द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
गिरिडीह : महिलाओं से जुड़े मामलों के त्वरित और न्यायपूर्ण समाधान को लेकर जिला प्रशासन ने ठोस पहल शुरू कर दी है। उपायुक्त रामनिवास यादव ने अपने कार्यालय कक्ष में ‘नारी अदालत’ से संबंधित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की, जिसमें इसकी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि महिलाओं को घरेलू और सामाजिक विवादों में शीघ्र, पारदर्शी और संवेदनशील न्याय मिल सके। पिछले माह प्राप्त मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। जिन प्रकरणों का निष्पादन हो चुका है, उनकी जानकारी साझा की गई, वहीं लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने पर बल दिया गया।
उपायुक्त ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर महिलाएं अक्सर छोटे-छोटे लेकिन गंभीर प्रभाव वाले मामलों—जैसे उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, संपत्ति विवाद, पारिवारिक कलह या अधिकारों की कटौती—का सामना करती हैं। ऐसे मामलों में उन्हें त्वरित और सुलभ वैकल्पिक शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध कराना ही ‘नारी अदालत’ की मूल भावना है।
उन्होंने निर्देश दिया कि हर शिकायत का पंजीकरण पूर्ण पारदर्शिता के साथ किया जाए, दोनों पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए और पीड़ित महिला की गरिमा एवं सुरक्षा सर्वोपरि रखी जाए।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ग्राम स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस मंच की जानकारी प्राप्त कर सकें और आवश्यकता पड़ने पर इसका लाभ उठा सकें। प्रशासन का मानना है कि जागरूकता ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है।
उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि ‘नारी अदालत’ केवल एक मंच नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा का माध्यम है। इसे और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि प्रत्येक पीड़ित महिला को समय पर न्याय मिल सके और समाज में सकारात्मक संदेश जाए।
बैठक में अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारी गिरिडीह, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।






