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  • राहुल गांधी हुए चाईबासा कोर्ट में पेश, मानहानि मामले में मिली जमानत

    The News Post4u.

    रांची :   कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष  और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को झारखंड के चाईबासा कोर्ट से बुधवार को राहत मिल गयी , जब अदालत ने उन्हें मानहानि मामले में जमानत दे दी। मामला वर्ष 2018 का है, जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक बयान दिए थे। यह मामला अब कानूनी रूप से गवाही की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है।

    सुबह चाईबासा पहुंचे राहुल गांधी.

    बुधवार सुबह राहुल गांधी हेलीकॉप्टर से चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान पर उतरे। इसके बाद वह सीधे चाईबासा परिसदन पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग 45 मिनट तक रुके। करीब 11 बजे वे सिविल कोर्ट पहुंचे और एमपी-एमएलए विशेष अदालत की न्यायाधीश सुप्रिया रानी तिग्गा के समक्ष पेश हुए। उनके साथ उनके वकील प्रणव दरीपा भी मौजूद थे।

    अदालत ने दी सशर्त जमानत.

    राहुल गांधी की ओर से कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। उन्हें इस शर्त पर जमानत दी गई कि वह आगे की जांच में पूरा सहयोग करेंगे और जब भी अदालत बुलाएगी, पेश होंगे।

     क्या है मामला ?

    वर्ष 2018 में राहुल गांधी ने चाईबासा की एक जनसभा के दौरान कथित तौर पर भाजपा और उसके नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसे लेकर भाजपा नेता प्रताप कुमार कटियार ने चाईबासा एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

    मामले में शिकायतकर्ता के वकील विनोद कुमार साहू के अनुसार, कोर्ट ने राहुल गांधी से स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या उन्होंने वह बयान दिया था, जिस पर विवाद हुआ है। इस पर राहुल गांधी ने साफ इनकार करते हुए कहा, “मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया।” वकील साहू ने कोर्ट में तर्क दिया कि राहुल गांधी का भाषण आज भी कांग्रेस की वेबसाइट पर उपलब्ध है और उसकी प्रति कोर्ट में साक्ष्य के रूप में जमा की जा चुकी है।

    पहले टली थी पेशी, अब शुरू होगी गवाही.

    बता दें कि राहुल गांधी को पहले 26 जून को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन उन्होंने विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए पेशी की तारीख 6 अगस्त तय की थी। उसी के तहत आज वे अदालत में पेश हुए।

    राहुल गांधी को भले ही चाईबासा कोर्ट से आज जमानत मिल गई हो, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अब इस केस में गवाही और बहस का चरण शुरू होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी अपने बयान से इनकार पर कायम रहते हैं या विपक्ष इसे एक और राजनीतिक मुद्दे में बदल देता है।

     

  • शिबू सोरेन पंचतत्व में विलीन: नेमरा गांव में लाखों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    रामगढ़, झारखंड: झारखंड आंदोलन के जननायक, पूर्व मुख्यमंत्री ‘दिशोम गुरु’  शिबू सोरेन को उनके पैतृक गांव रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित नेमरा में पूरे राजकीय सम्मान के साथ मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। झमाझम बारिश और गम के माहौल के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इसी के साथ झारखंड की राजनीति का एक युग समाप्त हो गया।

    अंतिम यात्रा: पहाड़ों की गोद में उमड़ा जनसैलाब.

    नेमरा गांव, जो पहाड़ों की तलहटी में बसा एक शांत और साधारण गांव है, मंगलवार को लाखों लोगों की भीड़ से भर गया। आम जनता से लेकर झारखंड आंदोलन के पुराने सिपाही, झामुमो कार्यकर्ता, राजनेता, नौकरशाह,पत्रकार और परिजन—हर कोई ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम बार देखने और श्रद्धांजलि देने पहुंचा।

    गांव की गलियों में नारे गूंजते रहे—“शिबू सोरेन अमर रहें”, “जब तक सूरज चांद रहेगा, गुरुजी तेरा नाम रहेगा”।

    बारिश की फुहारों के बीच शाम 6:45 बजे उनका अग्नि संस्कार किया गया। लोग छातों के नीचे भींगते हुए अंतिम विदाई में शामिल होते रहे। मानो आसमान भी इस विदाई में रो रहा हो।

    “गुरुजी को अंतिम जोहार”, “विनम्र श्रद्धांजलि”—ऐसे शब्दों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स रांची से रामगढ़ तक पूरे रास्ते भर लोगों की आंखें नम करते रहे।

    विधानसभा से उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई और फिर पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव नेमरा लाया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनके भाई बसंत सोरेन, और परिवार के अन्य सदस्य पार्थिव शरीर के साथ यात्रा में शामिल रहे।

    सादगी में श्रद्धा: संथाली परंपरा से हुआ अंतिम संस्कार.

    नेमरा गांव पहुंचने के बाद शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार संथाली रीति-रिवाज और परंपराओं के अनुसार किया गया। वहीं, उनका दाह संस्कार उसी बड़का नाला श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पूर्वजों की भी अंत्येष्टि होती रही है।

    मुखाग्नि देने की जिम्मेदारी पुत्र हेमंत सोरेन ने निभाई। जैसे ही चिता को अग्नि दी गई, गांव के हर कोने से नारे उठे—“शिबू सोरेन अमर रहें”। बारिश की बूंदें उस वक्त भी थमी नहीं थीं, लेकिन लोगों की श्रद्धा के आगे मौसम भी झुक गया।

    राजकीय सम्मान और राष्ट्रीय नेतृत्व की उपस्थिति.

    झारखंड सरकार ने शिबू सोरेन के निधन पर 6 अगस्त तक तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की। साथ ही, 4 और 5 अगस्त को सभी सरकारी दफ्तर बंद रखे गए।

    राजकीय सम्मान के तहत उनकी चिता के पास झंडा फहराया गया, गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, और शोक ध्वनि के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

    इस दौरान कई राष्ट्रीय नेता नेमरा पहुंचे, जिनमें प्रमुख रूप से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोक सभा मे विपक्ष के नेता राहुल गांधी,तेजस्वी यादव (राजद),संजय सिंह (आप), शताब्दी रॉय (टीएमसी), पप्पू यादव ( सांसद पूर्णिया )

    भारी बारिश के कारण कई नेता हेलिकॉप्टर से नहीं आ सके, और उन्होंने सड़क मार्ग से ही नेमरा गांव पहुंचकर ‘दिशोम गुरु’ को अंतिम सलामी दी।

    प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था.

    गुरुजी की अंतिम यात्रा के दौरान मुख्य सचिव अलका तिवारी, डीजीपी अनुराग गुप्ता, प्रधान सचिव अविनाश कुमार, तथा कई जिलों के डीसी और एसपी सहित उच्चस्तरीय प्रशासनिक अमला मौजूद था। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही, लेकिन सादगी और अनुशासन के साथ श्रद्धा का वातावरण भी बना रहा।

    आमजन का जुड़ाव.

    गांव की गलियों में, पहाड़ों के बीच, बारिश से भीगते छतरियों के नीचे खड़े आम लोग—हर आंख नम थी। हर दिल गमगीन। लोगों ने बताया—“गुरुजी सिर्फ नेता नहीं थे, वो आंदोलन थे, वो आवाज थे हमारे हक की”। दुकानें, बाजार, स्कूल—हर जगह मातम पसरा रहा। कुछ विद्यालयों में दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की गईं।

    शिबू सोरेन का जाना, सिर्फ एक नेता का जाना नहीं है। यह उस संघर्ष का अंत है, जिसने झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाया।

    उनकी अंतिम यात्रा सिर्फ एक शारीरिक विदाई नहीं थी, बल्कि झारखंड के इतिहास में लिखी गई एक अविस्मरणीय घटना थी। उनका जीवन संघर्ष, आंदोलन और आदिवासी अस्मिता की मिसाल था।

    गुरुजी चले गए, लेकिन उनकी विचारधारा, उनकी आवाज, उनकी पहचान—हमेशा जीवित रहेगी।
    “दिशोम गुरु अमर रहें!”

  • झारखंड : शिबू सोरेन की हालत गंभीर, वेंटिलेटर पर रखा गया

    लंबा राजनीतिक सफर, स्वास्थ्य पर संकट.

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    रांची: झारखंड की राजनीति में चार दशकों से अधिक समय तक अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की हालत इस समय बेहद नाजुक बताई जा रही है। उन्हें दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। जानकारी के मुताबिक, उन्हें जून के अंतिम सप्ताह में गंभीर किडनी संबंधी परेशानियों के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से अब तक उनका इलाज जारी है, लेकिन उनकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।

    हेमंत सोरेन ने दी थी जानकारी.

    शिबू सोरेन के बेटे और वर्तमान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 24 जून को अस्पताल पहुंचकर पिता के स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। हेमंत ने मीडिया से कहा था कि “पिता जी की तबीयत को लेकर चिकित्सकीय जांच चल रही है। स्थिति अभी स्थिर है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लग सकता है।”

    एक महीना से ज्यादा समय से अस्पताल में भर्ती.

    सूत्रों के मुताबिक, 81 वर्षीय शिबू सोरेन को लगभग पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती रखा गया है, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी देखभाल कर रही है। हालांकि डॉक्टरों ने उनकी रिकवरी को लेकर अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है।

    स्वास्थ्य के मोर्चे पर संकट के साथ-साथ पार्टी में चिंता.

    झामुमो के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है। पार्टी के वरिष्ठ नेता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई जा रही है। दूसरी ओर, राज्य के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन को भी ब्रेन स्ट्रोक के चलते दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों शीर्ष नेताओं की सेहत पार्टी के लिए एक बड़ा धक्का है।

    शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन: संघर्ष, सत्ता और सजा.

    शिबू सोरेन ने 18 वर्ष की उम्र में “संथाल नवयुवक संघ” की स्थापना की थी। इसके बाद 1972 में उन्होंने ए.के. रॉय और बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का गठन किया और इसके महासचिव बने। आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई में वह एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

    संसद और मंत्रालय

    • 1980 में पहली बार दुमका से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
    • 1989, 1991, 1996 में भी लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।
    • 2002 में राज्यसभा पहुंचे, लेकिन दुमका सीट से उपचुनाव जीतने पर इस्तीफा दे दिया।
    • 2004 में केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में कोयला मंत्री बने।

    विवादों और कानूनी मामलों में फंसे

    2004 में ही चिरुडीह हत्याकांड (1975 की घटना) में गिरफ्तारी वारंट जारी होने पर मंत्री पद छोड़ना पड़ा। गिरफ्तारी के बाद जेल गए और बाद में जमानत मिली।
    2006 में अपने निजी सचिव शशिनाथ झा के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी पाए गए। CBI के आरोपपत्र के अनुसार, झा झामुमो और कांग्रेस के बीच हुए कथित सौदे की जानकारी रखता था।

    • 5 दिसंबर 2006 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
    • हालांकि बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया।

    जानलेवा हमले से बाल-बाल बचे.

    2007 में जब उन्हें दुमका जेल ले जाया जा रहा था, तब उनके काफिले पर बम से हमला किया गया। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए थे।

    शिबू सोरेन न केवल झारखंड की राजनीति का एक स्तंभ रहे हैं, बल्कि उन्होंने आदिवासी समाज के हक और अस्तित्व की लड़ाई को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। आज जब उनकी तबीयत नाजुक है, तो सिर्फ उनका परिवार या पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरा राज्य उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है।

  • बजट सत्र: दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन कल तक के लिए स्थगित

     

    झारखंड विधानसभा में दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि, शोक प्रस्ताव पारित

    झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान हाल ही में दिवंगत हुई कई प्रतिष्ठित हस्तियों और आम नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक प्रस्ताव पारित किया गया। इस दौरान सदन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव को स्वीकार किया और दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शोक प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि राज्य और देश ने कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों को खो दिया है, जिनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनके दुख में सहभागी है। विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस क्षति को अपूरणीय बताया और कहा कि हम सभी उनकी यादों को संजोकर आगे बढ़ेंगे।

    इस अवसर पर विभिन्न दलों के नेताओं ने भी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया।

    इन हस्तियों को किया गया याद

    विधानसभा में श्रद्धांजलि अर्पित की गई प्रमुख हस्तियों में देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दिग्गज उद्योगपति रतन नवल टाटा, वामपंथी नेता सीताराम येचुरी, वरिष्ठ राजनेता ओम प्रकाश चौटाला, एस.एम. कृष्णा, कुंवर नटवर सिंह, सधनु भगत, बच्चा सिंह, छत्रुराम महतो, बैरागी उरांव, गुलाब सिंह मुंडा, मनोरमा सिंह, डॉ. कृष्णानंद झा, विश्वनाथ सिंह, गणेश पासवान, प्रीतिश नंदी, जनरल पदमनाभन, शारदा सिन्हा, उस्ताद जाकिर हुसैन और श्याम बेनेगल आदि शामिल हैं।

    पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का 26 दिसंबर 2024 को निधन हो गया। वर्ष 2004 से 2014 तक देश की बागडोर संभालने वाले सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्हें पद्म विभूषण, एशिया मनी अवॉर्ड और यूरो मनी अवॉर्ड जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया था।

    देश के दिग्गज उद्योगपति और टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन नवल टाटा का 9 अक्टूबर 2024 को निधन हुआ। वे भारतीय उद्योग जगत की अग्रणी शख्सियतों में से एक थे और उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण सहित कई सम्मान प्राप्त हुए थे। उनका निधन औद्योगिक क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।

    वामपंथी आंदोलन के प्रमुख नेता सीताराम येचुरी का 12 सितंबर 2024 को निधन हो गया। वे 2005 से 2017 तक राज्यसभा सदस्य रहे और भारतीय राजनीति में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।

    शोक प्रस्ताव पारित करने के बाद सदन की कार्यवाही 25 फरवरी को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

  • झारखंड की सियासत में गरमाहट: मरांडी ने पूजा सिंघल प्रकरण पर सरकार को घेरा

     

    झारखंड की राजनीति में इन दिनों आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस बार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार को आईएएस पूजा सिंघल प्रकरण पर आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    बाबूलाल मरांडी ने लिखा, “झारखंड में एक अजीबोगरीब खेल चल रहा है। यहां प्रशासनिक व्यवस्था ‘रिवॉर्ड और पनिशमेंट’ की अनोखी नीति पर काम कर रही है। भ्रष्ट अधिकारियों को इनाम दिए जा रहे हैं और ईमानदार अधिकारियों को दंडित किया जा रहा है।”

    जमानत पर बाहर अधिकारी को विभाग की जिम्मेदारी?
    मरांडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में जेल से जमानत पर बाहर आई आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को राज्य के एक प्रमुख विभाग की जिम्मेदारी देने की तैयारी कर ली है। उन्होंने कहा, “यह निर्णय न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राज्य में ईमानदारी और पारदर्शिता का क्या महत्व रह गया है।”

    सियासत में उबाल|
    बाबूलाल मरांडी के इस बयान के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल मच गई है। उनके आरोपों ने राज्य सरकार के प्रशासनिक फैसलों पर नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर भाजपा इसे राज्य सरकार की नाकामी बता रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार समर्थकों का कहना है कि यह सिर्फ सियासी हमला है।

    जनता के मन में सवाल|
    इस प्रकरण ने जनता के बीच भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे अधिकारियों को जिम्मेदारी देना सही है? क्या इससे ईमानदार अधिकारियों का मनोबल गिरता नहीं?

    झारखंड की सियासत में यह मुद्दा फिलहाल गर्म है और आने वाले दिनों में इसका असर राज्य की राजनीति पर साफ दिखाई देगा।

  • जयराम महतो, हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बनेंगे !

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट………

    डुमरी विधायक जयराम महतो, हेमंत सोरेन की सरकार में मंत्री बनेंगे ! चौक गए न  । हेमंत सोरेन सरकार में जयराम महतो का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसा क्यों? क्योंकि उनकी पार्टी जेएलकेएम ने झारखंड चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन किया है। 15 से ज़्यादा सीटों पर एनडीए का खेल बिगाड़ने वाली इस पार्टी के प्रदर्शन को हर राजनीतिक दल ने सराहा है। अब सवाल यह है कि हेमंत सोरेन इस फैसले के पीछे क्या रणनीति रख रहे हैं?
    दरअसल, जयराम महतो 15% कुर्मी वोटों के बड़े नेता बनकर उभरे हैं। अगर वह सरकार में शामिल होते हैं, तो इसका फायदा इंडिया गठबंधन को कुर्मी समुदाय के वोटों के रूप में मिल सकता है।
    चलिए अब झारखंड मंत्रिमंडल की संभावित तस्वीर पर बात करते हैं।
    आपको बता दें, झारखंड विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं और मुख्यमंत्री समेत 12 मंत्री बनाए जा सकते हैं। झामुमो के खाते से 5 से 6 मंत्री, कांग्रेस के 3 से  4 मंत्री, और राजद – माले से 1- 1 मंत्री बनाए जाने की संभावना है।
    झामुमो से किनके नाम  हैं?
    दीपक बिरुवा, हफीजुल हसन, और रामदास सोरेन का नाम चल रहा है। महिला कोटा से कल्पना सोरेन को मंत्री बनाने का दबाव झामुमो पर है। अभी पार्टी के अंदर इस बात का मंथन चल रहा है की कल्पना मुर्मू सोरेन को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए या नहीं। ज्यादातर विधायकों का दबाव है की कल्पना सोरेन को मंत्रिमंडल में स्थान मिलना चाहिए क्योंकि उनके जबरदस्त परफॉर्मेंस की वजह से ही विधायक बड़ी संख्या में जीत कर आए हैं तो अब सवाल यह है की कल्पना मुर्मू सोरेन मंत्रिमंडल में शामिल होती है या नहीं अभी इंतजार करना होगा और अगर कल्पना मुर्मू सोरेन मंत्री नहीं बनती है तो महिला कोटे से जामा से जीत कर आई लुईस मरांडी और इचागढ़ से जीती सविता महतो में से किसी एक को मंत्री बनाया जा सकता है

    इधर कांग्रेस से इरफान अंसारी और दीपिका सिंह पांडे का  नाम मंत्री के लिए चल  रहा है। वहीं, प्रदीप यादव, ममता देवी, और जयमंगल सिंह भी रेस में हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर जयराम महतो को जगह मिलती है, तो कांग्रेस को तीन मंत्री और  एक भारी-भरकम मंत्रालय देकर संतुलन साधा जा सकता है ।
    राजद की स्थिति क्या है?
    राजद से सिर्फ 1 मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। इस दौड़ में सुरेश पासवान और संजय यादव के नाम हैं। लेकिन फाइनल फैसला तेजस्वी यादव करेंगे।
    सीपीआई(माले) का क्या होगा?
    पिछली बार समर्थन देने के बावजूद माले सरकार में शामिल नहीं हुआ था। इस बार, अरुप चटर्जी को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है।

    हेमंत मंत्रिमंडल में जातीय संतुलन को साधने की भी पूरी कोशिश हो रही है साथ ही प्रमंडलीय स्तर पर भी प्रतिनिधित्व मिले इसके भी कोशिश हो  रही है लेकिन सबसे बड़ा सवाल है की मुख्यमंत्री सहित 12 मंत्री में जयराम महतो की क्या भूमिका होगी क्या इंडिया ब्लॉक जयराम महतो को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर सहमत है या सिर्फ हेमंत सोरेन ही चाहते हैं कि जयराम महतो मंत्रिमंडल में शामिल हो । क्या होगा मामला यह अभी देखना दिलचस्प होगा।