Category: RANCHI

  • मोरहाबादी मैदान में 15 अगस्त के लिए तैयारियां पूरी, राज्यपाल करेंगे झंडोत्तोलन

    The News Post4u.

    रांची : झारखंड में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य राजकीय समारोह राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित होगा। 15 अगस्त की सुबह 9 बजे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार झंडोत्तोलन करेंगे और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत होगी। प्रशासन और पुलिस ने इस ऐतिहासिक अवसर के लिए तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है।

    परेड में होगी खास झलक.

    झंडोत्तोलन के बाद परेड का आयोजन होगा, जिसमें जवानों की टुकड़ियां कदमताल करते हुए सलामी देंगी।

    • 14 बटालियन इस बार परेड में शामिल होंगी।
    • खास बात यह है कि बिहार पुलिस की एक टुकड़ी भी झारखंड पुलिस के साथ परेड में हिस्सा लेगी।
    • एनसीसी कैडेट्स और रांची पुलिस की महिला जवान भी अपनी ताकत और अनुशासन का प्रदर्शन करेंगी।
    • परेड की कमान इस बार भी महिला पुलिस अधिकारी के हाथ में होगी – सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) श्रुति इसका नेतृत्व करेंगी।

    फुल ड्रेस रिहर्सल और सुरक्षा इंतज़ाम.

    आज मोरहाबादी मैदान में फुल ड्रेस रिहर्सल आयोजित हुआ, जिसमें जवानों ने परेड के सभी चरणों का अभ्यास किया। रांची के उपायुक्त ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम को सफल बनाने के निर्देश दिए।
    मुख्य बिंदु:

    • पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
    • समारोह स्थल पर प्रवेश से पहले सघन जांच की जाएगी ताकि कोई भी बाहरी व्यक्ति आपत्तिजनक सामग्री के साथ अंदर न जा सके।
    • सड़कों पर गड्ढों को तुरंत भरने, होटलों में चेकिंग अभियान चलाने और सभी भीड़भाड़ वाले स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश जारी हुए हैं।

    ट्रैफिक प्लान में बदलाव.

    स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए राजधानी में ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है:

    • 15 अगस्त की सुबह 6 बजे से बड़े वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा।
    • मोरहाबादी मैदान में भीड़ नियंत्रित करने के लिए 16 ड्रॉप गेट बनाए गए हैं।
    • आम नागरिकों के वाहनों का प्रवेश टीआरआई और दुर्गा मंदिर के पास से होगा।

    मौसम विभाग का अलर्ट;.

    मौसम एक बार फिर चुनौती बन सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची ने 14 से 17 अगस्त के बीच बारिश की संभावना जताई है।

    • कई जिलों में गरज-चमक के साथ 40 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
    • इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
    • बारिश के कारण 15 अगस्त के समारोह पर असर पड़ने की आशंका है, हालांकि प्रशासन ने इसके लिए वैकल्पिक इंतजाम करने की बात कही है।

    राजधानी रांची का मोरहाबादी मैदान कल  देशभक्ति के रंग में रंग जाएगा, जहां झंडोत्तोलन, परेड और सलामी के साथ स्वतंत्रता दिवस का भव्य आयोजन होगा। सुरक्षा, ट्रैफिक और मौसम—तीनों ही मोर्चों पर प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है, ताकि यह दिन शांति और गौरव के साथ मनाया जा सके।

  • सूर्या हांसदा मामले पर बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार पर तीखा हमला

    यह एनकाउंटर नहीं, मर्डर है,सीबीआई जांच की मांग.

    The News Post4u.

    रांची : झारखंड की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। गोड्डा में आदिवासी नेता सूर्या हांसदा की मौत के मामले ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मौका दे दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गुरुवार को रांची में प्रेस वार्ता कर सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।

    “अपराधियों को संरक्षण, निर्दोषों पर अत्याचार” – मरांडी.

    मरांडी ने कहा कि मौजूदा सरकार में कुछ पुलिसकर्मी अपराधियों को शरण और संरक्षण दे रहे हैं, जबकि निर्दोषों को झूठे मामलों में फंसाकर प्रताड़ित किया जा रहा है।
    उन्होंने आरोप लगाया –

    “चाहे किसी आदिवासी नेता को अपराधी साबित करना हो, या शक के आधार पर आवाज दबाने के लिए एनकाउंटर करना हो… झारखंड पुलिस के भीतर के कुछ अपराधी मानसिकता वाले लोग इन कामों को अंजाम दे रहे हैं। माफियाओं को खुली छूट दी जा रही है, और जमीन कब्जाने जैसे मामलों में भी इनकी भूमिका संदिग्ध है।”

    विपक्ष और सत्ता दोनों पर खतरा.

    नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि इस स्थिति से केवल आम जनता ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता एवं उनके सहयोगी भी सुरक्षित नहीं हैं।
    मरांडी के शब्दों में –

    “संघर्ष करते-करते रास्ता भटकने वालों को देश की न्याय व्यवस्था ने हमेशा मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया है, लेकिन आज एक आवाज को हमेशा के लिए खामोश कर दिया गया।”

    “यह एनकाउंटर नहीं, मर्डर है”

    मरांडी ने सूर्या हांसदा की मौत को सीधा-सीधा हत्या करार दिया।

    “यह एनकाउंटर नहीं, मर्डर है। वह भी अपराधियों द्वारा नहीं, बल्कि वर्दी में छिपे कुछ कायर और बुजदिलों द्वारा किया गया। उन्हें डर था कि आदिवासियों की आवाज उनके कानों का पर्दा न हिला दे, डर था कि आदिवासी अपने हक और अधिकार के लिए न खड़े हो जाएं।”

    उन्होंने कहा कि झूठे केस, फर्जी मुकदमे और लगातार मानसिक दबाव बनाना – यही आज के समय में विरोध की आवाज को दबाने का सरकारी तरीका बन गया है।

    परिजनों की सीबीआई जांच की मांग.

    मरांडी ने बताया कि सूर्या हांसदा की पत्नी और मां लगातार पुलिस पर जानबूझकर हत्या करने का आरोप लगा रही हैं। उनकी एक ही मांग है – इस पूरे मामले की सीबीआई जांच हो।

    “अगर मुख्यमंत्री को सीबीआई से डर लगता है तो हाईकोर्ट के सिटिंग जज की अध्यक्षता में जांच कराई जाए। इस घटना को जनता पचा नहीं पा रही, और पुलिस की भूमिका गंभीर संदेह के घेरे में है।”

    राजनीतिक माहौल में बढ़ी गरमी.

    सूर्या हांसदा की मौत पर भाजपा का यह हमला झारखंड की सियासत में नई बहस छेड़ सकता है। एक तरफ सरकार और पुलिस पर आरोपों की बौछार हो रही है, तो दूसरी ओर आदिवासी समुदाय के भीतर भी इस घटना को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।

  • एक आईपीएस अधिकारी समेत 17 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को राष्ट्रपति पदकों

    The News Post4u.

    झारखंड पुलिस के लिए इस स्वतंत्रता दिवस पर गर्व का अवसर आने वाला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए राज्य के एक आईपीएस अधिकारी समेत 17 पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को विभिन्न श्रेणियों में वीरता, राष्ट्रपति और सराहनीय सेवा पदकों से सम्मानित करने की घोषणा की है।

    इस सूची में शामिल अधिकारी और जवानों को 15 अगस्त के दिन औपचारिक रूप से सम्मान प्रदान किया जाएगा। सम्मानित किए जाने वालों में पांच पुलिस अधिकारी और कर्मी को वीरता पदक, एक को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक, जबकि 11 को सराहनीय सेवा पदक मिलेगा।

    वीरता पदक प्राप्त करने वाले

    इन पदकों को उन पुलिस कर्मियों को दिया जाता है, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान असाधारण साहस और बहादुरी का प्रदर्शन किया। झारखंड से इस सम्मान के लिए चुने गए नाम हैं:

    • सब-इंस्पेक्टर विनय कुमार
    • हेड कॉन्टेबल प्रमोद राय
    • कांस्टेबल वेद प्रकाश महतो
    • कांस्टेबल रामचंद्र महतो
    • कांस्टेबल कृष्णा मुर्मू

    राष्ट्रपति पदक (विशिष्ट सेवा) प्राप्त करने वाले

    • हवलदार कैलाश कुमार श्रेष्ठा — जिन्होंने अपने लंबे कार्यकाल में उत्कृष्ट कार्य और अनुकरणीय सेवा से विभाग का मान बढ़ाया।

    सराहनीय सेवा पदक प्राप्त करने वाले

    ये पदक उन पुलिसकर्मियों को दिए जाते हैं जिन्होंने अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अनुशासन, समर्पण और लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया हो। इस श्रेणी में झारखंड पुलिस के 11 अधिकारी और कर्मी शामिल हैं:

    • आईपीएस अनुरंजन किस्पोट्टा
    • डीएसपी मनोज कुमार राय
    • इंस्पेक्टर असित मोदी
    • एसआई दीपक पुंज
    • एएसआई महेंद्र महतो
    • हवलदार विजय थापा
    • कांस्टेबल विदेशी मांझी
    • कांस्टेबल अजय कुमार दुबे
    • हवलदार रंजीता कुजूर
    • कांस्टेबल पुष्पा औरैया
    • कांस्टेबल दीपक कुमार सिंह

    झारखंड पुलिस के लिए यह सम्मान न केवल राज्य की कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों का प्रमाण है, बल्कि उन जवानों के साहस और प्रतिबद्धता की भी पहचान है जो अपने कर्तव्य के प्रति हर परिस्थिति में समर्पित रहते हैं।

     

  • शिबू सोरेन के श्राद्ध में 5 लाख लोगों की मेज़बानी की तैयारी

    वीआईपी के लिए बने चार हेलीपैड, सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

    परवेज़ आलम

    For The News Post4u.

    रामगढ़, नेमरा :  झारखंड की राजनीति के पुरोधा और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु  शिबू सोरेन के श्राद्ध भोज की तैयारियां इन दिनों पूरे जोर-शोर से चल रही हैं। अनुमान है कि इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में करीब चार से पांच लाख लोग शामिल होंगे, जिसके लिए पांच विशाल पंडाल और अस्थायी रसोईघरों की व्यवस्था की गई है।

    वीआईपी के लिए विशेष इंतज़ाम.

    देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता, कांग्रेस अध्यक्ष, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और विशिष्ट मेहमानों को निमंत्रण भेजा गया है। वीआईपी आवागमन को ध्यान में रखते हुए चार हेलीपैड तैयार किए गए हैं — जिनमें से तीन शिबू सोरेन के घर के पास और एक लगभग तीन किलोमीटर दूर बनाया गया है। 16 अगस्त को होने वाले संस्कार भोज के दिन, विशेष अतिथियों के लिए अलग पार्किंग की सुविधा भी होगी।

    स्थानीय आमंत्रण झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला कमेटियों के माध्यम से भेजे जा रहे हैं। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से शिबू सोरेन के पैतृक आवास के 300 मीटर के दायरे में बैरिकेडिंग कर दी है, जहां केवल वीआईपी और करीबी लोग ही प्रवेश कर सकेंगे।

    ग्रामीणों और मेहमानों के लिए व्यवस्था.

    श्राद्ध भोज के लिए तैयार पांच पंडालों में बैठकर भोजन करने की सुविधा होगी। सभी पंडालों के पास ही बड़े-बड़े रसोई घर बनाए गए हैं। विशेष अतिथियों का भोजन शिबू सोरेन के घर के पीछे परोसा जाएगा। कार्यक्रम स्थल तक केवल वीआईपी वाहन ही पहुंचेंगे; आम लोगों के लिए 300 ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है, जो पार्किंग स्थल से लोगों को पंडाल तक लाएंगे।

    सुरक्षा के पुख्ता इंतेजाम.

    कार्यक्रम के दौरान नेमरा को छावनी में तब्दील कर दिया जाएगा। 9 आईपीएस अधिकारी 14 से 16 अगस्त तक और 40 डीएसपी 12 से 17 अगस्त तक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए विशेष आदेश जारी कर दिए हैं।

    गांव में आम आदमी की तरह सीएम सोरेन.

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं, जहां वे पिता के श्राद्ध कर्म में एक आम ग्रामीण की तरह हिस्सा ले रहे हैं। संथाल समाज और गांव के लोगों के साथ बैठकों में वे हर विधि-विधान की योजना पर चर्चा कर रहे हैं, साथ ही भोज के मेन्यू से लेकर मेहमानों की सेवा तक पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं।

    पिता की विरासत को जीते हुए हेमंत सोरेन गांव की गलियों और खेत-खलिहानों में घूमते हैं, किसानों से बात करते हैं और जल, जंगल, ज़मीन की रक्षा पर चर्चा करते हैं। उनका कहना है कि राजनीति उनके लिए सत्ता का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा और अधिकारों की रक्षा का संकल्प है — एक सीख जो उन्हें सीधे पिता से मिली है।

    जल, जंगल और ज़मीन: पहचान और संकल्प

    सीएम ने स्पष्ट कहा कि जल, जंगल और ज़मीन झारखंड की पहचान और अस्तित्व का आधार हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार इन संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वे मानते हैं कि यह केवल पर्यावरणीय जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा, समृद्ध झारखंड देने का वादा है।

    विरासत का विस्तार.

    गांव की मिट्टी, उसकी खुशबू और हरियाली की ठंडक में हेमंत सोरेन आज भी अपने पिता की परछाईं की तरह दिखते हैं। जनसेवा, सादगी और संघर्ष की वही परंपरा, जिसे दिशोम गुरु ने दशकों तक निभाया, अब मुख्यमंत्री अपने कामों के जरिये आगे बढ़ा रहे हैं।

  • अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आज़ाद नेमरा पहुँचकर दिवंगत शिबू सोरेन को दी श्रद्धांजलि

    The News Post4u.

    रामगढ़/नेमरा/रांची: झारखंड की राजनीति के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के लिए आज नेमरा गांव में श्रद्धालुओं और नेताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पैतृक आवास पर सुबह से ही लोगों का आना-जाना जारी रहा, जहां आमजन से लेकर देश के बड़े नेता तक श्रद्धा-सुमन अर्पित करने पहुंचे।

    अखिलेश यादव का भावुक पल.
    उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद अखिलेश यादव मंगलवार को नेमरा पहुंचे। उन्होंने दिवंगत नेता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, विधायक बसंत सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की और गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
    मुलाकात के दौरान वे रूपी सोरेन से बातचीत करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष, सेवा और जनहित के लिए समर्पण का प्रतीक रहा है, जिसे देश और झारखंड कभी नहीं भूल पाएगा।

    चंद्रशेखर आज़ाद ने भी दी श्रद्धांजलि.
    इससे पहले नगीना लोकसभा से सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद भी मुख्यमंत्री के पैतृक आवास पहुंचे। उन्होंने गुरुजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की। चंद्रशेखर आज़ाद ने शोक-संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए इस कठिन घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

    नेमरा में उमड़ी भीड़, गुरुजी को जननायक के रूप में किया याद.
    श्रद्धांजलि देने वालों में राजनीतिक नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी, वकील, किसान, मजदूर और आम ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद थे। सभी ने गुरुजी को ‘जननायक’ के रूप में याद किया और कहा कि उनका जीवन आदिवासी, वंचित और शोषित समाज की आवाज़ बनकर बीता।
    आज उनके श्राद्ध कर्म के सातवें दिन सुबह से ही नेमरा गांव में भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी। घर के आंगन से लेकर आस-पास की गलियों तक लोगों की कतारें लगी थीं।

    स्वतंत्रता दिवस समारोह में बदलाव.
    इसी बीच, रांची से यह खबर आई कि 15 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में ध्वजारोहण मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की जगह राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार करेंगे। परंपरा के अनुसार, हर साल स्वतंत्रता दिवस पर मुख्यमंत्री रांची में और राज्यपाल दुमका में ध्वजारोहण करते हैं। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के पारिवारिक शोक के कारण यह बदलाव किया गया है।
    राजभवन से जारी सूचना में बताया गया कि राज्य सरकार के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने स्वीकृति दे दी है। साथ ही, इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में राजभवन में होने वाला पारंपरिक ‘एट होम’ कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया है, जो कि गुरुजी के सम्मान में लिया गया निर्णय है।

    गुरुजी की विरासत अमर रहेगी.
    नेमरा में मौजूद लोगों का कहना था कि शिबू सोरेन न सिर्फ एक नेता थे, बल्कि संघर्ष, सादगी और सेवा की मिसाल थे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

  • ईडी के पूर्व अफसर कपिल राज ने जॉइन किया रिलायंस

    हेमंत सोरेन और केजरीवाल की गिरफ्तारी से जुड़े रहे चर्चित अधिकारी.

    The News Post4u.

    रांची/दिल्ली : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की जांच की निगरानी करने वाले प्रवर्तन निदेशालय (ED) के वरिष्ठ अधिकारी कपिल राज ने अब कॉर्पोरेट क्षेत्र की राह पकड़ ली है। भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 2009 बैच के अधिकारी और ईडी के पूर्व संयुक्त निदेशक कपिल राज ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) में नई जिम्मेदारी संभाल ली है।

    सरकारी सेवा से निजी क्षेत्र तक का सफर

    कपिल राज ने 16 वर्षों की सरकारी सेवा के बाद 17 जुलाई 2025 को व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था। इस बाबत वित्त मंत्रालय द्वारा एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया था। अब उन्होंने देश की अग्रणी कॉर्पोरेट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज में अपनी नई पारी शुरू कर दी है।

    हाई-प्रोफाइल जांचों में रहा महत्वपूर्ण रोल

    ईडी में अपने आठ वर्षों के कार्यकाल में कपिल राज का नाम कई चर्चित और संवेदनशील मामलों से जुड़ा रहा। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय की हेडक्वार्टर इन्वेस्टिगेशन यूनिट (HIU) और रांची ज़ोन में रहते हुए कई हाई-प्रोफाइल मामलों की निगरानी की।

    इनमें सबसे प्रमुख रही दिल्ली शराब नीति घोटाला, जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई, और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी से जुड़ा कथित ज़मीन घोटाला। इन दोनों ही मामलों की कार्रवाई में कपिल राज की अग्रणी भूमिका रही।

    इसके अलावा, मुंबई में उप निदेशक के तौर पर कार्यरत रहते हुए उन्होंने नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे भगोड़े हीरा कारोबारियों के वित्तीय घोटालों, डीएचएफएल घोटाले और अंडरवर्ल्ड से जुड़े इकबाल मिर्ची के मामलों की भी गंभीरता से जांच की।

    सहारनपुर से निकलकर ईडी के शीर्ष तक

    उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले कपिल राज ने लखनऊ से इलेक्ट्रॉनिक्स में बी.टेक की पढ़ाई की थी। मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से आने वाले राज को एक जुझारू और जमीनी स्तर पर काम करने वाले अफसर के रूप में जाना जाता रहा है। पूछताछ के लिए प्रश्नावली तैयार करने से लेकर रेड की निगरानी तक, वे हर मोर्चे पर अपनी सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

    रिलायंस में वरिष्ठ अधिकारियों की बढ़ती दिलचस्पी

    कपिल राज का रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ना यह संकेत देता है कि अब वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और जांच एजेंसियों में कार्यरत रहे अफसर कॉर्पोरेट सेक्टर में भी अपनी भूमिका तलाश रहे हैं।

    इससे पहले सीबीडीटी के पूर्व चेयरमैन के.वी. चौधरी, जो स्वयं IRS कैडर से थे, रिलायंस बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर कार्यरत हैं। वहीं, प्रसिद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट दिनेश कनबर को भी हाल ही में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया है।

    नवाचार आधारित नेतृत्व की ओर कदम

    मुकेश अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस इंडस्ट्रीज ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, रिटेल और टेलीकॉम जैसे विविध क्षेत्रों में कार्य कर रही है और ऐसे अनुभवी पेशेवरों को शामिल कर अपनी नवाचार-आधारित विकास रणनीति को और सशक्त कर रही है।

  • राज्यपाल पहुंचे नेमरा, दिवंगत दिशोम गुरु को दी श्रद्धांजलि

    हेमंत सोरेन निभा रहे पारिवारिक और राजनीतिक दायित्वों का संतुलन.

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    नेमरा/ रामगढ़: झारखंड की राजनीति के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और झामुमो संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद पूरा राज्य शोक में डूबा है। इसी क्रम में गुरुवार को झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा पहुंचे और दिवंगत नेता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

    राज्यपाल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर शोक संवेदना भी प्रकट की। मुख्यमंत्री इन दिनों अपने पिता के निधन के बाद श्राद्धकर्म और अंतिम संस्कार से जुड़ी सभी धार्मिक विधियां पूरी करने के लिए नेमरा गांव में ही रुके हुए हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ भावनात्मक रूप से भी यह समय उनके लिए अत्यंत कठिन है।

    बाबा की चिता को दी मुखाग्नि, अब निभा रहे पुत्र धर्म

    बीते मंगलवार को दिशोम गुरु शिबू सोरेन का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेमरा में किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान राज्य के कई बड़े नेता, पार्टी कार्यकर्ता और हज़ारों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। रांची विधानसभा से नेमरा तक उनके पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा के दौरान लोग सड़कों पर कतारबद्ध होकर “गुरुजी अमर रहें” के नारों से विदाई दे रहे थे।

    तीन कर्म की परंपरा निभाई, परिवार संग भावनात्मक क्षण

    अंतिम संस्कार के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को पारंपरिक ‘तीन कर्म’ की रस्म निभाई। इस दौरान उनका पूरा परिवार उनके साथ था — माता रूपी सोरेन, छोटे भाई बसंत सोरेन, पत्नी कल्पना सोरेन, बहन अंजलि सोरेन, भाभी सीता सोरेन सहित अन्य परिजन और बच्चे भी मौजूद रहे। बुजुर्गों की सलाह और परिवार की परंपराओं का पालन करते हुए हेमंत सोरेन ने पुत्र धर्म का निर्वहन किया।

    भावुक पोस्ट में याद किया संघर्ष और बलिदान

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया (X) पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा,

    “नेमरा की यह क्रांतिकारी और वीर भूमि, दादाजी की शहादत और बाबा के अथाह संघर्ष की गवाह है। यहां के जंगलों, नालों, नदियों और पहाड़ों ने क्रांति की हर गूंज सुनी है, हर बलिदान को संजो कर रखा है।”

    उन्होंने वीर शहीद दादाजी सोना सोबरन मांझी और दिशोम गुरु के संघर्ष को नमन करते हुए उनकी स्मृतियों को साझा किया। मुख्यमंत्री ने इस भावुक क्षण में नेमरा की प्राकृतिक पृष्ठभूमि में ली गई एक तस्वीर भी पोस्ट की।

    नेमरा बना श्रद्धांजलि स्थल, प्रशासनिक व्यवस्था चाक-चौबंद

    नेमरा गांव इन दिनों शोक और श्रद्धा का केंद्र बन गया है। राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू खुद नेमरा मे कैंप  कर ब्यवस्था बनाने मे लगे है ।  झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में गांव में मौजूद हैं। आम जनता से लेकर राजनेता तक, हर कोई दिशोम गुरु को अंतिम श्रद्धांजलि देने नेमरा पहुंच रहा है। गांव की सीमाओं पर प्रशासन ने ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की सख्त व्यवस्था की है। लगभग 4 किलोमीटर दूर तक गाड़ियों की पार्किंग व्यवस्था की गई है। रामगढ़ के डीसी और एसपी  व बोकारो ज़ोन के आई जी स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

    नेमरा आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि आदिवासी चेतना, संघर्ष और नेतृत्व की विरासत का प्रतीक बन गया है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा ने यह साबित कर दिया कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक आंदोलन थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब उस विरासत को संजोने और आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ अपने पिता के अंतिम संस्कार की हर परंपरा को निभा रहे हैं।

     

  • नेमरा गांव में 10 दिन तक रहेंगे मुख्यमंत्री, श्राद्धकर्म की सभी धार्मिक विधियों में निभाएंगे भागीदारी

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    नेमरा / रामगढ़ : झारखंड आंदोलन के जननायक, पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद अब उनके पुत्र और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पिता के अंतिम संस्कार से जुड़ी हर धार्मिक प्रक्रिया में पूर्ण रूप से भाग लेने का निर्णय लिया है। वे आगामी दस दिनों तक अपने पैतृक गांव  नेमरा में ही रहेंगे और वहीं से राज्य के कार्यों का संचालन भी करेंगे।

    बीते मंगलवार को शिबू सोरेन का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनके गांव नेमरा में किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता को मुखाग्नि दी थी । परिवार के सूत्रों के मुताबिक, गुरुजी का श्राद्धकर्म 10 दिनों तक चलेगा, और इस अवधि में हेमंत सोरेन पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ हर विधि-विधान में सम्मिलित रहेंगे।

    नेमरा में अपने पिता की स्मृतियों के बीच रहना हेमंत सोरेन के लिए एक भावनात्मक अनुभव होगा। वे परिवार के साथ समय बिताते हुए, अपने पिता के संघर्षों और योगदान को आत्मसात करने का अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। यह न केवल एक बेटे की जिम्मेदारी है, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक वारिस की भावनात्मक यात्रा भी है जो अपने पिता की विरासत को संभाल रहा है।

    प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सक्रिय.

    मुख्यमंत्री के नेमरा प्रवास को देखते हुए प्रशासनिक व्यवस्था भी पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। नेमरा गांव में सड़क, बिजली, पेयजल और मोबाइल नेटवर्क की समस्याओं को दूर करने के लिए तेज़ी से कार्य किए जा रहे हैं। अंतिम यात्रा के दौरान लाखों लोगों की उपस्थिति से गांव की बुनियादी सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ा था। खासकर मोबाइल नेटवर्क ठप हो जाने और संकरी सड़कों पर घंटों जाम लगने से लोगों को खासी परेशानी हुई।

    इस जाम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव तक फंस गए थे। भारी भीड़ और अव्यवस्था के बीच सुरक्षा बलों और प्रशासनिक अधिकारियों की चुनौतियाँ कई गुना बढ़ गई थीं।

    नेमरा में फिर जुटेगी भीड़.

    स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गुरुजी के श्राद्धकर्म के अंतिम दिन एक बार फिर नेमरा में भारी जनसैलाब उमड़ने की संभावना है। लाखों लोग अंतिम बार उनके चित्र पर पुष्प अर्पित करने और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के लिए वहां पहुँच सकते हैं।

    गांव के लोगों का कहना है कि गुरुजी की लोकप्रियता केवल एक नेता के रूप में नहीं थी, बल्कि एक जननायक और प्रेरणा स्रोत के रूप में थी। यही कारण है कि उनकी अंतिम विदाई में न केवल झारखंड, बल्कि बिहार, ओडिशा और बंगाल से भी श्रद्धालु उमड़े थे, और अब उनके श्राद्ध में भी यही दृश्य दोहराया जा सकता है।

  • राहुल गांधी हुए चाईबासा कोर्ट में पेश, मानहानि मामले में मिली जमानत

    The News Post4u.

    रांची :   कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष  और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को झारखंड के चाईबासा कोर्ट से बुधवार को राहत मिल गयी , जब अदालत ने उन्हें मानहानि मामले में जमानत दे दी। मामला वर्ष 2018 का है, जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक बयान दिए थे। यह मामला अब कानूनी रूप से गवाही की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है।

    सुबह चाईबासा पहुंचे राहुल गांधी.

    बुधवार सुबह राहुल गांधी हेलीकॉप्टर से चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान पर उतरे। इसके बाद वह सीधे चाईबासा परिसदन पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग 45 मिनट तक रुके। करीब 11 बजे वे सिविल कोर्ट पहुंचे और एमपी-एमएलए विशेष अदालत की न्यायाधीश सुप्रिया रानी तिग्गा के समक्ष पेश हुए। उनके साथ उनके वकील प्रणव दरीपा भी मौजूद थे।

    अदालत ने दी सशर्त जमानत.

    राहुल गांधी की ओर से कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। उन्हें इस शर्त पर जमानत दी गई कि वह आगे की जांच में पूरा सहयोग करेंगे और जब भी अदालत बुलाएगी, पेश होंगे।

     क्या है मामला ?

    वर्ष 2018 में राहुल गांधी ने चाईबासा की एक जनसभा के दौरान कथित तौर पर भाजपा और उसके नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसे लेकर भाजपा नेता प्रताप कुमार कटियार ने चाईबासा एमपी-एमएलए कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।

    मामले में शिकायतकर्ता के वकील विनोद कुमार साहू के अनुसार, कोर्ट ने राहुल गांधी से स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या उन्होंने वह बयान दिया था, जिस पर विवाद हुआ है। इस पर राहुल गांधी ने साफ इनकार करते हुए कहा, “मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया।” वकील साहू ने कोर्ट में तर्क दिया कि राहुल गांधी का भाषण आज भी कांग्रेस की वेबसाइट पर उपलब्ध है और उसकी प्रति कोर्ट में साक्ष्य के रूप में जमा की जा चुकी है।

    पहले टली थी पेशी, अब शुरू होगी गवाही.

    बता दें कि राहुल गांधी को पहले 26 जून को कोर्ट में पेश होना था, लेकिन उन्होंने विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देते हुए पेशी की तारीख 6 अगस्त तय की थी। उसी के तहत आज वे अदालत में पेश हुए।

    राहुल गांधी को भले ही चाईबासा कोर्ट से आज जमानत मिल गई हो, लेकिन मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अब इस केस में गवाही और बहस का चरण शुरू होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी अपने बयान से इनकार पर कायम रहते हैं या विपक्ष इसे एक और राजनीतिक मुद्दे में बदल देता है।

     

  • मानहानि मुकदमे में राहुल गांधी कल चाईबासा कोर्ट में होंगे पेश

    अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़ा है मामला 

    The News Post4u.

    रांची ,झारखंड: कांग्रेस नेता राहुल गांधी आगामी 6 अगस्त को झारखंड के चाईबासा में स्थित एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में पेश होंगे। यह पेशी वर्ष 2018 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मानहानि के मामले में हो रही है। इस मामले में कोर्ट ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश देते हुए गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

    क्या है मामला ?

    चाईबासा निवासी प्रताप कटियार ने 9 जुलाई 2018 को एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि कांग्रेस अधिवेशन के दौरान राहुल गांधी ने अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया था, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कोर्ट ने पहले अप्रैल 2022 में राहुल गांधी के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया। लेकिन उनके द्वारा इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

    इसके बाद फरवरी 2024 में कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट जारी किया। राहुल गांधी की ओर से उनके अधिवक्ता ने व्यक्तिगत पेशी से छूट की अर्जी दाखिल की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। फिर मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा, जहां उन्हें कुछ समय के लिए राहत मिली।

    हालांकि मार्च 2024 में हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद चाईबासा कोर्ट ने मामले में पुनः सुनवाई शुरू की और उन्हें 6 अगस्त को सशरीर उपस्थित होने का आदेश जारी किया।

    सुरक्षा के कड़े इंतजाम, हेलीपैड तैयार.

    राहुल गांधी की प्रस्तावित उपस्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क है। सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाने की कवायद जारी है। चाईबासा के टाटा कॉलेज मैदान में उनके हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए विशेष हेलीपैड तैयार किया गया है। टाटा कॉलेज से लेकर व्यवहार न्यायालय तक के पूरे रास्ते में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी।

    प्रशासन ने उनके आगमन को लेकर सभी सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राहुल गांधी के साथ दिल्ली और रांची से अधिवक्ताओं की एक टीम के आने की भी संभावना जताई जा रही है।

    अब अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें.

    यह मामला राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राहुल गांधी की कोर्ट में उपस्थिति न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, बल्कि इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि 6 अगस्त को कोर्ट में क्या रुख अपनाया जाता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।