HomeJharkhandGiridihबीमा कानून संशोधन के खिलाफ कर्मचारी संघ मुखर

बीमा कानून संशोधन के खिलाफ कर्मचारी संघ मुखर

द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

 गिरिडीह : 71वें जीवन बीमा व्यवसाय राष्ट्रीयकरण दिवस के मौके पर 19 जनवरी 2026 को अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ, गिरिडीह शाखा इकाई की ओर से शाखा परिसर में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बीमा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कर्मचारी नेता मौजूद रहे।

प्रेस वार्ता में अध्यक्ष संजय शर्मा, सचिव धर्म प्रकाश, संयुक्त सचिव अनुराग मुर्मू, राजेश कुमार उपाध्याय, विजय कुमार, उपाध्यक्ष कुमकुम बाला वर्मा और उमानाथ झा उपस्थित थे।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंडलीय संयुक्त सचिव सह शाखा सचिव धर्म प्रकाश ने जीवन बीमा के राष्ट्रीयकरण के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 19 जनवरी 1956 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से जीवन बीमा व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण किया था। इसके बाद 1 सितंबर 1956 को 245 से अधिक देसी-विदेशी निजी बीमा कंपनियों का अधिग्रहण कर भारतीय जीवन बीमा निगम—एलआईसी की स्थापना की गई।

उन्होंने बताया कि एलआईसी की स्थापना का मूल उद्देश्य था—
“जनता का पैसा, जनता के लिए” और आम नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना। महज 5 करोड़ रुपये की पूंजी से शुरू हुई एलआईसी ने अपने उद्देश्यों को पूरी मजबूती से निभाया है।

धर्म प्रकाश ने आंकड़ों के जरिए एलआईसी की भूमिका को सामने रखा। उन्होंने बताया कि

  • 31 मार्च 2025 तक, एलआईसी ने देश के आधारभूत संरचना विकास में 54 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है।

  • एलआईसी की कुल परिसंपत्तियां 56 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी हैं।

  • हर वर्ष एलआईसी आयकर, जीएसटी सहित विभिन्न माध्यमों से 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का योगदान भारतीय राजकोष में दे रही है।

  • पिछले वित्तीय वर्ष में एलआईसी ने 230 लाख बीमा दावों का भुगतान किया।

  • एलआईसी का शुद्ध लाभ 48,151 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18.38 प्रतिशत अधिक है।

उन्होंने यह भी बताया कि 20 जनवरी 2025 को एलआईसी ने एक ही दिन में 5,88,160 बीमा पॉलिसियां बेचकर ग्रीनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया। आज एलआईसी दुनिया का तीसरा सबसे शक्तिशाली ब्रांड बन चुका है और

  • प्रीमियम में 57 प्रतिशत,

  • तथा पॉलिसियों की संख्या में 63 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ बीमा बाजार में अग्रणी बना हुआ है।

हालांकि, प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर गहरी चिंता भी जताई गई। धर्म प्रकाश ने कहा कि केंद्र सरकार ने “सबका बीमा, सबकी सुरक्षा” के नाम पर बीमा कानून संशोधन बिल 2025 पारित किया है, जिसके तहत बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही कंपोजिट और कैपटिव इंश्योरेंस जैसी नई अवधारणाएं लाई जा रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के ये फैसले जीवन बीमा के राष्ट्रीयकरण के मूल उद्देश्य को कमजोर करेंगे और देश का बीमा क्षेत्र 1956 से पहले वाली निजी मुनाफाखोरी की स्थिति की ओर लौट सकता है।

अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ ने बताया कि हाल ही में भुवनेश्वर में संपन्न 27वें राष्ट्रीय अधिवेशन में यह सर्वसम्मति से तय किया गया है कि केंद्र सरकार के इन फैसलों के खिलाफ जोरदार और लोकतांत्रिक संघर्ष किया जाएगा, ताकि एलआईसी की सार्वजनिक और जनकल्याणकारी भूमिका को सुरक्षित रखा जा सके।

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