परवेज़ आलम.
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रांची, 22 जुलाई : झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान कल सुबह 10 बजे राजभवन के बिरसा मंडप में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे । राज्यपाल संतोष गंगवार उन्हें शपथ दिलाएँगे । वे झारखंड हाईकोर्ट के 17वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे।
मंगलवार को रांची पहुंचे, हुआ भव्य स्वागत.
जस्टिस चौहान मंगलवार को अपने परिजनों के साथ रांची पहुंचे। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीशों, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारियों ने उनका भव्य स्वागत किया। इसके बाद वे होटल रेडिशन ब्लू पहुंचे, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया।
शपथ के बाद सीधे संभालेंगे न्यायिक कार्य.
शपथ ग्रहण समारोह के बाद जस्टिस चौहान सीधे हाईकोर्ट जाएंगे, जहां वे अपने नए पद का कार्यभार संभालेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, झारखंड हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिकारी, अधिवक्ता और अन्य गणमान्य अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।

राजभवन के बिरसा मंडप में भव्य समारोह की तैयारियां मंगलवार शाम तक पूरी कर ली गईं।
जस्टिस तरलोक सिंह चौहान: एक परिचय.
- जन्म: 9 जनवरी 1964, रोहड़ू तहसील, जिला शिमला (हिमाचल प्रदेश)
- स्कूली शिक्षा: बिशप कॉटन स्कूल, शिमला
- स्नातक: गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, संजौली (बीए ऑनर्स)
- कानून की पढ़ाई: पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ से एलएलबी
न्यायिक करियर.
- 1989: हिमाचल प्रदेश बार काउंसिल में वकील के रूप में पंजीकरण
- 2007: वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित
- 2014 : हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त
- 2014 : स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ
- कई अवसरों पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की भूमिका निभा चुके हैं
गौरवशाली इतिहास वाला झारखंड हाईकोर्ट.
झारखंड हाईकोर्ट का इतिहास न्यायिक उत्कृष्टता से परिपूर्ण रहा है।
- प्रथम मुख्य न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार गुप्ता थे, जो बाद में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
- यहां सेवा देने वाले कई मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे, जिनमें शामिल हैं:
- जस्टिस अल्तमश कबीर.
- जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा.
- जस्टिस आर. बनुमति.
- जस्टिस अनिरुद्ध बोस.
जस्टिस तरलोक सिंह चौहान के आने से झारखंड हाईकोर्ट को एक अनुभवी और प्रतिष्ठित न्यायविद् का नेतृत्व मिलने जा रहा है। उनके न्यायिक अनुभव और सशक्त दृष्टिकोण से राज्य की न्यायिक प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितकारी बनाए जाने की उम्मीद की जा रही है।







