अस्पताल की सेवाएं चलाने वाले हाथ सड़क पर, सदर अस्पताल में बेमियदी धरना शुरू

द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

गिरिडीह : जिस सदर अस्पताल में रोज़ सैकड़ों मरीज़ इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, उसी अस्पताल परिसर में आज काम करने वाले हाथों ने न्याय की गुहार लगाई। गिरिडीह सदर अस्पताल में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों ने अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। यह आंदोलन जेएलकेएम के बैनर तले चल रहा है।

धरने पर बैठे कर्मियों का साफ़ कहना है—
“जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक यह आंदोलन खत्म नहीं होगा।”

आंदोलनरत कर्मियों का आरोप है कि महीनों से उनका वेतन बकाया है। ईपीएफ, ईएसआई और पूर्व में की गई कटौतियों की राशि अब तक नहीं मिली है। सरकार द्वारा तय समय पर वेतन और बोनस का भुगतान नहीं होने से कर्मी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कई परिवारों के सामने रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करना तक मुश्किल हो गया है।

कर्मियों ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में सभी पदों पर कार्यरत कर्मियों को नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराना, तकनीकी डिग्रीधारी कर्मचारियों को कुशल कामगार की श्रेणी में शामिल कर उचित वेतन देना और हर माह की 7 तारीख तक मानदेय का भुगतान सुनिश्चित करना शामिल है।

इसके साथ ही अनुत्रिन कंप्यूटर ऑपरेटरों के स्किल टेस्ट का परिणाम शीघ्र जारी कर पद बहाल करने की मांग उठाई गई है। कर्मियों ने यह भी कहा कि सिविल सर्जन द्वारा सभी प्रखंडों के प्रभारियों को हर माह की 5 तारीख तक उपस्थिति (एबसेंटी) पर हस्ताक्षर के लिए बाध्य किया जाए, ताकि वेतन भुगतान में देरी न हो।

धरना स्थल पर मौजूद कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। उन्होंने साफ़ कहा कि ज़रूरत पड़ी तो अस्पताल से लेकर जिला मुख्यालय तक संघर्ष का दायरा बढ़ाया जाएगा।

गिरिडीह सदर अस्पताल में शुरू हुआ यह धरना सिर्फ़ वेतन का सवाल नहीं है, बल्कि उन कर्मियों की आवाज़ है, जिनके भरोसे स्वास्थ्य व्यवस्था चलती है, लेकिन जिनकी मेहनत का हिसाब समय पर नहीं दिया जाता।

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