HomeJharkhandGiridihहरितालिका तीज: जब आस्था और उत्सव ने पूरे शहर को तीजमय बना...

हरितालिका तीज: जब आस्था और उत्सव ने पूरे शहर को तीजमय बना दिया

चन्दन पांडेय.

Edited By: परवेज़ आलम.

द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क

गिरिडीह की सुबह आज कुछ अलग थी। शहर की गलियों में रंग-बिरंगे परिधानों में सजी महिलाएं, हाथों में पूजा की थालियां और चेहरों पर भक्ति का तेज़। यह नज़ारा बता रहा था कि आज हरितालिका तीज है—एक ऐसा पर्व, जिसमें सुहागिनें निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं।

सुबह से ही घर-घर में तैयारियां हो रही थीं। कोई पूजा की थाली सजा रहा था, तो कोई सोलह श्रृंगार में जुटा था। कई महिलाएं मंदिरों का रुख करती दिखीं। काली मंदिर, शिवालय और मोहल्ले के छोटे-छोटे देवस्थल आस्था के केंद्र बन गए।

पूजा-अर्चना के बीच जब तीज व्रत की कथा का श्रवण हुआ तो माहौल और भी भावुक हो गया। पौराणिक कथा के अनुसार, हिमवान की पुत्री पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। तभी से इस व्रत को पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की समृद्धि के लिए किया जाता है।

इस दौरान कई महिलाओं ने अपनी भावनाएं भी व्यक्त कीं।
उदनाबाद की ममता देवी ने कहा – “यह व्रत मेरे लिए सिर्फ पति की लंबी आयु की कामना नहीं है, बल्कि यह हमारी परंपरा और विश्वास से भी जुड़ा है। निर्जला व्रत कठिन है, लेकिन आस्था से सब आसान लगता है।”

वहीं नवविवाहिता सुमन कुमारी ने बताया – “यह मेरा पहला तीज है। मां और दादी से सुना था कि इस व्रत का महत्व कितना बड़ा है। आज खुद करने का सौभाग्य मिला, तो मन में एक अलग ही खुशी है।”

पूरे दिन मंदिरों में महिलाओं की टोली भक्ति-गीत गाती और आरती करती नजर आई। कोई ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगा रहा था, तो कोई ‘तेजस्विनी पार्वती माता’ के भजन गा रहा था।

गिरिडीह की फिजा में आज आस्था और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला। तीज ने शहर को सिर्फ धार्मिक रंगों से नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव की डोर से भी बांध दिया।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Most Popular