16 साल पुराने अफीम खेती मामले में 27 आरोपी बरी, विशेष अदालत ने कहा- आरोप साबित नहीं हुए

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गिरिडीह: झारखंड के गिरिडीह में 16 वर्ष पुराने अफीम की अवैध खेती और कारोबार से जुड़े मामले में विशेष न्यायाधीश प्रथम कंवलजीत चोपड़ा की अदालत ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए 27 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं हो सका, इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाता है।

2010 में दर्ज हुआ था मामला

बचाव पक्ष के अधिवक्ता महीप मंयक ने बताया कि 14 फरवरी 2010 को लोकाय नयनपुर थाना में तत्कालीन अवर निरीक्षक आर.के. शाह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में लुकाई नयनपुर गांव के 29 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

पुलिस का आरोप था कि आरोपी अपनी जमीन पर अवैध रूप से अफीम की खेती करते थे और उसका कारोबार भी करते थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 8 किलोग्राम अफीम बरामद करने का दावा किया था। जांच पूरी होने के बाद विशेष न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया।

बचाव पक्ष ने उठाए कई तकनीकी सवाल

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से चार गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता महीप मंयक ने अदालत में दलील दी कि पुलिस द्वारा जब्त किए गए मादक पदार्थ को कानून के अनुरूप प्रमाणित नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि जांच और साक्ष्य में कई ऐसी खामियां हैं, जिनसे अभियोजन के पूरे मामले पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि भोले-भाले ग्रामीण पिछले 16 वर्षों से अदालत के चक्कर लगा रहे थे, जबकि अभियोजन पक्ष समयबद्ध और प्रभावी तरीके से मामले को साबित करने में असफल रहा। मुकदमे के दौरान एक आरोपी की मृत्यु भी हो गई।

अभियोजन पक्ष ने क्या कहा?

अपर लोक अभियोजक अशोक दास ने अदालत में कहा कि मादक पदार्थों से जुड़े अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने अदालत से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

अदालत ने क्यों किया बरी?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों से कई संदेह उत्पन्न होते हैं। आपराधिक मामलों में संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाता है। इसी आधार पर अदालत ने 27 आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।

16 साल बाद मिली राहत

मामले के कई आरोपी अब 80 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं। लंबे समय तक मुकदमा झेलने के बाद अदालत का फैसला आने पर आरोपियों और उनके परिजनों में राहत और खुशी का माहौल देखा गया।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता महीप मंयक ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह “न्याय की जीत” है और अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष फैसला सुनाया।

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