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रांची : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को झारखंड के चाईबासा कोर्ट से बुधवार को राहत मिल गयी , जब अदालत ने उन्हें मानहानि मामले में जमानत दे दी। मामला वर्ष 2018 का है, जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक बयान दिए थे। यह मामला अब कानूनी रूप से गवाही की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है।
सुबह चाईबासा पहुंचे राहुल गांधी.
बुधवार सुबह राहुल गांधी हेलीकॉप्टर से चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान पर उतरे। इसके बाद वह सीधे चाईबासा परिसदन पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग 45 मिनट तक रुके। करीब 11 बजे वे सिविल कोर्ट पहुंचे और एमपी-एमएलए विशेष अदालत की न्यायाधीश सुप्रिया रानी तिग्गा के समक्ष पेश हुए। उनके साथ उनके वकील प्रणव दरीपा भी मौजूद थे।
अदालत ने दी सशर्त जमानत.
राहुल गांधी की ओर से कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। उन्हें इस शर्त पर जमानत दी गई कि वह आगे की जांच में पूरा सहयोग करेंगे और जब भी अदालत बुलाएगी, पेश होंगे।
क्या है मामला ?
वर्ष 2018 में राहुल गांधी ने चाईबासा की एक जनसभा के दौरान कथित तौर पर भाजपा और उसके नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसे लेकर भाजपा नेता प्रताप कुमार कटियार ने चाईबासा एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
मामले में शिकायतकर्ता के वकील विनोद कुमार साहू के अनुसार, कोर्ट ने राहुल गांधी से स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या उन्होंने वह बयान दिया था, जिस पर विवाद हुआ है। इस पर राहुल गांधी ने साफ इनकार करते हुए कहा, “मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया।” वकील साहू ने कोर्ट में तर्क दिया कि राहुल गांधी का भाषण आज भी कांग्रेस की वेबसाइट पर उपलब्ध है और उसकी प्रति कोर्ट में साक्ष्य के रूप में जमा की जा चुकी है।
पहले टली थी पेशी, अब शुरू होगी गवाही.
बता दें कि राहुल गांधी को पहले 26 जून को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन उन्होंने विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए पेशी की तारीख 6 अगस्त तय की थी। उसी के तहत आज वे अदालत में पेश हुए।
राहुल गांधी को भले ही चाईबासा कोर्ट से आज जमानत मिल गई हो, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अब इस केस में गवाही और बहस का चरण शुरू होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी अपने बयान से इनकार पर कायम रहते हैं या विपक्ष इसे एक और राजनीतिक मुद्दे में बदल देता है।







