चन्दन नीतू की रिपोर्ट.
गिरिडीह: आज का दिन राष्ट्र की आत्मा को झकझोर देने वाला और प्रेरणा से भर देने वाला रहा। एक ओर लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती, जिन्होंने बिखरे भारत को एक सूत्र में पिरोया — तो दूसरी ओर भारत की आयरन लेडी इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि, जिनके साहस ने भारत को विश्व मंच पर नई पहचान दी।
इन्हीं दो महान आत्माओं की याद में गिरिडीह जिला कांग्रेस कार्यालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई, जहां नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत दोनों नेताओं के चित्र पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्वलन से हुई।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष सतीश केडिया ने कहा —
“आज हम उस लौह पुरुष को नमन कर रहे हैं, जिन्होंने 562 रियासतों को एक सूत्र में बांधकर आधुनिक भारत की नींव रखी। सरदार पटेल केवल नेता नहीं, बल्कि भारत की एकता के शिल्पकार थे। वहीं, इंदिरा गांधी का अदम्य साहस और दृढ़ निश्चय देश के हर नागरिक के लिए प्रेरणा है।”
उन्होंने आगे कहा कि इंदिरा गांधी ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की मजबूत नींव रखी और भारत को “शक्ति और स्वाभिमान” का प्रतीक बनाया।
“1971 के युद्ध में पाकिस्तान के विभाजन के बाद बांग्लादेश का निर्माण — यह उस लौह इच्छाशक्ति का परिणाम था, जिसने दुनिया को भारत की ताकत दिखा दी,” उन्होंने कहा।
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नरेश वर्मा ने कहा —
“आज का दिन सिर्फ याद करने का नहीं, बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने का दिन है। सरदार पटेल की एकता और इंदिरा गांधी के साहस का संगम ही भारत की असली पहचान है।”
कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यालय एक भावनात्मक माहौल से भर गया। “जय भारत, जय इंदिरा, जय पटेल” के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
इस अवसर पर अशोक विश्वकर्मा, पप्पू विश्वकर्मा, मदन विश्वकर्मा, पंकज कुमार सागर, इरफान अली, गुलाम मुस्तफा, साबिर अहमद खान, परेश नाथ मित्र, अमित कुमार सिन्हा, मनोज कुमार राय, अनिमेष देव, सिकंदर अंसारी, मोहम्मद अली खान, मोहम्मद निजाम, समीम मुखिया, कृष्ण सिंह, शहाबुद्दीन खान, सरफराज अंसारी, सोहेल परमेश्वर मेहता, विनीत भास्कर, मोहम्मद टार्जन, पुरुषोत्तम चौधरी, मोहम्मद सोहेल, सोनू खान, क्यामुल अंसारी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम न सिर्फ श्रद्धांजलि सभा थी, बल्कि भारत की एकता, त्याग और नेतृत्व की विरासत को फिर से याद करने का संकल्प भी।







