अमित शाह का झारखंड दौरा: क्या तय होगी नई रणनीति?
परवेज़ आलम. for The News Post4U.
झारखंड की सियासत में एक बार फिर हलचल है। रविवार को दुमका में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मुलाकात पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से हुई। पहली नज़र में यह मुलाकात सामान्य प्रतीत हो सकती है, क्योंकि दोनों नेता दुमका परिसदन में ठहरे हुए थे। लेकिन पार्टी के भीतरखाने में इसे एक राजनीतिक ‘प्रयोग’ माना जा रहा है — एक ऐसी पहल, जो आने वाले महीनों में भाजपा की रणनीति और नेतृत्व को नई दिशा दे सकती है।
शाह से मुलाकात और रघुवर की सक्रियता: कोई संयोग नहीं ?
बताया जा रहा है कि एक सप्ताह पहले जब बाबूलाल मरांडी दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिले थे, उसी दिन रघुवर दास ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड में आदिवासी परंपराओं को सम्मान देने के लिए पेसा कानून लागू करने की मांग कर डाली। रघुवर की इस पहल को राजनीतिक गलियारों में ‘सक्रिय वापसी’ के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस ने भी पेसा के मुद्दे पर चर्चा शुरू कर दी है, जिससे साफ है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो सकता है। सूत्रों के अनुसार, अमित शाह ने बाबूलाल मरांडी को निर्देश दिया है कि वे रघुवर दास की सक्रियता को संगठन से जोड़ें।
नेतृत्व संकट और संगठन की जरूरत.
2024 के लोकसभा चुनाव में हार और प्रमुख नेताओं की पराजय के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने नेतृत्व का संकट है। बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन जैसे नेता सौम्य और शांत राजनीति के लिए जाने जाते हैं। लेकिन वर्तमान हालात में पार्टी को एक ऐसा चेहरा चाहिए जो आक्रामक तेवर के साथ पार्टी की बात जनता तक पहुंचा सके — और यही भूमिका रघुवर दास निभा सकते हैं।
अमित शाह का झारखंड दौरा: क्या तय होगी नई रणनीति?
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 10 जुलाई को रांची आने वाले हैं। वे पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में हिस्सा लेंगे और झारखंड भाजपा के नेताओं से मिलकर पार्टी की झारखंड मे रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस दौरान पार्टी की आदिवासी, ओबीसी और सामान्य वर्गों के बीच आउटरीच कार्यक्रम का ब्लूप्रिंट भी पेश किया जाएगा।
इसी समय के आसपास झारखंड भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष भी मिलने की संभावना है। ऐसे में रघुवर दास की बढ़ती सक्रियता और बाबूलाल मरांडी की रणनीतिक भूमिका को लेकर शाह का नजरिया महत्वपूर्ण होगा।
अध्यक्ष पद की रेस: कौन किससे आगे?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई नाम चर्चा में हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम हैं:
- रघुवर दास – पूर्व मुख्यमंत्री, वे ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर सक्रिये राजनीति मे लौटे हैं और लगातार झारखंड के जिलों का दौरा कर रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें और जनता से संवाद कर रहे हैं। शिकायतों पर अफसरों को फोन करना और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो उनकी सक्रियता को दिखा रहे हैं।
- अर्जुन मुंडा – पूर्व केंद्रीय मंत्री और अनुभवी आदिवासी नेता। लेकिन खूंटी से चुनाव हारने के बाद वे फिलहाल जमशेदपुर स्थित अपने आवास में सीमित राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित हैं।
- चंपाई सोरेन – पूर्व मुख्यमंत्री, जो अब भाजपा में हैं और लगातार कोल्हान व संताल परगना में दौरे कर रहे हैं। संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं।
- ओबीसी और सामान्य वर्ग के नेता – इस सूची में राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, पूर्व मंत्री अमर बाउरी और पूर्व सांसद रविंद्र राय के नाम प्रमुख हैं।
भाजपा की रणनीति किस मोड़ पर ?
रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी की दुमका में मुलाकात कोई सामान्य शिष्टाचार नहीं थी, बल्कि भाजपा के आने वाले फैसलों की बुनियाद मानी जा रही है। अमित शाह के दौरे से पहले पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है और यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा झारखंड में नेतृत्व के लिए किसे चुनती है — अनुभव, सामाजिक समीकरण या सक्रियता को प्राथमिकता दी जाएगी?







