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  • क्या सीता सोरेन की JMM में वापसी होगी ? सियासी गलियारों में चर्चा तेज

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट………………….

    झारखंड की राजनीति में इन दिनों सीता सोरेन की घरवापसी की चर्चाएं जोरों पर हैं। भाजपा नेता और शिबू सोरेन की बड़ी पुत्र वधू  सीता सोरेन एक बार फिर अपने पुराने राजनीतिक घराने में लौटने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन इस राह में सबसे बड़ी चुनौती उनके ही परिवार से आ रही है।

    राजनीतिक भविष्य को लेकर बढ़ी बेचैनी।

    लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद सीता सोरेन की स्थिति डगमगाने लगी है। उन्हें लगने लगा है कि भाजपा में रहकर संथाल परगना में अपनी सियासी पकड़ मजबूत करना मुश्किल है, क्योंकि यहां जेएमएम का जनाधार काफी मजबूत है। यही वजह है कि अब  वे  वापसी का रास्ता तलाश रही हैं। इस फैसले के पीछे सिर्फ उनकी सियासत ही नहीं, बल्कि अपनी बेटियों का राजनीतिक भविष्य भी एक बड़ी वजह बताया जा रहा है।

    हेमंत और कल्पना की सहमति का इंतजार।

    हालांकि, जेएमएम में वापसी इतनी आसान नहीं दिख रही। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन इस पर सहमत नहीं दिख रहे हैं। दरअसल, भाजपा में शामिल होते वक्त सीता सोरेन ने हेमंत और कल्पना पर गंभीर आरोप लगाए थे। दिवंगत दुर्गा सोरेन को लेकर दिए गए उनके बयानों ने भी परिवार को झकझोर दिया था। यही कारण है कि हेमंत-कल्पना उन्हें वापस लेने के मूड में नहीं हैं।

    शिबू सोरेन चाहते हैं परिवार एक हो।

    जेएमएम के संरक्षक और दिग्गज नेता शिबू सोरेन हमेशा से अपने परिवार को एकजुट देखना चाहते हैं। 11 जनवरी को सीता सोरेन जब शिबू सोरेन को जन्मदिन की बधाई देने उनके घर पहुंचीं, तो इस चर्चा को और बल मिल गया कि वो जेएमएम में वापसी की कोशिशों में जुटी हैं।

    परिवार के भीतर ही सियासी संघर्ष!

    अब सवाल यह उठता है कि क्या हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पारिवारिक दबाव में झुकेंगे? परिवार के सदस्य और जेएमएम के कुछ नेता हेमंत और कल्पना को मनाने में लगे हैं, ताकि सीता की वापसी की राह आसान हो सके। लेकिन यह इतना आसान भी नहीं होगा, क्योंकि हेमंत और कल्पना को यह डर भी है कि पुराने विवाद कहीं दोबारा ना उठ खड़े हों।

    भाजपा से मोहभंग, जेएमएम में फायदा!

    भाजपा में रहते हुए सीता सोरेन को दो बड़े चुनावों में हार का सामना करना पड़ा—दुमका लोकसभा और जामताड़ा विधानसभा। इस हार ने उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया। ऐसे में, जब जेएमएम सत्ता में है, तो पार्टी में वापसी से उन्हें और उनके परिवार को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

    अब आगे क्या?

    अब सबकी निगाहें हेमंत और कल्पना सोरेन के फैसले पर टिकी हैं। अगर उन्होंने सीता सोरेन की वापसी को मंजूरी दे दी, तो झारखंड की सियासत में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। लेकिन अगर विरोध जारी रहा, तो सीता को एक नए राजनीतिक रास्ते की तलाश करनी होगी।

  • गरीबों के लिए बोलने वालों को जेल में डालने की राजनीति अब नहीं चलेगी-कल्पना

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………
    झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की प्रखर नेता और गांडेय की विधायक वसीएम हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने शनिवार को कोवाड़ में आयोजित एक भावुक संवाद कार्यक्रम के दौरान जनता को गहराई से छूने वाला भाषण दिया। उन्होंने 31 जनवरी 2024 की  तारीख का जिक्र करते हुए कहा कि यह दिन झारखंड की राजनीति के लिए अहम साबित हुआ था। ईडी द्वारा हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की याद दिलाते हुए उन्होंने जनता की दुआओं और समर्थन को हेमंत जी की रिहाई और उनके संघर्षों की वजह बताया।

    कल्पना सोरेन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आपने उस ताकत को सबक सिखाया, जो गरीबों की आवाज दबाने की कोशिश करती है। गरीबों के लिए बोलने वालों को जेल में डालने की राजनीति अब नहीं चलेगी। जनता ने दिखा दिया है कि उनका फैसला सबसे बड़ा है।”

    कार्यक्रम में कल्पना सोरेन ने झारखंड आंदोलन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संघर्षों को याद करते हुए कहा, “हेमंत सोरेन ने गरीबी, भूख और तड़प देखी है। उन्होंने झारखंड के हर व्यक्ति के लिए लड़ाई लड़ी है। लेकिन यह लड़ाई वह अकेले नहीं जीत सकते। उन्हें आपके साथ की जरूरत है।” उन्होंने जनता से अपील की कि वे झारखंड मुक्ति मोर्चा और हेमंत सोरेन को और मजबूती दें।

    सरकार की उपलब्धियां और भावनात्मक अपील

    विधायक कल्पना सोरेन ने झारखंड सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए बताया कि कैसे पेंशन बढ़ाने, बिजली बिल माफ करने और अन्य योजनाओं ने जनता को राहत पहुंचाई है। उन्होंने झारखंड आंदोलन से जुड़ी भावनाओं को छूते हुए कहा कि दिशोम गुरु का सपना है कि झारखंड न सिर्फ देश का अव्वल राज्य बने, बल्कि झामुमो का प्रभाव दूसरे राज्यों तक भी पहुंचे। कल्पना सोरेन के यहाँ  पहुँचने पर उनपर फूलों की वर्षा की गयी ।।

    मंत्री ने किया विकास योजनाओं की समीक्षा।

    कार्यक्रम से पहले झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने विकास योजनाओं की समीक्षा बैठक की। इस बैठक में नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, विधायक कल्पना सोरेन, उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और एसपी डॉ. बिमल कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में जल संकट, नल-जल योजनाओं, सोलर आधारित पानी टंकियों और शौचालय निर्माण जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की गई। मंत्री ने योजनाओं के समयबद्ध और पारदर्शी क्रियान्वयन पर जोर दिया।

    जनता से जुड़ाव और अपील।

    अपने भाषण के अंत में कल्पना सोरेन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को “रीढ़ की हड्डी” बताते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया और कहा, “आप इलाके की समस्याओं से मुझे अवगत कराते रहें। मैं हर संभव प्रयास करूंगी कि उन समस्याओं का समाधान हो।”

    झामुमो के इस कार्यक्रम ने एक बार फिर जनता को झारखंड के इतिहास, संघर्ष और विकास से जोड़ने का प्रयास किया। यह साफ है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा राज्य के हर व्यक्ति को साथ लेकर आगे बढ़ने की राह पर चल रही है। कल्पना सोरेन का यह भावुक और प्रेरणादायक संबोधन न सिर्फ राजनीतिक बल्कि सामाजिक संदेश भी देता है।इस कार्यक्रम बैरिस्टर फरदीन अहमद सहित पार्टी के सैकड़ो कार्यकर्ता और नेता उपस्थित थे ।

  • अब वक्त आ गया है कि हम झारखंडी होने पर गर्व करें-कल्पना सोरेन

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………

    गांडेय विधान सभा के बेंगाबाद मे  झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की विधायक और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने जनता से सीधा संवाद किया और उनका धन्यवाद  सह आभार ब्यक्त किया । उनकी बातें न सिर्फ दिल को छूने वाली थीं, बल्कि झारखंड की जनता को अपने हक और पहचान पर गर्व करने के लिए प्रेरित करने वाली भी।

    कल्पना सोरेन ने बेंगाबाद में आयोजित जनसभा में गांडेय की जनता को संबोधित करते हुए कहा, “अब वक्त आ गया है कि हम झारखंडी होने पर गर्व करें और पूरी दुनिया को यह बताएं कि हम भारत के हैं पर साथ ही झारखंडी भी है । अपने संबोधन में कल्पना सोरेन ने कहा, “दिशोम गुरु शिबू सोरेन का सपना है कि झारखंड सिर्फ देश में नहीं, बल्कि दुनिया में अपनी पहचान बनाए।” उन्होंने जनता से अपील की कि वे झारखंड मुक्ति मोर्चा का समर्थन करें और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मजबूत करें।

    महिलाओं ने कल्पना सोरेन उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया और बच्चों ने उनके साथ सेल्फी लेकर खुशी जताई। पूरे गांव में उत्साह का माहौल था। इस दौरान कल्पना सोरेन ने कहा, “यह आपकी सरकार है, अबुआ सरकार। झारखंड के हर व्यक्ति के मान-सम्मान और विकास को प्राथमिकता देना हमारी जिम्मेदारी है।”

    कल्पना सोरेन ने इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा किए गए कार्यों का जिक्र किया। उन्होंने माइयाँ सम्मान योजना  को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये करने और बिजली बिल माफ करने जैसे फैसलों को जनता के सामने रखा। उन्होंने झारखंड आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि इस राज्य के लिए कई लोगों ने संघर्ष किया है। 2019 में जब जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया, तब से वे जनता की सेवा के लिए समर्पित हैं।  कल्पना सोरेन ने झारखंड सरकार की “माइयाँ सम्मान योजना” का उल्लेख किया, जिसके तहत महिलाओं को हर महीने ₹2500 दिए जा रहे हैं। उन्होंने वादा किया कि आने वाले पांच वर्षों में गांडेय की तस्वीर बदलकर रहेगी।

    कार्यक्रम में राज्य के उच्च शिक्षा व नगर विकास व पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू , बैरिस्टर फरदीन अहमद और झामुमो के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

    इस कार्यक्रम के बाद कल्पना सोरेन रांची के लिए रवाना हो गईं, लेकिन उन्होंने गांडेय की जनता को भरोसा दिलाया कि वे लगातार अपने इलाके मे आती रहेंगी  और विकास कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाएंगी। उन्होने पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से भी आग्रह किया कि वे उनके विधान सभा क्षेत्र को भी अपनी प्राथमिकता मे रखें ।

     

  • गांडेय में विधायक कल्पना सोरेन का हुआ भव्य स्वागत, कल्पना ने जनता का जताया आभार

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………

    झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की नेत्री और गांडेय की विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में अपनी ऐतिहासिक जीत के बाद मंगलवर को पहली बार अपने विधानसभा क्षेत्र का दौरा किया। बरमसिया पंचायत में आयोजित “धन्यवाद सह आभार कार्यक्रम” में शामिल होकर उन्होंने क्षेत्रवासियों को उनके समर्थन के लिए दिल से धन्यवाद दिया।

    कार्यक्रम में राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन, विधायकप्रतिनिधि बैरिस्टर फरदीन अहमद और झामुमो के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे। इससे पहले, विधायक ने जिला उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा और एसपी डॉ. विमल कुमार सहित ज़िले और प्रखंड के सभी अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त बैठक की। बैठक में उन्होंने विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिया कि योजनाओं की रूपरेखा तैयार कर उन्हें तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि इसके लिए झारखंड सरकार आवश्यक बजट उपलब्ध कराएगी।

    भव्य स्वागत और जन समर्थन का उत्सव।
    गांडेय पहुंचने पर विधायक सोरेन का जोरदार स्वागत हुआ। महिलाओं ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया और बच्चों ने उनके साथ सेल्फी लेकर खुशी जताई। पूरे गांव में उत्साह का माहौल था। इस दौरान कल्पना सोरेन ने कहा, “यह आपकी सरकार है, अबुआ सरकार। झारखंड के हर व्यक्ति के मान-सम्मान और विकास को प्राथमिकता देना हमारी जिम्मेदारी है।”

    जन योजनाओं और महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं।
    विधायक सोरेन ने अपनी सरकार की महत्वाकांक्षी “माइयाँ सम्मान योजना” की चर्चा करते हुए बताया कि झारखंड सरकार महिलाओं के खातों में हर महीने ₹2500 दे रही है ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने वादा किया कि आने वाले पांच वर्षों में गांडेय की तकदीर और तस्वीर बदलने का जो सपना उन्होंने देखा है, उसे साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

    भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख और जनता से अपील।
    कल्पना सोरेन ने विकास कार्यों में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराया। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि गरीब और जरूरतमंद लोगों को दफ्तरों में अनावश्यक परेशान न किया जाए। उन्होंने कहा, “आपके दुख-दर्द को समझकर उन्हें राहत पहुंचाना ही प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।”

    जनता और प्रतिनिधियों का सम्मान।
    बैरिस्टर फरदीन अहमद की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “एक विधायक प्रतिनिधि के तौर पर फरदीन अहमद का कार्य सराहनीय है। वे लगातार क्षेत्र की समस्याओं को हम तक पहुंचाते हैं, और हम उनका समाधान करने का हर संभव प्रयास करते हैं।”

    कार्यक्रम के बाद विधायक सोरेन रांची के लिए रवाना हो गईं, लेकिन उन्होंने गांडेय की जनता को यह भरोसा दिलाया कि वह जल्द ही अन्य क्षेत्रों का भी दौरा करेंगी और क्षेत्र के विकास के लिए अपने प्रयासों को निरंतर आगे बढ़ाएंगी।

  • झारखंड : मंइयां सम्मान योजना का भव्य आगाज कल,तीन लाख महिलाएं होंगी सहभागी

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………………

    सोमवार को राजधानी रांची के नामकुम में झारखंड सरकार मंइयां सम्मान योजना के तहत ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित करेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे, जिसमें लाभुक महिलाओं के लिए मासिक सहायता राशि को बढ़ाकर ₹2500 कर दिया गया है। यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है।

    महिलाओं के खाते में हर महीने ₹2500।

    पहले इस योजना के तहत ₹1000 मासिक दिए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर ₹2500 कर दिया गया है। प्रायोगिक तौर पर दिसंबर माह में कुछ लाभार्थी महिलाओं के खाते में यह राशि ट्रांसफर की गई थी। सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा।

    भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी आकर्षण का केंद्र।

    कार्यक्रम में झारखंड की लोक संस्कृति का भी जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा। प्रसिद्ध नागपुरी गायक पवन राय, कुडुख गायक सुरेंद्र कुजूर और सादरी गायक इग्नेश कुमार अपनी सुरमयी प्रस्तुतियां देंगे। वहीं पारंपरिक पाइका और छऊ नृत्य जैसे लोकनृत्यों के जरिए झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत किया जाएगा।

    तीन लाख महिलाओं की भागीदारी, पुख्ता सुरक्षा इंतजाम।

    इस राज्यस्तरीय समारोह में करीब तीन लाख महिलाओं के शामिल होने की उम्मीद है। भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चार हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। रैप की चार कंपनियां और प्रमुख चौक-चौराहों पर क्यूआरटी टीम को आंसू गैस दस्ते के साथ तैयार रखा गया है।

    सुविधाओं और यातायात का रखा गया विशेष ध्यान।

    लाभार्थियों के लिए भोजन, पानी, और बैठने की पुख्ता व्यवस्था की गई है। वाहनों को व्यवस्थित पार्किंग स्थल पर खड़ा कराने के निर्देश दिए गए हैं। यातायात सुचारू रखने के लिए शहर के कुछ मार्गों को वन-वे किया गया है और भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

    प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में।

    रविवार को रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने आयोजन स्थल का निरीक्षण किया और पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को समय पर ड्यूटी संभालने के निर्देश दिए। मौके पर डीडीसी दिनेश यादव, रांची एसडीओ उत्कर्ष कुमार, और ग्रामीण एसपी सुमित अग्रवाल भी मौजूद थे।

    झारखंड की संस्कृति का संदेश।

    यह समारोह झारखंड की परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को एक नए आयाम तक पहुंचाने का प्रयास है। मंइयां सम्मान योजना के जरिए सरकार ने महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का जो अवसर दिया है, वह झारखंड के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है।

  • नए साल के जश्न के बीच झारखंड का खरसावां गोलीकांड का स्मरण,सीएम ने दी श्रद्धांजलि

    परवेज़ आलम की खास और भावपूर्ण रिपोर्ट……..

    एक तरफ़ जहां पूरी दुनिया 1 जनवरी को नए साल के आगमन का उत्सव मना रही है, झारखंड का सरायकेला-खरसावां गांव हर साल इस दिन को शहीद दिवस के रूप में याद करता है। यह वह दिन है जब इस भूमि ने अपने वीर सपूतों और बेटियों की कुर्बानियां देखीं।

    आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ खरसावां स्थित शहीद स्थल पहुंचे। पारंपरिक तरीकों से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने झारखंड के महान वीरों के संघर्ष को नमन किया। यह परंपरा पिछले मुख्यमंत्रियों – बाबूलाल मरांडी और रघुवर दास – के समय से चली आ रही है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा,
    “आज नए साल के पहले दिन, हम अपने उन वीर पूर्वजों की शहादत से प्रेरणा लेते हैं जिन्होंने जल, जंगल, और ज़मीन की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह वीर भूमि “झारखंड “असंख्य बलिदानों से सिंचित है। हर साल हम खरसावां के शहीदों की स्मृति में यहां एकत्र होते हैं, उनकी अमर गाथा को याद करते हैं।”

    यहाँ आने से पहले हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से राजभवन मे जाकर मिले और उन्हें नए साल की बधाई दी ।

    क्या है खरसावां की कहानी?

    यह दर्दनाक घटना 1 जनवरी 1948 को हुई, जब खरसावां के हाट बाजार में सैकड़ों आदिवासियों को गोलियों का सामना करना पड़ा। उस दिन, जो गुरुवार था, आदिवासी ग्रामीण अपने पारंपरिक बाजार में पहुंचे थे। लेकिन वहां उनकी ज़िंदगी खून से लथपथ खरसावां की मिट्टी पर सिमट गई।

    इस जनसंहार की जड़ें आज़ाद भारत के शुरुआती दौर से जुड़ी हैं। 1947 के बाद राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही थी। 14-15 दिसंबर को अनौपचारिक रूप से खरसावां और सरायकेला रियासतों का विलय ओडिशा राज्य में कर दिया गया। इसका विरोध आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा ने किया। उन्होंने 1 जनवरी 1948 को एक विशाल जनसभा का आह्वान किया, लेकिन किसी कारणवश वे खुद वहां नहीं पहुंच सके। सभा में हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए। इसी दौरान पुलिस और भीड़ के बीच संघर्ष हुआ और अचानक गोलियां चलने लगीं। इतिहासकारों का कहना है कि सैकड़ों लोग मारे गए, लेकिन मरने वालों की सही संख्या आज तक किसी को नहीं पता।

    शहीद दिवस और गहरे दफन राज। 

    हर साल 1 जनवरी को खरसावां में शहीदों की याद में मेला लगता है। इसमें झारखंड और ओडिशा के आदिवासी समुदाय बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं। यह केवल शोक का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और एकता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री और अन्य नेता इस आयोजन को अपनी उपस्थिति से सम्मान देते हैं।

    आजाद भारत का सबसे बड़ा गोलीकांड।

    खरसावां गोलीकांड भारत का सबसे बड़ा आदिवासी जनसंहार माना जाता है। इसने झारखंड की राजनीति और समाज पर अमिट छाप छोड़ी है। यह दिन सिर्फ़ एक इतिहास नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अदम्य साहस और बलिदान का प्रतीक है।

    आज, जब पूरा देश नए साल के उल्लास में डूबा है, झारखंड का यह छोटा सा गांव उस जख्म को याद कर रहा है जिसने यहां की मिट्टी को रक्त से लाल कर दिया। खरसावां के शहीदों को शत-शत नमन।

     

  • झारखंड 2024: सीएम को हुई जेल और भाजपा हुई फ़ेल!

    परवेज़ आलम की खास रपट ……………..

    2024  झारखंड के लिए केवल एक चुनावी साल नहीं था, बल्कि सियासत का ऐसा रंगमंच था, जहां हर दिन एक नया ट्विस्ट देखने को मिला। जनवरी से शुरू हुई उथल-पुथल नवंबर में जाकर शांत हुई, लेकिन इस दौरान झारखंड ने इतिहास भी बनाया और राजनीति के सबसे दिलचस्प पल भी देखे।

    हेमंत सोरेनकी गिरफ्तारी ।

    31 जनवरी 2024, झारखंड की राजनीति और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में दर्ज हो गया। पहली बार किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को केंद्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया। ईडी के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर सात घंटे पूछताछ की और फिर रात में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले 29 जनवरी को ईडी ने दिल्ली में शांति निकेतन स्थित उनके आवास, झारखंड भवन और उनके पिता शिबू सोरेन के घर पर छापेमारी की थी। लेकिन हेमंत सोरेन को ढूंढ नहीं पाई । 30 जनवरी को वे अचानक इंडिया गठबंधन के विधायकों के साथ रांची में बैठक करते दिखे।

    चंपाई सोरेन का मुख्यमंत्री बनना।

    31 जनवरी की रात हेमंत सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा। उनकी गिरफ्तारी के बाद गठबंधन ने चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री चुना। पांच महीने तक राज्य की कमान चंपाई सोरेन के हाथ में रही

    5 महीने बाद जेल रिहाई और हेमंत की वापसी।

    28 जून 2024 को झारखंड हाई कोर्ट से हेमंत सोरेन को जमानत मिली। जेल से बाहर आते ही उन्होंने अपने नए लुक से सबको चौंका दिया। लंबे बाल और दाढ़ी में वे अपने पिता शिबू सोरेन की झलक दे रहे थे। उनकी रिहाई के साथ ही गठबंधन में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गईं। और आखिरकार, 4 जुलाई को हेमंत सोरेन ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली ।

    चुनाव और गठबंधन की जीत।

    2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी और सीपीआई-एमएल के साथ मिलकर गठबंधन ने 81 में से 56 सीटों पर जीत दर्ज की। 28 नवंबर को हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

    बीजेपी के लिए निराशाजनक रहा साल।

    2024 बीजेपी की हार का साल भी साबित हुआ। लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को झटका लगा, और विधानसभा चुनाव में उनकी हार ने झारखंड में उनकी स्थिति और कमजोर कर दी।

    झारखंड की राजनीति में 2024 का साल दिखाता है कि लोकतंत्र में एक दिन भी कितना निर्णायक हो सकता है। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी से लेकर उनकी वापसी तक, सत्ता के हर पहलू में सस्पेंस, ड्रामा और नई उम्मीदें देखने को मिलीं।

    झारखंड की राजनीति को समझने के लिए इस साल को हमेशा याद किया जाएगा।
    तो दोस्तों, कैसी लगी ये कहानी ? कमेंट में अपनी राय जरूर दीजिएगा।

  • झारखंड : PESA कानून लागू करने की कवायद तेज़, क्या है PESA कानून !

    परवेज़ आलम  की खास रिपोर्ट………….

    झारखंड में पेसा कानून (PESA Act) को लेकर बड़ी हलचल मची है। खबरें आ रही हैं कि पेसा नियमावली अब कैबिनेट में भेजे जाने की तैयारी में है। राज्य के महाधिवक्ता से सलाह लेकर इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

    क्या कहती हैं निदेशक निशा उरांव?
    निशा उरांव का कहना है कि, “2017 में पेसा कानून पर उच्च और सर्वोच्च न्यायालयों ने सरकार के पक्ष में फैसला सुना दिया था। इसके बाद इसे लागू करने की कवायद शुरू हुई, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर जनता को भटकाने का काम किया। इसी वजह से यह प्रक्रिया अटक गई।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत ने पंचायती राज अधिनियम को पेसा क्षेत्र के अनुकूल माना है और इसे 1996 के पेसा कानून के तहत सही ठहराया है। अब राज्य अधिनियम के तहत पेसा नियमावली का प्रस्ताव तैयार है। उन्होंने बताया कि देश के 10 राज्यों ने भी यही प्रक्रिया अपनाई है, जो कानूनी रूप से सही मानी जाती है।

    हाईकोर्ट का अल्टीमेटम: 2 महीने में लागू करें कानून!
    हाईकोर्ट ने पेसा कानून को जल्द लागू करने का आदेश दिया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण राय की बेंच ने 29 जुलाई को ही यह फैसला सुनाया था। लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया, जिसके बाद राज्य सरकार को फिर से अल्टीमेटम दिया गया है।

    क्या है विवाद?
    पेसा कानून को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं दायर की गई हैं। हालांकि अदालत ने साफ कहा है कि यह कानून सही प्रक्रिया के तहत है और इसे जल्द लागू करना अनिवार्य है।

    पेसा कानून का क्या मतलब है?
    पेसा यानी पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996। इसका मकसद आदिवासी इलाकों में स्वशासन को बढ़ावा देना और संसाधनों पर उनकी अधिकारिता सुनिश्चित करना है।

    कब तक लागू होगा?
    सूत्रों की मानें तो अगले दो महीने के भीतर पेसा कानून झारखंड में लागू हो सकता है। लेकिन क्या राज्य सरकार समय पर इस आदेश का पालन कर पाएगी या फिर एक बार फिर प्रक्रिया फाइलों में अटक जाएगी?

  • 2024 :कल्पना सोरेन की सक्रिय राजनीति में हुई धमाकेदार एंट्री हमेशा याद रखा जाएगा

    परवेज़ आलम की विश्लेषणात्मक  रिपोर्ट …………..

    झारखंड की राजनीति में वर्ष 2024 ने एक नया अध्याय लिखा। बदलाव की ऐसी बयार चली जिसने सत्ता समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया। लोकसभा चुनाव में बीजेपी को झटका लगा, लेकिन असली कहानी विधानसभा चुनाव के दौरान लिखी गई। इंडिया गठबंधन की ओर से कल्पना सोरेन ने मोर्चा संभाला और इतिहास रच दिया।

    हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और कल्पना का उदय. 

    झारखंड की राजनीति में एक ऐसा मोड़ आया जब 31 जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। उस रात की कहानी कल्पना सोरेन बार-बार बताती हैं—”सोचा था, बस पूछताछ होगी, लेकिन सुबह की पहली किरण के साथ पूरा परिदृश्य बदल चुका था।”

    हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद जेएमएम के सामने सवाल खड़ा था—कौन नेतृत्व करेगा? गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कल्पना सोरेन से कहा, “भाभी, भैया नहीं हैं, अब आपको ही जिम्मेदारी उठानी होगी।”

    राजनीति में कदम रखने की दास्तान। 


    कल्पना सोरेन, जो अब तक सामाजिक कार्यों और परिवार तक सीमित थीं, अचानक राजनीति के केंद्र में आ गईं। 4 मार्च 2024 को गिरिडीह में जेएमएम के स्थापना दिवस पर उन्होंने राजनीति में प्रवेश का ऐलान किया। पहली ही रैली में उनकी आंखों से आंसू छलके, लेकिन हाथ में झंडा थामे उन्होंने पार्टी को भरोसा दिलाया—“हम लड़ेगें और जीतेंगे।”

    लोकसभा चुनाव: कल्पना का असर। 

    हेमंत सोरेन की गैरमौजूदगी में कल्पना सोरेन ने इंडिया गठबंधन की कमान संभाली। धुर्वा के प्रभात तारा मैदान में उनकी रैली ने यह साफ कर दिया कि झारखंड की जनता उनके साथ है। नतीजों में इंडिया गठबंधन ने 14 में से 4 सीटें जीतीं। ये प्रदर्शन 2019 के मुकाबले दोगुना था और इसका श्रेय कल्पना की मेहनत को गया।

    गांडेय उपचुनाव: पहली जीत और बढ़ता प्रभाव। 

    लोकसभा चुनाव के साथ हुए गांडेय विधानसभा उपचुनाव में कल्पना सोरेन ने बाजी मारी। 4 जून 2024 को आए नतीजों में उन्होंने बीजेपी के दिलीप वर्मा को 27,149 वोटों से हराया। ये जीत न सिर्फ एक चुनावी आंकड़ा थी, बल्कि झारखंड में उनकी बढ़ती सियासी ताकत का सबूत भी थी।

    विधानसभा चुनाव: मैदान पर कल्पना और हेमंत की जोड़ी। 

    झारखंड विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन की रिहाई के बावजूद कल्पना सोरेन गठबंधन की स्टार प्रचारक बनीं रहीं। उन्होंने 100 से अधिक सभाएं कीं और हर सभा में जनता से सीधा संवाद किया। उनकी नेतृत्व क्षमता और भावुकता ने जनता को अपने साथ जोड़ लिया।

    झारखंड की “नई शक्ति”

    कल्पना सोरेन के सियासी सफर की शुरुआत भले ही अप्रत्याशित परिस्थितियों में हुई हो, लेकिन उन्होंने साबित कर दिया कि झारखंड में बदलाव की बागडोर अब उनके हाथ में है।

    2006 से 2024 तक: कल्पना का सफर।

    ओडिशा के मयूरभंज की रहने वाली कल्पना, झारखंड के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार की बहू बनकर आईं थीं। एक आम महिला से एक सशक्त नेता तक का उनका सफर, झारखंड की जनता के लिए प्रेरणा है।

    तो सवाल यह है कि क्या झारखंड में यह नई नारी शक्ति राज्य को एक नई दिशा दे पाएगी? जवाब वक्त देगा, लेकिन एक बात तय है—कल्पना सोरेन की कहानी झारखंड की राजनीति का वह मोड़ है, जो शायद हमेशा याद रखा जाएगा।

  • मंत्री सोनू ने किया मृतक दामोदर के परिवार को आर्थिक मदद

    गिरिडीह : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चिलगा गांव में बीते दिनों हुई चाकूबाजी की घटना में मारे गए दामोदर यादव के परिवार को नगर विकास और पर्यटन मंत्री सुदिब्य कुमार सोनू ने तीन लाख रुपये की आर्थिक मदद दी गई। मंत्री सोनू ने पीड़ित परिवार से मिलकर पहुंचे और उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया । इसके अलावा मंत्री के निर्देश पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने ₹50,000 और सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) की ओर से ₹2.5 लाख की भी मदद पीड़ित परिवार को दी गयी । मंत्री ने अम्बेडकर आवास योजना के तहत घर, बेटी की शिक्षा का खर्च और बेटे को नौकरी दिलाने का आश्वासन भी दिया।

    बता दें कि अपराधियों द्वारा चाकूबाजी की घटना में घायल दामोदर यादव का इलाज के दौरान बीते दिनों निधन हो गया था। यह घटना पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का कारण बनी थी और विरोधी दल इसपर राजनीति भी शुरू कर दिया था पर मंत्री और स्थानीय विधायक सोनू की इस पहल ने विरोधियों की मंशा को फुस्स कर दिया ।
    मंत्री जी के दौरे के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग मौजूद थे । परिवार ने सरकारी मदद और मंत्री के आश्वासनों पर आभार व्यक्त किया। वहीं, ग्रामीणों ने भी मंत्री को धन्यवाद देते हुए अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
    यह पहल पीड़ित परिवार को राहत देने के साथ ही सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाती है।