गिरिडीह: झारखंड के हाडी जाति विकास मंच ने एक बार फिर राज्य सरकार से अपनी लंबित मांगों पर त्वरित और सकारात्मक कार्रवाई की मांग की है। मंच की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित ज्ञापन में सात सूत्रीय मांगों को दोहराते हुए कहा गया है कि वर्षों से सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जूझ रहे हाडी समुदाय को अभी तक न्याय नहीं मिला है।
यह ज्ञापन डीसी गिरिडीह के माध्यम से दिनांक 24 जून 2025 को सौंपा गया, जिसमें मंच की तरफ से पहले 25 जनवरी 2025 को प्रस्तुत की गई मांगों को एक बार फिर से याद दिलाया गया है। ज्ञापन में मंच ने उल्लेख किया है कि हाडी जाति आज भी मुख्यधारा से वंचित है और उन्हें विकास योजनाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- राज्य के विभिन्न जिलों में निवासरत हाडी जाति के लोगों को स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र (स्थानीय नीति 1932) के आधार पर निर्गत किया जाए।
- राज्य के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति भूमिहीन हाडी जाति परिवारों को पांच डिसमिल भूमि मुफ्त में उपलब्ध कराई जाए।
- हाडी जाति को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल किया जाए।
ज्ञापन में कहा गया है कि हाडी जाति की पहचान, परंपरा और रहन-सहन जनजातीय समाज से पूरी तरह मेल खाती है, फिर भी आज तक इस समुदाय को संवैधानिक दर्जा नहीं मिल पाया है। हाडी जाति विकास मंच का यह ज्ञापन सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है। मंच का कहना है कि कई बार सरकार से मांग करने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे समुदाय में निराशा है। ज्ञापन के अंत में मंच ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि वह स्वयं इन मांगों पर गौर करें और उचित निर्देश संबंधित विभागों को दें ताकि हाड़ू जाति को उसका हक और सम्मान मिल सके।
यह ज्ञापन गिरिडीह के हाडी जाति प्रतिनिधियों द्वारा सौंपा गया, जिसमें हस्ताक्षरकर्ता के रूप में राजेश कुमार हाड़ी (अध्यक्ष हाड़ी जाति विकास मंच) का नाम उल्लिखित है।
राज्य सरकार यदि हाडी जाति की मांगों को गंभीरता से लेती है, तो यह समुदाय के सशक्तिकरण और सामाजिक समरसता की दिशा में एक निर्णायक कदम होगा।







