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  • नेमरा गांव में 10 दिन तक रहेंगे मुख्यमंत्री, श्राद्धकर्म की सभी धार्मिक विधियों में निभाएंगे भागीदारी

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    नेमरा / रामगढ़ : झारखंड आंदोलन के जननायक, पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद अब उनके पुत्र और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता के अंतिम संस्कार से जुड़ी हर धार्मिक प्रक्रिया में पूर्ण रूप से भाग लेने का निर्णय लिया है। वे आगामी दस दिनों तक अपने पैतृक गांव  नेमरा में ही रहेंगे और वहीं से राज्य के कार्यों का संचालन भी करेंगे।

    बीते मंगलवार को शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके गांव नेमरा में किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी थी । परिवार के सूत्रों के मुताबिक, गुरुजी का श्राद्धकर्म 10 दिनों तक चलेगा, और इस अवधि में हेमंत सोरेन पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ हर विधि-विधान में सम्मिलित रहेंगे।

    नेमरा में अपने पिता की स्मृतियों के बीच रहना हेमंत सोरेन के लिए एक भावनात्मक अनुभव होगा। वे परिवार के साथ समय बिताते हुए, अपने पिता के संघर्षों और योगदान को आत्मसात करने का अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। यह न केवल एक बेटे की जिम्मेदारी है, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक वारिस की भावनात्मक यात्रा भी है जो अपने पिता की विरासत को संभाल रहा है।

    प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सक्रिय.

    मुख्यमंत्री के नेमरा प्रवास को देखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था भी पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। नेमरा गांव में सड़क, बिजली, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क की समस्याओं को दूर करने के लिए तेज़ी से कार्य किए जा रहे हैं। अंतिम यात्रा के दौरान लाखों लोगों की उपस्थिति से गांव की बुनियादी सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ा था। खासकर मोबाइल नेटवर्क ठप हो जाने और संकरी सड़कों पर घंटों जाम लगने से लोगों को खासी परेशानी हुई।

    इस जाम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव तक फंस गए थे। भारी भीड़ और अव्यवस्था के बीच सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों की चुनौतियाँ कई गुना बढ़ गई थीं।

    नेमरा में फिर जुटेगी भीड़.

    स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गुरुजी के श्राद्धकर्म के अंतिम दिन एक बार फिर नेमरा में भारी जनसैलाब उमड़ने की संभावना है। लाखों लोग अंतिम बार उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करने और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए वहां पहुँच सकते हैं।

    गांव के लोगों का कहना है कि गुरुजी की लोकप्रियता केवल एक नेता के रूप में नहीं थी, बल्कि एक जननायक और प्रेरणा स्रोत के रूप में थी। यही कारण है कि उनकी अंतिम विदाई में न केवल झारखंड, बल्कि बिहार, ओडिशा और बंगाल से भी श्रद्धालु उमड़े थे, और अब उनके श्राद्ध में भी यही दृश्य दोहराया जा सकता है।

  • राहुल गांधी हुए चाईबासा कोर्ट में पेश, मानहानि मामले में मिली जमानत

    The News Post4u.

    रांची :   कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष  और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को झारखंड के चाईबासा कोर्ट से बुधवार को राहत मिल गयी , जब अदालत ने उन्हें मानहानि मामले में जमानत दे दी। मामला वर्ष 2018 का है, जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक बयान दिए थे। यह मामला अब कानूनी रूप से गवाही की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है।

    सुबह चाईबासा पहुंचे राहुल गांधी.

    बुधवार सुबह राहुल गांधी हेलीकॉप्टर से चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान पर उतरे। इसके बाद वह सीधे चाईबासा परिसदन पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग 45 मिनट तक रुके। करीब 11 बजे वे सिविल कोर्ट पहुंचे और एमपी-एमएलए विशेष अदालत की न्यायाधीश सुप्रिया रानी तिग्गा के समक्ष पेश हुए। उनके साथ उनके वकील प्रणव दरीपा भी मौजूद थे।

    अदालत ने दी सशर्त जमानत.

    राहुल गांधी की ओर से कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। उन्हें इस शर्त पर जमानत दी गई कि वह आगे की जांच में पूरा सहयोग करेंगे और जब भी अदालत बुलाएगी, पेश होंगे।

     क्या है मामला ?

    वर्ष 2018 में राहुल गांधी ने चाईबासा की एक जनसभा के दौरान कथित तौर पर भाजपा और उसके नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसे लेकर भाजपा नेता प्रताप कुमार कटियार ने चाईबासा एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

    मामले में शिकायतकर्ता के वकील विनोद कुमार साहू के अनुसार, कोर्ट ने राहुल गांधी से स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या उन्होंने वह बयान दिया था, जिस पर विवाद हुआ है। इस पर राहुल गांधी ने साफ इनकार करते हुए कहा, “मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया।” वकील साहू ने कोर्ट में तर्क दिया कि राहुल गांधी का भाषण आज भी कांग्रेस की वेबसाइट पर उपलब्ध है और उसकी प्रति कोर्ट में साक्ष्य के रूप में जमा की जा चुकी है।

    पहले टली थी पेशी, अब शुरू होगी गवाही.

    बता दें कि राहुल गांधी को पहले 26 जून को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन उन्होंने विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए पेशी की तारीख 6 अगस्त तय की थी। उसी के तहत आज वे अदालत में पेश हुए।

    राहुल गांधी को भले ही चाईबासा कोर्ट से आज जमानत मिल गई हो, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अब इस केस में गवाही और बहस का चरण शुरू होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी अपने बयान से इनकार पर कायम रहते हैं या विपक्ष इसे एक और राजनीतिक मुद्दे में बदल देता है।

     

  • मानहानि मुकदमे में राहुल गांधी कल चाईबासा कोर्ट में होंगे पेश

    अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़ा है मामला 

    The News Post4u.

    रांची ,झारखंड: कांग्रेस नेता राहुल गांधी आगामी 6 अगस्त को झारखंड के चाईबासा में स्थित एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में पेश होंगे। यह पेशी वर्ष 2018 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि के मामले में हो रही है। इस मामले में कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश देते हुए गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

    क्या है मामला ?

    चाईबासा निवासी प्रताप कटियार ने 9 जुलाई 2018 को एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि कांग्रेस अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कोर्ट ने पहले अप्रैल 2022 में राहुल गांधी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया। लेकिन उनके द्वारा इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

    इसके बाद फरवरी 2024 में कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी किया। राहुल गांधी की ओर से उनके अधिवक्ता ने व्यक्तिगत पेशी से छूट की अर्जी दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। फिर मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा, जहां उन्हें कुछ समय के लिए राहत मिली।

    हालांकि मार्च 2024 में हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद चाईबासा कोर्ट ने मामले में पुनः सुनवाई शुरू की और उन्हें 6 अगस्त को सशरीर उपस्थित होने का आदेश जारी किया।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, हेलीपैड तैयार.

    राहुल गांधी की प्रस्तावित उपस्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क है। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाने की कवायद जारी है। चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान में उनके हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए विशेष हेलीपैड तैयार किया गया है। टाटा कॉलेज से लेकर व्यवहार न्यायालय तक के पूरे रास्ते में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।

    प्रशासन ने उनके आगमन को लेकर सभी सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राहुल गांधी के साथ दिल्ली और रांची से अधिवक्ताओं की एक टीम के आने की भी संभावना जताई जा रही है।

    अब अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें.

    यह मामला राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राहुल गांधी की कोर्ट में उपस्थिति न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि 6 अगस्त को कोर्ट में क्या रुख अपनाया जाता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

     

  • शिबू सोरेन पंचतत्व में विलीन: नेमरा गांव में लाखों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    रामगढ़, झारखंड: झारखंड आंदोलन के जननायक, पूर्व मुख्यमंत्री ‘दिशोम गुरु’  शिबू सोरेन को उनके पैतृक गांव रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। झमाझम बारिश और गम के माहौल के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इसी के साथ झारखंड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया।

    अंतिम यात्रा: पहाड़ों की गोद में उमड़ा जनसैलाब.

    नेमरा गांव, जो पहाड़ों की तलहटी में बसा एक शांत और साधारण गांव है, मंगलवार को लाखों लोगों की भीड़ से भर गया। आम जनता से लेकर झारखंड आंदोलन के पुराने सिपाही, झामुमो कार्यकर्ता, राजनेता, नौकरशाह,पत्रकार और परिजन—हर कोई ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम बार देखने और श्रद्धांजलि देने पहुंचा।

    गांव की गलियों में नारे गूंजते रहे—“शिबू सोरेन अमर रहें”, “जब तक सूरज चांद रहेगा, गुरुजी तेरा नाम रहेगा”।

    बारिश की फुहारों के बीच शाम 6:45 बजे उनका अग्नि संस्कार किया गया। लोग छातों के नीचे भींगते हुए अंतिम विदाई में शामिल होते रहे। मानो आसमान भी इस विदाई में रो रहा हो।

    “गुरुजी को अंतिम जोहार”, “विनम्र श्रद्धांजलि”—ऐसे शब्दों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स रांची से रामगढ़ तक पूरे रास्ते भर लोगों की आंखें नम करते रहे।

    विधानसभा से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई और फिर पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव नेमरा लाया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके भाई बसंत सोरेन, और परिवार के अन्य सदस्य पार्थिव शरीर के साथ यात्रा में शामिल रहे।

    सादगी में श्रद्धा: संथाली परंपरा से हुआ अंतिम संस्कार.

    नेमरा गांव पहुंचने के बाद शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार संथाली रीति-रिवाज और परंपराओं के अनुसार किया गया। वहीं, उनका दाह संस्कार उसी बड़का नाला श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पूर्वजों की भी अंत्येष्टि होती रही है।

    मुखाग्नि देने की जिम्मेदारी पुत्र हेमंत सोरेन ने निभाई। जैसे ही चिता को अग्नि दी गई, गांव के हर कोने से नारे उठे—“शिबू सोरेन अमर रहें”। बारिश की बूंदें उस वक्त भी थमी नहीं थीं, लेकिन लोगों की श्रद्धा के आगे मौसम भी झुक गया।

    राजकीय सम्मान और राष्ट्रीय नेतृत्व की उपस्थिति.

    झारखंड सरकार ने शिबू सोरेन के निधन पर 6 अगस्त तक तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की। साथ ही, 4 और 5 अगस्त को सभी सरकारी दफ्तर बंद रखे गए।

    राजकीय सम्मान के तहत उनकी चिता के पास झंडा फहराया गया, गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, और शोक ध्वनि के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

    इस दौरान कई राष्ट्रीय नेता नेमरा पहुंचे, जिनमें प्रमुख रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोक सभा मे विपक्ष के नेता राहुल गांधी,तेजस्वी यादव (राजद),संजय सिंह (आप), शताब्दी रॉय (टीएमसी), पप्पू यादव ( सांसद पूर्णिया )

    भारी बारिश के कारण कई नेता हेलिकॉप्टर से नहीं आ सके, और उन्होंने सड़क मार्ग से ही नेमरा गांव पहुंचकर ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम सलामी दी।

    प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था.

    गुरुजी की अंतिम यात्रा के दौरान मुख्य सचिव अलका तिवारी, डीजीपी अनुराग गुप्ता, प्रधान सचिव अविनाश कुमार, तथा कई जिलों के डीसी और एसपी सहित उच्चस्तरीय प्रशासनिक अमला मौजूद था। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही, लेकिन सादगी और अनुशासन के साथ श्रद्धा का वातावरण भी बना रहा।

    आमजन का जुड़ाव.

    गांव की गलियों में, पहाड़ों के बीच, बारिश से भीगते छतरियों के नीचे खड़े आम लोग—हर आंख नम थी। हर दिल गमगीन। लोगों ने बताया—“गुरुजी सिर्फ नेता नहीं थे, वो आंदोलन थे, वो आवाज थे हमारे हक की”। दुकानें, बाजार, स्कूल—हर जगह मातम पसरा रहा। कुछ विद्यालयों में दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं।

    शिबू सोरेन का जाना, सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है। यह उस संघर्ष का अंत है, जिसने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाया।

    उनकी अंतिम यात्रा सिर्फ एक शारीरिक विदाई नहीं थी, बल्कि झारखंड के इतिहास में लिखी गई एक अविस्मरणीय घटना थी। उनका जीवन संघर्ष, आंदोलन और आदिवासी अस्मिता की मिसाल था।

    गुरुजी चले गए, लेकिन उनकी विचारधारा, उनकी आवाज, उनकी पहचान—हमेशा जीवित रहेगी।
    “दिशोम गुरु अमर रहें!”

  • गिरिडीह में दिशोम गुरु शिबू सोरेन को दी गई श्रद्धांजलि

    चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स के कार्यालय में शोक सभा का हुआ आयोजन.

    The News Post4u.

    गिरिडीह : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक “दिशोम गुरु” शिबू सोरेन के निधन के बाद राज्यभर में शोक की लहर है। उनकी स्मृति में गिरिडीह के बरगंडा स्थित चैंबर ऑफ कॉमर्स कार्यालय में एक शोकसभा का आयोजन किया गया, जहां अलग-अलग व्यापारिक और पेशेवर संगठनों ने मिलकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

     संयुक्त रूप से हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम.

    इस शोकसभा का आयोजन चैंबर ऑफ कॉमर्स, वस्त्र व्यवसायी संघ, माईका एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन और सीए एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में सभी संगठनों ने एक सुर में कहा कि शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आंदोलन की मिसाल थे। उन्होंने अपने जीवन की प्रत्येक सांस को झारखंड के हक, हकूक और अस्मिता के लिए समर्पित कर दिया।

    चित्र पर पुष्पांजलि, याद किए गए योगदान.

    कार्यक्रम की शुरुआत दिशोम गुरु के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुई। उपस्थित सभी गणमान्य लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद सभा में वक्ताओं ने झारखंड राज्य के गठन में शिबू सोरेन के ऐतिहासिक योगदान, आदिवासियों, पिछड़ों, शोषितों और वंचितों के लिए उनके संघर्षों को याद करते हुए कहा “उन्होंने सिर्फ नारे नहीं दिए, बल्कि आंदोलन खड़ा किया। शोषितों की आवाज बने और झारखंडियों के अधिकारों के लिए पूरी जिंदगी लड़ते रहे। उन्हें यूं ही नहीं दिशोम गुरु कहा गया।”

    दिशोम गुरु का जाना – एक अपूरणीय क्षति.

    सभा में उपस्थित सभी लोगों ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया कि शिबू सोरेन का निधन केवल झारखंड नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके विचार, उनका साहस और उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को मार्गदर्शन देते रहेंगे। “आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तब यह खालीपन हर उस व्यक्ति को महसूस हो रहा है जो न्याय, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई से जुड़ा रहा है।”

    इस अवसर पर गिरिडीह के व्यापार और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं। इनमें शामिल रहे. माइका स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अशोक पांड्या, राजेंद्र बगेड़िया, संजय भूदोलिया, अरविंद राजगढ़िया, लख्खी गोरीसरिया, राजेंद्र भारतीया,चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव प्रमोद कुमार, सीए एसोसिएशन के विकाश खेतान, सुनील मोदी, दिनेश खेतान, संजय जैन, अंकित बगेड़िया, श्रवण केडिया, विकास बगेड़िया, वस्त्र व्यवसायी संघ के राजेश सुराना, नीलकमल भारतीया व दीपक मोदी।  सभी ने  शिबू सोरेन के विचारों को जीवित रखने और उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

     

     

  • भाजपा 10 अगस्त को निकलेगी ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा

    ‘हर घर तिरंगा‘ अभियान को लेकर कार्यशाला.

    The News Post4U.

    गिरिडीह : पचंबा स्थित भाजपा कार्यालय, हरिचक में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर एक भव्य और संगठित जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष महादेव दुबे ने की।

     कार्यशाला का उद्देश्य.

    इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आजादी के अमृत महोत्सव के तहत हर घर तिरंगा अभियान को ज़मीनी स्तर पर सफल बनाना और जिलेभर में इसकी प्रभावशाली तैयारी सुनिश्चित करना था।
    इस मौके पर भाजपा नेताओं ने भाजयुमो के कार्यकर्ताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया और अभियान को लेकर उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

    तैयारी का विस्तृत कार्यक्रम.

    जिलाध्यक्ष महादेव दुबे ने जानकारी दी कि 7 और 8 अगस्त को गिरिडीह जिले के सभी 34 मंडलों में मंडल स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। 10 अगस्त को गिरिडीह मुख्यालय सहित प्रमुख स्थलों पर भव्य तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी, जो जिले के इतिहास की सबसे बड़ी राष्ट्रभक्ति यात्रा साबित होगी। 10 अगस्त से 14 अगस्त तक जिलेभर के हर घर, हर दुकान, हर प्रतिष्ठान पर तिरंगा फहराने का आह्वान किया गया है।

    तिरंगा यात्रा का उद्देश्य.

    इस यात्रा का मकसद न केवल राष्ट्रप्रेम का संदेश फैलाना है, बल्कि भारत की आज़ादी के संघर्ष और वीर सपूतों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
    इस दौरान अंग्रेजों से लड़ी गई ऐतिहासिक लड़ाइयों, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और तिरंगे के गौरव को लेकर जनजागरूकता फैलाई जाएगी।

    भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष की अपील.

    भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज ने कार्यकर्ताओं से कहा कि“हर घर तिरंगा अभियान सिर्फ एक आयोजन नहीं, यह राष्ट्र की एकता और अखंडता का प्रतीक है। हमें यह सुनिश्चित करना है कि गिरिडीह जिले के प्रत्येक घर, हर संस्थान, और हर गली में तिरंगा लहराए।” उन्होंने समाज के सभी वर्गों, सामाजिक संगठनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से भी संपर्क साधने का निर्देश दिया, ताकि यह अभियान जनआंदोलन का रूप ले।

    दिए गए संगठनात्मक निर्देश.

    जिलाध्यक्ष महादेव दुबे ने कहा कि “भाजपा के संगठनात्मक दृष्टिकोण से जिले के सभी 34 मंडलों में कार्यशालाएं आयोजित होंगी। इसके लिए मंडल अध्यक्षों को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
    यह तिरंगा यात्रा ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण होगी। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से गिरिडीह भाजपा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देशभक्ति केवल भावना नहीं, एक जीवंत कार्यनीति है। कार्यशालाओं से लेकर यात्रा और तिरंगा फहराने तक की योजना जिले में राष्ट्रप्रेम का वातावरण तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

    सैकड़ों कार्यकर्ता हुए शामिल.

    इस कार्यशाला में जिलेभर से सैकड़ों भाजपा नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे विनय सिंह, प्रदीप साहू, कामेश्वर पासवान, श्याम प्रसाद, नवीन सिन्हा, उदय सिंह, मनोज यादव, देवनाथ राणा, रंजीत राय, संगीता सेठ, मुकेश जलान, उषा कुमारी, पिंकी कुमारी, अमर सिन्हा, राजेश जायसवाल, मनोज शंघाई, रंजन सिन्हा, सुनील साव, अमित साव, राजेश गुप्ता, नगर अध्यक्ष हरमिंदर सिंह बग्गा, प्रदीप राय, अरविंद बर्नवाल, गंगाधर वर्मा, सौरभ सागर मिश्रा, संजय हाजरा, राजेंद्र राय, दीपक भारती, पवन साव, सुनीता विश्वकर्मा, सुरेश मंडल, विवेक गुप्ता, मिथुन चंद्रवंशी, सदानंद साहू, प्रदीप सिंह, दिनेश महतो, अजीत राणा, अजीत राम, अशोक केसरी, कृष्ण जी, अशोक राय, खिरोधर दास समेत कई वरिष्ठ पदाधिकारी।

     

  • दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा: नेमरा गांव में होगा अंतिम संस्कार

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    झारखंड आंदोलन के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और “दिशोम गुरु” के नाम से पहचाने जाने वाले शिबू सोरेन अब हमारे बीच नहीं हैं। उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और सिद्धांत झारखंड की धरती पर अमर रहेंगे।

    विधानसभा परिसर में दी गई अंतिम श्रद्धांजलि.

    राज्य की राजधानी रांची के विधानसभा परिसर में जब शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर लाया गया, तो पूरा परिसर शोक और सम्मान में डूब गया।

    विधानसभा में गॉड ऑफ ऑनर.

    झारखंड विधानसभा परिसर में उन्हें राजकीय सम्मान (गॉड ऑफ ऑनर) दिया गया।
    राज्यपाल, मुख्यमंत्री, केंद्र व राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और हजारों आम नागरिक उन्हें अंतिम बार श्रद्धांजलि देने पहुंचे। शोकाकुल वातावरण में ‘दिशोम गुरु अमर रहें’ के नारों ने माहौल को और भी भावुक बना दिया।

    नेमरा गांव में अंतिम संस्कार की तैयारी

    रामगढ़ के नेमरा गांव, जहां से शिबू सोरेन की जीवन यात्रा शुरू हुई थी, वहीं आज दोपहर 3 बजे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। यह वही गांव है, जहां एक 15 वर्षीय बालक ने अपने पिता की हत्या के बाद अन्याय के खिलाफ लड़ने की प्रतिज्ञा ली थी – और यहीं से झारखंड आंदोलन का बीज अंकुरित हुआ था।

    हेमंत सोरेन की भावुक पोस्ट:

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो खुद शिबू सोरेन के बेटे हैं, ने सोशल मीडिया पर लिखा –

    “मैं अपने जीवन के सबसे कठिन दिनों से गुजर रहा हूँ। मेरे सिर से सिर्फ पिता का साया नहीं, झारखंड की आत्मा का एक स्तंभ चला गया।”

    उन्होंने यह भी कहा:

    “मैं उन्हें सिर्फ बाबा नहीं कहता था। वे मेरे पथप्रदर्शक थे। मेरे विचारों की जड़ें उन्हीं से थीं। वो उस घने जंगल जैसे थे, जिसकी छांव ने हजारों-लाखों झारखंडियों को अन्याय की धूप से बचाया।”

    अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब.

    शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा जब नेमरा गांव के लिए रवाना हुई, तो सड़क के दोनों किनारों पर जनसागर उमड़ पड़ा। लोग बस एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे।
    हर कोने से उठती आवाज़ – “गुरुजी अमर रहें” – उनके प्रति लोगों के प्रेम और श्रद्धा को दर्शा रही थी।

    देश भर से आए राजनेता.

    इस दुखद घड़ी में देशभर से राजनीतिक हस्तियों ने शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी।
    विपक्ष के नेता राहुल गांधी, काँग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सांसद पप्पू यादव, संजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, मंत्री सुदिव्य कुमार,  फुरकान अंसारी, समेत कई दिग्गज नेता अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे हैं

    ओरमांझी में भी श्रद्धांजलि.

    रांची के ओरमांझी स्थित लाल बहादुर शास्त्री चौक पर भी भारी संख्या में लोग जुटे।
    पूर्व सांसद रामटहल चौधरी के नेतृत्व में झामुमो, कांग्रेस, भाजपा, आजसू, झाविमो समेत सभी दलों के कार्यकर्ता व आम नागरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद पार्थिव शरीर वाले वाहन पर बैठे हुए थे, और उनके पीछे-आगे सैकड़ों गाड़ियां – जैसे पूरी झारखंड सड़क पर उतर आई हो।

    संसद में भी दी गई श्रद्धांजलि.

    लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले स्पीकर ओम बिरला ने शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा –

    “वे सामाजिक न्याय और जनजातीय कल्याण के लिए हमेशा याद किए जाएंगे।”
    शिबू सोरेन आठ बार लोकसभा सांसद रहे और केंद्र में मंत्री व राज्य में मुख्यमंत्री भी।

    नेमरा तक 8 किलोमीटर पैदल यात्रा.

    अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों लोग 8 किलोमीटर पैदल चलकर नेमरा गांव जा रहे हैं।
    शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा एक जनांदोलन जैसी दिख रही है – जो यह बताती है कि उन्होंने केवल राजनीति नहीं की, बल्कि लोगों के दिलों पर राज किया

    चर्च ने भी दी श्रद्धांजलि.

    जीईएल चर्च ऑफिस, रांची में बिशप सीमांत तिर्की समेत चर्च के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि दी। यह उनके सामाजिक समरसता और धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण को दर्शाता है

    संघर्षों की कहानी:

    हेमंत सोरेन ने कहा:

    “बचपन में मैं जब उनसे पूछता – ‘बाबा, आपको लोग दिशोम गुरु क्यों कहते हैं?’
    वे मुस्कुरा कर कहते – ‘क्योंकि बेटा, मैंने सिर्फ उनका दुख समझा और उनकी लड़ाई अपनी बना ली।’”

    शिबू सोरेन ने गरीबी, जमींदारी शोषण और आदिवासी उत्पीड़न के खिलाफ जीवन भर संघर्ष किया। उन्होंने आदिवासी समाज को न केवल पहचान दिलाई, बल्कि आवाज भी दी।

    भारत रत्न की मांग.

    मंत्री इरफान अंसारी ने कहा –

    “मैं राष्ट्रपति से अपील करता हूं कि गुरुजी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए। उन्होंने गरीबों की लड़ाई लड़ी, वह वास्तव में इसके हकदार हैं।”

    अंतिम सलाम.

    झारखंड की आत्मा, आदिवासी अस्मिता की आवाज, और आंदोलन की जीवित किताब शिबू सोरेन अब इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन उनके विचार, उनके संघर्ष और उनकी छाया आने वाली पीढ़ियों को रास्ता दिखाती रहेगी।

    गुरुजी अमर रहें। दिशोम गुरु अमर रहें।

  • दिशोम गुरु शिबू सोरेन: झारखंड आंदोलन का जननायक, एक युग का अवसान

    *झारखंड के दिशोम गुरु: शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा

             *झारखंड आंदोलन के पुरोधा का अवसान

    * नेमरा से संसद तक: शिबू सोरेन की अमर गाथा   

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    11 जनवरी 1944 को झारखंड के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में जन्मे शिबू सोरेन का जीवन महज 15 वर्ष की उम्र में एक त्रासदी से बदल गया। उनके पिता शोबरन सोरेन, जो शिक्षक थे और महाजनी प्रथा के खिलाफ मुखर थे, की हत्या स्थानीय साहूकारों ने कर दी। यही घटना शिबू सोरेन के भीतर न्याय के लिए एक ऐसी आग जगा गई, जिसने उन्हें ताउम्र आदिवासी अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया।

    संघर्ष की शुरुआत और आंदोलन की जड़ें.

    गरीब किसान परिवार से आने वाले शिबू सोरेन ने हजारीबाग के गोला हाई स्कूल से मैट्रिक पास की। 1962 में रूपी सोरेन से विवाह किया। उनके चार संतानें हैं — तीन पुत्र और एक पुत्री। बड़े बेटे दुर्गा सोरेन का निधन 2009 में हुआ, बेटी अंजनी ओडिशा में पार्टी की कमान संभाल रही हैं, बसंत सोरेन विधायक हैं, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को सशक्त रूप में आगे बढ़ाया है।

    1970 के दशक में जब आदिवासी समाज महाजनी शोषण, जमीन हड़प और शराब माफिया के चंगुल में था, तब शिबू सोरेन ने गिरिडीह, पारसनाथ और धनबाद के जंगलों में भूमिगत रहकर आंदोलन छेड़ा। हर रात तीन-तीन बार ठिकाने बदलते, महाजनों के खिलाफ ‘धनकटी आंदोलन’ चलाते और जनसभाओं के माध्यम से आदिवासियों को संगठित करते।

    70 के दशक में, शिबू सोरेन गिरिडीह के पारसनाथ  जंगलों में छिपकर आंदोलन कर रहे थे। उनके आंदोलन की आवाज पटना से दिल्ली तक सुनाई दे रही थी। सरकार उन्हें मुख्यधारा में लाना चाहती थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इसके लिए गंभीर थीं। धनबाद के तत्कालीन डीसी के.बी. सक्सेना ने यह काम शुरू किया। टुंडी के तत्कालीन थाना प्रभारी बी. किचिंगिया ने इसे पूरा किया।

    पारसनाथ के जंगलों में भूमिगत रहकर आंदोलन.

    शिबू सोरेन 70 के दशक में पारसनाथ के जंगलों में भूमिगत रहकर आंदोलन कर रहे थे। उस समय बिहार और दिल्ली में भी उनके आंदोलन की चर्चा थी। सरकार चाहती थी कि शिबू सोरेन मुख्यधारा में शामिल हों। इंदिरा गांधी ने भी इस पर ध्यान दिया। धनबाद के डीसी के.बी. सक्सेना ने इसकी शुरुआत की। टुंडी के थाना प्रभारी बी. किचिंगिया ने इस काम को पूरा किया। शिबू सोरेन के पुराने साथियों का कहना है कि किचिंगिया ने सरकारी नौकरी में रहते हुए भी शिबू के आंदोलन में मदद की थी। किचिंगिया ने संवैधानिक नियमों का पालन करते हुए यह काम किया। शिबू सोरेन को भूमिगत जीवन छोड़कर राजनीति में लाने का श्रेय किचिंगिया को ही जाता है।

    राजनीतिक उदय और झारखंड आंदोलन की नींव.

    4 फरवरी 1972 को उन्होंने एके राय और विनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की स्थापना की। यह संगठन न केवल आदिवासी अधिकारों बल्कि अलग राज्य झारखंड के गठन के लिए भी प्रतिबद्ध था। शिबू सोरेन की आवाज़ पर हजारों आदिवासी एकत्र हो जाते थे। 15 नवंबर 2000 को जब झारखंड का गठन हुआ, तो इसमें सबसे बड़ा योगदान दिशोम गुरु का ही था।

    संसद से मुख्यमंत्री तक का सफर.

    • 1980 में पहली बार दुमका से लोकसभा पहुंचे।
    • 1989, 1991, 1996 और 2004, 2009, 2014 में भी सांसद चुने गए।
    • 2004 में केंद्र की यूपीए सरकार में कोयला मंत्री बने।
    • तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री भी बने, हालांकि राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कार्यकाल अधिक लंबा नहीं हो सका।

    विवाद, जेल और फिर बेदाग वापसी.

    उनका जीवन संघर्षों से ही नहीं, विवादों से भी जुड़ा रहा। 1975 के चिरुडीह हत्याकांड और 1994 में अपने निजी सचिव शशिनाथ झा की हत्या के आरोपों ने उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया। 2006 में उन्हें उम्रकैद की सजा हुई, लेकिन बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने बरी कर दिया। इसके बावजूद उनकी जनप्रियता कभी कम नहीं हुई।

    2007 में जब उन्हें जेल ले जाया जा रहा था, तब उनके काफिले पर बम से हमला हुआ। वे बाल-बाल बचे।

    संघर्ष से सत्ता तक: सामाजिक-सांस्कृतिक भूमिका

    शिबू सोरेन का योगदान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने टुंडी और आसपास के इलाकों में आदिवासियों के लिए शिक्षा अभियान शुरू किया। टुंडी के एक महादेव मंदिर में आदिवासियों को प्रवेश दिलाने की ऐतिहासिक पहल की। वह सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने वाले नेता थे।

    राजनीति से मार्गदर्शक की भूमिका तक.

    लगभग चार दशकों तक झामुमो के अध्यक्ष रहे शिबू सोरेन ने अप्रैल 2025 में सक्रिय राजनीति से खुद को अलग कर पार्टी की कमान बेटे हेमंत सोरेन को सौंप दी। वे पार्टी के मार्गदर्शक बन गए।

    अंतिम दिन और राष्ट्र की श्रद्धांजलि.

    शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 की रात दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले एक महीने से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार अस्पताल में मौजूद रहे।

    सोमवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में अस्पताल पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें आदिवासी समाज का नायक बताते हुए श्रद्धांजलि दी।

    उनका पार्थिव शरीर रांची लाया गया, जहां मोरहाबादी स्थित आवास, झामुमो कार्यालय और विधानसभा में आम जन और नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। मंगलवार 5 अगस्त को दोपहर तीन बजे रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राज्यपाल, मंत्री, सांसद-विधायक समेत देशभर से आए नेताओं की उपस्थिति में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

    एक युग का अंत

    शिबू सोरेन सिर्फ नेता नहीं थे, वे आदिवासी चेतना, संघर्ष, आत्मसम्मान और राजनीतिक सशक्तिकरण के प्रतीक थे। झारखंड को उन्होंने सिर्फ राजनीतिक नक्शे पर नहीं रखा, बल्कि इसे इतिहास में सम्मान की जगह दिलाई। उनके निधन से झारखंड ही नहीं, देश ने एक जननायक खो दिया — और उनके साथ ही एक युग समाप्त हो गया।

     

  • झारखंड के जननायक शिबू सोरेन नहीं रहे: पूरे राज्य में शोक की लहर

    नेमरा गांव में मंगलवार को होगा राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार.

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन के निधन की खबर से झारखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। 81 वर्षीय शिबू सोरेन का निधन रविवार रात दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में हुआ। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे।

    सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली स्थित अस्पताल पहुंचकर शिबू सोरेन के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। उनका जीवन जनजातीय समाज के कल्याण के लिए समर्पित रहा। उनके परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं।”

    सरकारी सूत्रों के अनुसार, शिबू सोरेन का पार्थिव शरीर सोमवार शाम तक विशेष विमान से रांची लाया जाएगा। सबसे पहले उनके शव को बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से मोरहाबादी स्थित उनके आवास पर ले जाया जाएगा, जहां परिजन व करीबी उन्हें अंतिम बार श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे।

    मंगलवार 5 अगस्त को सुबह उनका पार्थिव शरीर झामुमो के केंद्रीय कार्यालय में आम जनों के दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद करीब 11 बजे उन्हें झारखंड विधानसभा भवन ले जाया जाएगा, जहां राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

    विधानसभा से उनका पार्थिव शरीर रामगढ़ जिले के उनके पैतृक गांव नेमरा ले जाया जाएगा, जहां मंगलवार दोपहर 3 बजे उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान और आदिवासी परंपराओं के अनुसार किया जाएगा। इस अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित झामुमो, कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों के नेता मौजूद रहेंगे। केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और सांसद-विधायक भी इस मौके पर उपस्थित रहेंगे।

    नेमरा गांव में शोक का माहौल है। गांव की गलियां सूनी हैं, और शिबू सोरेन का आवास खामोशी में डूबा हुआ है। घर के आंगन में लगे वो पौधे, जिन्हें गुरुजी ने खुद अपने हाथों से लगाया था, आज जैसे उन्हें ही निहार रहे हों। आवास के भीतर वो झूला, जिस पर कभी शिबू सोरेन अपने परिजनों संग बैठा करते थे, आज खाली है — मानो उनका इंतजार कर रहा हो।

    परिवार और ग्रामीणों की आंखें नम हैं, लेकिन गर्व भी है कि उनके गांव ने देश को एक ऐसा जननायक दिया जिसने झारखंड के अस्तित्व की लड़ाई लड़ी और आदिवासी अस्मिता को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया।

    शिबू सोरेन सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, वे झारखंड के संघर्षों, परंपराओं और सपनों का प्रतीक थे। उनके जाने से एक युग का अंत हो गया है।

  • रोटरी क्लब ऑफ गिरिडीह कपल सत्र 2025-26 के नए अध्यक्ष व सचिव बने

    Chandan Pandey.

    The News Post4u.

    गिरिडीह: रोटरी क्लब ऑफ गिरिडीह कपल क्लब ने 12वें स्थापना दिवस के अवसर पर नए सत्र 2025-26 के लिए अध्यक्ष हरिंदर सिंह मोंगिया और सचिव अनित खंडेलवाल के नाम की औपचारिक घोषणा की। समारोह में रोटरी परिवार के सदस्यों ने नए नेतृत्व का जोरदार स्वागत किया और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके आगामी कार्यों के प्रति आशा जताई।

    नेतृत्व परिवर्तन का गरिमामय आयोजन.

    कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व अध्यक्ष सिद्धार्थ गौरीसरिया द्वारा क्लब कॉलर को नए अध्यक्ष हरिंदर मोंगिया को सौंपने के साथ हुई। इस प्रतीकात्मक प्रक्रिया के जरिए क्लब ने नए नेतृत्व को जिम्मेदारियां सौंपीं। इस दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस क्षण को ऐतिहासिक बनाया।

    मुख्य और विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति.

    इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डीजीई (डिस्ट्रिक्ट गवर्नर इलेक्ट) रोटेरियन अनु नारंग और विशिष्ट अतिथि के रूप में एजी ज़ोन-8 रोटेरियन डॉ. आज़ाद समारोह में शामिल हुए। दोनों ने रोटरी के मूल उद्देश्यों और समाज सेवा की बदलती दिशा पर अपने विचार साझा किए।

    समाजसेवा को समर्पित विजन का अनावरण;.

    नवनिर्वाचित अध्यक्ष हरिंदर सिंह मोंगिया और सचिव अनित खंडेलवाल ने अपने संयुक्त संबोधन में कहा कि रोटरी क्लब केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है। उन्होंने वर्ष 2025-26 के लिए क्लब के विजन डॉक्यूमेंट का अनावरण करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

    क्या रहा खास.

    स्थापना दिवस के मौके पर न केवल नेतृत्व का परिवर्तन हुआ, बल्कि क्लब की अब तक की सामाजिक परियोजनाओं की भी जानकारी साझा की गई। साथ ही भविष्य में प्रस्तावित योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

    प्रमुख गणमान्य रहे मौजूद.

    कार्यक्रम में रोटरी क्लब परिवार के कई प्रमुख सदस्य और स्थानीय गणमान्य उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से गुणवंत सिंह मोंगिया, सतविंदर सिंह सलूजा, मुकेश जालान, चरणजीत सिंह, देवेंद्र सिंह, वैभव शाहबादी, डॉ. सुमन कुमार, अमित अग्रवाल, अभिषेक बगेड़िया, स्वाति बगेड़िया और विजय सिंह के नाम उल्लेखनीय हैं।
    रोटरी क्लब ऑफ गिरिडीह कपल के इस 12वें स्थापना समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि क्लब समाज की बेहतरी के लिए लगातार प्रतिबद्ध है। नए नेतृत्व से लोगों को आशा है कि वर्ष 2025-26 में क्लब सामाजिक सरोकारों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।