द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
गिरिडीह : आज पूरे झारखंड, खासकर गिरिडीह जिले में मिलाद-उन-नबी का पर्व बड़े ही अकीदत और जोश-ओ-ख़रोश के साथ मनाया गया। इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-उल-अव्वल की 12वीं तारीख को पैगंबर हज़रत मोहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम के जन्मदिन की खुशी में यह पर्व मनाया जाता है।
सुबह से ही शहर की गलियों और चौक-चौराहों पर जश्न का माहौल देखने को मिला। मौलाना आज़ाद चौक, बीबीसी रोड, स्टेशन रोड, विट्टी बाज़ार, कोल्डीहा, भंडारीडीह, मोहनपुर, बरवाडीह और बुढ़ियाखाद समेत जिलेभर में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बड़े-बड़े जुलूस निकाले। इन जुलूसों में नन्हें बच्चे से लेकर बुज़ुर्ग तक शामिल हुए और इस्लामी परचम लहराते नज़र आए।
गिरिडीह के विधायक और राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू भी मौलाना आज़ाद चौक से लेकर बरवाडीह करबला मैदान तक जुलूस में शरीक हुए और क़ियादत की। उनके साथ इरशाद अहमद वारिस, हाजी सईद अख़्तर, मो. चाँद सहित कई अन्य मुस्लिम रहनुमा भी मौजूद थे।
करबला मैदान में एक भव्य जलसे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उलेमा, इमाम और वक्ताओं ने लोगों को संबोधित किया। उन्होंने पैगंबर मोहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम की शिक्षाओं को मानवता के लिए अनमोल बताया। वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर का जीवन इंसानियत, समानता, मोहब्बत और भाईचारे की मिसाल है, जिसे अपनाना आज के समय की सबसे बड़ी ज़रूरत है।
इतिहास के पन्नों को देखें तो 570 ईस्वी में मक्का की पवित्र धरती पर हज़रत मोहम्मद सलल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्म हुआ था। उन्होंने ताउम्र लोगों को नफरत छोड़कर अमन और इंसाफ़ की राह अपनाने की शिक्षा दी।
आज के दिन मस्जिदों और मदरसों में कुरान-ख़्वानी हुई, विशेष दुआएं की गईं और जुलूसों के ज़रिए मोहब्बत और भाईचारे का संदेश दिया गया। पूरा शहर रोशनी और सजावट से जगमगाता नज़र आया। बच्चे, नौजवान और बुज़ुर्ग सभी ने इस दिन को उत्साह और श्रद्धा से मनाया और यह संकल्प लिया कि पैगंबर के बताए रास्ते पर चलकर समाज में मोहब्बत और इंसानियत को बढ़ावा देंगे।
आज जब दुनिया में नफरत और बंटवारे की आवाज़ें तेज हो रही हैं, मिलाद-उन-नबी हमें यह याद दिलाता है कि मोहम्मद साहब की असल तालीम अमन, बराबरी और इंसानियत के लिए थी।







