परवेज़ आलम.
गिरिडीह : शनिवार को चतरो गांव का उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय मंझलाडीह एक बार फिर जनआवाज़ से गूंज उठा। मौका था मेसर्स मोंगिया पावर प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित विस्तारीकरण परियोजना को लेकर आयोजित पर्यावरणीय लोक सुनवाई का। लेकिन यह सुनवाई कुछ ही मिनटों में “लोक” से “विरोध सभा” बन गई।
“स्पंज फैक्ट्री नहीं लगेगा, नहीं लगेगा…”,
“प्रदूषण मुक्त गिरिडीह हमारा अधिकार है!”,
“पर्यावरण के दुश्मनों होश में आओ!”
— ये नारे पूरे गांव में गूंजते रहे।
सुनवाई की अध्यक्षता सदर एसडीओ श्रीकांत यशवंत विस्पुते कर रहे थे। उनके साथ झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद रांची के सहायक वैज्ञानिक अधिकारी रामरतन काशी, क्षेत्रीय पदाधिकारी धनबाद के विवेक कुजूर, गादी श्रीरामपुर पंचायत की मुखिया कंचन देवी और मोंगिया पावर लिमिटेड के चेयरमैन गुणवंत सिंह मोंगिया समेत कई अधिकारी मौजूद थे।
लेकिन जैसे ही एसडीओ ने सुनवाई की औपचारिक शुरुआत की — ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। हाथों में तख्तियां, आंखों में आक्रोश, और स्लोगनों की गूंज ने माहौल को गर्मा दिया। कुछ देर के प्रयास के बाद एसडीओ ने किसी तरह लोगों को शांत कराया, और फिर ग्रामीणों ने बारी-बारी से अपनी बात रखी।
“हम बीमार हो रहे हैं, फसलें मर रही हैं, पानी खत्म हो रहा है” — ग्रामीणों की पीड़ा
गांव के विकास राय, विजय राय, सावित्री देवी, धनेश्वर सिंह, शत्रुघ्न राय, अरुण साव, रामेश्वर शर्मा समेत दर्जनों ग्रामीणों ने कहा —
“कारखाने से निकलने वाला धुआं और राख हमारी ज़िंदगी में जहर घोल रहा है। बच्चे बीमार पैदा हो रहे हैं, खेतों की फसलें सूख रही हैं, और अब तो पीने का पानी भी जहरीला हो गया है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि फैक्ट्री की डीप बोरिंग से भूजल स्तर बहुत नीचे चला गया है। नदियों का पानी प्रदूषित है, जिससे इंसान ही नहीं, मवेशी तक बीमार पड़ रहे हैं।
कंपनी की दलील पर फिर भड़के लोग.
झारखंड प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अधिकारियों ने बताया कि कंपनी स्पंज आयरन उत्पादन क्षमता को 33 हज़ार टन से बढ़ाकर 2.64 लाख टन प्रति वर्ष करना चाहती है। साथ ही 1.98 लाख टन बिलेट उत्पादन, री-हीटिंग फर्नेस, रोलिंग मिल और 25 मेगावाट कैप्टिव पावर प्लांट लगाने की योजना है।
जैसे ही कंपनी के चेयरमैन गुणवंत सिंह मोंगिया ने परियोजना के फायदे गिनाने शुरू किए — भीड़ एक बार फिर उग्र हो गई।
लोगों ने एक स्वर में कहा —
“कुछ नहीं सुनेंगे! प्लांट नहीं लगने देंगे तो नहीं लगने देंगे!”
विरोध इतना तीव्र था कि अंततः सुनवाई बीच में ही समाप्त करनी पड़ी।
ग्रामीणों का साफ संदेश — ‘प्रदूषण से विकास नहीं चाहिए’
इस लोक सुनवाई में गादी श्रीरामपुर, मोहनपुर, मंझलाडीह, चतरो, गंगापुर, अंबाडीह, भोरंडीहा और झलकडीहा समेत आसपास के गांवों से 500 से अधिक ग्रामीण शामिल हुए — जिनमें महिलाओं की संख्या भी काफी रही। सभी की मांग एक ही थी —
“पहले स्वास्थ्य और स्वच्छ हवा, बाद में उद्योग-धंधा।”







