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  • महेंद्र सिंह: झारखंड के जननेता को शहादत दिवस पर नमन

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………..

    16 जनवरी झारखंड के लिए एक खास तारीख है। यह दिन उस नेता की याद दिलाता है, जिसने गरीबों, मजदूरों और शोषितों की आवाज़ को बुलंद किया। स्वर्गीय महेंद्र सिंह की शहादत दिवस पर आज झारखंड उन्हें नमन कर रहा है।

    सादगी और संघर्ष से भरा जीवन।

    महेंद्र सिंह का जन्म 1944 में गिरिडीह के छोटे से गांव खंभरा में हुआ। सीमित शिक्षा के बावजूद, उनका ज्ञान और जागरूकता बेमिसाल थी। किताबों और अखबारों से उनका गहरा लगाव था। वह राजनीति को कुर्सी का खेल नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम मानते थे।

    महेंद्र सिंह ने अपने करियर की शुरुआत लाल सेना के गुरिल्ला नेता के रूप में की। शुरुआत में चुनावी राजनीति के खिलाफ रहने वाले महेंद्र सिंह ने वक्त के साथ अपने विचार बदले और बिहार विधानसभा चुनाव में कूद पड़े। गिरिडीह के बगोदर विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने लगातार जीत दर्ज की और गरीबों के सच्चे रहनुमा बने।वे सीपीआई(एमएल) के नेता थे, लेकिन उनकी पहचान केवल पार्टी तक सीमित नहीं थी।

    ईमानदारी और साहस की मिसाल।

    महेंद्र सिंह के लिए राजनीति का मतलब था अन्याय के खिलाफ लड़ाई। उन्होंने खदान मालिकों, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाहियों के खिलाफ आवाज़ उठाई। सत्ता पर तीखा वार करना और जनता के हक की बात करना उनकी पहचान थी। यही वजह है कि वह नक्सल प्रभावित इलाकों में भी उतने ही लोकप्रिय थे जितने ग्रामीण क्षेत्रों में।

    झूठे मामलों में फंसाए गए, पर हिम्मत नहीं हारी।

    1980 के दशक में सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने प्रभावशाली लोगों को चुनौती दी। इसके चलते उन्हें झूठे हत्या के मामले में फंसा दिया गया। निचली अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। जेल में भी उन्होंने अन्य कैदियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

    शहादत: विचारधारा को कुचलने की कोशिश।

    2005 में 16 जनवरी को महेंद्र सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना उस वक्त हुई, जब वे चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। उनकी हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं थी, बल्कि एक विचारधारा को खत्म करने की कोशिश थी। लेकिन महेंद्र सिंह के विचार आज भी हर उस व्यक्ति के दिल में जिंदा हैं, जो न्याय और समानता की बात करता है।

    झारखंड को एक नई राह दिखाने वाले नेता। 

    महेंद्र सिंह की सादगी, ईमानदारी और साहस आज भी झारखंड के लोगों को प्रेरणा देते हैं। उनकी याद में हर साल बगोदर और उनके गांव खंभरा में लोग जुटते हैं। यह साबित करता है कि महेंद्र सिंह का आंदोलन कभी खत्म नहीं होगा।उनकी मौत के सालों बाद आज भी बगोदर विधान सभा में “महेंद्र सिंह तुम जिंदा हो खेतों व खलिहानों में, जनता के अरमानो में नारे गाँव में गूंजती है”.

    महेंद्र सिंह को नमन। उनकी विरासत हमें यह सिखाती है कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि जनता के लिए एक मिशन हो सकता है।

  • JPSC: हाईकोर्ट ने CBI को जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का निर्देश

    झारखंड की बहुप्रतीक्षित प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप एक बार फिर सुर्खियों में हैं। झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी  की पहली और दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में अनियमितताओं की जांच को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

    जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने इस मामले में सीबीआई को निर्देश देते हुए कहा कि जेपीएससी की प्रथम और द्वितीय परीक्षा की जांच के बाद दायर चार्जशीट को कोर्ट के रिकॉर्ड पर लाया जाए। इसके अलावा, केस की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करने के लिए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए। अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 5 फरवरी की तारीख तय की है।

     कोर्ट ने जताई सख्ती.

    सीबीआई की ओर से बताया गया कि रांची स्थित विशेष अदालत में इन मामलों में पहले ही आरोप पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। हालांकि, स्टेटस रिपोर्ट तैयार करने के लिए और समय देने का अनुरोध किया गया। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई से आरसी-5/2012 और आरसी-6/2012 नंबर के मामलों की जांच की स्थिति पर जवाब मांगा था।

    कौन-कौन हैं आरोपी?

    सीबीआई ने इस मामले में जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. दिलीप प्रसाद को मुख्य आरोपी बनाया है। उनके साथ वरीय सदस्य गोपाल प्रसाद, सदस्य राधा गोविंद नागेश, डॉ. शांति देवी, और परीक्षा नियंत्रक एलिस उषा रानी सिंह सहित कुल 37 लोगों को आरसी-5/2012 में आरोपित किया गया। वहीं, आरसी-6/2012 मामले में डॉ. दिलीप प्रसाद सहित 70 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया है।

    क्या है मामला?

    झारखंड लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इन आरोपों में मैनिपुलेशन, अयोग्य उम्मीदवारों का चयन, और नियमों का घोर उल्लंघन शामिल हैं। जनहित याचिकाओं के माध्यम से इन मामलों की जांच की मांग वर्षों से की जा रही थी।

    हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट कर दिया है कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई की ओर से अगली सुनवाई में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने की संभावना है।

    क्या न्याय की उम्मीद कर रहे प्रतियोगी छात्रों को इंसाफ मिलेगा, या इस मामले में भी सियासत और कानूनी दांव-पेंच के चलते सच दबा रहेगा? 5 फरवरी की सुनवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं।

  • कौन बनेगा बीजेपी विधायक दल का नेता ? मरांडी, सीपी सिंह और नीरा यादव !

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………

    झारखंड की राजनीति में इन दिनों बीजेपी की खामोशी ने सत्ता पक्ष  को हमलावर होने का पूरा मौका दे दिया है। विधानसभा चुनाव खत्म हुए चार महीने हो गए, लेकिन अब तक बीजेपी अपने विधायक दल के नेता का चयन नहीं कर पाई है। संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां अटकी हुई हैं, और सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि दो सप्ताह के भीतर नेता प्रतिपक्ष का चयन किया जाए।

    मरांडी, सीपी सिंह और नीरा यादव!

    पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी इस दौड़ में सबसे आगे हैं। उनके साथ सीपी सिंह और डॉ. नीरा यादव के नामों पर भी गंभीरता से विचार हो रहा है। लेकिन बीजेपी की इस देरी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सत्ता पक्ष  का कहना है कि चुनावी हार के बाद पार्टी नेतृत्व में गहरी निराशा है।

    झामुमो और कांग्रेस के तीखे वार।

    सत्तारूढ़ झामुमो ने इस मुद्दे पर भाजपा को जमकर घेरा है। झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने तंज कसते हुए कहा, “चुनावी हार के बाद भाजपा इतनी निराश हो चुकी है कि विधायक दल का नेता तक नहीं चुन पा रही। राज्य की जनता ने इन्हें नकार दिया है, और अब इनकी सियासत दिशाहीन हो गई है।”

    कांग्रेस ने भी भाजपा पर संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान न करने का आरोप लगाया। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा, “भाजपा को नफरत और झूठ फैलाने के अलावा कुछ नहीं आता। इनकी मंशा संविधान को कमजोर करने की है।”

    मामला उल्टा पड़ गया।

    गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा पहले संवैधानिक पदों पर नियुक्ति न होने को लेकर राज्य सरकार पर हमलावर रहती थी। लेकिन अब यही मुद्दा पार्टी के गले की फांस बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद विपक्ष को हमले का नया हथियार मिल गया है।

    शीघ्र होगा निर्णय?

    ऐसा माना जा रहा है कि भाजपा केंद्रीय नेतृत्व की निगरानी में जल्द ही विधायक दल के नेता का चयन करेगी। पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश पार्टी पर दबाव बढ़ा रहा है, और फैसला जल्द लिए जाने की उम्मीद की जा रही है।

    क्या मरांडी बन पाएंगे विधायक दल के नेता, या सीपी सिंह और डॉ. नीरा यादव बाज़ी मारेंगे?

  • झारखंड के 4 जिलों में बनेगा जंगल सफारी: 800 करोड़ की योजना पर काम शुरू

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    रांची: झारखंड सरकार वन्यजीव प्रेमियों को एक खास तोहफा देने जा रही है। राज्य के चार प्रमुख अभयारण्यों में जंगल सफारी विकसित करने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। पलामू टाइगर रिजर्व, दलमा, हजारीबाग और पारसनाथ वन्यजीव अभयारण्यों में यह सफारी शुरू की जाएगी। लगभग 800 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल किया जाएगा।

    क्या खास होगा जंगल सफारी में?

    इन जंगल सफारी में पर्यटक खुली कार या बस में बैठकर वन्यजीवों को बेहद करीब से देख सकेंगे। ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देते हुए स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और पर्यावरण को संरक्षित करने का खास ध्यान रखा जाएगा।

    • खुली सफारी: पर्यटकों को जंगल में खुले में भ्रमण का मौका मिलेगा।
    • ईको-फ्रेंडली टूरिज्म: बांस की झोपड़ियों (बंबू हाट), कैफेटेरिया और कैंटीन जैसी सुविधाएं दी जाएंगी।
    • प्राकृतिक अनुभव: जंगल में घूमने के साथ-साथ वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा।

    हर अभयारण्य की अपनी खासियत

    1. पलामू टाइगर रिजर्व: झारखंड का इकलौता टाइगर रिजर्व, जहां बाघ पर्यटकों का मुख्य आकर्षण हैं।
    2. दलमा अभयारण्य: हाथियों के लिए प्रसिद्ध।
    3. हजारीबाग अभयारण्य: सांभर, चीतल, नीलगाय, भालू और लकड़बग्घा जैसे जानवरों का घर।
    4. पारसनाथ अभयारण्य: तेंदुआ, जंगली बिल्ली और साही जैसे दुर्लभ जीव-जंतुओं का बसेरा।

    कैसे हुई योजना की शुरुआत?

    30 दिसंबर को मुख्यमंत्री ने ईको-टूरिज्म के विकास पर जोर देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया था। इसके बाद पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  ने बिहार के राजगीर जंगल सफारी का दौरा कर जरूरी अनुभव साझा किए। अब झारखंड में इस प्रोजेक्ट को तेज़ी से लागू किया जा रहा है।

    क्या कहती है सरकार?

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से न केवल राज्य का पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिलेगा। पर्यटन और वन विभाग इस प्रोजेक्ट का संयुक्त संचालन करेंगे। हर अभयारण्य पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    पर्यटकों के लिए एक सुनहरा अवसर

    जंगल सफारी झारखंड के प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों का लुत्फ उठाने का बेहतरीन मौका देगा। चाहे बाघ की दहाड़ हो, हाथियों का झुंड हो या तेंदुए की फुर्ती—यह सफारी हर पर्यटक के लिए खास अनुभव होगी।

    झारखंड के पर्यटन में यह पहल एक नए युग की शुरुआत है, जहां पर्यावरण और आर्थिक विकास का संतुलन देखने को मिलेगा।

  • रांची से लापता नाबालिग बहनें कर्नाटक में मिलीं, पुलिस जल्द करेगी खुलासा

    रांची: झारखंड की राजधानी से रहस्यमय तरीके से लापता हुईं दो नाबालिग बहनों को पुलिस ने कर्नाटक से बरामद कर लिया है। 11 जनवरी की शाम से गायब इन बहनों को बेंगलुरु से वापस रांची लाया जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने अभी तक अपहरण की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उनके रांची पहुंचने के बाद सच सामने आने की उम्मीद है।

    गायब होने की कहानी:

    रांची के हिंदपीढ़ी इलाके की रहने वाली ये दोनों बहनें 11 जनवरी को आधार कार्ड ठीक करवाने के लिए निकली थीं। परिजनों के मुताबिक, दोनों मंगल टॉवर से घर लौटने के लिए ऑटो में बैठी थीं। लेकिन रास्ते में उन्हें शक हुआ कि ऑटो चालक किसी और दिशा में जा रहा है। घबराई लड़कियों ने अपने पिता को फोन किया, लेकिन ऑटो चालक ने उनका फोन छीन लिया। इसके बाद परिजनों का उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया।

    स्पेशल टीम का कमाल।

    परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। रांची प्रक्षेत्र के आईजी ने तत्काल एक विशेष टीम का गठन किया और टेक्निकल सेल की मदद से लड़कियों की लोकेशन ट्रेस की। पुलिस को जानकारी मिली कि लड़कियां कर्नाटक में हैं। स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों बहनों को बरामद कर लिया गया। दोनों नाबालिग बहनों के गायब होने के बाद मामला राजनीतिक तूल पकड़ चुका था। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी परिजनों से मिलने पहुंचे थे। पुलिस ने भरोसा दिया था कि लड़कियों को जल्द ही ढूंढ लिया जाएगा, और अब यह भरोसा सच में बदल चुका है।

    पुलिस फिलहाल यह जांच कर रही है कि मामला अपहरण का था या फिर कुछ और। दोनों बहनों की रांची वापसी के बाद घटनाक्रम की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

    झारखंड में लड़कियों  की सुरक्षा को लेकर यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या यह सिर्फ एक इत्तेफाक था, या इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह है? जवाबों का इंतजार सभी को है। परवेज़ आलम की रिपोर्ट ……

  • गिरिडीह: धूमधाम से मनाया गया लोहड़ी और मकर संक्रांति

    गिरिडीह: झारखंड के नगर विकास मंत्री और सदर विधायक सुदीव्य कुमार सोनू की ओर से होटल उत्सव उपवन में मकर संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक दही, चूड़ा और तिलकुट का प्रसाद ग्रहण करने का कार्यक्रम आयोजित किया गया ।  इस मौके पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकर्ताओं के अलावा कई गणमान्य लोग शामिल हुये ।  मंत्री सुदीव्य कुमार सोनू ने इस खास अवसर पर झामुमो के साथियों के साथ ही पूरे राज्य वासियों व देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं दीं।

    गुरुद्वारा ग्राउंड में लोहड़ी का रंगारंग उत्सव। 

    इधर सोमवार देर शाम सिख समाज ने गुरुद्वारा ग्राउंड परिसर में लोहड़ी पर्व को बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया। पारंपरिक भंगड़ा और गिद्दा की प्रस्तुति ने माहौल को जीवंत बना दिया। ढोल की थाप पर सिख समुदाय के लोगों ने जमकर नृत्य किया, वहीं पंजाबी गीतों ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।

    गिरिडीह गुरुद्वारा के मुख्य प्रधान सेवक गुणवंत सिंह मोंगिया ने सबसे पहले पवित्र लोहड़ी प्रज्वलित की। इसके बाद सिख समुदाय के सदस्यों ने अग्नि की परिक्रमा करते हुए परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की।

    मकर संक्रांति पर मिलन समारोह का आयोजन। 

    गिरिडीह में मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में कई स्थानों पर मिलन समारोह आयोजित किए गए। भाजपा नेता और गिरिडीह बार एसोसिएशन के सचिव चुन्नुकांत ने अपने आवासीय कार्यालय में दही, चूड़ा और तिलकुट के साथ पारंपरिक मकर संक्रांति का आयोजन किया। इस मौके पर चुन्नुकांत ने मकर संक्रांति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह पर्व केवल धार्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि इसका संबंध विज्ञान, कृषि और सामाजिक जीवन से भी है। यह दिन शुभ कार्यों की शुरुआत और आपसी मेल-मिलाप का प्रतीक है।”

    इंजीनियर विनय सिंह के कार्यालय में भी पर्व की धूम।

    सेवानिवृत्त इंजीनियर विनय सिंह के बोड़ो कार्यालय परिसर में भी मकर संक्रांति के मौके पर भव्य मिलन समारोह आयोजित हुआ। यहां भी पारंपरिक दही, चूड़ा और तिलकुट के साथ पर्व मनाया गया। विनय सिंह ने इस अवसर पर कहा, “मकर संक्रांति हमारे सामाजिक जीवन में मेल-जोल और परंपराओं का प्रतीक है। यह पर्व धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

    इस कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष महादेव दुबे, जिला परिषद अध्यक्ष मुनिया देवी, प्रदेश कार्य समिति सदस्य सुरेश साहू, जिला महामंत्री महेंद्र वर्मा, नवीन सिन्हा, रंजीत राय, प्रमोद सिंह, और कई अन्य प्रमुख लोग शामिल हुए।

    उत्सवों ने दिया सामाजिक एकता का संदेश।

    गिरिडीह में आयोजित इन दोनों प्रमुख पर्वों ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक जुड़ाव और समर्पण को मजबूत किया जा सकता है। लोहड़ी और मकर संक्रांति के माध्यम से गिरिडीह के लोगों ने मिलन, खुशहाली और समृद्धि का संदेश पूरे जिले में फैलाया।

  • पत्रकार पर हमले के विरोध में प्रेस क्लब का सांकेतिक धरना

    गिरिडीह: पत्रकारिता के पेशे को सुरक्षित रखने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रेस क्लब ने सोमवार को गिरिडीह में सांकेतिक धरना दिया। यह धरना पत्रकार अमरनाथ सिन्हा और अन्य दो पत्रकारों पर हुए हमले के विरोध में आयोजित किया गया।

    प्रेस क्लब की एकजुटता
    इस धरने का नेतृत्व प्रेस क्लब के अध्यक्ष पत्रकार राकेश सिन्हा ने किया, जबकि संचालन महासचिव अरविंद कुमार के हाथों में रहा। इस विरोध प्रदर्शन में गिरिडीह के प्रमुख पत्रकार लक्ष्मी अग्रवाल, अमरनाथ सिन्हा,श्रीकांत सिंह,मृणाल सिंहा, सूरज सिन्हा, अविनाश प्रसाद, आलोक रंजन, अंजनी सिन्हा,  समेत कई अन्य पत्रकार उपस्थित रहे।

    क्या है मामला?
    बताया गया कि हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नगर निगम के टोल टैक्स पॉइंट से अवैध वसूली को लेकर थी। इस अवैध वसूली की कवरेज के दौरान अमरनाथ सिन्हा और अन्य पत्रकारों पर हमला किया गया। इस मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन टोल टैक्स संवेदक के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

    मंत्री का आश्वासन और धरने का समापन
    धरने की सूचना पाकर नगर विकास मंत्री सुदीब्य कुमार सोनू मौके पर पहुंचे और संवेदक पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। मंत्री के सकारात्मक रुख और भरोसे के बाद प्रेस क्लब ने धरना समाप्त किया।

    पत्रकारिता पर हमला लोकतंत्र पर हमला
    प्रेस क्लब के सदस्यों ने स्पष्ट किया कि यह विरोध केवल पत्रकारों पर हमले का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सुरक्षा के लिए है। पत्रकारों ने मांग की कि इस घटना से जुड़े सभी आरोपियों पर सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    यह धरना गिरिडीह के पत्रकारों की एकजुटता और उनकी आवाज को दबाने के खिलाफ उनके साहस का प्रतीक है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पत्रकारिता न केवल सच की तलाश है, बल्कि इसके लिए खड़ा होना भी उतना ही जरूरी है।

     

  • गिरिडीह :  बहुचर्चित डकैती कांड मे पुलिस को मिली सफलता,चार गिरफ्तार

    गिरिडीह जिले के बिरनी थाना क्षेत्र के बिराजपुर में सुरेश मोदी के घर हुई लगभग 20 लाख रुपये की डकैती का मामला सुलझाते हुए पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। इस मामले में चार शातिर डकैतों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें मोहम्मद मोहतमीम और करण दास उर्फ दास बाबू धनबाद के तोपचांची थाना के हैं, जबकि गुलजार और हातिम धनबाद जिले के कतरास थाना  के हैं। पुलिस कप्तान डॉ. बिमल कुमार ने मीडिया को बताया कि इस घटना के त्वरित खुलासे के लिए गठित SIT ने बेहतरीन काम किया है।

    बरामदगी और पुलिस की सक्रियता
    गिरफ्तार अपराधियों के पास से पुलिस ने घटना में उपयोग की गई 2 मोटरसाइकिलें, 5 मोबाइल फोन, 1 चाकू और 55,000 रुपये नकद बरामद किए हैं। वहीं, इस कांड में शामिल अन्य अपराधियों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। एसडीपीओ धनंजय राम के नेतृत्व में गठित SIT ने घटना के खुलासे के लिए तकनीकी और मानवीय साक्ष्य का सहारा लिया।

    कैसे दिया गया घटना को अंजाम?
    घटना बीते 2/3 जनवरी की रात की है। डकैतों ने रात करीब 1 बजे सुरेश मोदी के घर पर धावा बोला। बांस की सीढ़ी का इस्तेमाल कर घर के अंदर घुसे और घर के बुजुर्ग व्यक्ति को हथियार का भय दिखाकर परिवार के अन्य सदस्यों को बंधक बना लिया। इसके बाद अलमारी से गहने और नकदी के साथ किराने की दुकान में रखे पैसे भी लूट ले गए।

    गिरफ्तार अपराधियों का इतिहास
    गिरफ्तार चारों अपराधी पहले भी कई गंभीर अपराधों में लिप्त रहे हैं।

    • मोहम्मद मोहतमीम: कतरास थाना कांड संख्या 126/2021 में संलिप्त।
    • गुलजार अंसारी: निमियाघाट, कतरास, और पुरुलिया के कई कांडों में शामिल।
    • हातिम: नरेंद्रपुर और सरिया थाना क्षेत्र में दर्ज कई मामलों का आरोपी।

    पुलिस का दावा और अगली कार्रवाई
    पूछताछ में इन अपराधियों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की और बताया कि कुल 13 लोगों ने मिलकर इस डकैती को अंजाम दिया। पुलिस अब फरार अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।

    इस घटना का खुलासा पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ का नतीजा है, लेकिन यह गिरिडीह और आसपास के इलाकों में अपराधियों के बढ़ते हौसले पर सवाल भी खड़े करता है। पुलिस के लिए यह जरूरी है कि वे अपराधियों के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर क्षेत्र में कानून ब्यवस्था बहाल करें।

  • दो नक्सली गिरफ्तार,मुखिया पति को दिया था धमकी

    गिरिडीह :मुखिया पति और पारा शिक्षक को धमकी देने वाले दो नक्सलियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार है। गिरफ्तार दोनों नक्सली बिहार के जमुई जिले के बटिया थाना क्षेत्र का रहने वाला है। गिरिडीह के पुलिस कप्तान डॉ. बिमल कुमार ने मीडिया को बताया कि गुनियाथर के मुखिया पति और उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय हड़मातरी के पारा शिक्षक सफदर अली अहमद को नक्सलियों ने पर्चे के माध्यम से धमकी दी थी। इसके बाद फोन पर धमकाते हुए पैसे की मांग की गई। इस घटना से भयभीत होकर सफदर अली ने गुनियाथर ओपी में मामला दर्ज कराया था।

    पुलिस की कार्रवाई:
    घटना की गंभीरता को देखते हुए गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार ने एक विशेष टीम का गठन किया। टीम का नेतृत्व एएसपी (अभियान) सुरजीत कुमार, एसडीपीओ खोरीमहुआ राजेंद्र प्रसाद ने किया।  टीम ने झारखंड और बिहार के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर जमुई जिले के बटिया थाना क्षेत्र के लखनपुर निवासी बुधन मुर्मू (पिता: सुरेश मुर्मू) और बुढियालापर निवासी अनवर अंसारी (पिता: सिद्दिक मियां) को गिरफ्तार किया।

    एसपी डॉ बिमल ने बताया कि दोनों नक्सली पहले भी कई मामलों में वांछित थे और उन्होंने अपनी संलिप्तता भी स्वीकार की है। पुलिस ने धमकी देने में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है।

  • लंगटा समाधि स्थल: आस्था और एकता का अभूतपूर्व संगम

    गिरिडीह: खरगडीहा स्थित लंगटा बाबा के समाधि स्थल पर इस बार भी आस्था का सैलाब उमड़ा। पौष पूर्णिमा के मौके पर हर साल की तरह इस वर्ष भी समाधि पर्व मनाया गया, जिसमें श्रद्धालुओं की भीड़ ने भाईचारे और समरसता की मिसाल पेश की। अहले सुबह तीन बजे जमुआ थाना प्रभारी मणिकांत कुमार ने बाबा की समाधि पर पहली चादरपोशी कर आयोजन का शुभारंभ किया। इसके बाद आम श्रद्धालुओं ने चादरपोशी शुरू की, जो दिनभर जारी रही।

    लंगटा बाबा: पीड़ित मानवता के उद्धारक संत
    कहा जाता है कि 1870 में देवघर जाते समय नागा साधुओं का एक दल खरगडीहा के पुलिस थाना परिसर में रुका। सभी साधु अगले दिन रवाना हो गए, लेकिन एक साधु नग्न अवस्था में धूनी रमाए वहीं बैठे रहे। यही साधु बाद में लंगटा बाबा के रूप में विख्यात हुए। 1910 की पौष पूर्णिमा को बाबा ने महासमाधि ले ली। बाबा के जीवन में अनेक चमत्कार और लीलाएं जुड़ी हैं। उन्होंने न केवल लोगों की समस्याएं दूर कीं, बल्कि अमीर-गरीब, जाति-धर्म से परे सभी को समान रूप से सम्मान दिया।

    भाईचारे की मिसाल
    लंगटा बाबा के समाधि पर्व पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की बराबर भागीदारी होती है। परंपरा के अनुसार, सुबह हिंदू धर्मावलंबियों ने चादरपोशी की और दोपहर बाद मुस्लिम समुदाय ने अपनी श्रद्धा अर्पित की। इस आयोजन में झारखंड, बिहार सहित अन्य प्रदेशों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। बाबा के प्रति आस्था का आलम ऐसा है कि उनकी समाधि पर सिर झुकाने वालों में हर वर्ग और धर्म के लोग शामिल होते हैं।

    विशेष व्यवस्थाएं और चुनौतियां
    मेले में भक्तों की सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे, लेकिन भारी भीड़ के कारण व्यवस्थाएं नाकाफी रहीं। समाधिस्थल तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात किया गया था, और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी समाधिस्थल पर श्रद्धा निवेदित की।

    समाज को जोड़ने का संदेश
    लंगटा बाबा का समाधि पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है। उनकी शिक्षाएं और साधना आज भी लोगों को प्रेम, समानता और भाईचारे का संदेश देती हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार, बाबा के दरबार में मन्नत मांगने से हर समस्या का समाधान होता है।

    लंगटा बाबा का समाधि स्थल हर वर्ष यह याद दिलाता है कि सच्ची आस्था और इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती। यही वजह है कि बाबा के प्रति आस्था अडिग है और उनका समाधि पर्व एकता और मानवता का जश्न बन चुका है।