By : परवेज़ आलम.
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रांची ब्यूरो | 18 जुलाई 2025
झारखंड में नगर निकाय चुनाव में लगातार हो रही देरी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य प्रशासन लोकतंत्र की मूल भावना और कानून के शासन (Rule of Law) का गला घोंट रहा है।
अदालत ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को 25 अगस्त 2025 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है ताकि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सके। इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये को “जानबूझकर टालमटोल करने वाला और गैर-जिम्मेदार” बताया।
❖ अदालत की तीखी टिप्पणियां:
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा:
“राज्य सरकार ने न्यायालय के स्पष्ट आदेश की अवहेलना करते हुए संवैधानिक तंत्र को ठप्प कर दिया है। यह न केवल अदालत की अवमानना है, बल्कि यह लोकतंत्र और विधिसम्मत शासन के खिलाफ एक गंभीर हमला है।”
❖ मुख्य सचिव को अवमानना का नोटिस:
पूर्व पार्षद रोशनी खलखो की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सरकार ने पहले खुद चार महीने में चुनाव कराने की गारंटी दी थी, लेकिन वह मियाद भी खत्म हो चुकी है। अब सरकार यह तर्क दे रही है कि राज्य चुनाव आयोग से मतदाता सूची नहीं मिली है, जबकि आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि 25 मार्च से राज्य चुनाव आयुक्त का पद रिक्त है, जिसके कारण सूची जारी नहीं हो सकी।
इस पर अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा:
“जब चुनाव आयुक्त की नियुक्ति राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, तो नियुक्ति में देरी क्यों? यह अदालत के आदेश की अवमानना का एक नायाब तरीका है।”
❖ सरकार का रवैया लोकतंत्र विरोधी: याचिकाकर्ता.
याचिकाकर्ता के वकील विनोद सिंह ने कहा कि यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार चुनाव प्रक्रिया में जानबूझकर देरी कर रही है। इससे स्थानीय निकायों का कामकाज प्रभावित हो रहा है और जनता की भागीदारी को नजरअंदाज किया जा रहा है।
❖ पहले भी मिला था आदेश, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई.
- 4 जनवरी 2024 को हाईकोर्ट ने सरकार को 3 सप्ताह के भीतर निकाय चुनाव की अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया था।
- सरकार ने इस आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील की, जिसे खंडपीठ ने खारिज कर दिया।
- इसके बाद मुख्य सचिव की ओर से अदालत को 4 महीने में चुनाव कराने की अंडरटेकिंग दी गई थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।
❖ चुनाव न होने से अफसरों के हवाले प्रशासन.
चुनाव न होने के चलते फिलहाल राज्य के 49 नगरीय निकायों का संचालन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बजाय नियुक्त अधिकारियों के हाथों में है। इनमें शामिल हैं:
- नगर निगम (9): रांची, धनबाद, हजारीबाग, मेदिनीनगर, गिरिडीह, देवघर, चास, आदित्यपुर, मानगो।
- नगर परिषद (21): चाईबासा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, रामगढ़ आदि।
- नगर पंचायत (19): जामताड़ा, खूंटी, चाकुलिया, लातेहार, हुसैनाबाद आदि।
❖ ट्रिपल टेस्ट रिपोर्ट का बहाना?
राज्य सरकार बार-बार निकाय चुनाव में देरी के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया की अधूरी रिपोर्ट को जिम्मेदार ठहरा रही है। हालांकि कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठाया है कि आखिर इतनी लंबी अवधि में प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की गई?
अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी, जिसमें मुख्य सचिव के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए जा सकते हैं। अगर कोर्ट को सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं लगा, तो यह मामला राज्य के लिए बड़ा संवैधानिक संकट बन सकता है।







