HomeJharkhandGiridihभाकपा (माओवादी) को गिरिडीह में बड़ा झटका

भाकपा (माओवादी) को गिरिडीह में बड़ा झटका

 

एरिया कमेटी सदस्य शिवलाल हेम्ब्रम और पत्नी सरिता हांसदा ने किया आत्मसमर्पण

परवेज़ आलम.

The News Post4u.

गिरिडीह: झारखंड में नक्सल मोर्चे पर पुलिस को मिली एक बड़ी सफलता! भाकपा (माओवादी) संगठन के एरिया कमेटी सदस्य शिवलाल हेम्ब्रम उर्फ शिवा और उनकी पत्नी दस्ता सदस्य सरिता हांसदा उर्फ उर्मिला ने बुधवार को गिरिडीह पुलिस के समक्ष स्वेच्छा से आत्मसमर्पण कर दिया।

दोनों ने झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति “नई दिशा – एक नई पहल” से प्रभावित होकर हथियार डालने का फैसला किया।
आत्मसमर्पण का यह क्षण गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार, उपायुक्त  रामनिवास यादव, अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान) सुरजीत सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक, सीआरपीएफ 154 बटालियन कमांडेंट अमित सिंह, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी डुमरी और अन्य पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में दर्ज हुआ।

कौन हैं शिवलाल और सरिता.

शिवलाल हेम्ब्रम निवासी टेसाफुली, थाना मधुबन — संगठन में एरिया कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय थे।
वहीं उनकी पत्नी सरिता हांसदा (उम्र 19 वर्ष), निवासी चतरो, थाना खुखरा — दस्ते की सक्रिय सदस्य थीं।

पुलिस के अनुसार, शिवलाल वर्ष 2017 में नक्सली संगठन से जुड़ा था। शुरुआत में उसने संतरी और रसोइए का काम किया, लेकिन जल्द ही वह माओवादी कमांडर करम दा उर्फ विवेक का अंगरक्षक बन गया।
वर्ष 2022 में उसे एरिया कमेटी सदस्य के पद पर पदोन्नत किया गया।
संगठन में रहते हुए शिवलाल ने हथियार और विस्फोटक छिपाने, ग्रामीणों से लेवी वसूली और पुलिस बलों पर हमलों जैसी कई नक्सली कार्रवाइयों में हिस्सा लिया। आत्मसमर्पण के बाद दोनों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिया जाएगा।

सरिता हांसदा को 2020 में ‘जया दी’ द्वारा संगठन में शामिल किया गया था।
दोनों ने वर्ष 2024 में विवाह किया, लेकिन बीते महीनों में संगठन के शीर्ष कमांडरों द्वारा लगातार शोषण और ग्रामीणों पर अत्याचार से दोनों का मोहभंग हो गया। सरिता हांसदा के विरुद्ध भी कई नक्सली मामलों में प्राथमिकी दर्ज है।

मुख्यधारा की ओर वापसी.

गिरिडीह पुलिस ने बताया कि संगठन के प्रति मोहभंग और लगातार पुलिस दबाव के चलते दोनों ने आत्मसमर्पण का निर्णय लिया।
पुलिस लगातार उनके परिजनों के संपर्क में थी और उन्हें समझा-बुझाकर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित कर रही थी।

अब आत्मसमर्पण के बाद दोनों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सभी लाभ दिए जाएंगे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शिवलाल के खिलाफ कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं — जिनमें हत्या, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, यूएपीए और आर्म्स एक्ट की धाराएं शामिल हैं।
सरिता के विरुद्ध भी कई नक्सली मामलों में प्राथमिकी दर्ज है।

पुलस अधीक्षक का बयान.

पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने कहा —

“शिवलाल और सरिता का आत्मसमर्पण माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका है। इससे न सिर्फ संगठन कमजोर होगा, बल्कि अन्य उग्रवादियों को भी मुख्यधारा में लौटने की प्रेरणा मिलेगी।”

उन्होंने इस आत्मसमर्पण को गिरिडीह पुलिस के लिए नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया।

अब नई दिशा में नया जीवन.

दोनों नक्सली दंपती ने यह साफ कहा —

“अब हथियार नहीं, हम समाज और परिवार के साथ नई जिंदगी शुरू करेंगे।”

झारखंड सरकार की पहल “नई दिशा – एक नई पहल” एक बार फिर कारगर साबित हुई है —
जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूंजती थी, अब वहाँ मुख्यधारा में लौटने की उम्मीदें पनप रही हैं।

 

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