परवेज़ आलम. By The News Post4u.
देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम की घोषणा मंगलवार को पटना में हुई, जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बिहार में न्यूक्लियर पावर प्लांट (परमाणु बिजली घर) स्थापित करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी। यह घोषणा पूर्वी भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ऊर्जा मंत्रियों के पांचवें क्षेत्रीय सम्मेलन के दौरान हुई। इस सम्मेलन में बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं अंडमान-निकोबार के ऊर्जा मंत्री उपस्थित रहे। बिहार से इसका प्रतिनिधित्व ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने किया जबकि झारखंड से नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू इसमे शामिल हुये । 
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सम्मेलन के बाद फोन पर The News Post4u को बताया कि बैठक में राज्यों में संचालित विद्युत परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन, वितरण नेटवर्क को मजबूत करने तथा सेवा प्रदायगी में दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही, निर्बाध और समान रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी गहन चर्चा हुई।
देश के ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए यह सामूहिक प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
बिहार को मिलेगा ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बूस्ट.
सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार की ओर से राज्य में परमाणु ऊर्जा आधारित पावर प्लांट की मांग रखी गई थी। इस पर केंद्रीय मंत्री खट्टर ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि केंद्र सरकार हर आवश्यक तकनीकी और वित्तीय सहायता देने को तैयार है।
साथ ही बिहार में अगले 6 महीनों के भीतर अतिरिक्त 500 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करने का भी प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है, जिससे राज्य की औद्योगिक और ग्रामीण जरूरतों को मजबूत आधार मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री ने क्या कहा?
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि:
- ऊर्जा क्षेत्र में थर्मल, सोलर, विंड और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हो रहा है।
- 2035 तक का राष्ट्रीय ऊर्जा विजन तैयार किया गया है, जिसमें हर राज्य में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना है।
- बिहार में अब तक 80 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसे उन्होंने “रिकॉर्ड” बताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि “बिहार को कभी पिछड़ा समझा जाता था, लेकिन अब वह बिजली क्षेत्र में कई राज्यों से आगे निकल गया है।”
बिजली स्टोरेज की भी मांग॰
सम्मेलन के दौरान बिहार सरकार ने राज्य में 1000 मेगावाट की बिजली स्टोरेज क्षमता विकसित करने की मांग भी रखी। इस पर भी केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया कि जरूरत के मुताबिक हरसंभव मदद दी जाएगी।
भारत अब बिजली निर्यातक देश.
मंत्री खट्टर ने कहा कि कभी “पावर डिफिसिट” (बिजली की कमी वाला) देश माने जाने वाला भारत, आज भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश और नेपाल को बिजली निर्यात कर रहा है। देश के भीतर जरूरत के हिसाब से बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
इस सम्मेलन से स्पष्ट है कि बिहार अब पारंपरिक बिजली आपूर्ति से आगे बढ़कर विकसित ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर और वैकल्पिक स्रोतों की ओर बढ़ रहा है। न्यूक्लियर पावर प्लांट की स्थापना राज्य के लिए आर्थिक और औद्योगिक विकास का एक नया अध्याय खोल सकती है।







