हेमंत सोरेन निभा रहे पारिवारिक और राजनीतिक दायित्वों का संतुलन.
परवेज़ आलम.
The News Post4u.
नेमरा/ रामगढ़: झारखंड की राजनीति के पुरोधा, आदिवासी अस्मिता के प्रतीक और झामुमो संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद पूरा राज्य शोक में डूबा है। इसी क्रम में गुरुवार को झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पैतृक गांव नेमरा पहुंचे और दिवंगत नेता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
राज्यपाल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर शोक संवेदना भी प्रकट की। मुख्यमंत्री इन दिनों अपने पिता के निधन के बाद श्राद्धकर्म और अंतिम संस्कार से जुड़ी सभी धार्मिक विधियां पूरी करने के लिए नेमरा गांव में ही रुके हुए हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ भावनात्मक रूप से भी यह समय उनके लिए अत्यंत कठिन है।
बाबा की चिता को दी मुखाग्नि, अब निभा रहे पुत्र धर्म
बीते मंगलवार को दिशोम गुरु शिबू सोरेन का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेमरा में किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान राज्य के कई बड़े नेता, पार्टी कार्यकर्ता और हज़ारों की संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। रांची विधानसभा से नेमरा तक उनके पार्थिव शरीर की अंतिम यात्रा के दौरान लोग सड़कों पर कतारबद्ध होकर “गुरुजी अमर रहें” के नारों से विदाई दे रहे थे।
तीन कर्म की परंपरा निभाई, परिवार संग भावनात्मक क्षण
अंतिम संस्कार के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को पारंपरिक ‘तीन कर्म’ की रस्म निभाई। इस दौरान उनका पूरा परिवार उनके साथ था — माता रूपी सोरेन, छोटे भाई बसंत सोरेन, पत्नी कल्पना सोरेन, बहन अंजलि सोरेन, भाभी सीता सोरेन सहित अन्य परिजन और बच्चे भी मौजूद रहे। बुजुर्गों की सलाह और परिवार की परंपराओं का पालन करते हुए हेमंत सोरेन ने पुत्र धर्म का निर्वहन किया।
भावुक पोस्ट में याद किया संघर्ष और बलिदान
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया (X) पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा,
“नेमरा की यह क्रांतिकारी और वीर भूमि, दादाजी की शहादत और बाबा के अथाह संघर्ष की गवाह है। यहां के जंगलों, नालों, नदियों और पहाड़ों ने क्रांति की हर गूंज सुनी है, हर बलिदान को संजो कर रखा है।”
उन्होंने वीर शहीद दादाजी सोना सोबरन मांझी और दिशोम गुरु के संघर्ष को नमन करते हुए उनकी स्मृतियों को साझा किया। मुख्यमंत्री ने इस भावुक क्षण में नेमरा की प्राकृतिक पृष्ठभूमि में ली गई एक तस्वीर भी पोस्ट की।
नेमरा बना श्रद्धांजलि स्थल, प्रशासनिक व्यवस्था चाक-चौबंद
नेमरा गांव इन दिनों शोक और श्रद्धा का केंद्र बन गया है। राज्य के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू खुद नेमरा मे कैंप कर ब्यवस्था बनाने मे लगे है । झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में गांव में मौजूद हैं। आम जनता से लेकर राजनेता तक, हर कोई दिशोम गुरु को अंतिम श्रद्धांजलि देने नेमरा पहुंच रहा है। गांव की सीमाओं पर प्रशासन ने ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की सख्त व्यवस्था की है। लगभग 4 किलोमीटर दूर तक गाड़ियों की पार्किंग व्यवस्था की गई है। रामगढ़ के डीसी और एसपी व बोकारो ज़ोन के आई जी स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
नेमरा आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि आदिवासी चेतना, संघर्ष और नेतृत्व की विरासत का प्रतीक बन गया है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अंतिम यात्रा ने यह साबित कर दिया कि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक आंदोलन थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब उस विरासत को संजोने और आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ अपने पिता के अंतिम संस्कार की हर परंपरा को निभा रहे हैं।







