Category: Giridih

  • गिरिडीह में आयुष सेवाओं की सर्जरी! उप विकास आयुक्त ने कसी कमान

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में आज एक अहम कदम उठाया गया। उप विकास आयुक्त स्मृता कुमारी ने अपने कार्यालय कक्ष में आयुष विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर साफ संकेत दे दिया कि अब स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

    बैठक का फोकस स्पष्ट था—आमजन को बेहतर, सुलभ और प्रभावी स्वास्थ्य सुविधा कैसे मिले। आयुष विभाग की योजनाओं की प्रगति, सेवा की गुणवत्ता, दवाओं की उपलब्धता और आगामी कार्ययोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उप विकास आयुक्त ने एक-एक बिंदु पर गंभीरता से समीक्षा की और अधिकारियों से जमीनी हकीकत की जानकारी ली।

    ओपीडी नियमित, दवाएं समय पर.

    उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आयुष स्वास्थ्य केंद्रों में नियमित रूप से ओपीडी संचालित हो। चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और मरीजों को आवश्यक दवाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। साफ-सफाई की स्थिति पर भी विशेष जोर देते हुए कहा गया कि स्वास्थ्य केंद्रों की स्वच्छता से ही मरीजों का विश्वास मजबूत होता है।

    ग्रामीण इलाकों पर विशेष फोकस.

    बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष सेवाओं के प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धति की ताकत गांव-गांव तक पहुंचनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी पद्धतियों के माध्यम से लोगों को सस्ती और प्रभावी चिकित्सा उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

    आयुष्मान भारत से तालमेल.

    बैठक में आयुष्मान भारत योजना के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। निर्देश दिया गया कि लाभुकों को योजनाओं का समुचित लाभ मिले और आयुष सेवाएं भी इस दायरे में प्रभावी रूप से जुड़ें।

    जवाबदेही और पारदर्शिता पर जोर.

    उप विकास आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि आयुष विभाग की सेवाएं सीधे जनहित से जुड़ी हैं। सभी पदाधिकारी और कर्मी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन गंभीरता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ करें। साथ ही, प्रगति कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर दिखाई दें।

    बैठक में आयुष पदाधिकारी समेत संबंधित अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।
    जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन की यह सक्रियता आने वाले दिनों में आमजन के लिए राहत की बड़ी खबर साबित हो सकती है।

  • गैर-दलीय चुनाव में ‘भाजपा समर्थित’ पोस्टरों का खेल, आचार संहिता पर सवाल—FIR के बाद भी शहर में जस के तस बैनर

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू.

    गिरिडीह:नगर निगम का चुनाव गैर-दलीय है। कागज़ पर यह साफ लिखा है कि चुनाव पार्टी चिन्ह पर नहीं, व्यक्ति के नाम और काम पर लड़ा जाएगा। लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और कहानी कह रही है। पूरे शहर में “भाजपा समर्थित उम्मीदवार” लिखे पोस्टरों और बैनरों ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। सवाल यह है—जब चुनाव गैर-दलीय है, तो फिर ‘पार्टी समर्थित’ का शोर किस नियम के तहत?

    चुनाव आयोग ने मामले का संज्ञान लिया। आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में दो दिन पहले गिरिडीह नगर निगम के मेयर प्रत्याशी शैलेंद्र चौधरी के खिलाफ नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि एफआईआर के बाद भी वे बैनर-पोस्टर शहर की दीवारों पर अब भी टंगे हुए हैं—मानो व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहे हों।

    शहर के कई प्रमुख चौक-चौराहों से लेकर गलियों तक लगे बैनरों में साफ तौर पर “भाजपा समर्थित” लिखा दिखाई देता है। यह स्थिति केवल पोस्टरों तक सीमित नहीं है। पचम्बा थाना और मुफस्सिल थाना क्षेत्र में प्रचार वाहनों के जरिए भी बाकायदा यह प्रचार किया जा रहा है कि “मैं भाजपा का समर्थित उम्मीदवार हूँ।” लाउडस्पीकर से प्रसारित संदेशों में पार्टी समर्थन का दावा खुलकर दोहराया जा रहा है।

    जबकि नियम स्पष्ट हैं—नगर निकाय चुनाव में किसी भी दल के अधिकृत प्रत्याशी की अवधारणा लागू नहीं होती। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश है? क्या यह आचार संहिता की खुली अवहेलना नहीं है?

    जिला प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जो अधिकारी “नियम-कानून” का पालन सुनिश्चित कराने के लिए तैनात हैं, क्या उन्हें यह सब दिखाई नहीं दे रहा? एफआईआर दर्ज होने के बाद अपेक्षा थी कि पोस्टर-बैनर हटाए जाएंगे, प्रचार वाहनों पर रोक लगेगी और कड़ी कार्रवाई होगी। लेकिन अब तक ज़मीनी स्तर पर कोई सख्ती नजर नहीं आई है।

    राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गैर-दलीय चुनाव में पार्टी का नाम जोड़ना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना के विपरीत है। इससे चुनाव की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगता है।

    अब देखना यह है कि चुनाव आयोग और जिला प्रशासन आगे क्या कदम उठाते हैं—क्या नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा या फिर यह मामला भी कागज़ी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगा?

    नगर निगम चुनाव में मुद्दे विकास, जल संकट, सफाई और आधारभूत सुविधाओं के होने चाहिए थे। लेकिन फिलहाल चर्चा पोस्टरों, बैनरों और आचार संहिता उल्लंघन की है। सवाल सीधा है—क्या गैर-दलीय चुनाव वाकई गैर-दलीय रह पाएगा?

     

  • प्रमिला मेहरा का जनसंपर्क तेज, बोलीं— “बेटी को मौका दीजिए, शहर को नई दिशा मिलेगी”

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: नगर निगम चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, सियासी सरगर्मी भी तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में महापौर प्रत्याशी प्रमिला मेहरा ने शहर के विभिन्न मोहल्लों में जोरदार जनसंपर्क अभियान चलाया। घर-घर पहुंचकर उन्होंने लोगों से आशीर्वाद मांगा और भावनात्मक अपील करते हुए कहा, आपकी बेटी, आपकी बहन चुनाव मैदान में है। अगर आप मुझे मेयर बनाते हैं तो गिरिडीह का समुचित और संतुलित विकास सुनिश्चित करूंगी।”

    जनसंपर्क के दौरान प्रमिला मेहरा ने स्थानीय समस्याओं—जल संकट, सफाई व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं—को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि वह शहरी क्षेत्र की परेशानियों से भली-भांति परिचित हैं और मेयर बनने के बाद निश्चित समय सीमा में समाधान सुनिश्चित करेंगी।

    महाशिवरात्रि के अवसर पर उन्होंने विभिन्न मंदिरों में महादेव की पूजा-अर्चना कर शहर की सुख-समृद्धि की कामना भी की।

    रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग होगा प्राथमिक एजेंडा.

    प्रमिला मेहरा ने अपने विज़न को स्पष्ट करते हुए कहा कि गिरिडीह नगर निगम क्षेत्र में रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था लागू की जाएगी, ताकि लगातार गिरते भूजल स्तर को रोका जा सके। उनका दावा है कि इससे आने वाले वर्षों में शहर को पानी की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।

    उन्होंने “हर घर नल जल” की व्यवस्था सुनिश्चित करने का भी वादा किया और कहा कि जल संकट का स्थायी समाधान उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है।

    समर्थकों का दिखा उत्साह.

    जनसंपर्क अभियान में इरशाद अहमद वारिस , नऔषद अहमद चांद ,राकेश कुमार राकी, अभय सिंह, सुमेर वर्मा, रौनक मिश्रा, अभय कुमार, सन्नी सिंह, विवेक सिन्हा, नंदकिशोर सिंह, बासुदेव यादव, मो. इम्तियाज, उमेश यादव, अंजली सोरेन, नंदू सिंह, गीता शर्मा, प्रमिला कुमारी, सुशील शर्मा, शाहनवाज अंसारी, मो. तुफान, सोनू एजाज, अल्कामा, मो. वसीम राजा, मो. पप्पू सहित दर्जनों समर्थक मौजूद रहे।

    चुनावी मौसम में अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता “बेटी” की इस अपील को कितना समर्थन देती है और शहर की सरकार की सत्ता की चाबी किसके हाथों में जाती है।

  • नगर निकाय चुनाव में महागठबंधन में दरार ! JMM – CONGRESS आमाने सामने

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह :  नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच एक बड़ी सियासी खबर सामने आ रही है।
    नाम वापसी शुक्रवार को होगी लेकिन उससे पहले ही महागठबंधन में दरार साफ़ दिखाई देने लगी है। मेयर चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस आमने-सामने खड़ी नजर आ रही हैं।

    दरअसल, दोनों ही दलों ने अपने-अपने समर्थित प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। जेएमएम ने जहां पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रमिला मेहरा को मेयर पद के लिए समर्थन देने का ऐलान किया है, तो वहीं कांग्रेस ने अपने नेता डॉ. समीर राज चौधरी को मैदान में उतार दिया है।

    गुरुवार को अलग-अलग जगहों पर हुई प्रेस वार्ताओं में दोनों दलों के जिला अध्यक्षों ने अपने-अपने प्रत्याशियों के नाम का औपचारिक ऐलान किया।

    जेएमएम का दावा – विकास के लिए एकजुट हैं कार्यकर्ता

    गोयनका सेवा सदन में आयोजित प्रेस वार्ता में जेएमएम जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि प्रमिला मेहरा शुरू से ही आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से उठाती रही हैं। उनका कहना था कि प्रमिला मेहरा के नेतृत्व में
    शहर के विकास को एक नई दिशा मिलेगी और झारखंड मुक्ति मोर्चा पूरी ताकत के साथ उनके समर्थन में मैदान में उतरेगा। इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ और युवा कार्यकर्ता मौजूद रहे,
    जिनमें अजीत कुमार पप्पू, शाहनवाज अंसारी, सुमन सिन्हा, रॉकी सिंह, अभय सिंह, कृष्ण मुरारी शर्मा, चांद रशीद, टुन्ना सिंह, देवचरण दास, अजय सिंह, दिलीप रजक, सुमित सहित
    बड़ी संख्या में जेएमएम कार्यकर्ता शामिल थे।

    कांग्रेस का पलटवार – जनहित के मुद्दों को समझते हैं समीर

    वहीं दूसरी ओर, अलकापुरी में कांग्रेस ने भी शक्ति प्रदर्शन किया।
    मेयर प्रत्याशी सह कांग्रेस नेता डॉ. समीर राज चौधरी के समर्थन में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। कांग्रेस जिला अध्यक्ष सतीश केडिया ने कहा कि डॉ. समीर राज चौधरी अनुभवी, शिक्षित और जनता के मुद्दों को गहराई से समझने वाले नेता हैं। उनका दावा है  कि डॉ. समीर के नेतृत्व में नगर निगम का समुचित विकास होगा और आम लोगों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इस मौके पर अजय सिन्हा मंटू, मदन लाल विश्वकर्मा, साबिर खान  समेत कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    बीजेपी ने पहले ही खोल दिया था पत्ता

    आपको बता दें कि इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने मेयर पद के लिए
    डॉ. शैलेंद्र चौधरी को अपना समर्थित प्रत्याशी घोषित किया था। हालांकि, बीजेपी की इस घोषणा के बावजूद पार्टी से जुड़े नेता कामेश्वर पासवान, प्रकाश कुमार दास और नागेश्वर दास
    ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है

    महागठबंधन में अंदरूनी चुनौती भी बनी सिरदर्द

    इतना ही नहीं, कांग्रेस और जेएमएम दोनों के लिए चुनौती अपने ही घर से खड़ी हो गई है।

    कांग्रेस के एक और नेता जोगेश्वर महथा पहले ही मेयर पद के लिए नामांकन दाखिल कर चुके हैं। वहीं जेएमएम से जुड़े पप्पू रजक भी मेयर की रेस में अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं।

    अब बड़ा सवाल यही है— क्या नाम वापसी से पहले महागठबंधन की यह दरार भरेगी?
    या फिर यह चुनावी लड़ाई महागठबंधन के लिए नई मुश्किलें खड़ी करने वाली है?

    नगर निगम चुनाव में अब मुकाबला पूरी तरह दिलचस्प हो चुका है— हर निगाह नाम वापसी की तारीख और आगे की सियासी चालों पर टिकी है।

  • JMM की हो गयी शालिनी, कोडरमा की पूर्व जिप अध्यक्ष रही है

    CM हेमंत सोरेन की मोजूदगी मे ली सदस्यता

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    कोडरमा / गिरिडीह :  कोडरमा की सियासी ज़मीन पर आज झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपनी ताकत का खुला प्रदर्शन किया। झामुमो के सदस्यता समारोह में खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मौजूद रहे, और इसी मंच से राजनीति की एक अहम तस्वीर भी साफ हो गई।

    जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष और आजसू की वरिष्ठ नेत्री शालिनी गुप्ता ने गुरुवार को सैकड़ों समर्थकों के साथ झामुमो का दामन थाम लिया। मंच पर मौजूद थे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू—और माहौल था पूरी तरह सियासी उत्साह से भरा हुआ।

    कोडरमा में आयोजित इस सदस्यता समारोह में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने शालिनी गुप्ता को औपचारिक रूप से झामुमो की सदस्यता दिलाई। कार्यक्रम में झामुमो कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे, जो इस बदलाव को अपने आप में बड़ा संकेत मान रहे हैं।
    हेमंत सोरेन ने पार्टी में शामिल होने वाले सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह झामुमो के बढ़ते कुनबे और जनता के मजबूत भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता लगातार झामुमो की नीतियों और सरकार के काम पर भरोसा जता रही है।

    वहीं, झामुमो में शामिल होने के बाद शालिनी गुप्ता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के कामकाज की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि झामुमो की सरकार आदिवासी, मूलवासी समेत समाज के हर वर्ग का ख्याल रख रही है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड विकास की सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।
    शालिनी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री के विकास कार्यों से प्रभावित होकर उन्होंने यह फैसला लिया। साथ ही उनके क्षेत्र के कार्यकर्ताओं की भी यही इच्छा थी, और उसी भावना का सम्मान करते हुए उन्होंने झामुमो में शामिल होने का निर्णय लिया।

    सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद किया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने का जो सपना देखा गया था, वह आज जमीन पर उतरता दिखाई दे रहा है।
    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य के हर गांव तक विकास योजनाएं पहुंच रही हैं और सरकार सभी वर्गों को साथ लेकर काम कर रही है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि झारखंड के विकास को देखकर भाजपा असहज है और केंद्र सरकार द्वारा राज्य की योजनाओं की राशि रोकी जा रही है।

    महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ समेत कई जनकल्याणकारी योजनाओं का जिक्र किया। साथ ही भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में झारखंड में कई कंपनियां निवेश करेंगी, जिससे युवाओं को रोजगार और नौकरी के नए अवसर मिलेंगे।

    कुल मिलाकर, कोडरमा से उठी यह सियासी तस्वीर साफ संकेत दे रही है—झामुमो लगातार अपना दायरा बढ़ा रहा है, और आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति और भी दिलचस्प होने वाली है।

     

  • प्रचार में बंपर पैसा नहीं उड़ा सकेंगे मेयर प्रत्याशी, झारखंड निकाय चुनाव में आयोग ने तय की लिमिट

    परवेज़ आलम.

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह: झारखंड की सियासत में एक बार फिर चुनावी डुगडुगी बज चुकी है।नगर निकाय चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही शहरी राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
    लेकिन इस बार चुनावी मैदान में उतरने वाले मेयर प्रत्याशियों के लिए एक बड़ी खबर है—अब प्रचार में बंपर पैसा उड़ाना आसान नहीं होगा।
    राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की घोषणा के साथ-साथ उम्मीदवारों के खर्च की सख्त सीमा भी तय कर दी है।

    लंबे इंतज़ार के बाद मंगलवार, को झारखंड नगर निकाय चुनाव की आधिकारिक घोषणा कर दी गई। राज्य के 48 शहरी निकायों में 23 फरवरी को मतदान होगा। इस चुनाव में कुल 43 लाख 33 हजार 574 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।  इनमें—  22 लाख 7 हजार से ज़्यादा पुरुष,
    21 लाख 26 हजार से अधिक महिलाएं, और 144 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।

    अब ज़रा चुनाव के दायरे पर नज़र डालते हैं…

    राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक,
    9 नगर निगमों में मेयर, 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों में अध्यक्ष पद के लिए वोट डाले जाएंगे। इसके अलावा, पूरे राज्य में 1087 वार्ड पार्षदों का भी चुनाव होगा।

    मतदान की तैयारियां भी ज़ोरों पर हैं।राज्यभर में बनाए गए हैं— 4,304 मतदान केंद्र,
    जो 2,129 भवनों में स्थापित किए जाएंगे, ताकि मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। और अब बात उस फैसले की, जिस पर सबसे ज्यादा चर्चा है…
    चुनावी खर्च की लिमिट

    निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है—
     10 लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगर निगमों में
    मेयर या अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अधिकतम 25 लाख रुपये ही खर्च कर सकेंगे,
    जबकि वार्ड पार्षदों के लिए यह सीमा 5 लाख रुपये होगी।

    10 लाख से कम आबादी वाले नगर निगमों में मेयर/अध्यक्ष के लिए खर्च सीमा 15 लाख रुपये,
    और वार्ड पार्षदों के लिए 3 लाख रुपये तय की गई है।

    नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए भी अलग-अलग सीमा तय है—एक लाख से ज्यादा आबादी वाली नगर परिषदों में अध्यक्ष 10 लाख और वार्ड पार्षद 2 लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे।

    एक लाख से कम आबादी वाली नगर परिषदों में यह सीमा घटकर 6 लाख और 1.5 लाख रुपये रह गई है। वहीं, 12 हजार से 40 हजार आबादी वाली नगर पंचायतों में
    अध्यक्ष के लिए 5 लाख, और वार्ड पार्षद के लिए 1 लाख रुपये की सीमा तय की गई है। गौरतलब है कि झारखंड में नगर निकाय चुनाव साल 2020 से लंबित थे।
    पहले कोरोना महामारी, फिर कानूनी और प्रक्रियात्मक अड़चनों के चलते चुनाव टलते रहे।
    लेकिन अब आयोग ने साफ कर दिया है—
    चुनाव होंगे और तय नियमों के तहत ही होंगे।

    तो साफ है… इस बार चुनावी मैदान में नारे, मुद्दे और जनता का भरोसा तो चलेगा,
    लेकिन बेतहाशा खर्च पर पूरी तरह ब्रेक रहेगा।

  • बीमा कानून संशोधन के खिलाफ कर्मचारी संघ मुखर

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

     गिरिडीह : 71वें जीवन बीमा व्यवसाय राष्ट्रीयकरण दिवस के मौके पर 19 जनवरी 2026 को अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ, गिरिडीह शाखा इकाई की ओर से शाखा परिसर में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बीमा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कर्मचारी नेता मौजूद रहे।

    प्रेस वार्ता में अध्यक्ष संजय शर्मा, सचिव धर्म प्रकाश, संयुक्त सचिव अनुराग मुर्मू, राजेश कुमार उपाध्याय, विजय कुमार, उपाध्यक्ष कुमकुम बाला वर्मा और उमानाथ झा उपस्थित थे।

    प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंडलीय संयुक्त सचिव सह शाखा सचिव धर्म प्रकाश ने जीवन बीमा के राष्ट्रीयकरण के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 19 जनवरी 1956 को तत्कालीन केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से जीवन बीमा व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण किया था। इसके बाद 1 सितंबर 1956 को 245 से अधिक देसी-विदेशी निजी बीमा कंपनियों का अधिग्रहण कर भारतीय जीवन बीमा निगम—एलआईसी की स्थापना की गई।

    उन्होंने बताया कि एलआईसी की स्थापना का मूल उद्देश्य था—
    “जनता का पैसा, जनता के लिए” और आम नागरिकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना। महज 5 करोड़ रुपये की पूंजी से शुरू हुई एलआईसी ने अपने उद्देश्यों को पूरी मजबूती से निभाया है।

    धर्म प्रकाश ने आंकड़ों के जरिए एलआईसी की भूमिका को सामने रखा। उन्होंने बताया कि

    • 31 मार्च 2025 तक, एलआईसी ने देश के आधारभूत संरचना विकास में 54 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है।

    • एलआईसी की कुल परिसंपत्तियां 56 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी हैं।

    • हर वर्ष एलआईसी आयकर, जीएसटी सहित विभिन्न माध्यमों से 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का योगदान भारतीय राजकोष में दे रही है।

    • पिछले वित्तीय वर्ष में एलआईसी ने 230 लाख बीमा दावों का भुगतान किया।

    • एलआईसी का शुद्ध लाभ 48,151 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18.38 प्रतिशत अधिक है।

    उन्होंने यह भी बताया कि 20 जनवरी 2025 को एलआईसी ने एक ही दिन में 5,88,160 बीमा पॉलिसियां बेचकर ग्रीनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया। आज एलआईसी दुनिया का तीसरा सबसे शक्तिशाली ब्रांड बन चुका है और

    • प्रीमियम में 57 प्रतिशत,

    • तथा पॉलिसियों की संख्या में 63 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ बीमा बाजार में अग्रणी बना हुआ है।

    हालांकि, प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर गहरी चिंता भी जताई गई। धर्म प्रकाश ने कहा कि केंद्र सरकार ने “सबका बीमा, सबकी सुरक्षा” के नाम पर बीमा कानून संशोधन बिल 2025 पारित किया है, जिसके तहत बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है। साथ ही कंपोजिट और कैपटिव इंश्योरेंस जैसी नई अवधारणाएं लाई जा रही हैं।

    उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के ये फैसले जीवन बीमा के राष्ट्रीयकरण के मूल उद्देश्य को कमजोर करेंगे और देश का बीमा क्षेत्र 1956 से पहले वाली निजी मुनाफाखोरी की स्थिति की ओर लौट सकता है।

    अखिल भारतीय बीमा कर्मचारी संघ ने बताया कि हाल ही में भुवनेश्वर में संपन्न 27वें राष्ट्रीय अधिवेशन में यह सर्वसम्मति से तय किया गया है कि केंद्र सरकार के इन फैसलों के खिलाफ जोरदार और लोकतांत्रिक संघर्ष किया जाएगा, ताकि एलआईसी की सार्वजनिक और जनकल्याणकारी भूमिका को सुरक्षित रखा जा सके।

  • अस्पताल की सेवाएं चलाने वाले हाथ सड़क पर, सदर अस्पताल में बेमियदी धरना शुरू

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : जिस सदर अस्पताल में रोज़ सैकड़ों मरीज़ इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, उसी अस्पताल परिसर में आज काम करने वाले हाथों ने न्याय की गुहार लगाई। गिरिडीह सदर अस्पताल में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों ने अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। यह आंदोलन जेएलकेएम के बैनर तले चल रहा है।

    धरने पर बैठे कर्मियों का साफ़ कहना है—
    “जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक यह आंदोलन खत्म नहीं होगा।”

    आंदोलनरत कर्मियों का आरोप है कि महीनों से उनका वेतन बकाया है। ईपीएफ, ईएसआई और पूर्व में की गई कटौतियों की राशि अब तक नहीं मिली है। सरकार द्वारा तय समय पर वेतन और बोनस का भुगतान नहीं होने से कर्मी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कई परिवारों के सामने रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करना तक मुश्किल हो गया है।

    कर्मियों ने बताया कि उनकी प्रमुख मांगों में सभी पदों पर कार्यरत कर्मियों को नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराना, तकनीकी डिग्रीधारी कर्मचारियों को कुशल कामगार की श्रेणी में शामिल कर उचित वेतन देना और हर माह की 7 तारीख तक मानदेय का भुगतान सुनिश्चित करना शामिल है।

    इसके साथ ही अनुत्रिन कंप्यूटर ऑपरेटरों के स्किल टेस्ट का परिणाम शीघ्र जारी कर पद बहाल करने की मांग उठाई गई है। कर्मियों ने यह भी कहा कि सिविल सर्जन द्वारा सभी प्रखंडों के प्रभारियों को हर माह की 5 तारीख तक उपस्थिति (एबसेंटी) पर हस्ताक्षर के लिए बाध्य किया जाए, ताकि वेतन भुगतान में देरी न हो।

    धरना स्थल पर मौजूद कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा। उन्होंने साफ़ कहा कि ज़रूरत पड़ी तो अस्पताल से लेकर जिला मुख्यालय तक संघर्ष का दायरा बढ़ाया जाएगा।

    गिरिडीह सदर अस्पताल में शुरू हुआ यह धरना सिर्फ़ वेतन का सवाल नहीं है, बल्कि उन कर्मियों की आवाज़ है, जिनके भरोसे स्वास्थ्य व्यवस्था चलती है, लेकिन जिनकी मेहनत का हिसाब समय पर नहीं दिया जाता।

  • जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष का आह्वान, फॉरवर्ड ब्लॉक का सम्मेलन संपन्न

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ किसी तरह का समझौता नहीं, बल्कि संगठित संघर्ष ही शहीद कॉमरेड महेंद्र सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि हो सकती है। यह बात पूर्व जिला परिषद सदस्य एवं ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के गिरिडीह जिला संयोजक राजेश यादव ने कही। वे रविवार को फॉरवर्ड ब्लॉक के बेंगाबाद प्रखंड के पहले सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    राजेश यादव ने कहा कि आज आम जनता केंद्र और झारखंड सरकार की नीतियों से बुरी तरह प्रभावित है। महंगाई, बेरोज़गारी, किसानों की बदहाली, मज़दूरों के अधिकारों पर हमले और सामाजिक असमानता लगातार बढ़ रही है। ऐसे हालात में कॉमरेड महेंद्र सिंह जैसे जनसंघर्ष के प्रतीकों के जीवन से सीख लेते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस के समाजवादी भारत के सपने को साकार करने के लिए संघर्ष को तेज करना समय की मांग है।

    उन्होंने कहा कि देश की आज़ादी को 78 वर्ष और झारखंड राज्य के गठन को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन जनता की स्थिति आज भी चिंताजनक बनी हुई है। विकास के दावे ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। इसलिए सिदो-कानो, बिरसा मुंडा, नेताजी सुभाष बोस, भगत सिंह, डॉ. भीमराव अंबेडकर, शिबू सोरेन और कॉमरेड महेंद्र सिंह जैसे संघर्षशील नायकों की विचारधारा से प्रेरणा लेना अब अपरिहार्य हो गया है।

    सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रदेश महासचिव अरुण कुमार मंडल उपस्थित थे। उन्होंने बेंगाबाद प्रखंड सम्मेलन की सफलता पर कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि आने वाले दिनों में पार्टी जनहित के मुद्दों को लेकर सड़क से सदन तक संघर्ष तेज करेगी।

    कार्यक्रम के दौरान शहादत दिवस के अवसर पर कॉमरेड महेंद्र सिंह सहित फॉरवर्ड ब्लॉक के जन आंदोलनों में शहीद सभी साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके बाद सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई, जिसमें बेंगाबाद प्रखंड, गिरिडीह जिला, झारखंड राज्य और देश की मौजूदा राजनीतिक-सामाजिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    सम्मेलन में 17 सूत्री मांग पत्र प्रस्तुत किया गया, जिसमें किसानों, मज़दूरों, बेरोज़गार युवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनसुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल थे। इन मांगों को लेकर आंदोलन छेड़ने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।

    सम्मेलन के दौरान संगठनात्मक विस्तार करते हुए फॉरवर्ड ब्लॉक की 21 सदस्यीय बेंगाबाद प्रखंड (लोकल) कमेटी का गठन किया गया। इसके बाद कमेटी ने 7 सदस्यीय पदाधिकारी मंडल का चुनाव किया।
    जिसमें शिवनंदन यादव को अध्यक्ष, रामलाल मंडल को उपाध्यक्ष, शंभू ठाकुर को महासचिव तथा फोदार सिंह, सुखदेव गोस्वामी, शंकर यादव और शंभू तुरी को सचिव चुना गया।

    सम्मेलन के समापन के बाद नवगठित कमेटी के नेतृत्व में सम्मेलन स्थल से प्रखंड मुख्यालय तक जन अधिकार मार्च निकाला गया। मार्च के उपरांत 17 सूत्री मांग पत्र प्रखंड एवं अंचल अधिकारी के माध्यम से उपायुक्त गिरिडीह को सौंपा गया। प्रशासन से समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की गई, साथ ही चेतावनी दी गई कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

     

    आज के कार्यक्रम में मुख्य रूप से राजेश यादव, शंभू तुरी, लखन कोल, छोटेलाल यादव, मुस्लिम अंसारी, शंकर यादव, प्रदीप यादव, विजय कु रवि, फोदार सिंह, शिवनंदन यादव, महेश वर्मा, सुखदेव गोस्वामी, मुरारी यादव, राजेंद्र मंडल, रामलाल मंडल म, कुमार सिंह, महेंद्र साव, किशोर दास, शंभू ठाकुर, बड़का हेंब्रम, नकुल सिंह सहित सैकड़ों लोग शामिल थे।

  • गिरिडीह पुलिस की मानवीय पहल, बिरहोर समुदाय को मिली ठंड से राहत

    द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.

    गिरिडीह : पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास व समन्वय को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में गिरिडीह पुलिस ने एक सराहनीय पहल की। इसी कड़ी में मंगलवार को पुलिस अधीक्षक, गिरिडीह डॉक्टर बिमल कुमार ने सरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत अमनारी पंचायत के बिरहोर कॉलोनी पहुंचे, जहाँ उन्होंने ठंड से बचाव के लिए जरूरतमंदों के बीच कंबल व अन्य आवश्यक सामग्रियों का वितरण किया।

    इस दौरान पुलिस अधीक्षक बिमल कुमार ने बिरहोर समुदाय के लोगों से सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और आश्वस्त किया कि गिरिडीह पुलिस हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। पुलिस की इस संवेदनशील पहल से आदिवासी समुदाय के लोगों के चेहरे पर राहत और भरोसे की झलक साफ नजर आई।

    कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक के साथ अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, बगोदर–सरिया, समेत संबंधित थाना एवं ओपी प्रभारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने मौके पर स्थानीय हालात का जायजा लिया और क्षेत्रीय मुद्दों पर जानकारी प्राप्त की।

    कार्यक्रम के पश्चात अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बगोदर–सरिया के कार्यालय में सभी संबंधित पुलिस पदाधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विधि-व्यवस्था की गहन समीक्षा करते हुए कई आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए, ताकि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था और अधिक मजबूत बनी रहे।

    मानवीय संवेदना और प्रशासनिक सक्रियता का यह प्रयास पुलिस–जनसहभागिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।