Blog

  • झारखंड 2024: सीएम को हुई जेल और भाजपा हुई फ़ेल!

    परवेज़ आलम की खास रपट ……………..

    2024  झारखंड के लिए केवल एक चुनावी साल नहीं था, बल्कि सियासत का ऐसा रंगमंच था, जहां हर दिन एक नया ट्विस्ट देखने को मिला। जनवरी से शुरू हुई उथल-पुथल नवंबर में जाकर शांत हुई, लेकिन इस दौरान झारखंड ने इतिहास भी बनाया और राजनीति के सबसे दिलचस्प पल भी देखे।

    हेमंत सोरेनकी गिरफ्तारी ।

    31 जनवरी 2024, झारखंड की राजनीति और भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में दर्ज हो गया। पहली बार किसी मौजूदा मुख्यमंत्री को केंद्रीय जांच एजेंसी ने गिरफ्तार किया। ईडी के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवास पर सात घंटे पूछताछ की और फिर रात में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले 29 जनवरी को ईडी ने दिल्ली में शांति निकेतन स्थित उनके आवास, झारखंड भवन और उनके पिता शिबू सोरेन के घर पर छापेमारी की थी। लेकिन हेमंत सोरेन को ढूंढ नहीं पाई । 30 जनवरी को वे अचानक इंडिया गठबंधन के विधायकों के साथ रांची में बैठक करते दिखे।

    चंपाई सोरेन का मुख्यमंत्री बनना।

    31 जनवरी की रात हेमंत सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा। उनकी गिरफ्तारी के बाद गठबंधन ने चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री चुना। पांच महीने तक राज्य की कमान चंपाई सोरेन के हाथ में रही

    5 महीने बाद जेल रिहाई और हेमंत की वापसी।

    28 जून 2024 को झारखंड हाई कोर्ट से हेमंत सोरेन को जमानत मिली। जेल से बाहर आते ही उन्होंने अपने नए लुक से सबको चौंका दिया। लंबे बाल और दाढ़ी में वे अपने पिता शिबू सोरेन की झलक दे रहे थे। उनकी रिहाई के साथ ही गठबंधन में सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गईं। और आखिरकार, 4 जुलाई को हेमंत सोरेन ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली ।

    चुनाव और गठबंधन की जीत।

    2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। जेएमएम-कांग्रेस-आरजेडी और सीपीआई-एमएल के साथ मिलकर गठबंधन ने 81 में से 56 सीटों पर जीत दर्ज की। 28 नवंबर को हेमंत सोरेन ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

    बीजेपी के लिए निराशाजनक रहा साल।

    2024 बीजेपी की हार का साल भी साबित हुआ। लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को झटका लगा, और विधानसभा चुनाव में उनकी हार ने झारखंड में उनकी स्थिति और कमजोर कर दी।

    झारखंड की राजनीति में 2024 का साल दिखाता है कि लोकतंत्र में एक दिन भी कितना निर्णायक हो सकता है। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी से लेकर उनकी वापसी तक, सत्ता के हर पहलू में सस्पेंस, ड्रामा और नई उम्मीदें देखने को मिलीं।

    झारखंड की राजनीति को समझने के लिए इस साल को हमेशा याद किया जाएगा।
    तो दोस्तों, कैसी लगी ये कहानी ? कमेंट में अपनी राय जरूर दीजिएगा।

  • गिरिडीह : हाई लेवल प्लानिंग से जेवर दुकान मे लाखों की चोरी

    गिरिडीह : हीरोडीह थाना क्षेत्र के कोदम्बरी इलाके में सोमवार रात चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है। चोरों ने आरएस ज्वेलर्स और वंदना ज्वेलर्स का शटर तोड़कर लाखों का माल और नकदी उड़ा ली। 6 लाख के गहने और 85 हज़ार रुपये नकद लेकर चोरों ने आरएस ज्वेलर्स को तो साफ कर दिया, लेकिन जब वंदना ज्वेलर्स पहुंचे, तो उनका खेल और बड़ा हो गया—20-30 लाख के गहने और सामान पर हाथ साफ कर दिया।
    कैसे हुई चोरी?
    सोमवार शाम दुकानें बंद कर दुकानदार घर चले गए। मंगलवार सुबह जब दुकान पर पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए। शटर कटे हुए थे और दुकानें खाली।
    आरएस ज्वेलर्स के मालिक सीताराम स्वर्णकार ने बताया, “सिर्फ सामान ही नहीं, चोर गिरवी रखे गहने और मरम्मत के लिए आए सामान तक उठा ले गए।”
    वहीं वंदना ज्वेलर्स के मालिक सुधीर स्वर्णकार ने कहा, “शटर इतनी ऊंचाई तक उठा दी गई थी कि कोई आराम से अंदर जा सके। दुकान का सारा कीमती सामान ले गए, CCTV तोड़ा और DVR भी चुरा लिया।”
    चोरी का तरीका—’प्लानिंग लेवल हाई!’
    चोर न सिर्फ दुकान का शटर काटने में माहिर थे, बल्कि अंदर घुसते ही सबसे पहले CCTV और DVR को ठिकाने लगा दिया। इन्वर्टर तक को नहीं छोड़ा। दुकान में गहने और नकदी सब ले उड़े।
    पुलिस ने क्या कहा?
    घटना की जानकारी मिलते ही हीरोडीह थाने की टीम हरकत में आ गई। एसडीपीओ राजेंद्र प्रसाद और पुलिस टीम ने जांच शुरू कर दी। एसपी डॉ. बिमल कुमार ने बताया, “चोरी की वारदात कितनी बड़ी है, इसकी जांच चल रही है। अपराधियों को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है। छापेमारी जारी है, और जल्द ही अपराधियों को दबोचा जाएगा।”
    चोरों के हौसले बुलंद क्यों?
    घटना थाने के पास ही हुई, फिर भी चोरों ने बेखौफ होकर वारदात को अंजाम दिया। यह पुलिस के लिए सवाल खड़े करता है।
    क्या कहती है गिरिडीह की जनता?
    दुकानदारों और इलाके के लोगों में डर का माहौल है। उनका कहना है कि अगर पुलिस जल्द चोरों को नहीं पकड़ पाई, तो यह हिम्मत और बढ़ेगी। गिरिडीह की इस बड़ी चोरी ने फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या हमारी पुलिस वाकई सतर्क है? और अगर नहीं, तो अगला शिकार कौन होगा?

  • बिहार चुनाव 2025: झामुमो की राजनीतिक बिसात, 12 सीटों पर दावा!

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट……………..

    झारखंड की सियासी सरगर्मी अब बिहार की ओर बढ़ रही है। साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। इस बार झामुमो (झारखंड मुक्ति मोर्चा) भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरने को तैयार है। पार्टी ने 12 विधानसभा सीटों पर दावा ठोक दिया है, और यह मांग सीधे  महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) से की गई है।

    झामुमो का तर्क: सीमावर्ती जिलों में मजबूत पकड़। 
    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, झामुमो ने अपनी दावेदारी पर बड़ा तर्क दिया है—बिहार के सीमावर्ती जिलों में उनका मजबूत जनाधार है। पहले भी पार्टी के विधायक इन इलाकों से चुने जा चुके हैं। जिन सीटों पर झामुमो की नजर है, उनमें शामिल हैं:

    • तारापुर, कटोरिया, मनिहारी, झाझा, बांका, ठाकुरगंज
    • रूपौली, रामपुर, बनमनखी, जमालपुर, पीरपैंती, चकाई

    झामुमो का मास्टरप्लान।
    पार्टी के नेताओं का कहना है कि इन 12 सीटों पर उनके पास न सिर्फ मजबूत कार्यकर्ता आधार है, बल्कि जीतने वाले प्रत्याशी भी तैयार हैं। जल्द ही झामुमो, राजद, और कांग्रेस की महागठबंधन बैठक में यह मांग रखने की तैयारी है।

    2020 का सबक और 2025 की उम्मीद। 
    गौरतलब है कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो ने अकेले चुनाव लड़ने का दांव खेला था। लेकिन यह कदम कामयाब नहीं हो सका। इस बार झामुमो को उम्मीद है कि झारखंड की तरह बिहार में भी महागठबंधन सीटों का बंटवारा उसी अंदाज में करेगा।

    क्या कहती है राजनीति?
    बिहार में झामुमो का दांव क्या रंग लाएगा?

    • राजद और कांग्रेस को सीट बंटवारे में झामुमो की मांग माननी होगी या सियासी घमासान बढ़ेगा?
    • सीमावर्ती जिलों में झामुमो के दावे को कितना समर्थन मिलेगा?

    , बिहार की सियासत एक बार फिर गरमाने को तैयार है। झारखंड का झामुमो बिहार में कितनी जगह बना पाएगा, यह देखने वाली बात होगी। लेकिन राजनीति का एक नियम तो तय है—जितनी बड़ी रणनीति, उतना बड़ा खेल!

  • झारखंड : PESA कानून लागू करने की कवायद तेज़, क्या है PESA कानून !

    परवेज़ आलम  की खास रिपोर्ट………….

    झारखंड में पेसा कानून (PESA Act) को लेकर बड़ी हलचल मची है। खबरें आ रही हैं कि पेसा नियमावली अब कैबिनेट में भेजे जाने की तैयारी में है। राज्य के महाधिवक्ता से सलाह लेकर इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

    क्या कहती हैं निदेशक निशा उरांव?
    निशा उरांव का कहना है कि, “2017 में पेसा कानून पर उच्च और सर्वोच्च न्यायालयों ने सरकार के पक्ष में फैसला सुना दिया था। इसके बाद इसे लागू करने की कवायद शुरू हुई, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर जनता को भटकाने का काम किया। इसी वजह से यह प्रक्रिया अटक गई।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत ने पंचायती राज अधिनियम को पेसा क्षेत्र के अनुकूल माना है और इसे 1996 के पेसा कानून के तहत सही ठहराया है। अब राज्य अधिनियम के तहत पेसा नियमावली का प्रस्ताव तैयार है। उन्होंने बताया कि देश के 10 राज्यों ने भी यही प्रक्रिया अपनाई है, जो कानूनी रूप से सही मानी जाती है।

    हाईकोर्ट का अल्टीमेटम: 2 महीने में लागू करें कानून!
    हाईकोर्ट ने पेसा कानून को जल्द लागू करने का आदेश दिया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण राय की बेंच ने 29 जुलाई को ही यह फैसला सुनाया था। लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया, जिसके बाद राज्य सरकार को फिर से अल्टीमेटम दिया गया है।

    क्या है विवाद?
    पेसा कानून को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं दायर की गई हैं। हालांकि अदालत ने साफ कहा है कि यह कानून सही प्रक्रिया के तहत है और इसे जल्द लागू करना अनिवार्य है।

    पेसा कानून का क्या मतलब है?
    पेसा यानी पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996। इसका मकसद आदिवासी इलाकों में स्वशासन को बढ़ावा देना और संसाधनों पर उनकी अधिकारिता सुनिश्चित करना है।

    कब तक लागू होगा?
    सूत्रों की मानें तो अगले दो महीने के भीतर पेसा कानून झारखंड में लागू हो सकता है। लेकिन क्या राज्य सरकार समय पर इस आदेश का पालन कर पाएगी या फिर एक बार फिर प्रक्रिया फाइलों में अटक जाएगी?

  • साइबर अपराध: ठगी की कहानी जानकार आप हो जाएंगे हैरान !

    गिरिडीह:गिरिडीह पुलिस ने ठगी के खेल में माहिर चार शातिर साइबर अपराधियों को पकड़ने में बड़ी सफलता हासिल की है। मोहनपुर के जंगल में ये ठग अपने फर्जीपन के जाल में लोगों को फंसाकर उनकी मेहनत की कमाई चट कर रहे थे। लेकिन, गिरिडीह पुलिस की फुर्ती और सूझबूझ ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। गिरफ्तार ठगों में अहिल्यापुर के पंडरिया गांव का अफजल अंसारी, मो. समीम, गांडेय के घाटकुल गांव का मो. मनीर अंसारी और रयूफ अंसारी शामिल हैं। इनके पास से पुलिस ने 14 मोबाइल फोन और 20 सिम कार्ड बरामद किए हैं। साइबर डीएसपी आबिद खान ने मंगलवार को मीडिया को  इसकी जानकारी दी।

    कैसे हुआ खुलासा?
    एसपी डॉ. विमल कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि मोहनपुर जंगल में कुछ लोग छिपकर साइबर ठगी का खेल खेल रहे हैं। एसपी के निर्देश पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर छापेमारी की और इन चारों को रंगे हाथ दबोच लिया। ये अपराधी कोरियर कंपनियों की वेबसाइट पर फर्जी नंबर डालने और एयरटेल पेमेंट बैंक के फर्जी अधिकारी बनने का नाटक कर लोगों को ठगते थे।

    अफजल: साइबर ठगी का ‘महागुरु’। 
    गिरफ्तार अफजल अंसारी इस गोरखधंधे में पिछले 10 साल से सक्रिय है। कोरियर सर्विस की आड़ में उसने गूगल पर दर्जनभर फर्जी नंबर डाल रखे थे। ये नंबर जब किसी ग्राहक को कोरियर रिटर्न करने की जरूरत होती, तो उसके गिरोह के पास पहुंच जाते।

    ठगी का तरीका:

    • ग्राहक को फोन पर फर्जी डिलीवरी रिटर्न की प्रक्रिया बताई जाती।
    • उनकी गोपनीय जानकारी जैसे OTP, बैंक डिटेल्स ले ली जाती।
    • और कुछ ही सेकंड में उनके खाते से रकम गायब!

    सावधान रहें:
    डीएसपी आबिद खान ने बताया, “अगर आप कोरियर या ऑनलाइन ऑर्डर रिटर्न कर रहे हैं, तो केवल कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट या ऐप का ही इस्तेमाल करें। गूगल पर दिख रहे अनजान नंबरों से सतर्क रहें।”

    गिरिडीह पुलिस का बड़ा कदम।
    इस कार्रवाई ने गिरिडीह जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस की गंभीरता को साफ कर दिया है। लेकिन सवाल यह है—क्या यह गिरफ्तारी इस संगठित अपराध के नेटवर्क को तोड़ने के लिए काफी है? तो दोस्तों आपका सतर्क रहना ही इन ठगों के खेल को खत्म कर सकता है!

  • झारखंड : नए साल मे कैसा रहेगा ठंड का तेवर,जानिए पूरी खबर

    परवेज़ आलम  खास रिपोर्ट……………

    झारखंड  में  एक बार फिर ठंड ने तेवर दिखाना  शुरू कर दिया है। सुबह-शाम चल रही ठंडी हवाओं ने लोगों की रजाइयों की गहराई बढ़ा दी है। मौसम विभाग की माने, तो 1 जनवरी की सुबह कोहरे की चादर ओढ़ेगी, और दिन चढ़ते ही आसमान साफ हो जाएगा। लेकिन, राज्य के उत्तरी इलाकों में घना कोहरा और ठिठुरन की संभावना है।

    तापमान में गिरावट। 
    रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने साफ कर दिया है—अगले 1-2 दिन न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री की गिरावट दर्ज की जा सकती है। राजधानी रांची समेत कई जिलों का तापमान 10 डिग्री के नीचे जा सकता है। सोमवार को रांची, जमशेदपुर और डालटनगंज में पारा सामान्य से 7 डिग्री तक कम रहा।

    बदल सकता है मौसम का मिजाज। 
    पश्चिमी विक्षोभ के झोंके झारखंड में दस्तक दे रहे हैं। 5 जनवरी के बाद से मौसम का मिजाज फिर पलट सकता है। आसमान पर बादलों की हलचल और सुबह-शाम घने कोहरे की धुंध संभावना को और बढ़ा रही है।

    मौसम वैज्ञानिकों की राय:
    वरिष्ठ वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया, “उत्तर की ओर बर्फबारी के कारण ठंडी हवाएं झारखंड का तापमान गिरा रही हैं। अगले 2 दिन तक न्यूनतम तापमान में गिरावट जारी रहेगी।”

    नए साल के जश्न पर असर। 
    ठंडी हवाएं और कोहरे का कहर नया साल मनाने वालों के उत्साह पर पानी फेर सकता है। पिकनिक के प्लान में ठिठुरन का खलल तय है। लोगों को सलाह दी गई है कि वाहन चलाते वक्त सावधानी बरतें।

    तो दोस्तों, जैकेट, मफलर, और स्वेटर की तैयारी कर लो। ठंडी हवाओं का झारखंड में अब दबदबा है। और याद रखें , कोहरे के साए में सड़कों पर धीरे चलो, क्योंकि सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं!

     

  • बेटियों के लिए प्रशासन का सख्त रुख, PC & PNDT ACT पर उपायुक्त की सख्ती

    गिरिडीह जिले में PC & PNDT ACT से संबंधित एक महत्वपूर्ण बैठक उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई। इस बैठक में मुख्य रूप से अल्ट्रासाउंड क्लीनिक/सेंटर की स्थिति, पिछले निर्णयों का अनुपालन, नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के आवेदन, और लाइसेंस रिन्यूअल पर चर्चा की गई।
    उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में बिना लाइसेंस के संचालित हो रहे क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उन्होंने छापेमारी दल का गठन कर गहन जांच अभियान चलाने का आदेश दिया। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि अवैध क्लीनिक बंद हों और लिंग परीक्षण पर पूरी तरह रोक लगे।
    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को मजबूती.
    उपायुक्त ने कहा कि गिरिडीह जिला प्रशासन “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” मुहिम के तहत लिंग अनुपात सुधारने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि PC & PNDT ACT, 1994 का उद्देश्य गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व लिंग चयन और लिंग आधारित गर्भपात पर पूरी तरह से रोक लगाना है। इसके तहत सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को अपने क्षेत्र में अधिनियम के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    सार्वजनिक जागरूकता पर जोर.
    उपायुक्त ने प्रखंड और जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की भी योजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में बेटियों के महत्व को रेखांकित किया जाएगा।
    विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुआ विचार-विमर्श.
    बैठक में सिविल सर्जन, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक, आईएमए शाखा के अध्यक्ष, और नामित नोडल पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसके अलावा, समाजसेवी, चिकित्सक, और अधिवक्ता भी उपस्थित थे। सभी ने इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाने के सुझाव दिए।
    लिंग अनुपात सुधारने के लिए ठोस कदम.
    इस बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि सभी नए अल्ट्रासाउंड केंद्रों के आवेदन उचित जांच के बाद ही स्वीकृत किए जाएंगे। साथ ही, प्रशासन ने यह भी तय किया कि अवैध गतिविधियों पर नजर रखते हुए जिला स्तर पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
    गिरिडीह प्रशासन का यह प्रयास लिंग अनुपात सुधारने और बेटियों को समान अवसर देने की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।

  • झारखंड: नए साल मे हॉकी इंडिया लीग रहेगी धूम

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट ………………

    अगर बात भारत की राष्ट्रीय खेल हॉकी की करें, तो झारखंड का नाम गर्व से लिया जाता है। यह राज्य न सिर्फ अपने खनिज, जल-जंगल-जमीन के लिए मशहूर है, बल्कि हॉकी की नर्सरी के रूप में भी जाना जाता है। झारखंड ने देश को ओलंपियन माइक किंडो, सिल्वानुस डुंगडुंग, सुमराई टेटे, और अंसुता लकड़ा जैसे अनगिनत खिलाड़ियों से नवाजा है।  7 साल के लंबे इंतजार के बाद, हॉकी इंडिया लीग (एचआईएल) की धूम झारखंड में फिर से गूंजने वाली है। महिला एचआईएल का आयोजन 12 जनवरी 2025 से रांची के मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम में होने जा रहा है।

    झारखंड की बेटियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमक रहीं

    झारखंड की बेटियां सलीमा टेटे, संगीता कुमारी, निक्की प्रधान और ब्यूटी डुंगडुंग पहले ही अपने प्रदर्शन से देश का नाम रौशन कर चुकी हैं। इस बार एचआईएल में भी झारखंड की 6 महिला खिलाड़ी अपनी चमक बिखेरेंगी।

    • सुरमा हॉकी क्लब: सलीमा टेटे और निक्की प्रधान
    • दिल्ली एसजी पाइपर्स: संगीता कुमारी और दीपिका सोरेंग
    • बंगाल टाइगर: ब्यूटी डुंगडुंग और बिनीमा धान

    महिला और पुरुष दोनों की हिस्सेदारी

    इस लीग में न केवल महिला खिलाड़ियों का जलवा दिखेगा, बल्कि 18, 22, और 24 जनवरी को पुरुषों के एचआईएल के भी मुकाबले रांची में आयोजित होंगे।

    तैयारियां जोरों पर

    खेल विभाग और हॉकी झारखंड की टीमों ने महिला खिलाड़ियों के स्वागत और स्टेडियम को तैयार करने का काम अंतिम चरण में पहुंचा दिया है। मैदान का रंग-रोगन हो रहा है, एलईडी लाइट्स की ट्रायल चल रही है, और दर्शकों की दीवानगी को ध्यान में रखते हुए टिकटें पूरी तरह से मुफ्त रखी गई हैं।

    क्यों खास है यह आयोजन?

    • पहली बार महिला एचआईएल का आयोजन रांची में।
    • अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं के साथ स्टेडियम का रखरखाव।
    • झारखंड की जनता के लिए अपने नायकों को देखने का सुनहरा मौका।

    12 जनवरी से शुरू होने वाले इस हॉकी उत्सव के लिए झारखंड तैयार है।
    रांची की धरती एक बार फिर साबित करने जा रही है कि हॉकी का असली दिल झारखंड में धड़कता है।

     

  • झारखंड में इको टूरिज्म सीएम हेमंत सोरेन ने दिए अहम निर्देश

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………………
    झारखंड, जो अपनी घनी हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, अब इको टूरिज्म के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में एक अहम बैठक की, जिसमें इको टूरिज्म के विकास पर विस्तृत चर्चा हुई।  मुख्य सचिव अलका तिवारी, वन पर्यावरण विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, और पर्यटन विभाग के सचिव मनोज कुमार की मौजूदगी में मुख्यमंत्री ने झारखंड में इको टूरिज्म की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में ऐसे स्थलों की पहचान करें जहां इको टूरिज्म को विकसित किया जा सके।

    प्रकृति और रोजगार का होगा संगम। 
    मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा, “इको टूरिज्म को इस तरह से विकसित किया जाए कि न केवल झारखंड की प्राकृतिक धरोहर संरक्षित रहे, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हों।” मुख्यमंत्री ने वन पर्यावरण और पर्यटन विभाग को आपसी समन्वय के साथ एक ठोस कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता को देश और दुनिया के सामने लाने का यह बेहतरीन मौका है।

    अन्य राज्यों और देशों के मॉडल से सीखने पर जोर। 
    मुख्यमंत्री सोरेन ने अधिकारियों से यह भी कहा कि देश के उन राज्यों या विदेशों का अध्ययन करें, जहां इको टूरिज्म के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य हुआ है। उन्होंने उदाहरणों से सीखकर झारखंड में अंतरराष्ट्रीय स्तर का इको टूरिज्म विकसित करने की बात कही।

    वैश्विक मानचित्र पर झारखंड की पहचान। 
    मुख्यमंत्री का कहना था कि राज्य में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने से झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता को एक वैश्विक पहचान मिलेगी। उन्होंने वन विभाग और पर्यटन विभाग से प्रतिबद्धता के साथ इस दिशा में कार्य करने को कहा।

    झारखंड, जहां प्राकृतिक संसाधनों और विविधता की कोई कमी नहीं है, अब इको टूरिज्म के जरिए न केवल अपनी धरोहर को संरक्षित करने बल्कि उसे दुनिया के सामने लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। आने वाले समय में यह पहल राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण, दोनों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

  • ‘जीनत’ का रोमांचक सफर खत्म, पश्चिम बंगाल के बांकुरा में पकड़ी गई

    ओडिशा के टाइगर रिजर्व  की बाघिन ‘जीनत’, जो बीते कई दिनों से  सुर्खियों में थी, आखिरकार रविवार को पश्चिम बंगाल के बांकुरा में पकड़ ली गई। 21 दिनों तक तीन राज्यों—ओडिशा, झारखंड और पश्चिम बंगाल—में लगभग 300 किलोमीटर की यात्रा कर, जीनत ने वन विभाग की नींद उड़ा दी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस बड़ी खबर को साझा करते हुए एक वीडियो ट्वीट किया। माना जा रहा है कि बाघिन को कुछ समय निगरानी में रखा जाएगा और फिर उसे वापस ओडिशा के टाइगर रिजर्व भेजा जाएगा।

    कैसे पकड़ी गई जीनत?
    जीनत के पकड़े जाने का ऑपरेशन किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं था। मुख्य वन संरक्षक देबल रॉय ने बताया कि शनिवार रात तक जीनत गोपालपुर के जंगल में थी। उसे धीरे-धीरे जालों से घेरा गया। रविवार तड़के 1:20 बजे उसे बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया, लेकिन वह पूरी तरह बेहोश नहीं हुई। अंततः रविवार शाम 4:09 बजे एक और डार्ट शॉट ने अपना काम कर दिखाया। रॉय ने कहा, “जीनत काफी उत्तेजित थी, इसलिए उसे बेहोश करने में बार-बार परेशानी हो रही थी। फिलहाल उसे आराम दिया गया है, और तीन पशु चिकित्सक उसकी निगरानी कर रहे हैं।”

     ‘मेहमान’ से जंगल की ‘राहगीर’
    ज़ीनत  को कुछ ही समय पहले महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व (टीएटीआर) सेओडिशा के सिमिलिपाल लाया गया था। लेकिन ऐसा लगता है कि सिमिलिपाल का जंगल उसे भा नहीं पाया। वहां से निकलकर जीनत ने झारखंड और फिर पश्चिम बंगाल के घने जंगलों का रुख किया।जीनत ने 27 दिसंबर को बंदवान से मनबाजार ब्लॉक के जंगलों तक का 15 किलोमीटर का सफर तय किया। वन विभाग ने उसके हर कदम पर नजर रखी, लेकिन उसे पकड़ने में पसीने छूट गए।

    अब क्या होगा जीनत का?
    वन्यजीव अधिकारियों के मुताबिक, जीनत को फिलहाल अस्थायी आवास में रखा जाएगा। उसकी स्वास्थ्य जांच के बाद उसे वापस सिमिलिपाल भेजने का निर्णय लिया जाएगा।

    जंगल की इस ‘राहगीर’ का सफर भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उसकी कहानी ने हमें यह जरूर सिखाया कि जंगल के जानवरों की अपनी दुनिया, अपनी चुनौतियां होती हैं।