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  • नेहरू युवा केंद्र व रुद्रा फाउंडेशन ने चलाया सड़क सुरक्षा जागरूकता सप्ताह कार्यक्रम

    महेशलुंडी पंचायत में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

    गिरिडीह : महेशलुंडी पंचायत सचिवालय भवन में नेहरू युवा केंद्र, गिरिडीह और रुद्रा फाउंडेशन गिरिडीह ने सोमवार को राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा जागरूकता सप्ताह के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया।

    कार्यक्रम की शुरुआत रुद्रा फाउंडेशन के सचिव सैयद सबीह अशरफ ने मुख्य अतिथि, गिरिडीह के यातायात निरीक्षक  दुगन टोपनो और पंचायत मुखिया शिवनाथ साव का बुके देकर स्वागत करते हुए की।

    मुख्य अतिथि  टोपनो ने कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं को राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह की महत्ता समझाई। उन्होंने यातायात नियमों का पालन करने का आग्रह करते हुए कहा, “आपकी सुरक्षा आपकी जागरूकता पर निर्भर है। हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न केवल अनिवार्य है, बल्कि जीवन रक्षक भी है। यातायात पुलिस आपकी मदद के लिए तत्पर है, लेकिन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जनता का सहयोग अनिवार्य है।” उन्होंने सड़क पर धैर्य रखने और ट्रैफिक जाम की समस्या से बचने के लिए सभी को प्रेरित किया।

    पंचायत मुखिया शिवनाथ साव ने इस जागरूकता कार्यक्रम को अपने पंचायत में आयोजित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “यह पहल न केवल मेरे पंचायत के युवाओं को जागरूक करेगी, बल्कि पूरे गिरिडीह जिले में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होगी। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे अभियान निरंतर चलने चाहिए।”

    रुद्रा फाउंडेशन के सचिव सैयद सबीह अशरफ ने ट्रैफिक नियमों के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए सभी से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा, “अगर हम सब मिलकर प्रयास करें, तो गिरिडीह को दुर्घटनामुक्त जिला बना सकते हैं।”

    कार्यक्रम का संचालन रुद्रा फाउंडेशन के समन्वयक संतोष कुमार पांडेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रवि कुमार ने दिया।

    इस कार्यक्रम में पंचायत उपमुखिया रमेश कंधवे, रुद्रा फाउंडेशन के संतोष कुमार और रवि कुमार, युवा प्रतिनिधि सागर कुमार, रिजवाज अंसारी, प्रेम कुमार गुप्ता, आनंद कुमार समेत सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना था।

  • झारखंड में जल्द शुरू होगा ट्राइबल और माइनिंग टूरिज्म

    झारखंड में जल्द शुरू होगा ट्राइबल टूरिज्म, माइनिंग टूरिज्म को भी मिलेगा बढ़ावा

    झारखंड में जल्द ही ‘ट्राइबल टूरिज्म’ की शुरुआत की जाएगी। राज्य के नगर विकास, पर्यटन और उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि इस पहल का पहला केंद्र तमाड़ के अड़की से उलिहातू तक विकसित होगा। यहां पर्यटक भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति, उनके रहन-सहन और पारंपरिक खानपान का अनुभव भी कर सकेंगे।

    खनन पर्यटन पर भी रहेगा फोकस

    मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में ‘माइनिंग टूरिज्म’ शुरू करने की योजना है। इसके तहत सीसीएल और बीसीसीएल की कोयला खदानों को पर्यटकों के लिए खोला जाएगा, जहां वे ‘ओपन कास्ट माइंस’ का दौरा कर सकेंगे। इसके साथ ही धार्मिक और दर्शनीय स्थलों को जोड़ते हुए एक विशेष पर्यटन सर्किट तैयार किया जाएगा। हर 25 किलोमीटर पर एक विश्राम केंद्र बनाया जाएगा, जहां यात्रियों के लिए खान-पान और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इन स्थलों का प्रबंधन स्थानीय ग्राम और वन समितियों को सौंपा जाएगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय लोग पर्यटन से जुड़ सकेंगे।

    प्रमुख पर्यटन स्थलों का होगा विकास

    राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। नेतरहाट के कोयल व्यू प्वाइंट पर ग्लास टावर और अन्य लोकप्रिय स्थलों जैसे दशम फॉल, जोन्हा फॉल, मैगनोलिया प्वाइंट और पतरातू वैली में ग्लास ब्रिज बनाए जाएंगे। इसके अलावा मसानजोर, गेतलसूद, पतरातु, चांडिल, तेनुघट और तिलैया डैम में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बेहतर की जाएंगी। ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा। पलामू किले के जीर्णोद्धार के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को पत्र लिखा जाएगा, जबकि हजारीबाग के मेगालिथ स्थल का भी विकास किया जाएगा।

    स्पेन से सीखने जाएगी झारखंड की टीम

    झारखंड के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के लिए मंत्री सुदिव्य कुमार और उनकी टीम स्पेन के मैड्रिड में 22-26 जनवरी तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन ट्रेड फेयर (FITUR) में भाग ले रही है। इस टीम में पर्यटन सचिव मनोज कुमार, निदेशक अंजिल यादव और उपनिदेशक राजीव कुमार सिंह शामिल हैं। मंत्री 24-25 जनवरी को वापस लौटेंगे, जबकि अन्य अधिकारी 28 जनवरी को झारखंड आएंगे।

    झारखंड में ये नई पर्यटन योजनाएं राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर भी प्रदान करेंगी।

  • आज होगी कैबिनेट बैठक, स्वास्थ्य बीमा योजना के नए प्रस्ताव पर होगी चर्चा

    झारखंड सरकार की कैबिनेट बैठक आज, स्वास्थ्य बीमा योजना में संशोधन पर होगा विचार

     

    पेंशनरों और उनके परिवारों को होगा लाभ
    सरकार पहले ही राज्यकर्मियों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा देने का निर्णय ले चुकी थी। अब इस योजना में जरूरी सुधार कर इसे दोबारा पेश किया जा रहा है। यह योजना झारखंड के करीब 1.5 लाख पेंशनरों और उनके परिवारों को भी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्रदान करेगी।

    योजना के तहत कर्मचारियों को प्रति वर्ष 6000 रुपये प्रीमियम देना होगा, और प्रत्येक लाभार्थी को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज मिलेगा। इसके लिए झारखंड सरकार ने टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी के साथ करार किया है। अगर इलाज का खर्च 5 लाख रुपये से अधिक होता है, तो अतिरिक्त भुगतान बफर स्टॉक से किया जाएगा।

    सरकार ने इस योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए 150 करोड़ रुपये की आकस्मिक निधि तय की है। इसमें 100 करोड़ रुपये योजना के संचालन पर खर्च होंगे, जबकि 50 करोड़ रुपये आरोग्य सोसाइटी के बफर स्टॉक में सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त खर्च को पूरा किया जा सके।

    अब तक 2 लाख कर्मचारियों ने कराया निबंधन
    मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अब तक करीब 2 लाख राज्यकर्मियों और पेंशनरों ने निबंधन करवाया है। सरकार का प्रयास है कि इस योजना को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाए, ताकि सभी सरकारी कर्मचारी और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

  • मानवता को शर्मसार करने वाली माँ, जानिए क्या है घटना !

    गिरिडीह : झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। एक मां ने अपनी नवजात बच्ची को बगोदर-हजारीबाग रोड पर स्थित अलपीटो गांव के एक खेत में फेंक दिया। जहां ठंड के थपेड़ों और आवारा कुत्तों के हमलों ने मासूम की जिंदगी छीन ली।

    सोमवार सुबह, गांव के स्कूल के पीछे खेत में पड़े नवजात के शव को देखकर ग्रामीण सन्न रह गए। ठंड में बिना कपड़ों के, मासूम का शरीर जगह-जगह नोचा हुआ था। ग्रामीणों के मुताबिक, जब बच्ची दिखी, तब उसमें थोड़ी जान बाकी थी, लेकिन कुत्तों के हमले ने उसे बुरी तरह घायल कर दिया।

    सूचना मिलते ही सीओ नित्यानंद दास और थाना प्रभारी सपन कुमार महथा मौके पर पहुंचे। बच्ची को विष्णुगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, जिससे यह साफ हो सके कि बच्ची को जिंदा फेंका गया था या मृत।

    गांव में छाया मातम और आक्रोश।

    घटना के बाद पूरे गांव में मातम और गुस्से का माहौल है। ग्रामीण उस निर्दयी मां को कोस रहे हैं, जिसने इस हाड़ कंपाती ठंड में अपने खून के टुकड़े को इस तरह मरने के लिए छोड़ दिया। भीखन रविदास, जो सबसे पहले घटना स्थल पर पहुंचे, ने बताया, “जब हमने बच्ची को देखा, तब उसका एक हाथ कुत्ते खा चुके थे, और दूसरा बुरी तरह घायल था।”

    सवाल उठाते हैं यह दर्दनाक दृश्य।

    क्या मजबूरी रही होगी उस मां की, जिसने अपनी ही बच्ची को इस क्रूर अंत के लिए छोड़ दिया? समाज और प्रशासन के लिए यह घटना एक बड़ा सवाल है। क्या ऐसी निर्दयी घटनाओं को रोकने के लिए कोई कदम उठाए जाएंगे, या यह सिर्फ एक और मामला बनकर फाइलों में दब जाएगा?

     

  • झारखंड में अब पर्यटकों के लिए रोमांचक अनुभव का नया विकल्प जहां वे ग्लास ब्रिज पर स्काई वॉक का लुत्फ उठा सकेंगे।

    झारखंड में पर्यटन को मिलेगा नया आयाम, जल्द शुरू होगी ग्लास ब्रिज और स्काई वॉक की सुविधा

    झारखंड के पर्यटकों के लिए रोमांचक अनुभवों का दौर शुरू होने वाला है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर राज्य के तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों पर ग्लास ब्रिज और स्काई वॉक का निर्माण किया जाएगा। यह पहल बिहार के राजगीर में बने प्रसिद्ध ग्लास ब्रिज की तर्ज पर की जा रही है।

    तीन पर्यटन स्थलों पर बनेगा ग्लास ब्रिज

    ग्लास ब्रिज के निर्माण के लिए रांची जिले के दशम फॉल, हुंडरू फॉल, और नेतरहाट के मंगोलिया प्वाइंट का चयन किया गया है। पर्यटन विभाग ने इन स्थलों पर निर्माण के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली है। इसके साथ ही राजगीर में ग्लास ब्रिज का निर्माण करने वाली परामर्शी कंपनी से संपर्क स्थापित किया गया है। कंपनी को तीनों स्थलों पर ग्लास ब्रिज के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का निर्देश दिया गया है।

    पर्यटकों की संख्या का आकलन और सुरक्षा पर जोर

    ग्लास ब्रिज निर्माण के दौरान संभावित पर्यटकों की संख्या का आकलन किया जाएगा। परामर्शी कंपनी को साइट की विस्तृत जानकारी जुटाने के साथ-साथ पर्यटकों की संख्या, जमीन अधिग्रहण, डिज़ाइन, सुरक्षा मानकों और रखरखाव के लिए एक मजबूत मॉडल तैयार करने को कहा गया है।

    देश में तीसरा ग्लास ब्रिज होगा झारखंड में

    वर्तमान में भारत में केवल दो ग्लास ब्रिज हैं। पहला ग्लास ब्रिज सिक्किम के पेलिंग में और दूसरा बिहार के राजगीर में है। अब झारखंड इन पर्यटन स्थलों की श्रेणी में शामिल होने जा रहा है। दुनिया का पहला ग्लास ब्रिज चीन के हेबई प्रांत में बना था, जिसने पर्यटकों के बीच इसे खासा लोकप्रिय बनाया।

    पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

    झारखंड में ग्लास ब्रिज और स्काई वॉक की योजना राज्य के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल स्थानीय पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा बल्कि देश और विदेश से भी अधिक पर्यटकों को झारखंड की ओर खींचेगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की यह पहल राज्य में पर्यटन उद्योग को नई पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

  • सम्मेद शिखर: जंगल सफारी योजना का विरोध, जैन समाज नाराज

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट ………..

    गिरिडीह:  सम्मेद शिखर में जंगल सफारी बनाने के झारखंड सरकार के फैसले से जैन समाज में गहरी नाराज़गी है। सम्मेद शिखर जैन धर्म का एक अत्यंत पवित्र स्थल है, जहां 20 तीर्थंकरों को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। जैन समुदाय का मानना है कि जंगल सफारी जैसी मनोरंजन गतिविधियों से इस पवित्र स्थल की गरिमा और शांति भंग होगी।

    जैन समाज ने झारखंड सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया  है। जैन समाज के लोगों का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार पहले ही इस स्थल को पवित्र तीर्थस्थल घोषित कर चुकी हैं, और ऐसे में जंगल सफारी शुरू करना तीर्थस्थल का अपमान होगा।

    “पवित्रता से समझौता नामंज़ूर “
    जैन धर्म संगठनों का मानना है कि सम्मेद शिखर जैसे पवित्र स्थल पर मौज-मस्ती की कोई भी गतिविधि अनुचित है। जैन समाज ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जंगल सफारी की योजना को वापस नहीं लिया, तो  देशव्यापी आंदोलन होगा । यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान जो भी स्थिति बनेगी, उसकी पूरी जिम्मेदारी झारखंड और केंद्र सरकार की होगी।

    पर्यटन क्षेत्र को लेकर पहले भी हुआ था विवाद।
    यह पहली बार नहीं है जब पारसनाथ क्षेत्र को लेकर विवाद हुआ हो। दो साल पहले इस क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने की कोशिश की गई थी, जिसका भी जैन समाज ने पुरजोर विरोध किया था। समुदाय का कहना है कि पर्यटन क्षेत्र बनने से मांस-मदिरा जैसे अनुचित कार्य शुरू हो सकते हैं, जिससे तीर्थस्थल की पवित्रता नष्ट होगी। हालांकि, सरकार ने इस क्षेत्र को पहले ही मांस-मदिरा निषेध क्षेत्र घोषित कर दिया है।
    बताया गया है कि 2018 में झारखंड सरकार ने पारसनाथ पर्वत को जैन समाज का पवित्र तीर्थ स्थल घोषित किया था, जबकि भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 5 जनवरी 2023 को इसे पुनः पवित्र तीर्थ स्थल के रूप में मान्यता दी थी।

    जैन समाज का संदेश साफ है—सम्मेद शिखर जैसे पवित्र स्थल की गरिमा और शांति बनाए रखना ही उनकी प्राथमिकता है। उनका यह आंदोलन उस विरासत और श्रद्धा को बचाने के लिए है, जो इस तीर्थस्थल के साथ गहराई से जुड़ी हुई है।

     

  • राजनीतिक हिस्सेदारी के लिए अनुसूचित जाति को एकजुट होना होगा -डॉ. शैलेन्द्र

    गिरिडीह : राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एकता मंच का मिलन समारोह सह बैठक का आयोजन रविवार को गिरिडीह शहर के शहनाई बैंक्वेट हॉल में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पित कर की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता डॉ. शैलेंद्र कुमार चौधरी, विशेषज्ञ रेडियोलॉजिस्ट ने की, जबकि संचालन विनोद चौधरी द्वारा किया गया।

    बैठक में संगठन का विस्तार करते हुए सर्वसम्मति से डॉ. शैलेंद्र कुमार चौधरी को जिलाध्यक्ष से प्रोन्नत कर प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। उनके कार्यों की दक्षता और समर्पण भावना को देखते हुए यह निर्णय लिया गया। इसके अलावा जिला कमिटी का भी विस्तार किया गया।

     कमल दास को जिला अध्यक्ष बनाया गया जबकि  सत्यनारायण दास, राजेंद्र चौधरी,  राजेश हाड़ी व राजकुमार भुइयां को  जिला उपाध्यक्ष, डॉ. रविकांत, विनोद चौधरी, सुखदेव दास, सुनील पासवान,  सुरेंद्र तूरी, बबलू हाड़ी व  संतोष पासवान को  सचिव, वहीं  सुनीता कुमारी को कोषाध्यक्ष व  रामचंद्र हजारा, रिंकू दास व ज्ञान ज्योति मीडिया प्रभारी बनये गए हैं ।

    मार्गदर्शक मंडली मे धनेश्वर रजक, भोला चौधरी, छात्रधारी महथा, व  गिरधारी महथा को शामिल किया गया है ।

     

    डॉ. शैलेंद्र चौधरी का संबोधन।
    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नव-निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र चौधरी ने कहा, “अनुसूचित जाति समाज विभिन्न जातियों में बंटा हुआ है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एकता मंच का उद्देश्य इस बिखराव को समाप्त कर सबको एकजुट करना है। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने हमें शिक्षित बनने, संगठित रहने और संघर्ष करने का जो संदेश दिया, उसी मार्ग पर चलकर समाज को एक सूत्र में पिरोना है।”

    उन्होंने आगे कहा, “हमारे भोले-भाले समाज का लंबे समय से केवल उपयोग होता आया है। राजनीतिक दलों ने हमें सक्षम नेतृत्व नहीं दिया। लेकिन अब समय आ गया है कि हम संगठित होकर समाज को मजबूत करें।” डॉ. चौधरी ने यह भी कहा कि मंच शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज तक पहुंचाने में मदद करेगा।

    एकजुटता का संकल्प।
    बैठक के दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने मंच को मजबूत बनाने और समाज के सशक्तिकरण के लिए एकजुट होकर काम करने का संकल्प लिया। सभी नव-निर्वाचित पदाधिकारियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया।

    इस अवसर पर अन्य गणमान्य लोग और मंच के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

  • कट्टा ले कर आए थे कांड करने, पुलिस ने वारदात से पहले धर-दबोचा

    गिरिडीह: जमुआ थाना पुलिस ने समय पर कार्रवाई करते हुए एक बड़ी घटना को होने से रोक लिया। खोरीमहुआ एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि मंगलवार रात रंगामाटी निवासी इंद्रदेव कुमार वर्मा ने सूचना दी कि छह युवकों ने देसी कट्टे के साथ उनके भाई मणिलाल वर्मा पर जानलेवा हमला किया है।

    इस सूचना पर तुरंत कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी मणिकांत कुमार ने पुलिस बल के साथ रंगामाटी गांव में छापेमारी की। ग्रामीणों के सहयोग से दो आरोपियों को पकड़ लिया गया। पकड़े गए युवकों में रितेश पांडे (19) और अनिमेष पांडे (20), दोनों निवासी ग्राम चुंगलों, थाना जमुआ, शामिल हैं। उनके पास से एक देसी कट्टा और दो मोटरसाइकिल बरामद की गईं।

    इंद्रदेव कुमार वर्मा के आवेदन पर जमुआ थाना में कांड संख्या 03/2025 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस कांड के अन्य फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

  • कल्पना सोरेन को महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष नियुक्त किया गया है

    झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने विधानसभा की 25 समितियों का पुनर्गठन किया है। इसके लिए सभापति और सदस्यों की सूची अधिसूचना के माध्यम से जारी कर दी गई है। जारी अधिसूचना के अनुसार, गांडेय से झामुमो की विधायक कल्पना सोरेन को महिला एवं बाल विकास समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वहीं, बरही से भाजपा के विधायक मनोज कुमार यादव को लोकलेखा समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो स्वयं विशेषाधिकार समिति, नियम समिति और याचिका समिति के अध्यक्ष होंगे।

    अन्य प्रमुख समितियों के नए अध्यक्ष:

    • सत्येंद्र नाथ तिवारी (भाजपा, गढ़वा) – सामान्य प्रयोजन समिति
    • हेमलाल मुर्मू (झामुमो, लिट्टीपाड़ा) – प्राक्कलन समिति
    • निरल पूर्ति (झामुमो, मझगांव) – सरकारी उपक्रम समिति
    • अरूप चटर्जी (माले, निरसा) – सरकारी आश्वासन समिति
    • बसंत सोरेन (झामुमो, दुमका) – प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति
    • प्रदीप यादव (पोड़ैयाहाट) – जिला परिषद एवं पंचायती राज समिति
    • रामेश्वर उरांव (कांग्रेस, लोहरदगा) – आंतरिक संसाधन एवं केंद्रीय सहायता समिति
    • उमाकांत रजक (झामुमो, चंदनक्यारी) – निवेदन समिति
    • स्टीफन मरांडी (महेशपुर) – अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति
    • रामचंद्र सिंह (मनिका, कांग्रेस) – सदाचार समिति
    • नीरा यादव (कोडरमा, भाजपा) – पुस्तकालय विकास समिति
    • उदयशंकर सिंह (सारठ, झामुमो) – पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति
    • चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह (रांची, भाजपा) – विधायक निधि अनुश्रवण समिति
    • भूषण तिर्की (गुमला, झामुमो) – शून्यकाल समिति
    • राज सिन्हा (धनबाद, भाजपा) – गैर सरकारी संकल्प समिति
    • सुरेश पासवान (देवघर, राजद) – अनागत प्रश्न क्रियान्वयन समिति
    • सविता महतो (ईचागढ़, झामुमो) – युवा कल्याण, संस्कृति एवं पर्यटन विकास समिति
    • दशरथ गगराई (खरसावां, झामुमो) – आवास समिति
    • सरयू राय (जमशेदपुर पश्चिम, निर्दलीय) – प्रत्यायुक्त समिति
    • विकास मुंडा (तमाड़, झामुमो) – खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले समिति
  • उसरी महोत्सव का भव्य शुभारंभ, पर्यावरण संरक्षण के लिए जुटे जिले के लोग

    गिरिडीह जिले में तीन दिवसीय उसरी महोत्सव का आज शास्त्री नगर स्थित अमित बर्दियार छठ घाट में भव्य उद्घाटन हुआ। पर्यावरण को समर्पित इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उसरी नदी को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के उपायों पर जोर देना है। महोत्सव का शुभारंभ जिला उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा, डीएफओ मनीष तिवारी, और सदर एसडीओ यशवंत श्रीकांत बिस्पुटे ने संयुक्त रूप से किया।

    जागरूकता का संदेश.

    कार्यक्रम का संचालन कर रहे कोर कमेटी के संयोजक राजेश सिन्हा ने जिले के बुद्धिजीवियों और पर्यावरण प्रेमियों के विचार साझा करते हुए कहा कि गिरिडीह की जनता को ऐसे मुद्दों पर आगे आकर पहल करनी होगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही फैक्ट्री क्षेत्रों में भी सुधार की दिशा में कार्य शुरू किया जाएगा।

    मुख्य अतिथि  नमन प्रियेश लकड़ा ने नदियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “जल ही जीवन है और वायु ही प्राणदायिनी। नदियों को बचाने में समाज की सहभागिता बेहद जरूरी है।” उन्होंने उसरी बचाव अभियान को निस्वार्थ भाव से प्रकृति संरक्षण में जुटा हुआ बताते हुए इसे सरकार और प्रशासन का पूरा समर्थन देने की बात कही।

    वन प्रमंडल पदाधिकारी मनीष तिवारी ने जल, जंगल, और जमीन को बचाने की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि उसरी नदी के किनारे हजारों पेड़ लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा, “उसरी बचाव अभियान की टीम शानदार काम कर रही है और भविष्य में और बेहतर करेगी।”

    खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन.

    महोत्सव में जागरूकता बढ़ाने के लिए नदी में खो-खो और कबड्डी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। खेलों का उद्घाटन उपायुक्त ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया। खेल आयोजन नुरुल हुदा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

    कार्यक्रम की शुरुआत भावपूर्ण नृत्य प्रदर्शन से हुई, जिसमें बच्चियों ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। इस भव्य आयोजन में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, पुरुष, बच्चे और स्कूल के विद्यार्थी उपस्थित थे।

    उसरी बचाओ का संदेश.

    कोर कमेटी के विनय कुमार सिंह ने कहा, “यह महोत्सव हमें प्रेरणा देता है कि हम सब मिलकर अपनी नदियों को बचाने के लिए आगे आएं।” महोत्सव के दौरान गिरिडीह के पर्यावरण प्रेमियों और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार साझा कर उपस्थित लोगों को जागरूक किया।
    उसरी महोत्सव ने गिरिडीह में पर्यावरण संरक्षण और नदियों के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाने में बड़ी भूमिका निभाई। इस तरह के आयोजन न केवल प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी को रेखांकित करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट होकर कार्य करने की प्रेरणा भी देते हैं।