परवेज़ आलम.
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
रांची : झारखंड में लंबे समय से टलते नगर निकाय चुनावों पर आखिरकार मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। जस्टिस आनंद सेन की अदालत में अवमाननावाद याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने साफ-साफ कहा — “हम तैयार हैं, बस आदेश का इंतजार है।”
सुनवाई के दौरान राज्य के मुख्य सचिव समेत कई शीर्ष अधिकारी कोर्ट में उपस्थित रहे। सरकार की ओर से बताया गया कि राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति पूरी हो चुकी है और चुनाव से जुड़ा सारा डाटा और अभिलेख तैयार हैं। सभी जरूरी दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश किए गए।
सरकार की इस तैयारी पर अदालत ने संतोष जताया, लेकिन साथ ही तीन सप्ताह के भीतर चुनाव आयोग को औपचारिक अनुशंसा भेजने का सख्त निर्देश भी दे दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अब किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
राज्य की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने पक्ष रखा। वहीं, राज्य चुनाव आयोग ने अपनी दलील में कहा कि चुनावी प्रक्रिया पूरी करने में लगभग तीन महीने का समय लगेगा। इस पर अदालत ने आयोग से पूछा — “तीन महीने क्यों चाहिए?” और कारणों की पूरी जानकारी शपथ पत्र के रूप में दाखिल करने को कहा।
मामले की अगली सुनवाई अब 10 नवंबर को होगी।
गौरतलब है कि इससे पहले नगर निकाय चुनाव में लगातार हो रही देरी पर अदालत ने राज्य सरकार को फटकार लगाई थी और रूल 393 के तहत मुख्य सचिव व नगर विकास विभाग के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना नोटिस भी जारी किया था। यह याचिका रोशनी खलखो द्वारा दायर की गई थी।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या झारखंड सरकार तय समय पर चुनावी प्रक्रिया शुरू कर पाएगी या फिर यह मामला एक बार फिर अदालत के शिकंजे में फंस जाएगा।