डिजिटल ठगों का नया अड्डा बना झारखंड: बिना हथकड़ी, बिना वर्दी हो रहा ‘डिजिटल अरेस्ट’

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परवेज़ आलम  for The News Post4U.

झारखंड, जो कभी कोयले की खदानों और जंगलों के लिए पहचाना जाता था, अब एक नई पहचान के साथ सामने आ रहा है—भारत का नया साइबर क्राइम हब। यहां अब न तो खदानें चर्चा में हैं और न ही जंगल, बल्कि अब बात हो रही है उस डर की जो एक कॉल से शुरू होता है और एक करोड़ की ठगी तक पहुंच जाता है।

जब फोन बन जाए गिरफ्तारी का वारंट.

सोचिए, एक दिन अचानक आपके फोन पर कॉल आता है—
हम दिल्ली क्राइम ब्रांच से बोल रहे हैं, आपके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज हुआ है। ईडी और सीबीआई आपको ट्रैक कर रही हैं। गिरफ़्तारी कभी भी हो सकती है।”

और फिर वीडियो कॉल पर एक फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाया जाता है जिसमें आपका नाम लिखा होता है। आप डर जाते हैं, घबरा जाते हैं। और यहीं से शुरू होता है डिजिटल अरेस्ट—आपसे कहा जाता है कि अगर आप निर्दोष हैं तो “सहयोग” करिए और अपने बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करिए ताकि वेरिफिकेशन हो सके। डर के मारे लोग अपनी मेहनत की कमाई खुद ठगों को ट्रांसफर कर देते हैं।

झारखंड पुलिस के साइबर सेल ने ऐसे ही एक मामले में 14 मई 2025को केस दर्ज किया। जांच के दौरान पता चला कि गिरोह ने व्हाट्सएप कॉल के जरिए लोगों को ईडी का अधिकारी बनकर धमकाया और ₹1.39 करोड़ की ठगी कर ली।

साइबर गिरोह का जाल—हिमाचल से तमिलनाडु तक.

जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह ने महिला समाज कल्याण समिति के नाम से फर्जी खाता YES बैंक में खुलवाया था, जिसमें चार दिनों में ₹3.10 करोड़ से अधिक ट्रांसफर हुआ। ये रकम देशभर के ठगे गए पीड़ितों की थी।

अब तक 27 अलग-अलग राज्यों से शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं—हरियाणा, केरल, दिल्ली, असम, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तेलंगाना, और खुद झारखंड।
यह नेटवर्क इतना संगठित है कि देश के हर कोने में इसका असर दिखने लगा है।

कई राज्यों में हुई गिरफ्तारियां.

इस केस में झारखंड पुलिस ने तीन ठगों को गिरफ्तार किया है:

  • सुभाष शर्मा — हिमाचल प्रदेश से पकड़ा गया मुख्य आरोपी
  • बी. इशाक अहमद — तेलंगाना से
  • लालडूसंगा — मिजोरम से

इनके पास से मोबाइल, सिम कार्ड, एटीएम और आधार कार्ड बरामद किए गए। लेकिन ठगी के इस खेल में यह केवल कुछ मोहरे हैं।

झारखंड: साइबर क्राइम का नया ‘डिजिटल गुरुकुल’

देवघर, दुमका, जामताड़ा, गिरिडीह और बोकारो अब सिर्फ जिले नहीं, साइबर ठगी के ब्रांड बन गए हैं। इन इलाकों के कुछ युवाओं ने बिना किसी औपचारिक शिक्षा के ‘डिजिटल बैंकिंग’ में ऐसी महारत हासिल की है, जो बड़े-बड़े इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र भी नहीं कर पाते।

इन गांवों में न सड़कें हैं, न रोजगार, लेकिन लैपटॉप, इंटरनेट और मोबाइल फोन ने यहां के लड़कों को ‘फ्रॉडवेयर इंजीनियर’ बना दिया है। ये ठग इतनी सफाई से कॉल करते हैं—सर, मैं बैंक से बोल रही हूं, आपका केवाईसी अपडेट करना है”—कि सुनने वाला झांसे में आ ही जाता है।

सरकारी सिस्टम की चुनौती.

सरकार 1930 हेल्पलाइन नंबर का प्रचार कर रही है। आईफोरसी (Indian Cyber Force Coordination App) जैसे ऐप बनाए गए हैं, जो साइबर अपराधियों को ट्रैक करने में मदद करते हैं। पर फिर भी, झारखंड के इन डिजिटल अपराधियों के खिलाफ जंग आसान नहीं है। हर गिरफ्तारी के साथ नए नाम उभरते हैं, नए तरीके आते हैं, और लोगों की मेहनत की कमाई फिर उड़ जाती है।

फिर भी सवाल वही है…

  • क्या ये साइबर ठगी कभी रुकेगी?
  • क्या सरकार सिर्फ “डिजिटल इंडिया” का सपना दिखाएगी या इसके काले पक्ष से भी लड़ेगी?
  • क्या युवाओं की तकनीकी दक्षता को सही दिशा नहीं दी जा सकती?

एक विचार कीजिए—अगर इन्हीं युवाओं को सही दिशा और रोजगार दिया जाए, तो झारखंड न केवल खनिजों का प्रदेश होगा, बल्कि भारत का डिजिटल टैलेंट हब भी बन सकता है।

और जब अगली बार कोई कहे…

मैं बैंक से बोल रहा हूं…”
तो मुस्कराकर कहिए—
तो मैं भी झारखंड से बोल रहा हूं!”

 

The News Post4u

Perwez Alam is one of the founder of The News Post4U, he brings over 4 decades of Journalism of experience, having worked with Zee News, Sadhna News, News 11, Bureau cheif of Dainik Jargarn, Govt. Accredited Crosspondent of Hindustan daily, Jansatta ect, He loves doing human intrest, political and crime related stories. Contact : 9431395522

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