परवेज़ आलम.
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
गिरिडीह: झारखंड की सियासत में एक बार फिर चुनावी डुगडुगी बज चुकी है।नगर निकाय चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही शहरी राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
लेकिन इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले मेयर प्रत्याशियों के लिए एक बड़ी खबर है—अब प्रचार में बंपर पैसा उड़ाना आसान नहीं होगा।
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की घोषणा के साथ-साथ उम्मीदवारों के खर्च की सख्त सीमा भी तय कर दी है।
लंबे इंतज़ार के बाद मंगलवार, को झारखंड नगर निकाय चुनाव की आधिकारिक घोषणा कर दी गई। राज्य के 48 शहरी निकायों में 23 फरवरी को मतदान होगा। इस चुनाव में कुल 43 लाख 33 हजार 574 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें— 22 लाख 7 हजार से ज़्यादा पुरुष,
21 लाख 26 हजार से अधिक महिलाएं, और 144 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।
अब ज़रा चुनाव के दायरे पर नज़र डालते हैं…
राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक,
9 नगर निगमों में मेयर, 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए वोट डाले जाएंगे। इसके अलावा, पूरे राज्य में 1087 वार्ड पार्षदों का भी चुनाव होगा।
मतदान की तैयारियां भी ज़ोरों पर हैं।राज्यभर में बनाए गए हैं— 4,304 मतदान केंद्र,
जो 2,129 भवनों में स्थापित किए जाएंगे, ताकि मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। और अब बात उस फैसले की, जिस पर सबसे ज्यादा चर्चा है…
चुनावी खर्च की लिमिट
निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है—
10 लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगर निगमों में
मेयर या अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अधिकतम 25 लाख रुपये ही खर्च कर सकेंगे,
जबकि वार्ड पार्षदों के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये होगी।
10 लाख से कम आबादी वाले नगर निगमों में मेयर/अध्यक्ष के लिए खर्च सीमा 15 लाख रुपये,
और वार्ड पार्षदों के लिए 3 लाख रुपये तय की गई है।
नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए भी अलग-अलग सीमा तय है—एक लाख से ज्यादा आबादी वाली नगर परिषदों में अध्यक्ष 10 लाख और वार्ड पार्षद 2 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे।
एक लाख से कम आबादी वाली नगर परिषदों में यह सीमा घटकर 6 लाख और 1.5 लाख रुपये रह गई है। वहीं, 12 हजार से 40 हजार आबादी वाली नगर पंचायतों में
अध्यक्ष के लिए 5 लाख, और वार्ड पार्षद के लिए 1 लाख रुपये की सीमा तय की गई है। गौरतलब है कि झारखंड में नगर निकाय चुनाव साल 2020 से लंबित थे।
पहले कोरोना महामारी, फिर कानूनी और प्रक्रियात्मक अड़चनों के चलते चुनाव टलते रहे।
लेकिन अब आयोग ने साफ कर दिया है—
चुनाव होंगे और तय नियमों के तहत ही होंगे।
तो साफ है… इस बार चुनावी मैदान में नारे, मुद्दे और जनता का भरोसा तो चलेगा,
लेकिन बेतहाशा खर्च पर पूरी तरह ब्रेक रहेगा।






