किए और सत्ता में अपनी जगह बनाई। 2005 में झामुमो के नेता शिबू सोरेन मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत न होने के कारण जल्द ही इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, उन्होंने तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा, मनमोहन सिंह सरकार में वे कोयला मंत्री भी रहे। हेमंत सोरेन ने 13 जुलाई 2013 को झारखंड के 9वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 2019 में एक बार फिर झामुमो ने बहुमत हासिल किया और हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा का सफर संघर्ष, सत्ता और समझौतों से भरा रहा है। आदिवासी और श्रमिक हितों की रक्षा से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राज्य की सत्ता का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। झामुमो ने झारखंड राज्य निर्माण में अहम भूमिका निभाई और आज भी राज्य की राजनीति में इसकी गहरी पकड़ बनी हुई है।

    Key Points

    -झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की 13वीं केंद्रीय महाधिवेशन 14-15 अप्रैल 2025 को रांची में आयोजित होगा, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन की संभावना है।

    – शिबू सोरेन को फिर से अध्यक्ष चुने जाने की संभावना है, जबकि कल्पना मूर्मु सोरेन को केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष या महासचिव जैसे बड़े पद दिए जा सकते हैं।

    – यह परिवर्तन पार्टी के संगठन को मजबूत बनाने और युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।