Blog

  • एक्शन में CM हेमंत : झारखंड के 8 PSU को डिविडेंड देने का सख्त निर्देश

    रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (PSU) पर शिकंजा कसते हुए उन्हें अपने मुनाफे का 30% हिस्सा डिविडेंड के रूप में राज्य सरकार को देने का आदेश दिया है। यह निर्देश ऐसे समय में आया है जब राज्य में 8 प्रमुख PSU ने अपने गठन के बाद से सरकार को अब तक कोई लाभांश नहीं दिया है।

    PSU को डिविडेंड न देने पर सख्त चेतावनी।
    इन इकाइयों में पर्यटन, खनिज विकास, शहरी परिवहन, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली, कृषि, वन और फिल्म उद्योग जैसे क्षेत्रों से जुड़े PSU शामिल हैं। हालांकि झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (JSMDCL) ने अपने लाभांश की घोषणा की थी, लेकिन 15 करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक लंबित है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसी लापरवाहियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    JUTCL को किया जाएगा बंद। 
    शहरी परिवहन से जुड़े झारखंड अर्बन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन लिमिटेड (JUTCL), जो काफी समय से निष्क्रिय है, को बंद करने का निर्णय लिया गया है। वहीं, अन्य 16 PSU पर भी शिकंजा कसते हुए सरकार ने उन्हें अपनी स्टेट्यूटरी ऑडिट रिपोर्ट जल्द से जल्द दाखिल करने का आदेश दिया है।

    PSU की ऑडिट और ओवर-कैपिटलाइजेशन पर समीक्षा।
    29 नवंबर को प्रोजेक्ट भवन में हुई एक समीक्षा बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव ने PSU की ऑडिट रिपोर्ट, ओवर-कैपिटलाइजेशन और लाभांश को लेकर विस्तृत चर्चा की। बैठक में कहा गया कि जो PSU अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में विफल रहे हैं, उनके निदेशकों के खिलाफ कंपनी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    इन PSU को देना होगा डिविडेंड:
    राज्य सरकार ने निर्देश दिया है कि लाभ अर्जित करने वाले PSU डिविडेंड दें। इनमें शामिल हैं:

    झारखंड स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड
    झारखंड स्टेट विवरेज कारपोरेशन लिमिटेड
    झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड
    झारखंड पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन लिमिटेड
    झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कारपोरेशन लिमिटेड
    JUDCO लिमिटेड
    रांची स्मार्ट सिटी कारपोरेशन लिमिटेड
    झारखंड एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग कारपोरेशन लिमिटेड
    ऑडिट में फंसी कंपनियां:
    कुछ PSU ने गठन के बाद से ही अपनी ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं की है। इनमें झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और झारखंड स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाइ कारपोरेशन लिमिटेड प्रमुख हैं।

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के आर्थिक संसाधनों का कुशल प्रबंधन उसकी प्राथमिकता है। यह निर्णय न केवल सरकारी राजस्व में वृद्धि करेगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा।

  • झारखंड पुलिस में सुधार की बयार, FIR दर्ज करने के निर्देश जारी

    रांची: झारखंड के पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता ने राज्यभर में पुलिस प्रशासन को नई दिशा देने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सभी जिलों के वरीय पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षकों को साफ कहा है कि उनके अधीनस्थ थानों में FIR दर्ज करने में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही, आम जनता के साथ पुलिस का व्यवहार बेहतर बनाने पर खास जोर दिया गया है।

    पुलिस महानिदेशक ने विशेष रूप से साइबर अपराध, अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) से जुड़े मामलों, मानव तस्करी और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर गंभीरता दिखाई है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इन मामलों में पीड़ित की शिकायत पर तुरंत FIR दर्ज की जाए और कार्रवाई में कोई देरी न हो।

    इसके साथ ही, जनता की शिकायतों पर लापरवाही बरतने वाले थाना प्रभारियों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। अगर किसी थाने में शिकायतकर्ता की समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता, तो लोग सीधे वरीय अधिकारियों, जैसे पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप-महानिरीक्षक, और पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकते हैं।

    पुलिस अधीक्षकों और क्षेत्रीय पुलिस उप-महानिरीक्षकों को अपने दौरे के दौरान थानों में पुलिसकर्मियों को जनता के साथ संवेदनशील और मर्यादित व्यवहार करने के लिए प्रेरित करने को कहा गया है। इसके अलावा, अपराध अनुसंधान विभाग और विशेष शाखा के पुलिस महानिरीक्षक को निर्देशित किया गया है कि वह पुलिसकर्मियों के व्यवहार पर पैनी नजर रखें। अगर किसी पुलिस अधिकारी द्वारा जनता के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आता है, तो इसकी रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक को दी जाएगी, ताकि सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।

     

  • गिरिडीह में सुदिव्य कुमार सोनू का भव्य स्वागत, मंत्री बनने के बाद पहली बार पहुंचे गृह ज़िले

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट…….

    गिरिडीह: झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू  शनिवार को मंत्री बनने के बाद पहली बार अपने गृह जिले का दौरा किया। उनके आगमन पर गिरिडीह में एक उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। झामुमो और इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न संगठनों ने उनका भव्य स्वागत किया। फूल-मालाओं से सजे सोनू का काफिला जैसे ही गिरिडीह-डुमरी पथ पर पहुंचा, समर्थकों ने जोरदार आतिशबाजी और नारेबाजी कर अपनी खुशी जाहिर की।

    सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
    महिला, पुरुष और बच्चे सुबह से ही मंत्री के स्वागत के लिए सड़कों के किनारे खड़े थे। चमरखो मोड़ से लेकर उत्सव उपवन तक हर जगह उनके स्वागत की तैयारियां जोरों पर थीं। जैसे ही उनका काफिला पहुंचा, कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। सोनू ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उपस्थित लोगों से मुलाकात की।

    परिवार ने किया पारंपरिक स्वागत
    अपने आवास पहुंचने पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का परिवारिक सदस्यों ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। उनकी पत्नी श्वेता शर्मा ने तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया। सोनू सबसे पहले अपने आवासीय मंदिर में पूजा-अर्चना करने गए, जहां से वह उत्सव उपवन में आयोजित सभा की ओर रवाना हुए।

    आवास पर मिले पार्टी के वरिष्ठ नेता

    आवास पहुंचने पर झामुमो के राज्य सभा सदस्य डॉ सरफराज अहमद, पूर्व विधायक केदार हाजरा, निजामुद्दीन अंसारी आदि ने मंत्री से मुलाकात कर उन्हें गुलदस्ता देकर अपनी खुशी का इजहार किया.

    डुमरी में भी हुआ भव्य स्वागत
    रांची से गिरिडीह के सफर के दौरान मंत्री का डुमरी चौक पर भी जोरदार स्वागत किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जो दायित्व दिया है, उसे पूरी निष्ठा से निभाऊंगा। जगरनाथ बाबू की धरती के लोगों की समस्याओं का समाधान करना मेरी प्राथमिकता है।”

    सुरक्षा और आयोजन रहा भव्य
    पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे। कोलडीहा, तिनकोनिया मोड़, बड़ा चौक, तिरंगा चौक समेत विभिन्न जगहों पर कार्यकर्ताओं ने उनका अभिनंदन किया। मंत्री ने हर जगह रुककर समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया।

    प्रमुख चेहरे रहे मौजूद
    मंत्री के स्वागत में झामुमो जिलाध्यक्ष संजय सिंह, झामुमो नेता इरशाद अहमद वारिस, प्रमिला मेहरा, शहनवाज अंसारी, सुमित कुमार,कांग्रेस नेता सतीश केडिया, तेजलाल मंडल, प्रमिला मेहरा, शिवम आजाद, अशोक विश्वकर्मा, गोपाल विश्वकर्मा, नूर अहमद अंसारी, अनिल राम, मदनलाल विश्वकर्मा, कृष्णमुरारी शर्मा, जगत पासवान, टुन्ना सिंह, रामजी यादव, मुमताज अंसारी, मो. युसूफ, मो.सदाब, समीर राज चौधरी, विकास सिन्हा, मुन्ना सिंह, राकेश कुमार, रॉकी सिंह, सईद अख्तर, पप्पू रजक, मोंगिया टीएमटी के चेयरमैन गुणवंत सिंह सलुजा, डीपीएस के निदेशक ऋषि सलुजा, चरणजीत सिंह, समेत कई प्रमुख नेताओं और शिक्षाविदों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

    गिरिडीह के नागरिकों ने जिस आत्मीयता से अपने नेता का स्वागत किया, उससे स्पष्ट है कि मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू न केवल सरकार में, बल्कि जनता के दिलों में भी खास जगह बना चुके हैं।

  • वक्फ संपत्तियों पर कब्जे और संशोधन विधेयक के खिलाफ उठी आवाज

    कोलकाता: 2006 की सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में पहचानी गई 521 से ज्यादा वक्फ संपत्तियों पर सरकारी एजेंसियों द्वारा अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। इनमें से कई संपत्तियां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), दिल्ली सरकार (DDA), रेलवे और सेना (दिल्ली कैंटोनमेंट) के कब्जे में हैं। खुद सरकार ने स्वीकार किया है कि इन संपत्तियों पर अतिक्रमण हुआ है।
    यह मामला तब और गहराया जब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद में कहा कि देशभर में 59,000 से ज्यादा वक्फ संपत्तियां अतिक्रमित हैं। निसार आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल में अकेले 11,000 से अधिक संपत्तियों पर अतिक्रमण हुआ है।
    वक्फ अधिनियम संशोधन विधेयक 2024 का विरोध
    कोलकाता में लॉयर्स फॉर वक्फ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्फ अधिनियम संशोधन विधेयक 2024 का कड़ा विरोध किया गया। अधिवक्ता शेख खुर्शीद आलम ने कहा, “वक्फ बोर्ड अपनी अतिक्रमित जमीनें वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन अफवाह फैलाई जा रही है कि वक्फ बोर्ड जहां भी हाथ रखता है, वह जमीन उसकी हो जाती है। भारत संविधान द्वारा संचालित देश है, और वक्फ संपत्तियां बिना उचित प्रक्रिया के घोषित नहीं की जा सकतीं।”
    उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड ‘भूमि हड़पने वाले’ नहीं हैं, बल्कि वे खुद अतिक्रमण का शिकार हैं।
    सरकार की कथनी और करनी में फर्क
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए आलम ने कहा कि प्रधानमंत्री का बयान गैरजिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री को संविधान की जानकारी होनी चाहिए। मोदी के बयान के बाद सोशल मीडिया और मुख्यधारा मीडिया में इस्लामोफोबिया बढ़ा है।”
    आलम ने सवाल उठाया कि सरकार, जो वक्फ बोर्ड में भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रही है, बताए कि प्रस्तावित संशोधन में कौन-सा प्रावधान भ्रष्टाचार रोकने पर केंद्रित है।
    “वक्फ हमेशा वक्फ रहेगा”
    आलम ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला दिया। अदालत ने कहा, “अगर कोई वक्फ संपत्ति लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं है, तो भी वह वक्फ ही रहेगी। वक्फ एक बार घोषित हो गया, तो वह हमेशा वक्फ रहेगा।”
    संशोधन से खत्म होगी वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता
    वकील अमार जाकी ने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक 2024 वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को खत्म कर देगा। उन्होंने कहा, “वक्फ बोर्ड हमेशा से एक स्वतंत्र संस्था रही है। यह विधेयक इसे सरकार के नियंत्रण में ले आएगा, जो संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 30 का उल्लंघन करता है।”
    विधेयक का असली मकसद
    वकील अताउल मुस्तफा ने कहा कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों पर पूंजीपतियों के कब्जे को वैध बनाने और वक्फ बोर्ड को कानूनी लड़ाई लड़ने से रोकने की साजिश है। उन्होंने कहा, “2006 में सच्चर कमेटी ने 9.4 लाख एकड़ वक्फ जमीन की पहचान की थी, जिसकी कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी। सरकार इन्हें हड़पना चाहती है।”

    प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित सभी वकीलों ने यह स्पष्ट किया कि यह विधेयक केवल मुसलमानों के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान के खिलाफ है। वकीलों ने इस बिल को वापस लेने की मांग की।

    लेखक शाहनवाज़ अख्तर
    https://enewsroom.in/kolkata-lawyers-for-waqf-amendment-bill-pm-modi/ 

  • झारखंड विधानसभा सत्र: नए चेहरों, विश्वास मत और नई रणनीतियों का संगम

    रांची: झारखंड विधानसभा का सत्र 9 से 12 दिसंबर तक चलेगा और इस बार का सत्र कई मायनों में खास होने वाला है। पहली बार कई नए विधायक सदन में कदम रखेंगे, वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार को विश्वास मत साबित करना होगा। इसके साथ ही सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के लिए अनुपूरक बजट पेश करेगी। इस सत्र में नया विधानसभा अध्यक्ष भी चुना जाएगा। इस अहम सत्र से पहले, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इंडिया गठबंधन की बैठक अपने आवास पर बुलाई है। बैठक में विधानसभा सत्र की तैयारी को लेकर चर्चा की जाएगी।

    बैठक में क्या होगी चर्चा?
    इंडिया गठबंधन की बैठक में सत्र के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंत्रियों और विधायकों को सत्र में पूरी तैयारी के साथ आने का निर्देश देंगे। दूसरी ओर, विपक्ष इस सत्र में सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा।

    विधानसभा सत्र की खास बातें
    नए चेहरों का आगमन: इस सत्र में कई नए विधायकों की एंट्री होगी, जो विधानसभा की कार्यवाही का हिस्सा बनेंगे।
    नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी खाली: पहले सत्र में नेता प्रतिपक्ष का पद खाली रहेगा क्योंकि भाजपा अभी इस पद के लिए कोई नाम तय नहीं कर पाई है।
    नई शुरुआत: नए विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव भी इस सत्र का हिस्सा होगा।
    बीजेपी कर रही हार पर मंथन
    नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर भाजपा में कोई चर्चा नहीं हुई है। पार्टी हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार की समीक्षा कर रही है। हारे हुए प्रत्याशियों से वन-टू-वन चर्चा कर हार के कारणों का पता लगाने की कोशिश की गई है।

    सत्र का कार्यक्रम
    9 दिसंबर: विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी।
    10 दिसंबर: विधायकों की शपथ के साथ नए विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा।
    11 दिसंबर: राज्यपाल का अभिभाषण और द्वितीय अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा।
    12 दिसंबर: राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस होगी और अनुपूरक बजट पर चर्चा होगी।

    यह सत्र हेमंत सोरेन सरकार के लिए बेहद अहम है। एक तरफ सरकार को विश्वास मत साबित करना है, तो दूसरी तरफ अनुपूरक बजट और नए अध्यक्ष की घोषणा जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष की पैनी नजर होगी।

  • प्लेसेज़ ऑफ़ वर्शिप एक्ट 1991 की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट 12 दिसंबर को प्लेसेज़ ऑफ़ वर्शिप एक्ट, 1991 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इस बहुप्रतीक्षित मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की विशेष बेंच करेगी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह अधिनियम न केवल मनमाना और अनुचित है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत धर्म का पालन करने के मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है।

    किसने दायर की याचिका?
    इस मामले की मुख्य याचिका 2020 में बीजेपी नेता और एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने दाखिल की थी। इसके बाद अन्य याचिकाएं, जैसे कि विश्व भद्र पुजारी पुरोहित महासंघ और डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी की ओर से भी, इस कानून को चुनौती देते हुए दाखिल की गईं।

    प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप एक्ट, 1991, 15 अगस्त 1947 की स्थिति के अनुसार धार्मिक ढांचों की यथास्थिति बनाए रखने और इनके परिवर्तन के लिए कानूनी कार्रवाई पर रोक लगाता है।

    सरकार का क्या रुख है?
    सरकार ने इस मामले में अभी तक कोई जवाब दाखिल नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट कई बार केंद्र को जवाब देने की समय सीमा बढ़ा चुका है। पिछली सुनवाई में, 11 जुलाई 2023 को, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से 31 अक्टूबर 2023 तक जवाब दाखिल करने को कहा था।

    इस बीच, ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंध समिति ने हाल ही में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है। समिति ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि इस अधिनियम को असंवैधानिक ठहराने की याचिकाओं पर निर्णय के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

    अब तक क्या हुआ?
    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई बार केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा। पिछली सुनवाई में तत्कालीन चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने भी केंद्र से जवाब मांगा था। हालांकि, केंद्र की ओर से जवाब दाखिल करने में लगातार देरी होती रही है।

    जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से वकील बृंदा ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि अधिनियम पर स्टे की मांग की गई है। इस पर चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया था कि मामला लंबित होने का मतलब यह नहीं है कि अधिनियम पर स्टे लगा है।

    आगे की राह
    अब 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में इस महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई होने जा रही है। इस फैसले के दूरगामी सामाजिक और कानूनी प्रभाव हो सकते हैं। देश की निगाहें इस पर टिकी हैं।

  • मंईयां सम्मान योजना: आवेदन के बाद भी पैसे क्यों नहीं आ रहे?

    रांची: झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मंईयां सम्मान योजना’ का सपना, जो महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का भरोसा देता है, कई लाभार्थियों के लिए अभी भी अधूरा है। वजह? तकनीकी गड़बड़ियां, बैंकिंग प्रक्रियाओं की खामियां, और आवेदन में छोटी-छोटी गलतियां।
    सरकार ने योजना की राशि 1,000 से बढ़ाकर 2,500 रुपये तो कर दी, लेकिन सवाल यह है कि जिनके खाते में पैसे नहीं पहुंच रहे, उनके लिए यह बढ़ोतरी भी क्या मायने रखती है

    क्या हो सकते हैं पैसे न मिलने के कारण?
    इस योजना के तहत आर्थिक मदद पाने के लिए आवेदन तो लाखों महिलाओं ने किया, लेकिन पैसे नहीं मिलने की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की मानें तो इसके कई कारण हो सकते हैं:
    1. गलत खाता नंबर: अगर आवेदन में बैंक खाता नंबर गलत डाला गया है, तो पैसे अटक जाएंगे।
    2. आईएफएससी कोड की गलती: कई लाभार्थियों ने अपने बैंक के आईएफएससी कोड में गड़बड़ी की है, जिससे ट्रांजेक्शन फेल हो जाता है।
    3. बैंक खाता और आधार की लिंकिंग: डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) तभी काम करेगा, जब बैंक खाता आधार से लिंक

    कैसे करें समाधान?
    अगर आप भी उन लाभार्थियों में से हैं, जिनके खाते में पैसे नहीं आ रहे, तो पहले यह जांच करें कि आपका डीबीटी चालू है या नहीं।
    डीबीटी स्टेटस कैसे चेक करें?
    1. NPCI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    2. होम पेज पर कंज्यूमर ऑप्शन पर क्लिक करें।
    3. नए पेज पर भारत आधार सीडिंग इनेबलर (BASE) विकल्प पर क्लिक करें।
    4. यहां आपको मैप्ड स्टेटस पर क्लिक करके आधार नंबर भरना होगा।
    5. डीबीटी स्टेटस चेक करें।
    ध्यान रहे: अगर स्टेटस में ‘इनेबल’ की जगह कुछ और लिखा है, तो आपको बैंक जाकर इसे ठीक करवाना

     

  • IAS पूजा सिंघल को बड़ी राहत: मनी लॉन्ड्रिंग केस में 28 महीने बाद मिली जमानत

    रिपोर्टिंग: परवेज़ आलम………

    रांची: निलंबित IAS अधिकारी पूजा सिंघल को 28 महीने बाद बड़ी कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। झारखंड की पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें जमानत  दी है। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मई 2022 में गिरफ्तार किया था।  दो-दो लाख के निजी मुचलके और पासपोर्ट अदालत में जमा करने जैसी शर्तों के साथ उन्हें जमानता दी गयी है ।

    मनरेगा घोटाले का साया और सिंघल की गिरफ्तारी

    पूजा सिंघल का नाम उस समय सुर्खियों में आया, जब ईडी ने 6 मई 2022 को मनरेगा घोटाले की जांच के दौरान उनके ठिकानों पर छापेमारी की। क्या पाया गया? करोड़ों की नकदी। 11 मई को गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो गया कि मामला सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि क्या सत्ता के गलियारों में इतनी ताकत थी, जो सिंघल को अब तक बचाए हुए थी?

    एक अधिकारी का पतन

    झारखंड की राजनीति और प्रशासन में पूजा सिंघल का कद बड़ा था। उन्होंने उद्योग सचिव, खनन सचिव, और कृषि सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले। झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (JSMDC) की चेयरमैन रहीं और खूंटी जिले में डीसी रहते हुए मनरेगा योजना का संचालन किया। लेकिन, मनरेगा घोटाले ने उनके पूरे करियर पर सवाल खड़े कर दिए ।

    जमानत का कानून

    पूजा सिंघल ने जमानत के लिए BNS की धारा 479 का सहारा लिया। इस धारा के तहत, यदि यह किसी आरोपी का पहला अपराध है और उसने अधिकतम सजा का एक तिहाई हिस्सा जेल में बिताया हो, तो वह जमानत का हकदार होता है।  28 महीने जेल में बिताने के बाद पूजा सिंघल के लिए यह राहत निश्चित रूप से बड़ी है।

  • झारखंड सरकार को योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जिसके लिए विभागों को अनुदान राशि वापस करने का निर्देश

    झारखंड सरकार को वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बजट से अलग स्वीकृत योजनाओं पर खर्च करने के लिए ₹10,282 करोड़ की आवश्यकता है। इसे पूरा करने के लिए, सरकार ने सभी विभागों से बची हुई राशि वापस करने (सरेंडर) को कहा है। इसके लिए अंतिम तिथि 9 दिसंबर तय की गई है। सबसे बड़ा खर्च झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना पर होगा, जिसमें ₹7,314 करोड़ की जरूरत है। इसके अलावा, बिजली शुल्क में छूट के लिए ₹1,810 करोड़, बिरसा फसल बीमा योजना के लिए ₹250 करोड़ और बिजली टैरिफ सब्सिडी के लिए ₹767 करोड़ की आवश्यकता है।

    विभागों से धन जुटाने की योजना

    वित्त विभाग ने अनुमान लगाया है कि विभागों से लगभग ₹8,200 करोड़ जुटाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, झारखंड मिनरल्स बियरिंग लैंड सेस से ₹1,600 करोड़ और जिला खनिज फाउंडेशन से ₹490 करोड़ मिलने की उम्मीद है। अक्टूबर 2024 में लागू किए गए झारखंड मिनरल्स बियरिंग लैंड सेस से अब तक ₹400 करोड़ जमा हुए हैं और हर महीने ₹300 करोड़ मिलने की संभावना है।

    धन वापसी (सरेंडर) के नियम

    सरकार ने तय किया है कि जिन विभागों ने बजट का 50% से अधिक खर्च किया है, उन्हें 5% राशि सरेंडर करनी होगी। वहीं, 30-50% खर्च करने वाले विभागों को 10% और 30% से कम खर्च करने वाले विभागों को 20% राशि वापस करनी होगी। केंद्र प्रायोजित योजनाओं से भी फंड सरेंडर करने का निर्देश दिया गया है।

    प्रमुख विभाग और योजनाएं

    सरेंडर की प्रक्रिया में योजना एवं विकास, कृषि, पशुपालन, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और जल संसाधन जैसे प्रमुख विभागों को शामिल किया गया है।

  • हेमंत कैबिनेट की पहली बैठक में मंत्रियों को सौंपे गए कई कार्य, इन मुद्दों पर हुई चर्चा।

     

    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लगातार दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद अपनी पहली कैबिनेट बैठक की। यह बैठक झारखंड मंत्रालय, रांची में आयोजित की गई, जिसमें सभी मंत्री उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की और मंत्रियों को विभिन्न कार्य सौंपे। उन्होंने अपने विभागों में सुधार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट में प्रस्ताव भेजने से पहले उसे पूरी तरह से संतुष्ट होकर पेश किया जाए और इसके लिए वित्त, विधि, और कार्मिक विभागों से मार्गदर्शन लिया जाए।

    मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देश:

    • सभी मंत्री अपने विभागीय क्षेत्रीय कार्यालयों का दौरा कर कार्यों का निरीक्षण करें।
    • योजनाओं के लाभार्थियों से मिलकर उनकी राय और सुझाव प्राप्त करें।
    • योजनाओं के लाभ और कमियों का विश्लेषण करें तथा लंबित योजनाओं को जल्द पूरा करें।
    • जिन योजनाओं में बदलाव की आवश्यकता है, उनके लिए नए प्रस्ताव तैयार करें।
    • दूरस्थ, आदिवासी, और पहाड़ी क्षेत्रों में योजनाओं का विस्तार सुनिश्चित करें।
    • राजस्व बढ़ाने के लिए स्रोतों की समीक्षा करें।
    • सरकारी भवनों का बेहतर उपयोग करें और अनावश्यक योजनाओं से बचें।
    • वर्ष 2025-26 के लिए नई योजनाओं की योजना बनाएं।
    • कर्मचारियों की पदोन्नति और स्थानांतरण की समीक्षा करें।
    • कोर्ट केसों की स्थिति का अध्ययन कर सरकारी पक्ष को मजबूत करें।
    • जिलों का दौरा कर स्थानीय समस्याओं का समाधान करें।
    • जनप्रतिनिधियों से संवाद बनाए रखें।
    • विभागीय उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए प्रेस का उपयोग करें।

    मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे केवल अपने क्षेत्र ही नहीं, अन्य जिलों का भी भ्रमण करें और वहां की समस्याओं को समझकर मुख्यमंत्री कार्यालय को सूचित करें। इस बैठक के जरिए सरकार ने अपनी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने और विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।