Category: RANCHI

  • 10 मई को रांची में होगी ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल की अहम बैठक

    गृह मंत्री अमित शाह और कई मुख्यमंत्री होंगे शामिल, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
    परवेज़ आलम.
    रांची। झारखंड की राजधानी रांची एक बार फिर एक अहम राष्ट्रीय बैठक की मेज़बानी करने जा रही है। 10 मई को यहां ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल (पूर्वी क्षेत्र परिषद) की 27वीं बैठक आयोजित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता स्वयं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। इस बैठक में बिहार, ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री समेत चारों राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भाग लेंगे।
    अहम नीतिगत मसलों पर होगा विचार-विमर्श.
    इस बैठक में चारों राज्यों के बीच सीमा विवाद, आंतरिक सुरक्षा, अंतरराज्यीय परिवहन, सामाजिक कल्याण योजनाएं, और आर्थिक समन्वय जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। इसके साथ ही बैठक में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान, विकास परियोजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक तालमेल पर भी विचार किया जाएगा।
    गौरतलब है कि ईस्टर्न ज़ोनल काउंसिल का गठन राज्यों के बीच बेहतर संवाद, समन्वय और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए किया गया है। यह मंच विकास कार्यों को गति देने और नीतिगत अड़चनों को सुलझाने का एक प्रभावशाली माध्यम बन चुका है।
    रांची पुलिस अलर्ट मोड में, डीआईजी की अगुवाई में सुरक्षा तैयारियां.
    बैठक को देखते हुए रांची पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। गुरुवार को रांची के डीआईजी सह एसएसपी चंदन कुमार सिन्हा ने शहर के सभी महत्वपूर्ण पुलिस पदाधिकारियों — सिटी एसपी, ग्रामीण एसपी, ट्रैफिक एसपी, सभी डीएसपी और थानेदारों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।
    इस बैठक में वीआईपी सुरक्षा, रूट प्लानिंग, ट्रैफिक कंट्रोल, और मीटिंग वेन्यू व होटल्स की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत निर्देश दिए गए।
    डीआईजी सिन्हा ने कहा,
    “सभी संबंधित विभागों को निर्देश दे दिए गए हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो। हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी और सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय योजना बनाई गई है।”
    रूट मैप और ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष फोकस.
    गृह मंत्री और अन्य वीआईपी के आगमन के दौरान यातायात को सुगम और सुरक्षित बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया गया है। पुलिस टीम यह सुनिश्चित करेगी कि सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता को भी अनावश्यक परेशानी न हो।
    रांची में इस समय सुरक्षा अभ्यास (Security Drill) भी शुरू हो चुका है, जिसमें बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और स्पेशल ब्रांच की सक्रिय भूमिका रहेगी।
    झारखंड के लिए बड़ी जिम्मेदारी और अवसर.
    केंद्र और राज्यों के शीर्ष नेतृत्व के इस महत्त्वपूर्ण जमावड़े से न केवल नीति-निर्माण में झारखंड की भूमिका सुदृढ़ होगी, बल्कि राज्य को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से एक सशक्त मंच भी मिलेगा। स्थानीय प्रशासन के लिए यह आयोजन एक चुनौतीपूर्ण परीक्षा भी है, जिसमें सुरक्षा, प्रबंधन और समन्वय की क्षमता को परखा जाएगा।

    10 मई को रांची राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहेगा। यह बैठक जहां क्षेत्रीय विकास को नई दिशा दे सकती है, वहीं इसके सफल आयोजन से झारखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक साख को भी बल मिलेगा।

  • झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल !

    परवेज़ आलम.  

    धनबाद/रांची।  झारखंड आतंकवाद निरोधक दस्ता [एटीएस] ने राज्य में आतंक के खिलाफ बड़ी कामयाबी हासिल की है। वासेपुर से गिरफ्तार की गई महिला संदिग्ध शबनम परवीन न केवल अलकायदा, आईएसआईएस और हिज्ब-उत-तहरीर जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ी रही, बल्कि इन संगठनों के झारखंड मॉड्यूल को सक्रिय रूप से संचालित करने में भी अहम भूमिका निभा रही थी।

    जांच में यह साफ हुआ है कि शबनम युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा के जरिए बहला-फुसलाकर आतंकी संगठनों में भर्ती करने का काम कर रही थी। खासकर 18 से 25 वर्ष की आयु के मुस्लिम युवाओं को वह धर्म के नाम पर गुमराह करती थी।

    चार आधार कार्ड, चार अलग उम्रें – असली पहचान पर सस्पेंस.

    एटीएस की छापेमारी के दौरान शबनम के पास से चार अलग-अलग आधार कार्ड बरामद हुए हैं, जिनमें उसकी उम्र अलग-अलग — 20, 25, 28 और 32 वर्ष दर्ज है। इससे स्पष्ट है कि वह पहचान छिपाने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क से भी जुड़ी हुई थी।

    शबनम धनबाद के गोविंदपुर की रहने वाली बताई जा रही है, लेकिन उसके मूल घर के बारे में पुलिस को कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिली है। उसने आयान जावेद नामक युवक से प्रेम विवाह किया था, जो खुद भी एक संदिग्ध आतंकी है। लेकिन शादी के बाद वह जावेद के साथ अमन सोसायटी के घर में न रहकर शमशेर नगर में किराए के मकान में रह रही थी। यहीं से वह साइबर कैफे के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने का कार्य करती थी।

    झारखंड में आतंकी नेटवर्क का खुलासा – रांची से लेकर धनबाद तक फैला था जाल

    शबनम अकेली नहीं थी। गौरतलब है कि एटीएस की ओर से 26 अप्रैल को धनबाद में छापेमारी कर प्रतिबंध आतंकी संगठन के आतंकी शबनम के साथ गुलफाम हसन, अयान जावेद, और मोहम्मद शहजाद आलम  को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

    इनके पास से दो पिस्तौल, 12 जिंदा कारतूस, आतंकी संगठनों से जुड़े कई दस्तावेज, किताबें, और मोबाइल-लैपटॉप बरामद किए गए हैं।

    हथियारों का लेन देन ये लोग करते ही थे, लेकिन मूल काम युवाओं को आतंकी संगठनों से जोड़ना था। इसी माड्यूल पर रांची से गिरफ्तार हुआ डॉ. इश्तियाक भी काम करता रहा है।

    झारखंड एटीएस की टीम बुधवार को धनबाद के वासेपुर से गिरफ्तार आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर से जुड़े महिला समेत चार संदिग्धों को तीन दिन की रिमांड पर ली थी । एटीएस की टीम ने न्यायालय में चारों संदिग्धों को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने तीन दिन तक रिमांड दी है। अब इनसे एटीएस की टीम तीन दिन तक लगातार पूछताछ करेगी और उनके इरादों के साथ ही उनके संबंधों को की भी जांच की जाएगी। इसके अलावा एटीएस की टीम चारों संदिग्धों के विदेशी संबंधों की भी जांच करेगी।

    रिमांड मिलने के बाद टीम बुधवार को चारों संदिग्धों को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से एटीएस की टीम अपने साथ ले गई। इसके तुरंत बाद एटीएस ने चारों संदिग्धों से एटीएस ने पूछताछ शुरू कर दी है। मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम तक एटीएस उनसे पूछताछ करेगी।

    अम्मार यासर की गिरफ्तारी – इंडियन मुजाहिदीन से लेकर हिज्ब-उत-तहरीर तक का कनेक्शन.

    झारखंड एटीएस ने अम्मार यासर नामक एक संदिग्ध को भी गिरफ्तार किया है, जो पहले इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ा रहा है। वर्ष 2014 में जोधपुर से गिरफ्तार हुआ था । यासर, हाल ही में 2024 में जेल से रिहा होने के बाद फिर से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय हो गया था और हिज्ब-उत-तहरीर के झारखंड मॉड्यूल का हिस्सा बन गया। अयान जावेद से पूछताछ में अम्मार यासर का नाम सामने आया, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। झारखंड के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की है

    क्या है ‘हिज्ब-उत-तहरीर‘?

    1953 में यरुशलम में गठित यह आतंकी संगठन एक इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने के उद्देश्य से काम करता है। भारत में यह संगठन 2010 में प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसका मकसद लोकतांत्रिक सरकारों को गिराकर कट्टरपंथी इस्लामिक शासन लागू करना है।

    एटीएस की सतर्कता से टला खतरा, जांच अब विदेशी लिंक पर. 

    झारखंड एटीएस की सघन कार्रवाई से एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। एटीएस अब इन सभी संदिग्धों के विदेशी कनेक्शन की पड़ताल में जुटी है। शुरुआती पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां सामने आई हैं, लेकिन यह जांच अभी जारी है।
    झारखंड जैसे शांत राज्य में आतंक की ये घुसपैठ बेहद चिंताजनक है। युवाओं को धर्म के नाम पर भटकाना, फर्जी दस्तावेज बनाना और विदेशी संगठनों से जुड़ना — ये सारी गतिविधियां अब जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ एक मॉड्यूल था? या फिर एक बड़ा नेटवर्क धीरे-धीरे सामने आने वाला है?

  • झारखंड में मौसम ने ली अचानक करवट: तेज आंधी-बारिश से दिन में रात हो गई

    गिरिडीह /रांची।  झारखंड में मौसम ने अप्रत्याशित रूप से करवट ली है। चिलचिलाती धूप और 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान के बीच लोग  बेहाल थे, वहीं अब आसमान में घने काले बादलों ने डेरा जमा लिया है और कई जिलों में तेज आंधी के साथ झमाझम बारिश ने लोगों को गर्मी से बड़ी राहत दी है।

    दिन में छाया अंधकार, चालकों को जलानी पड़ी हेडलाइटें.

    हजारीबाग, रांची, धनबाद, गिरिडीह और पाकुड़ समेत झारखंड के कई जिलों में दोपहर के समय ही ऐसा नजारा देखने को मिला मानो दिन में रात उतर आई हो। घने काले बादलों और धूलभरी आंधी के कारण दृश्यता काफी कम हो गई, जिससे सड़क पर चलने वाले वाहनों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा।

    हजारीबाग में स्थिति इतनी विकट हो गई कि तेज तूफान के दौरान एक पेड़ एक चलती कार पर गिर पड़ा, जिससे एक दंपति के घायल होने की खबर है। वहीं, कई इलाकों में बिजली के पोल गिरने और कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने की सूचना भी सामने आई है।

    बारिश और तूफान से तापमान में भारी गिरावट.

    राज्य में तेज हवाओं की गति 50-60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। इसके बाद झमाझम बारिश ने मौसम को ठंडा बना दिया। रांची और इसके आसपास के क्षेत्रों में अचानक बारिश शुरू होने से गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में इसी तरह का मौसम बना रहेगा।

    मौसम विभाग का अलर्ट: अगले कुछ दिन राहत, फिर लौटेगी गर्मी

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पहले ही अलर्ट जारी किया था कि झारखंड के विभिन्न जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है। अब एक नया अपडेट जारी करते हुए मौसम विभाग ने चेताया है कि यह राहत अस्थायी है। मई के दूसरे सप्ताह से एक बार फिर भीषण गर्मी और लू का प्रकोप झारखंड में देखने को मिलेगा, जब तापमान 45 डिग्री के पार जा सकता है।

    गिरिडीह में झमाझम बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त.

    गिरिडीह में भी तेज हवाओं और बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ है। बाजारों में सन्नाटा पसर गया और सड़कों पर वाहन कम नजर आए।
    झारखंड के मौसम में आया यह अचानक बदलाव न केवल लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत दे रहा है, बल्कि कुछ क्षेत्रों में यह नुकसानदेह भी साबित हो रहा है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट रहने की जरूरत है क्योंकि अगले कुछ दिनों में भी मौसम इसी तरह अनिश्चित बना रह सकता है।

  • झारखंड में राशन व्यवस्था पर ओटीपी की नई शर्त: तकनीक के जाल में उलझे भूख से जूझते लोग

    By The News Post4U

    चाईबासा/लातेहार – झारखंड के ग्रामीण इलाकों में राशन जैसी बुनियादी जरूरत को हासिल करना अब सिर्फ पात्रता या ज़रूरत की बात नहीं रही। अब इसके लिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और उस पर आने वाला ओटीपी यानी ‘वन टाइम पासवर्ड’ जरूरी हो गया है। यह सुनने में एक तकनीकी प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन ज़मीन पर इसके नतीजे भूख, अपमान और असहायता के रूप में सामने आ रहे हैं।

    लातेहार जिले की हमीदा बीबी (39) की कहानी इस व्यवस्था की जमीनी सच्चाई बयां करती है। हमीदा जुलाई 2024 में अपने दो नाबालिग बेटों का नाम राशन कार्ड में जुड़वाने के लिए जन सेवा केंद्र गई थीं। लेकिन वहां ऑपरेटर ने उन्हें बताया कि आवेदन को आगे बढ़ाने के लिए उनके आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आया ओटीपी दर्ज करना होगा। हमीदा ने फोन चेक किया, लेकिन कोई संदेश नहीं आया। कुछ देर बाद पता चला – उनका मोबाइल नंबर आधार से लिंक ही नहीं है।

    बदलते नियम, बिना सूचना.

    यह समस्या अकेली हमीदा की नहीं है। झारखंड की नई पीडीएस (जन वितरण प्रणाली) गाइडलाइन के तहत अब राशन कार्ड में किसी भी तरह का बदलाव — जैसे सदस्य जोड़ना या हटाना, नाम या उम्र में सुधार — बिना ओटीपी के नहीं हो सकता। पहले तक केवल मुखिया का आधार नंबर और राशन कार्ड नंबर काफी था, लेकिन अब ओटीपी के बिना सिस्टम आगे नहीं बढ़ता।

    राज्य के अधिकारी दावा करते हैं कि यह कदम सुरक्षा बढ़ाने और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए उठाया गया है। लेकिन गांव की महिलाओं और सीमित संसाधनों वाले परिवारों के लिए यह बदलाव एक नई दीवार बनकर खड़ा हो गया है।

    “मुखिया हैं, पर मोबाइल नहीं तो कुछ नहीं कर सकते”

    झारखंड के कई हिस्सों में महिलाएं ही घर की मुखिया हैं — यह व्यवस्था राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की एक प्रगतिशील पहल का हिस्सा है। लेकिन जब आधार से जुड़ा मोबाइल ही नहीं है, तो ये महिलाएं सिस्टम में अदृश्य हो जाती हैं।

    सरयू ब्लॉक के चोरहा पंचायत की एक महिला ने बताया कि वह अपनी सास की मृत्यु के बाद घर की मुखिया बनीं, लेकिन महीनों की कोशिश के बाद भी राशन कार्ड में अपना नाम नहीं जुड़वा सकीं। “कई बार प्रखंड और जिला मुख्यालय गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला,” उन्होंने कहा, “अब तो हार मान ली है।”

    तकनीक बनी बाधा, ना कि समाधान.

    आधार और मोबाइल से जुड़ी यह नई अनिवार्यता ग्रामीण महिलाओं के लिए एक ऐसी तकनीकी बाधा बन गई है, जिसे पार करना कई बार असंभव होता है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5, 2019-21) के अनुसार झारखंड में 10% घरों में मोबाइल फोन ही नहीं है। और जिनके पास मोबाइल है भी, वहां अक्सर नंबर निष्क्रिय होते हैं, या किसी पुरुष रिश्तेदार के नाम पर होते हैं।

    2023 में NSSO के सर्वे के अनुसार, देश में 10 में से 7 गैर-मोबाइल उपयोगकर्ता महिलाएं हैं। ऐसे में ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण की बाध्यता महिलाओं को अपने ही अधिकारों से वंचित कर रही है।

    बिचौलियों का खेल, बढ़ती जेब पर चोट.

    जहां सिस्टम जटिल है, वहां बिचौलियों की आमद तय मानी जाती है। बरहेट जैसे इलाकों में लोगों से आधार या राशन अपडेट कराने के लिए ₹500 से लेकर ₹1,600 तक वसूले गए। यह वे सेवाएं हैं जो सामान्यतः मुफ्त या न्यूनतम शुल्क पर उपलब्ध होनी चाहिए थीं।

    कई लोगों को अपने दस्तावेज अपडेट कराने के लिए बार-बार प्रखंड कार्यालय जाना पड़ता है, जिससे ना सिर्फ परिवहन खर्च बढ़ता है, बल्कि उस दिन की मजदूरी भी चली जाती है।

    क्या राज्य अपने हकदारों को पहचानता है?

    राशन, सब्सिडी और जन-कल्याण की योजनाएं कोई उपकार नहीं हैं। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत ये नागरिकों का कानूनी अधिकार हैं — और इसमें सबसे अहम पात्र हैं महिलाएं और गरीब। लेकिन आधार-ओटीपी प्रमाणीकरण जैसे तकनीकी बदलावों ने इन हकदारों को सिस्टम से दूर धकेलना शुरू कर दिया है।

    संवेदनशील समाधान की ज़रूरत.

    डिजिटलीकरण अपने आप में समस्या नहीं है — समस्या है उसका एकमुश्त और बिना तैयारी के लागू किया जाना। झारखंड सरकार को चाहिए कि वो:

    • वैकल्पिक प्रक्रिया लागू करे जहां ओटीपी की अनिवार्यता न हो।
    • मोबाइल-आधार लिंकिंग की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाए।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक आधार केंद्र स्थापित करे।
    • जन-जागरूकता के माध्यम से पात्र लोगों को बदलावों की जानकारी दे।
    • और सबसे जरूरी, महिलाओं की डिजिटल पहुंच को प्राथमिकता के साथ मजबूत किया जाए।

    जब तक यह सुनिश्चित नहीं किया जाता कि तकनीकी बदलावों का लाभ समाज के सबसे वंचित हिस्से तक पहुंचे — तब तक डिजिटलीकरण भूख, अपमान और असमानता का दूसरा नाम ही बना रहेगा।

    *लेखक लिबटेक इंडिया से जुड़े हैं, जो कोलेबरेटिव रिसर्च एंड डिसेमिनेशन (CORD) का एक केंद्र है।

  • स्वीडन में मुख्यमंत्री सोरेन का वोल्वो संयंत्र का दौरा, झारखंड में ट्रक फैक्ट्री खोलने पर मंथन

    स्पेशल कोरेस्पोंडेंट.

    रांची/गोटेनबर्ग — झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने स्वीडन दौरे के दौरान गोटेनबर्ग शहर में स्थित वोल्वो ट्रक निर्माण संयंत्र का दौरा किया। उनके साथ राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद था। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य झारखंड में औद्योगिक विकास के नए रास्ते तलाशना और राज्य में ट्रक निर्माण इकाई स्थापित करने की संभावनाओं पर बातचीत करना था।

    मुख्यमंत्री ने वोल्वो कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के साथ गहन बातचीत की। उन्होंने बताया कि झारखंड में खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भारी संख्या में ट्रकों और डंपरों की जरूरत है। इस जरूरत को देखते हुए मुख्यमंत्री ने वोल्वो को झारखंड में एक ट्रक निर्माण संयंत्र लगाने का प्रस्ताव दिया। वोल्वो के अधिकारियों ने भी इस विचार में रुचि दिखाई और झारखंड की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ट्रक मॉडल विकसित करने की इच्छा जताई।

    वोल्वो की अत्याधुनिक तकनीकों का अनुभव.

    मुख्यमंत्री और उनके दल ने वोल्वो के ‘ट्रक एक्सपीरियंस सेंटर’ का भी दौरा किया। यहां उन्होंने कंपनी की नई-नई तकनीकों को करीब से देखा। इनमें मिरर-लेस कैमरा वाली ट्रक कैब, ट्रिपल पॉइंट सस्पेंशन सिस्टम और 440 किलोवाट मोटर से चलने वाले इलेक्ट्रिक ट्रक शामिल थे। मुख्यमंत्री ने वोल्वो की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए नवाचारों की तारीफ की। उन्होंने यह भी जाना कि ये इलेक्ट्रिक ट्रक ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर किस तरह बेहतर प्रदर्शन करते हैं।

    झारखंड में फैक्ट्री बनने से रोजगार और विकास के नए अवसर.

    सूत्रों के मुताबिक, अगर बातचीत सफल रहती है, तो वोल्वो निकट भविष्य में झारखंड में ट्रक निर्माण संयंत्र लगा सकती है। इससे न केवल राज्य के औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

    स्वीडन में निवेशक संवाद कार्यक्रम में भी झारखंड की मजबूत मौजूदगी.

    अपने दौरे के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारतीय दूतावास और झारखंड सरकार के संयुक्त प्रयास से गोटेनबर्ग में आयोजित निवेशक संवाद कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में स्वीडन की बड़ी कंपनियों के अधिकारी, निवेशक और भारतीय समुदाय के सदस्य मौजूद थे।

    कार्यक्रम में भारत के कार्यवाहक राजदूत राकेश तिवारी ने भारत और स्वीडन के बीच बढ़ते आर्थिक संबंधों और झारखंड में मौजूद निवेश अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी स्वीडिश कंपनियों को झारखंड में निवेश करने का खुला निमंत्रण दिया।

    चार प्रमुख क्षेत्रों में निवेश का विशेष निमंत्रण.

    मुख्यमंत्री ने खासतौर पर चार क्षेत्रों में निवेश के लिए स्वीडन की कंपनियों को आमंत्रित किया —

    1. खनिज अन्वेषण,
    2. खाद्य प्रसंस्करण,
    3. हरित (सस्टेनेबल) ऊर्जा,
    4. इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र।

    राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि झारखंड में खनन उपकरणों के निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी अपार संभावनाएं हैं। ड्रिलिंग रिग्स, बुलडोजर, हॉल ट्रक, मोटर ग्रेडर और एक्सकेवेटर जैसे भारी मशीनों के निर्माण में निवेश के बेहतरीन मौके हैं। इसके साथ ही, खनिज शोधन संयंत्र और ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट जैसे बेल्ट कन्वेयर और मोटर स्क्रैपर के निर्माण में भी बड़े अवसर हैं।


    खनिज संपदा से समृद्ध झारखंड: निवेशकों के लिए स्वर्णिम अवसर.

    झारखंड देश के कुल खनिज भंडार का लगभग 40% हिस्सा रखता है। कोयला, लोहा, तांबा, बॉक्साइट, चूना पत्थर, मैंगनीज जैसे कई कीमती खनिज यहां बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। झारखंड को देश में कोकिंग कोल का एकमात्र उत्पादक राज्य होने का गौरव प्राप्त है। इसके अलावा, यह कोयला उत्पादन में दूसरा, लौह अयस्क में दूसरा, तांबा अयस्क में तीसरा और बॉक्साइट भंडार में सातवां स्थान रखता है।

    इन प्राकृतिक संपदाओं के चलते झारखंड निवेशकों के लिए बेहद आकर्षक राज्य बन गया है। राज्य सरकार खनिज ब्लॉकों की नीलामी और खनिज अन्वेषण परियोजनाओं के जरिए निजी निवेश को प्रोत्साहित कर रही है।

    झारखंड सरकार का सतत और समावेशी विकास पर जोर.

    कार्यक्रम में झारखंड सरकार के प्रतिनिधियों ने राज्य की निवेश के अनुकूल नीतियों, उद्योगों के लिए बेहतर अवसंरचना, और सतत व समावेशी विकास के प्रयासों पर भी विस्तार से प्रस्तुति दी। स्वीडन की हरित तकनीकों में विशेषज्ञता और झारखंड के हरित औद्योगीकरण के लक्ष्य के बीच सहयोग की बड़ी संभावनाएं दिखाई दीं।

    इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकार से व्यवसाय (G2B) और सरकार से सरकार (G2G) के स्तर पर संवाद को मजबूत करना और भारत-स्वीडन के आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई तक ले जाना था।

     

  • झारखंड में नक्सलवाद पर अंतिम प्रहार: कोल्हान बना आखिरी मोर्चा, शीर्ष नेतृत्व लगभग नेस्तनाबूद

    परवेज़ आलम.

    झारखंड के जंगलों में चल रही एक पुरानी जंग अब अपने अंतिम मोड़ पर है। बरसों से राज्य के विकास और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाले माओवादियों के खिलाफ पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। डीजीपी अनुराग गुप्ता का बयान अब सिर्फ घोषणा नहीं, बल्कि मैदान पर उतर चुकी एक रणनीति का हिस्सा है।

    मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले ही झारखंड करेगा निर्णायक वार.

    बोकारो में हाल ही में हुए मुठभेड़ के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में झारखंड पुलिस प्रमुख डीजीपी अनुराग गुप्ता ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने भले ही मार्च 2026 तक माओवाद खत्म करने का लक्ष्य तय किया हो, लेकिन राज्य पुलिस उससे पहले ही सारंडा और कोल्हान जैसे नक्सल गढ़ों से माओवादियों का पूरी तरह सफाया करने की ओर अग्रसर है।

    लुगू पहाड़ी की मुठभेड़: माओवादियों को चेतावनी का संदेश.

    लुगू पहाड़ी में हुई मुठभेड़ को डीजीपी ने ‘टर्निंग पॉइंट’ बताया। यह वह घटना है जिससे नक्सलियों को न केवल सैन्य हार मिली, बल्कि मनोवैज्ञानिक झटका भी लगा। डीजीपी ने कहा कि यह घटना माओवादियों के लिए “सबक” है और उन्होंने उन्हें सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने की सलाह दी।

    अब कोई माओवादी ‘अदृश्य‘ नहीं.

    राज्य पुलिस के पास हर सक्रिय माओवादी की लोकेशन, नेटवर्क, फंडिंग स्रोत और गतिविधियों की जानकारी है। यह वही रणनीतिक जानकारी है जिसने माओवादियों के एक-एक किले को कमजोर किया है। डीजीपी के अनुसार, “अब वे न छिप सकते हैं, न बच सकते हैं।”

    तीन बचा, लेकिन घेरे में: करोड़ों के इनामी नक्सलियों की अंतिम सूची

    झारखंड में अब सिर्फ तीन नक्सली ऐसे बचे हैं जिनके सिर पर ₹1 करोड़ का इनाम है:

    1. मिसिर बेसरा – भाकपा माओवादी का ईआरबी सचिव
    2. पतिराम मांझी – सेंट्रल कमेटी मेंबर
    3. आकाश मंडल उर्फ अनमोल – कोल्हान में सक्रिय

    ये तीनों अब सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं। साथ ही, एनकाउंटर से बच निकले एक अन्य नक्सली “प्रवेश” पर भी जल्द ₹1 करोड़ का इनाम घोषित किया जा सकता है।

    प्रयाग मांझी उर्फ विवेक: एनकाउंटर में मारे गए पहले करोड़पति नक्सली

    इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता थी – प्रयाग मांझी उर्फ विवेक की मुठभेड़ में मौत। वह झारखंड पुलिस द्वारा मारे गए पहले ₹1 करोड़ के इनामी नक्सली बने। उनके मारे जाने से उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र में माओवाद का लगभग सफाया हो गया।

    नक्सलवाद का ढहता नेतृत्व: गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण की श्रृंखला

    झारखंड में नक्सल आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं की या तो गिरफ्तारी हो चुकी है या उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया है:

    • प्रशांत बोस उर्फ किशन दा: सेकेंड इन कमांड, गिरफ्तार
    • कंचन दा उर्फ कबीर: थिंक टैंक, गिरफ्तार
    • महाराज प्रमाणिक, विमल यादव, रिमी दी, अभय जी: आत्मसमर्पण

    2021 से फरवरी 2025 तक 1490 नक्सली गिरफ्तार हुए हैं। इनमें कई नाम जैसे प्रभा दी, सुधीर किस्कू, नंदलाल मांझी और बलराम उरांव शामिल हैं जिन पर 10 से 25 लाख तक का इनाम था।

    बूढ़ा पहाड़ से कोल्हान तक: कमजोर होता नक्सली नेटवर्क.

    कभी झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ का प्रमुख माओवादी किला माना जाने वाला बूढ़ा पहाड़ अब नेतृत्वविहीन हो चुका है।

    • देवकुमार सिंह (अरविंद जी) की मौत,
    • सुधाकरण का सरेंडर,
    • मिथिलेश महतो की गिरफ्तारी—
      इन घटनाओं ने संगठन को झकझोर दिया।

    अब नक्सली नेतृत्व केवल कोल्हान तक सिमट गया है, जहाँ अंतिम शेष शीर्ष माओवादी अब सुरक्षा बलों के रडार पर हैं।

    क्या यह नक्सलवाद का अंतिम अध्याय है?

    झारखंड में जो कभी नक्सलियों का अघोषित किला था, वहां अब पुलिस की रणनीति, जानकारी और जमीन पर पकड़ ने बागियों की रीढ़ तोड़ दी है।
    कोल्हान आखिरी मोर्चा है और माओवादियों के पास दो ही विकल्प बचे हैं—आत्मसमर्पण या अंतिम लड़ाई।

     

  • झारखंड सरकार का यूरोपीय दौरा: प्रवासी भारतीयों से संवाद

    विशेष संवाददाता.

    झारखंड में निवेश को लेकर एक नई सुबह दस्तक दे रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों यूरोप के दो प्रमुख देशों——के दौरे पर है। इस कूटनीतिक और आर्थिक यात्रा का मकसद है: झारखंड को वैश्विक निवेश का गंतव्य बनाना।

    इस यात्रा के दौरान न केवल राज्य की संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया, बल्कि कुछ अहम समझौते और प्रस्तावों की नींव भी रखी गई।

    खेल के क्षेत्र में ऐतिहासिक पहल: फुटबॉल कोचिंग के लिए RCD Espanyol का प्रस्ताव.

    स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान, विश्वप्रसिद्ध RCD Espanyol फुटबॉल क्लब ने झारखंड सरकार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया। क्लब ने झारखंड में खेल—विशेषकर फुटबॉल—के विकास के लिए सहयोग की इच्छा जताई है। इसमें खासकर फुटबॉल कोचों के प्रशिक्षण के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) की पेशकश की गई है।

    यह प्रस्ताव बार्सिलोना के विकसित खेल पारिस्थितिकी तंत्र और झारखंड में युवाओं की खेल प्रतिभा को जोड़ने का सेतु बन सकता है। आने वाले समय में यह साझेदारी झारखंड को भारतीय खेल मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिला सकती है।

    व्यापक क्षेत्रों में चर्चा: स्टार्टअप, क्लीन एनर्जी, बायो-फार्मा और अधिक.

    सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, झारखंड प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा में कई विविध क्षेत्रों पर संवाद हुआ। इसमें स्टार्टअप मेंटरशिप, क्लीन एनर्जी, पर्यावरणीय स्थिरता, सप्लाई चेन, बायो-फार्मास्यूटिकल्स, खेल विपणन, क्रिकेट टीम ओनरशिप, डीप-टेक बी2बी मार्केटिंग, लीगल, डेंटल साइंस और मेडटेक जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे।

    प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड में नवाचार आधारित एक जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार करने हेतु वैश्विक विशेषज्ञों और कंपनियों से मार्गदर्शन और निवेश का अनुरोध किया ।

    झारखंड में गीगा फैक्ट्री? टेसला ग्रुप A.S. से CM की महत्वपूर्ण बैठक.

    इस यूरोपीय दौरे का सबसे आकर्षक पड़ाव रहा टेसला ग्रुप A.S. (चेकोस्लोवाकिया) के CEO और सह-संस्थापक डुशान लिचार्डस के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात। बातचीत के दौरान टेसला ग्रुप ने झारखंड में एक गीगा फैक्ट्री स्थापित करने की इच्छा जताई, जो मुख्य रूप से वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग के लिए बैटरी भंडारण उत्पादों के असेंबली पर केंद्रित होगी।

    यह प्रस्ताव न केवल झारखंड को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बना सकता है, बल्कि इससे राज्य के तकनीकी और औद्योगिक बुनियादी ढांचे को भी नई दिशा मिलेगी।

    प्रवासी भारतीयों से संवाद: संभावनाओं को जोड़ने का प्रयास.

    यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ने बार्सिलोना में बसे प्रवासी भारतीय व्यवसायियों और विशेषज्ञों से भी मुलाकात की। इस संवाद का उद्देश्य था—झारखंड की विकास गाथा से उन्हें जोड़ना और विदेशी धरती पर बसे भारतीय मस्तिष्क को अपनी धरती से जोड़ना।

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि स्पेनिश कंपनियों और निवेशकों के साथ सतत संवाद और सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस कड़ी में भविष्य में और बैठकें तथा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई में झारखंड सरकार की यह यात्रा केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि निवेश और विकास की ओर बढ़ते भरोसे का संकेत है। यूरोपीय धरती पर झारखंड की आवाज़ अब सुनाई देने लगी है—चाहे वह खेल हो, तकनीक हो, या उद्योग। आने वाला समय बताएगा कि इन बैठकों का परिणाम धरातल पर किस तरह उतरता है, लेकिन शुरुआत आशाजनक है।

     

  • कांग्रेस ने सीपी सिंह की सदस्यता रद्द करने की मांग की, कहा- “मानसिक कुंठा के शिकार हैं विधायक”

    रांची ब्यूरो।
    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक सीपी सिंह के मुसलमानों को लेकर दिए गए विवादित बयान ने झारखंड की सियासत में तूफान ला दिया है। कांग्रेस ने इस बयान की तीखी आलोचना करते हुए इसे न केवल समाज को बांटने वाला बल्कि राज्य की सांप्रदायिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बताया है। पार्टी ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि सीपी सिंह की विधान सभा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।

    प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा विधायक पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “सीपी सिंह मानसिक कुंठा के शिकार हो गए हैं। भाजपा में वे न तो प्रदेश अध्यक्ष बन पाए, न ही विधायक दल के नेता। यही कारण है कि वे निराशा में ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं जो समाज को गहरे तक बांट सकती है।”

    शहजादा अनवर ने भाजपा नेतृत्व और केंद्र सरकार से तीखे सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा, “क्या भाजपा अपने वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं जैसे शहनवाज हुसैन, मुख्तार अब्बास नकवी, जफर इस्लाम और यहां तक कि बिहार के राज्यपाल मोहम्मद आरिफ खान को भी ‘जिहादी’ समझती है? जो मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आज़ादी के लिए जान की बाज़ी लगाई, क्या वे भी भाजपा की नजर में जिहादी थे?”

    इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा, मीडिया चेयरमैन सतीश पाल मुजनी, प्रवक्ता सोन शांति, अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एम तौसीफ और गजेंद्र सिंह समेत कई नेता मौजूद थे। सभी ने एक सुर में कहा कि ऐसे बयानों को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    इस बीच कांग्रेस नेता शमशेर आलम ने विधानसभा अध्यक्ष रविंद्रनाथ महतो को पत्र लिखकर सीपी सिंह के बयान की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह बयान सत्य पाए जाते हैं, तो विधानसभा से उनकी सदस्यता रद्द की जाए। शमशेर आलम ने कहा, “एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होकर सीपी सिंह ने समाज को उस दिशा में धकेलने का काम किया है, जहां न केवल सामाजिक तानेबाने को नुकसान पहुंचेगा, बल्कि पूरे देश की एकता भी खतरे में पड़ सकती है।”

    कांग्रेस का कहना है कि झारखंड जैसे संवेदनशील राज्य में शांति बनाए रखने के लिए ऐसे बयानों पर तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समाज में नफरत फैलाने की कोशिश करने वालों को सख्त संदेश दिया जा सके।

  • मंत्री हफीजुल हसन ने दी सफाई , भाजपा बर्खास्तगी की मांग पर अड़ी  

    झारखंड की सियासी फिजा इन दिनों एक बयान से राजनीति गरमाई हुई है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन का एक कथित बयान— “शरीयत संविधान से ऊपर है” — राजनीतिक हलकों में बीते चार दिनों से हलचल मचा रखा  है। विपक्षी दल भाजपा ने इस बयान को लेकर मंत्री पर सीधा हमला बोला है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है।

    लेकिन क्या मंत्री ने सचमुच ऐसा कहा था? या फिर बयान को संदर्भ से काट कर, अपने-अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुसार परोसा गया? राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप नई बात नहीं, लेकिन जब बात संविधान और धार्मिक मूल्यों की हो, तो सावधानी और संवेदनशीलता दोनों की जरूरत होती है।

    भाजपा का हमला: ‘संविधान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस कथन को भारतीय संविधान का अपमान बताते हुए तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि हसन का यह बयान सामाजिक सौहार्द्र के लिए खतरा है और झारखंड जैसे विविधता वाले राज्य में इस तरह की सोच की कोई जगह नहीं हो सकती। मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से साफ शब्दों में मांग की कि हसन को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

    मंत्री की सफाई: ‘बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया’

    इस पूरे विवाद के बीच मंत्री हफीजुल हसन ने मीडिया के सामने आकर सफाई दी और कहा कि उनका बयान गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कहा, “मैं बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के बनाए संविधान को सर्वोपरि मानता हूं। मेरी राजनीति हमेशा सामाजिक न्याय, समावेशिता और बराबरी के सिद्धांतों पर आधारित रही है। मैं ऐसे किसी भी बयान का समर्थन नहीं करता जो देश के मूलभूत सिद्धांतों के विरुद्ध हो।”

    हसन ने आगे जोड़ा, “संविधान ही हमें धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। मेरा विश्वास उसी संविधान पर है, जिसने हमें यह आजादी और अधिकार दिए हैं।”

    भाजपा नेताओं पर पलटवार: ‘नफरत की राजनीति बंद हो’

    हसन ने अपनी सफाई में भाजपा नेताओं पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा, “देश के कई केंद्रीय मंत्री मंच से अल्पसंख्यकों के खिलाफ भड़काऊ बातें करते आए हैं— किसी ने ‘गोली मारो’ के नारे लगवाए, तो किसी ने देश छोड़ने की धमकी दी। क्या वह संविधान की रक्षा है या संविधान से खिलवाड़?”

    उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म को लेकर प्रेम होना स्वाभाविक है, लेकिन यह प्रेम दूसरे धर्म के प्रति नफरत नहीं बन जाना चाहिए। “हम सबको अपने-अपने धर्म से लगाव हो सकता है, लेकिन उस लगाव में दूसरों के धर्म का अपमान न हो, यही संविधान की आत्मा है,” उन्होंने कहा।

    “संवैधानिक मूल्यों से नहीं हटूंगा”: हसन का संकल्प.

    बयान के अंत में हसन ने यह स्पष्ट किया कि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों से कभी पीछे नहीं हटेंगे। “मैं झारखंड के हर समुदाय के लिए न्याय, समानता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। संविधान मेरी राजनीति की धुरी है और वही मेरी सोच की दिशा तय करता है।”

    यह विवाद केवल एक बयान का नहीं है। यह एक बड़े विमर्श का हिस्सा है—धर्म और संविधान के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती का। जब राजनीतिक दल इस संतुलन को अपने-अपने नजरिए से तोड़ते-मरोड़ते हैं, तो सवाल उठता है: क्या वाकई चिंता संविधान की है या उसका इस्तेमाल सियासी लाभ के लिए हो रहा है?

     

  • हेमंत सोरेन का स्पेन-स्वीडन दौरा: झारखंड में निवेश लाने की तैयारी

    रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 18 अप्रैल से 27 अप्रैल तक एक 11 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ स्पेन और स्वीडन के दौरे पर रवाना होंगे। इस विदेश यात्रा का मकसद स्पष्ट है — वैश्विक निवेशकों को झारखंड में निवेश के लिए आमंत्रित करना और राज्य को एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत करना। इस यात्रा के लिए मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार से राजनीतिक स्वीकृति भी मिल चुकी है।

    निवेश बढ़ाने की रणनीति के तहत दौरा.

    मुख्यमंत्री की यह यात्रा राज्य के उद्योग विभाग के नेतृत्व में की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह दौरा “झारखंड में औद्योगिक निवेश के नए रास्ते खोलने” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल स्पेन के मैड्रिड, बार्सिलोना और स्वीडन के गोथेनबर्ग जैसे प्रमुख शहरों में उद्यमियों और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों से मिलेगा।

    मुख्य ठिकाने और कार्यक्रम:

    • 19 अप्रैल: प्रतिनिधिमंडल मैड्रिड पहुंचेगा
    • 21 अप्रैल: प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात
    • 22 अप्रैल:
      • मैड्रिड में खनन और इस्पात क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के साथ बैठक
      • बार्सिलोना में कृषि मंत्रालय के अधिकारियों से संवाद
    • 25 अप्रैल: गोथेनबर्ग (स्वीडन) में क्लीन एनर्जी कंपनियों से मुलाकात
    • 26 अप्रैल: वन-टू-वन बैठकें, संभावित निवेशकों से सीधी बातचीत
    • 27 अप्रैल: भारत वापसी

    दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल नेशनल रिन्यूएबल एनर्जी सेंटर (Spain) भी जाएगा, जो सौर ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी रिसर्च केंद्र है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की पहचान बनाने की कोशिश.

    मुख्यमंत्री के इस दौरे का एक बड़ा उद्देश्य झारखंड की ब्रांडिंग भी है। राज्य सरकार “हरित ऊर्जा, स्मार्ट सिटी, तकनीकी नवाचार और औद्योगिक विकास” को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक मंचों पर झारखंड की छवि को उभारना चाहती है। इस दौरे से निवेशकों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का अवसर मिलेगा, जिससे आगामी परियोजनाओं में साझेदारी की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

    प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन होंगे शामिल?

    मुख्यमंत्री के साथ जो टीम विदेश यात्रा पर जा रही है, उसमें प्रशासनिक, तकनीकी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन दिखता है। टीम में शामिल हैं:

    • कल्पना सोरेन (विधायक)
    • अलका तिवारी (मुख्य सचिव)
    • अविनाश कुमार (सीएम के अपर मुख्य सचिव)
    • ए.के. रस्तोगी (सेवानिवृत्त आईएफएस)
    • अरवा राजकमल (उद्योग सचिव)
    • राहुल कुमार सिन्हा (एमडी, जेएसएमडीसी)
    • सुशांत गौरव (उद्योग निदेशक)
    • वरुण रंजन (एमडी, जेआईआईडीसीओ)
    • प्रणव कुमार पाल (संयुक्त निदेशक, उद्योग)
    • अजय कुमार सिंह (सीएम के निजी सुरक्षा अधिकारी)

    क्या कहती है यह यात्रा झारखंड की दिशा के बारे में?

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यह दौरा उस बदले हुए दृष्टिकोण का संकेत है जिसमें राज्य सरकार सिर्फ खनन पर निर्भरता छोड़कर हरित ऊर्जा, स्मार्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी नवाचार की ओर कदम बढ़ा रही है। यह यात्रा न केवल आर्थिक निवेश की राह खोलेगी, बल्कि झारखंड को वैश्विक मंचों पर एक प्रगतिशील और निवेश-मैत्रीपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम साबित हो सकती है।