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  • बाहा पर्व 2026: सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्त करने की मुहिम, ‘हर दुकान दस्तक अभियान’ की शुरुआत

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : बाहा पर्व के अवसर पर आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला। जैव विविधता से भरपूर और धार्मिक आस्था के केंद्र  मारांग बुरु/पारसनाथ पहाड़ को सिंगल यूज़ प्लास्टिक मुक्त बनाने के संकल्प के साथ “हर दुकान दस्तक अभियान” की औपचारिक शुरुआत की गई।

    उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान चलाया गया। कार्यक्रम का आयोजन स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत यूनिसेफ के सहयोग से मधुबन पंचायत क्षेत्र में किया गया।

    मारांग बुरु/पारसनाथ पहाड़ न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र जैव विविधता का खजाना भी है। लेकिन पर्व के दौरान बढ़ती भीड़ और अस्थायी दुकानों के कारण प्लास्टिक प्रदूषण का खतरा भी बढ़ जाता है। प्रशासन ने इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए दुकानदारों तक सीधे पहुंचने की रणनीति अपनाई।

    दुकान-दुकान दस्तक, प्लास्टिक पर सख्ती.

    पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की जल सहियाओं और झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) की आजीविका समूह की दीदियों ने दुकान-दुकान जाकर सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग बंद करने की अपील की। इसके स्थान पर कपड़े के थैले, जूट बैग और सखुआ पत्ते से बने दोना-पत्तल अपनाने का आग्रह किया गया।

    होटल संचालकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखने की समझाइश दी गई, ताकि मधुबन क्षेत्र में कचरे का ढेर न लगे और वायु, जल तथा मिट्टी प्रदूषण की समस्या से बचा जा सके।

    ‘बोतल बैंक’ बनेगा नया मॉडल.

    अभियान के तहत मारांग बुरु परिसर में “बोतल बैंक” स्थापित किया जा रहा है। यहां पर्यटक प्लास्टिक की बोतलें और अन्य कचरा इधर-उधर फेंकने के बजाय निर्धारित संरक्षित बैंक में जमा करेंगे। एकत्रित प्लास्टिक को मधुबन में प्रस्तावित प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट में भेजकर रिसाइक्लिंग की जाएगी।

    अभियान का उद्देश्य केवल प्लास्टिक पर रोक लगाना नहीं, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और पर्यटकों को जूट बैग जैसे टिकाऊ विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है।

    कार्यक्रम में यूनिसेफ प्रतिनिधि, जेएसएलपीएस के प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, मधुबन के मुखिया एवं अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे इस पहल में सक्रिय भागीदारी निभाएं और मारांग बुरु/पारसनाथ पहाड़ की पवित्रता के साथ-साथ उसकी प्राकृतिक धरोहर को भी सुरक्षित रखने में सहयोग करें।

    आस्था का यह पर्व अब पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगा—ताकि प्रकृति और परंपरा दोनों साथ-साथ आगे बढ़ें।

  • गिरिडीह : नगर निकाय चुनाव 2026  की तैयारी तेज, मतगणना कर्मियों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : नगर निकाय चुनाव 2026को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। स्थानीय हनी हॉली ट्रिनिटी पब्लिक स्कूल, गिरिडीह में मतगणना कार्य में प्रतिनियुक्त मतगणना सहायकों एवं मतगणना पर्यवेक्षकों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

    यह सिर्फ एक औपचारिक प्रशिक्षण नहीं था, बल्कि लोकतंत्र के सबसे अहम चरण—मतगणना—को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कुल 255 कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। इन सभी को राज्य निर्वाचन आयोग, राँची द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों की विस्तार से जानकारी दी गई।

    विशेषज्ञ मास्टर ट्रेनरों ने मतगणना हॉल के प्रोटोकॉल, सुरक्षा मानकों और प्रक्रियाओं को विस्तार से समझाया। प्रपत्र-19 (भाग-1) का डेमों प्रस्तुत कर यह बताया गया कि मतगणना के दौरान दस्तावेजों का संधारण किस प्रकार किया जाएगा। प्रशिक्षण कक्ष में फ्लैक्स और नमूना मतपत्रों के माध्यम से वैध और अवैध मतपत्रों की पहचान की बारीकियों पर विशेष जोर दिया गया, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद की संभावना को न्यूनतम किया जा सके।

    प्रशिक्षण कार्यक्रम का नेतृत्व प्रशिक्षण कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी-सह-जिला शिक्षा अधीक्षक श्री मुकुल राज ने किया। वहीं सदर अनुमंडल पदाधिकारी श्री श्रीकांत विस्पुते ने प्रशिक्षण सत्र का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और आवश्यक निर्देश दिए।

    प्रशिक्षण कोषांग के संचालन में विजयेन्द्र सेठ, राम सिंह और आलोक कुमार ने सक्रिय सहयोग दिया। मास्टर ट्रेनरों की टीम में रामदेव वर्मा, प्रणय मिश्रा, मनोज तिवारी और फैजुल हक सहित अन्य प्रशिक्षकों ने अहम भूमिका निभाई। प्रशिक्षण केंद्र के प्रभारी के रूप में अतिरिक्त जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) श्री प्रकाश कुमार उपस्थित रहे।

    जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश है—मतगणना की प्रक्रिया न केवल तेज होगी, बल्कि पूरी तरह पारदर्शी और नियमसम्मत भी। क्योंकि लोकतंत्र की असली कसौटी मतदान नहीं, बल्कि निष्पक्ष मतगणना होती है।

  • “मेरा वोट – मेरा अधिकार”: 19 फरवरी को गिरिडीह की सड़कों पर गूंजेगा लोकतंत्र का स्वर

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: लोकतंत्र केवल चुनाव नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकों की भागीदारी से मजबूत होता है। इसी सोच के साथ 19 फरवरी 2026 को गिरिडीह में एक भव्य मतदाता जागरूकता रैली (पैदल मार्च) का आयोजन किया जा रहा है। विषय है—“मेरा वोट – मेरा अधिकार, सशक्त लोकतंत्र की पहचान”।

    यह पहल सिविल सोसायटी, गिरिडीह द्वारा की जा रही है, जिसका उद्देश्य है मतदाताओं को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना और शत-प्रतिशत मतदान के लिए प्रेरित करना।

    युवाओं पर विशेष फोकस.

    रैली का केंद्र बिंदु होंगे युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता। आयोजकों का मानना है कि यदि युवा जागरूक होंगे, तो लोकतंत्र और भी मजबूत होगा। कार्यक्रम के माध्यम से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने, निष्पक्ष और निर्भीक मतदान करने तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश दिया जाएगा।

    नारे, पोस्टर और जन-जागरण.

    रैली में सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, युवा प्रतिनिधि और विभिन्न सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल होंगे। जागरूकता नारों और आकर्षक पोस्टरों के जरिए मताधिकार के महत्व को रेखांकित किया जाएगा। संदेश साफ होगा—वोट सिर्फ अधिकार नहीं, जिम्मेदारी भी है।

    यहां से शुरू होगा मार्च.

    यह पैदल मार्च मारुति टावर, तिरंगा चौक स्थित सिविल सोसायटी, गिरिडीह के कार्यालय से प्रारंभ होकर अंबेडकर चौक पर समाप्त होगा। इस दौरान शहर की सड़कों पर लोकतंत्र के समर्थन में गूंजते नारों से माहौल लोकतांत्रिक उत्साह से भर उठेगा।

    नागरिकों से अपील.

    “सिविल सोसायटी, गिरिडीह” ने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे इस जन-जागरूकता अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

    19 फरवरी को गिरिडीह की सड़कों पर सिर्फ एक रैली नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी का संकल्प दिखाई देगा।

  • गिरिडीह में आयुष सेवाओं की सर्जरी! उप विकास आयुक्त ने कसी कमान

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में आज एक अहम कदम उठाया गया। उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी ने अपने कार्यालय कक्ष में आयुष विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर साफ संकेत दे दिया कि अब स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

    बैठक का फोकस स्पष्ट था—आमजन को बेहतर, सुलभ और प्रभावी स्वास्थ्य सुविधा कैसे मिले। आयुष विभाग की योजनाओं की प्रगति, सेवा की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता और आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उप विकास आयुक्त ने एक-एक बिंदु पर गंभीरता से समीक्षा की और अधिकारियों से जमीनी हकीकत की जानकारी ली।

    ओपीडी नियमित, दवाएं समय पर.

    उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आयुष स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित रूप से ओपीडी संचालित हो। चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और मरीजों को आवश्यक दवाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। साफ-सफाई की स्थिति पर भी विशेष जोर देते हुए कहा गया कि स्वास्थ्य केंद्रों की स्वच्छता से ही मरीजों का विश्वास मजबूत होता है।

    ग्रामीण इलाकों पर विशेष फोकस.

    बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष सेवाओं के प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की ताकत गांव-गांव तक पहुंचनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी पद्धतियों के माध्यम से लोगों को सस्ती और प्रभावी चिकित्सा उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

    आयुष्मान भारत से तालमेल.

    बैठक में आयुष्मान भारत योजना के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। निर्देश दिया गया कि लाभुकों को योजनाओं का समुचित लाभ मिले और आयुष सेवाएं भी इस दायरे में प्रभावी रूप से जुड़ें।

    जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर.

    उप विकास आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि आयुष विभाग की सेवाएं सीधे जनहित से जुड़ी हैं। सभी पदाधिकारी और कर्मी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन गंभीरता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ करें। साथ ही, प्रगति कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई दें।

    बैठक में आयुष पदाधिकारी समेत संबंधित अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।
    जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन की यह सक्रियता आने वाले दिनों में आमजन के लिए राहत की बड़ी खबर साबित हो सकती है।

  • गैर-दलीय चुनाव में ‘भाजपा समर्थित’ पोस्टरों का खेल, आचार संहिता पर सवाल—FIR के बाद भी शहर में जस के तस बैनर

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    गिरिडीह:नगर निगम का चुनाव गैर-दलीय है। कागज़ पर यह साफ लिखा है कि चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं, व्यक्ति के नाम और काम पर लड़ा जाएगा। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और कहानी कह रही है। पूरे शहर में “भाजपा समर्थित उम्मीदवार” लिखे पोस्टरों और बैनरों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। सवाल यह है—जब चुनाव गैर-दलीय है, तो फिर ‘पार्टी समर्थित’ का शोर किस नियम के तहत?

    चुनाव आयोग ने मामले का संज्ञान लिया। आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में दो दिन पहले गिरिडीह नगर निगम के मेयर प्रत्याशी शैलेंद्र चौधरी के खिलाफ नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि एफआईआर के बाद भी वे बैनर-पोस्टर शहर की दीवारों पर अब भी टंगे हुए हैं—मानो व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हों।

    शहर के कई प्रमुख चौक-चौराहों से लेकर गलियों तक लगे बैनरों में साफ तौर पर “भाजपा समर्थित” लिखा दिखाई देता है। यह स्थिति केवल पोस्टरों तक सीमित नहीं है। पचम्बा थाना और मुफस्सिल थाना क्षेत्र में प्रचार वाहनों के जरिए भी बाकायदा यह प्रचार किया जा रहा है कि “मैं भाजपा का समर्थित उम्मीदवार हूँ।” लाउडस्पीकर से प्रसारित संदेशों में पार्टी समर्थन का दावा खुलकर दोहराया जा रहा है।

    जबकि नियम स्पष्ट हैं—नगर निकाय चुनाव में किसी भी दल के अधिकृत प्रत्याशी की अवधारणा लागू नहीं होती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश है? क्या यह आचार संहिता की खुली अवहेलना नहीं है?

    जिला प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जो अधिकारी “नियम-कानून” का पालन सुनिश्चित कराने के लिए तैनात हैं, क्या उन्हें यह सब दिखाई नहीं दे रहा? एफआईआर दर्ज होने के बाद अपेक्षा थी कि पोस्टर-बैनर हटाए जाएंगे, प्रचार वाहनों पर रोक लगेगी और कड़ी कार्रवाई होगी। लेकिन अब तक ज़मीनी स्तर पर कोई सख्ती नजर नहीं आई है।

    राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गैर-दलीय चुनाव में पार्टी का नाम जोड़ना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना के विपरीत है। इससे चुनाव की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगता है।

    अब देखना यह है कि चुनाव आयोग और जिला प्रशासन आगे क्या कदम उठाते हैं—क्या नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा या फिर यह मामला भी कागज़ी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगा?

    नगर निगम चुनाव में मुद्दे विकास, जल संकट, सफाई और आधारभूत सुविधाओं के होने चाहिए थे। लेकिन फिलहाल चर्चा पोस्टरों, बैनरों और आचार संहिता उल्लंघन की है। सवाल सीधा है—क्या गैर-दलीय चुनाव वाकई गैर-दलीय रह पाएगा?

     

  • प्रमिला मेहरा का जनसंपर्क तेज, बोलीं— “बेटी को मौका दीजिए, शहर को नई दिशा मिलेगी”

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: नगर निगम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासी सरगर्मी भी तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में महापौर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा ने शहर के विभिन्न मोहल्लों में जोरदार जनसंपर्क अभियान चलाया। घर-घर पहुंचकर उन्होंने लोगों से आशीर्वाद मांगा और भावनात्मक अपील करते हुए कहा, “आपकी बेटी, आपकी बहन चुनाव मैदान में है। अगर आप मुझे मेयर बनाते हैं तो गिरिडीह का समुचित और संतुलित विकास सुनिश्चित करूंगी।”

    जनसंपर्क के दौरान प्रमिला मेहरा ने स्थानीय समस्याओं—जल संकट, सफाई व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं—को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि वह शहरी क्षेत्र की परेशानियों से भली-भांति परिचित हैं और मेयर बनने के बाद निश्चित समय सीमा में समाधान सुनिश्चित करेंगी।

    महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्होंने विभिन्न मंदिरों में महादेव की पूजा-अर्चना कर शहर की सुख-समृद्धि की कामना भी की।

    रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग होगा प्राथमिक एजेंडा.

    प्रमिला मेहरा ने अपने विज़न को स्पष्ट करते हुए कहा कि गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि लगातार गिरते भूजल स्तर को रोका जा सके। उनका दावा है कि इससे आने वाले वर्षों में शहर को पानी की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।

    उन्होंने “हर घर नल जल” की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी वादा किया और कहा कि जल संकट का स्थायी समाधान उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

    समर्थकों का दिखा उत्साह.

    जनसंपर्क अभियान में इरशाद अहमद वारिस , नऔषद अहमद चांद ,राकेश कुमार राकी, अभय सिंह, सुमेर वर्मा, रौनक मिश्रा, अभय कुमार, सन्नी सिंह, विवेक सिन्हा, नंदकिशोर सिंह, बासुदेव यादव, मो. इम्तियाज, उमेश यादव, अंजली सोरेन, नंदू सिंह, गीता शर्मा, प्रमिला कुमारी, सुशील शर्मा, शाहनवाज अंसारी, मो. तुफान, सोनू एजाज, अल्कामा, मो. वसीम राजा, मो. पप्पू सहित दर्जनों समर्थक मौजूद रहे।

    चुनावी मौसम में अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता “बेटी” की इस अपील को कितना समर्थन देती है और शहर की सरकार की सत्ता की चाबी किसके हाथों में जाती है।

  • निकाय  चुनाव “गैर-दलीय” है… लेकिन सियासत पूरी तरह दलीय हो चुकी है।

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू .
    राज्य के 48 शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव इस बार सीधे मुकाबले से निकलकर त्रिकोणीय जंग में बदल गए हैं। 23 फरवरी को मतदान होगा और चार दिन बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। पांच साल बाद हो रहे इन चुनावों की खास बात यह है कि ये कागज़ पर गैर-दलीय हैं, लेकिन ज़मीन पर राजनीतिक दल पूरी ताकत के साथ मैदान में हैं।

    सत्तारूढ़ इंडिया ब्लॉक के दो बड़े चेहरे—झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस—अब आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। संयुक्त उम्मीदवार पर सहमति नहीं बन पाई, और नतीजा यह कि दोनों दलों ने नौ नगर निगमों में महापौर पद के लिए अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए भी खुला समर्थन दिया गया है।

    गैर-दलीय चुनाव, पर दलीय रणनीति

    8 फरवरी को नाम वापसी की आखिरी तारीख बीतते ही तस्वीर साफ हो गई—गठबंधन की एकजुटता यहां नहीं दिखेगी। हालांकि, कांग्रेस और जेएमएम दोनों इसे “मतभेद” मानने से इनकार कर रहे हैं।
    कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है—“यह विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं है। यहां मुद्दे मोहल्लों के हैं, नालियों और सड़कों के हैं, हर वार्ड की अपनी प्राथमिकताएं हैं।”
    जेएमएम प्रवक्ताभी यही तर्क देते हैं—“जब चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं हो रहा, तो स्थानीय चेहरा और उसकी स्वीकार्यता ज्यादा मायने रखती है।”

    लेकिन सवाल यह है कि अगर चुनाव पूरी तरह स्थानीय है, तो फिर इतने बड़े पैमाने पर दलों की सक्रियता क्यों?

    बीजेपी की शहरी पकड़

    राज्य के प्रमुख शहरी केंद्र—रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, देवघर, हजारीबाग, गिरिडीह और मेदिनीनगर—परंपरागत रूप से भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र रहे हैं। एनडीए खेमे में भाजपा को अपने सहयोगियों एजेएसयू, जद(यू) और लोजपा (रामविलास) से खास चुनौती नहीं दिख रही।

    यानी मुकाबला असल में तीन कोनों वाला है—भाजपा, जेएमएम और कांग्रेस।

    जेएमएम की शहरी परीक्षा

    अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि यह दरअसल जेएमएम का “अर्बन एक्सपेरिमेंट” है। 81 सदस्यीय विधानसभा में जेएमएम की 34 सीटों में से करीब 90 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों से आती हैं। ग्रामीण इलाकों में मजबूत पकड़ के बावजूद बड़े शहरों में पार्टी अब तक सीमित रही है।

    छह साल से सत्ता में रहने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जेएमएम अब शहरों में भी अपनी जमीन तलाश रही है। यही वजह है कि पार्टी ने कई मजबूत स्थानीय चेहरों—यहां तक कि दूसरे दलों के बागी नेताओं—को भी समर्थन दिया है।

    गठबंधन पर असर?

    क्या यह नगर निकाय चुनाव भविष्य में इंडिया ब्लॉक की एकता को प्रभावित करेगा?
    फिलहाल दोनों दल इसे महज़ स्थानीय रणनीति बता रहे हैं। लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर नतीजे चौंकाने वाले रहे, तो इसका असर 2029 की बड़ी लड़ाइयों तक महसूस किया जा सकता है।

    फिलहाल तस्वीर साफ है—
    चुनाव भले ही “गैर-दलीय” हो,
    लेकिन सियासत पूरी तरह “दलीय” है।

    23 फरवरी को मतदाता तय करेंगे कि शहरों की कमान किसके हाथ जाएगी—परिणाम सिर्फ मेयर और अध्यक्ष नहीं चुनेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि झारखंड की शहरी राजनीति किस करवट बैठ रही है।

     

  • नगर निकाय चुनाव में महागठबंधन में दरार ! JMM – CONGRESS आमाने सामने

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह :  नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच एक बड़ी सियासी खबर सामने आ रही है।
    नाम वापसी शुक्रवार को होगी लेकिन उससे पहले ही महागठबंधन में दरार साफ़ दिखाई देने लगी है। मेयर चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस आमने-सामने खड़ी नजर आ रही हैं।

    दरअसल, दोनों ही दलों ने अपने-अपने समर्थित प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। जेएमएम ने जहां पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रमिला मेहरा को मेयर पद के लिए समर्थन देने का ऐलान किया है, तो वहीं कांग्रेस ने अपने नेता डॉ. समीर राज चौधरी को मैदान में उतार दिया है।

    गुरुवार को अलग-अलग जगहों पर हुई प्रेस वार्ताओं में दोनों दलों के जिला अध्यक्षों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के नाम का औपचारिक ऐलान किया।

    जेएमएम का दावा – विकास के लिए एकजुट हैं कार्यकर्ता

    गोयनका सेवा सदन में आयोजित प्रेस वार्ता में जेएमएम जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि प्रमिला मेहरा शुरू से ही आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से उठाती रही हैं। उनका कहना था कि प्रमिला मेहरा के नेतृत्व में
    शहर के विकास को एक नई दिशा मिलेगी और झारखंड मुक्ति मोर्चा पूरी ताकत के साथ उनके समर्थन में मैदान में उतरेगा। इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ और युवा कार्यकर्ता मौजूद रहे,
    जिनमें अजीत कुमार पप्पू, शाहनवाज अंसारी, सुमन सिन्हा, रॉकी सिंह, अभय सिंह, कृष्ण मुरारी शर्मा, चांद रशीद, टुन्ना सिंह, देवचरण दास, अजय सिंह, दिलीप रजक, सुमित सहित
    बड़ी संख्या में जेएमएम कार्यकर्ता शामिल थे।

    कांग्रेस का पलटवार – जनहित के मुद्दों को समझते हैं समीर

    वहीं दूसरी ओर, अलकापुरी में कांग्रेस ने भी शक्ति प्रदर्शन किया।
    मेयर प्रत्याशी सह कांग्रेस नेता डॉ. समीर राज चौधरी के समर्थन में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। कांग्रेस जिला अध्यक्ष सतीश केडिया ने कहा कि डॉ. समीर राज चौधरी अनुभवी, शिक्षित और जनता के मुद्दों को गहराई से समझने वाले नेता हैं। उनका दावा है  कि डॉ. समीर के नेतृत्व में नगर निगम का समुचित विकास होगा और आम लोगों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इस मौके पर अजय सिन्हा मंटू, मदन लाल विश्वकर्मा, साबिर खान  समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    बीजेपी ने पहले ही खोल दिया था पत्ता

    आपको बता दें कि इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने मेयर पद के लिए
    डॉ. शैलेंद्र चौधरी को अपना समर्थित प्रत्याशी घोषित किया था। हालांकि, बीजेपी की इस घोषणा के बावजूद पार्टी से जुड़े नेता कामेश्वर पासवान, प्रकाश कुमार दास और नागेश्वर दास
    ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है

    महागठबंधन में अंदरूनी चुनौती भी बनी सिरदर्द

    इतना ही नहीं, कांग्रेस और जेएमएम दोनों के लिए चुनौती अपने ही घर से खड़ी हो गई है।

    कांग्रेस के एक और नेता जोगेश्वर महथा पहले ही मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल कर चुके हैं। वहीं जेएमएम से जुड़े पप्पू रजक भी मेयर की रेस में अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं।

    अब बड़ा सवाल यही है— क्या नाम वापसी से पहले महागठबंधन की यह दरार भरेगी?
    या फिर यह चुनावी लड़ाई महागठबंधन के लिए नई मुश्किलें खड़ी करने वाली है?

    नगर निगम चुनाव में अब मुकाबला पूरी तरह दिलचस्प हो चुका है— हर निगाह नाम वापसी की तारीख और आगे की सियासी चालों पर टिकी है।

  • JMM की हो गयी शालिनी, कोडरमा की पूर्व जिप अध्यक्ष रही है

    CM हेमंत सोरेन की मोजूदगी मे ली सदस्यता

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    कोडरमा / गिरिडीह :  कोडरमा की सियासी ज़मीन पर आज झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपनी ताकत का खुला प्रदर्शन किया। झामुमो के सदस्यता समारोह में खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मौजूद रहे, और इसी मंच से राजनीति की एक अहम तस्वीर भी साफ हो गई।

    जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष और आजसू की वरिष्ठ नेत्री शालिनी गुप्ता ने गुरुवार को सैकड़ों समर्थकों के साथ झामुमो का दामन थाम लिया। मंच पर मौजूद थे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू—और माहौल था पूरी तरह सियासी उत्साह से भरा हुआ।

    कोडरमा में आयोजित इस सदस्यता समारोह में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने शालिनी गुप्ता को औपचारिक रूप से झामुमो की सदस्यता दिलाई। कार्यक्रम में झामुमो कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे, जो इस बदलाव को अपने आप में बड़ा संकेत मान रहे हैं।
    हेमंत सोरेन ने पार्टी में शामिल होने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह झामुमो के बढ़ते कुनबे और जनता के मजबूत भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता लगातार झामुमो की नीतियों और सरकार के काम पर भरोसा जता रही है।

    वहीं, झामुमो में शामिल होने के बाद शालिनी गुप्ता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के कामकाज की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि झामुमो की सरकार आदिवासी, मूलवासी समेत समाज के हर वर्ग का ख्याल रख रही है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड विकास की सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
    शालिनी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री के विकास कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने यह फैसला लिया। साथ ही उनके क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की भी यही इच्छा थी, और उसी भावना का सम्मान करते हुए उन्होंने झामुमो में शामिल होने का निर्णय लिया।

    सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद किया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का जो सपना देखा गया था, वह आज जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है।
    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य के हर गांव तक विकास योजनाएं पहुंच रही हैं और सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर काम कर रही है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड के विकास को देखकर भाजपा असहज है और केंद्र सरकार द्वारा राज्य की योजनाओं की राशि रोकी जा रही है।

    महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ समेत कई जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र किया। साथ ही भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में झारखंड में कई कंपनियां निवेश करेंगी, जिससे युवाओं को रोजगार और नौकरी के नए अवसर मिलेंगे।

    कुल मिलाकर, कोडरमा से उठी यह सियासी तस्वीर साफ संकेत दे रही है—झामुमो लगातार अपना दायरा बढ़ा रहा है, और आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति और भी दिलचस्प होने वाली है।

     

  • प्रचार में बंपर पैसा नहीं उड़ा सकेंगे मेयर प्रत्याशी, झारखंड निकाय चुनाव में आयोग ने तय की लिमिट

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: झारखंड की सियासत में एक बार फिर चुनावी डुगडुगी बज चुकी है।नगर निकाय चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही शहरी राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
    लेकिन इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले मेयर प्रत्याशियों के लिए एक बड़ी खबर है—अब प्रचार में बंपर पैसा उड़ाना आसान नहीं होगा।
    राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की घोषणा के साथ-साथ उम्मीदवारों के खर्च की सख्त सीमा भी तय कर दी है।

    लंबे इंतज़ार के बाद मंगलवार, को झारखंड नगर निकाय चुनाव की आधिकारिक घोषणा कर दी गई। राज्य के 48 शहरी निकायों में 23 फरवरी को मतदान होगा। इस चुनाव में कुल 43 लाख 33 हजार 574 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।  इनमें—  22 लाख 7 हजार से ज़्यादा पुरुष,
    21 लाख 26 हजार से अधिक महिलाएं, और 144 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।

    अब ज़रा चुनाव के दायरे पर नज़र डालते हैं…

    राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक,
    9 नगर निगमों में मेयर, 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए वोट डाले जाएंगे। इसके अलावा, पूरे राज्य में 1087 वार्ड पार्षदों का भी चुनाव होगा।

    मतदान की तैयारियां भी ज़ोरों पर हैं।राज्यभर में बनाए गए हैं— 4,304 मतदान केंद्र,
    जो 2,129 भवनों में स्थापित किए जाएंगे, ताकि मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। और अब बात उस फैसले की, जिस पर सबसे ज्यादा चर्चा है…
    चुनावी खर्च की लिमिट

    निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है—
     10 लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगर निगमों में
    मेयर या अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अधिकतम 25 लाख रुपये ही खर्च कर सकेंगे,
    जबकि वार्ड पार्षदों के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये होगी।

    10 लाख से कम आबादी वाले नगर निगमों में मेयर/अध्यक्ष के लिए खर्च सीमा 15 लाख रुपये,
    और वार्ड पार्षदों के लिए 3 लाख रुपये तय की गई है।

    नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए भी अलग-अलग सीमा तय है—एक लाख से ज्यादा आबादी वाली नगर परिषदों में अध्यक्ष 10 लाख और वार्ड पार्षद 2 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे।

    एक लाख से कम आबादी वाली नगर परिषदों में यह सीमा घटकर 6 लाख और 1.5 लाख रुपये रह गई है। वहीं, 12 हजार से 40 हजार आबादी वाली नगर पंचायतों में
    अध्यक्ष के लिए 5 लाख, और वार्ड पार्षद के लिए 1 लाख रुपये की सीमा तय की गई है। गौरतलब है कि झारखंड में नगर निकाय चुनाव साल 2020 से लंबित थे।
    पहले कोरोना महामारी, फिर कानूनी और प्रक्रियात्मक अड़चनों के चलते चुनाव टलते रहे।
    लेकिन अब आयोग ने साफ कर दिया है—
    चुनाव होंगे और तय नियमों के तहत ही होंगे।

    तो साफ है… इस बार चुनावी मैदान में नारे, मुद्दे और जनता का भरोसा तो चलेगा,
    लेकिन बेतहाशा खर्च पर पूरी तरह ब्रेक रहेगा।