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  • व्यवहार न्यायालय परिसर में पॉक्सो एक्ट और मोटर वाहन दुर्घटना वाद पर वर्कशॉप का आयोजन

    परवेज़ आलम. The News Post4u.

    गिरिडीह :  व्यवहार न्यायालय परिसर में पॉक्सो अधिनियम 2012 और मोटर वाहन दुर्घटना वाद पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह वर्कशॉप विशेष रूप से उन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ और प्रभावी बनाने हेतु सभी संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से रखी गई थी। इसका आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार, गिरिडीह द्वारा किया गया ।

     दीप प्रज्वलन के साथ हुआ उद्घाटन.

    कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें कई प्रमुख अतिथियों ने भाग लिया। इनमें मार्तंड प्रताप मिश्रा (प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश), धनंजय कुमार (प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय),  मनोज कुमार झा (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश), उपायुक्त रामनिवास यादव, व  पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार शामिल थे।

     पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना उद्देश्य: न्यायमूर्ति मिश्रा.

    अपने संबोधन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मिश्रा ने कहा कि पॉक्सो और मोटर वाहन दुर्घटना से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य है। इससे पीड़ितों को त्वरित न्याय देने में मदद मिलेगी। उन्होंने सभी स्टेकहोल्डर्स से आग्रह किया कि वे इन दिशा-निर्देशों को गंभीरता से अपनाएं।

     उपायुक्त ने की सहभागिता की सराहना.

    उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा कि यह वर्कशॉप पुलिसकर्मियों, डॉक्टरों, और अधिवक्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि कार्यशाला में साझा किए गए सुझावों और निर्देशों का पालन कर व्यवस्था को और बेहतर बनाएं।

    पुलिस अधीक्षक ने किया कर्तव्यों पर बल.

    एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि पॉक्सो और सड़क दुर्घटना जैसे मामलों में पुलिस की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी बेहद अहम होती है। उन्होंने अधिकारियों को उनके कर्तव्यों की विस्तार से जानकारी दी।

    तकनीकी सत्र: कानून की बारीकियों पर चर्चा.

    • न्यायाधीश राजेश कुमार बग्गा और हरिओम कुमार ने मोटर वाहन दुर्घटना वादों से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर प्रकाश डाला।
    • डीएसपी मो. कौसर अली ने “हिट एंड रन” मामलों में मुआवजा प्रक्रिया और जांच के नियमों पर विस्तार से जानकारी दी।
    • विशाल कुमार (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) और रीमा कुमारी (न्यायिक दंडाधिकारी) ने पॉक्सो मामलों में संवेदनशीलता और पीड़ितों से व्यवहार की व्याख्या की।

    वर्कशॉप में रही भारी सहभागिता.

    कार्यक्रम में गिरिडीह न्यायालय के न्यायिक पदाधिकारी, जिला प्रशासन के कार्यपालक अधिकारी, पुलिस विभाग के प्रतिनिधि, लोक अभियोजक, अधिवक्ता संघ के सदस्य, लीगल एड डिफेंस टीम, मध्यस्थ और न्यायालय कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी सुश्री स्मृति त्रिपाठी ने किया।

    इस तरह की कार्यशालाएं न केवल न्यायिक व्यवस्था को सशक्त बनाती हैं, बल्कि न्याय प्रक्रिया को पीड़ितों के लिए सहज, संवेदनशील और त्वरित बनाती हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार का यह प्रयास न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक अहम पहल है।

  • बरनवाल महिला समिति ने पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया सावन महोत्सव

    नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से सजी शाम.

    संवाददाता The News Post4u.

    गिरिडीह : बरनवाल महिला समिति गिरिडीह की ओर से बरनवाल सेवा सदन में आयोजित सावन महोत्सव शनिवार को परंपरा, उत्सव और नारी शक्ति के रंग में रंगा नजर आया। इस आयोजन में समाज की सैकड़ों महिलाएं बड़ी संख्या में शामिल हुईं और कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।

    दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत.

    कार्यक्रम का आरंभ समिति की अध्यक्षा ललिता बरनवाल और कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा महाराजा अहिबरण जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ हुआ। इस सांस्कृतिक आयोजन की शुरुआत समिति की सदस्य रेनू बरनवाल द्वारा प्रस्तुत सुंदर गणेश वंदना नृत्य से हुई, जिसने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

    रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्र.

    इसके बाद समाज की महिलाएं — सरिता बरनवाल, अनीता बरनवाल, निशा बरनवाल और अन्य — ने एक से बढ़कर एक आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां दीं। विशेष आकर्षण रहा राधा-कृष्ण की जीवंत झांकी, जिसने उपस्थित सभी महिलाओं को भावविभोर कर दिया।

    प्रतियोगिताएं और पुरस्कार.

    कार्यक्रम को और रोचक बनाने के लिए लकी ड्रा और क्विज प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इन आयोजनों में विजयी महिलाओं को  पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिससे प्रतिभागियों का उत्साह और भी बढ़ गया।

    आपसी जुड़ाव और संस्कृति के संकल्प का उत्सव.

    सभा को संबोधित करते हुए समिति की अध्यक्षा ललिता बरनवाल ने कहा,

    “सावन महोत्सव केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह हमारे सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रतीक है। हम सबको चाहिए कि सावन को झूले और गीतों तक सीमित न रखें, बल्कि इसे नारी शक्ति के उत्सव के रूप में मनाएं।”

    आयोजन में महिलाओं की अहम भागीदारी.

    महोत्सव को सफल बनाने में सरिता बरनवाल, सीमा बरनवाल, ज्योति बरनवाल, सुनीता बरनवाल, सोनी बरनवाल, कविता बरनवाल, रिंकी बरनवाल, नीलू बरनवाल, रंजीता बरनवाल, रेखा बरनवाल, रश्मि बरनवाल, किरण बरनवाल, शकुंतला बरनवाल और अन्य कई महिलाओं ने सक्रिय और सराहनीय योगदान दिया।

    इस आयोजन ने जहां सावन के पारंपरिक रंग को फिर से जीवंत किया, वहीं महिलाओं को एक साथ लाकर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी दिया।

  • झारखंड : शिबू सोरेन की हालत गंभीर, वेंटिलेटर पर रखा गया

    लंबा राजनीतिक सफर, स्वास्थ्य पर संकट.

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    रांची: झारखंड की राजनीति में चार दशकों से अधिक समय तक अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की हालत इस समय बेहद नाजुक बताई जा रही है। उन्हें दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। जानकारी के मुताबिक, उन्हें जून के अंतिम सप्ताह में गंभीर किडनी संबंधी परेशानियों के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तब से अब तक उनका इलाज जारी है, लेकिन उनकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।

    हेमंत सोरेन ने दी थी जानकारी.

    शिबू सोरेन के बेटे और वर्तमान झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 24 जून को अस्पताल पहुंचकर पिता के स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। हेमंत ने मीडिया से कहा था कि “पिता जी की तबीयत को लेकर चिकित्सकीय जांच चल रही है। स्थिति अभी स्थिर है, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में समय लग सकता है।”

    एक महीना से ज्यादा समय से अस्पताल में भर्ती.

    सूत्रों के मुताबिक, 81 वर्षीय शिबू सोरेन को लगभग पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती रखा गया है, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी देखभाल कर रही है। हालांकि डॉक्टरों ने उनकी रिकवरी को लेकर अभी कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है।

    स्वास्थ्य के मोर्चे पर संकट के साथ-साथ पार्टी में चिंता.

    झामुमो के लिए यह समय बेहद संवेदनशील है। पार्टी के वरिष्ठ नेता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई जा रही है। दूसरी ओर, राज्य के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन को भी ब्रेन स्ट्रोक के चलते दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों शीर्ष नेताओं की सेहत पार्टी के लिए एक बड़ा धक्का है।

    शिबू सोरेन का राजनीतिक जीवन: संघर्ष, सत्ता और सजा.

    शिबू सोरेन ने 18 वर्ष की उम्र में “संथाल नवयुवक संघ” की स्थापना की थी। इसके बाद 1972 में उन्होंने ए.के. रॉय और बिनोद बिहारी महतो के साथ मिलकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का गठन किया और इसके महासचिव बने। आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई में वह एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

    संसद और मंत्रालय

    • 1980 में पहली बार दुमका से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे।
    • 1989, 1991, 1996 में भी लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए।
    • 2002 में राज्यसभा पहुंचे, लेकिन दुमका सीट से उपचुनाव जीतने पर इस्तीफा दे दिया।
    • 2004 में केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में कोयला मंत्री बने।

    विवादों और कानूनी मामलों में फंसे

    2004 में ही चिरुडीह हत्याकांड (1975 की घटना) में गिरफ्तारी वारंट जारी होने पर मंत्री पद छोड़ना पड़ा। गिरफ्तारी के बाद जेल गए और बाद में जमानत मिली।
    2006 में अपने निजी सचिव शशिनाथ झा के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी पाए गए। CBI के आरोपपत्र के अनुसार, झा झामुमो और कांग्रेस के बीच हुए कथित सौदे की जानकारी रखता था।

    • 5 दिसंबर 2006 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
    • हालांकि बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें इस मामले से बरी कर दिया।

    जानलेवा हमले से बाल-बाल बचे.

    2007 में जब उन्हें दुमका जेल ले जाया जा रहा था, तब उनके काफिले पर बम से हमला किया गया। हालांकि, वह बाल-बाल बच गए थे।

    शिबू सोरेन न केवल झारखंड की राजनीति का एक स्तंभ रहे हैं, बल्कि उन्होंने आदिवासी समाज के हक और अस्तित्व की लड़ाई को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। आज जब उनकी तबीयत नाजुक है, तो सिर्फ उनका परिवार या पार्टी ही नहीं, बल्कि पूरा राज्य उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है।

  • गिरिडीह:जल्द शुरू होगी शराब दुकानों की ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया,लक्ष्य 109 करोड़.

    संवाददाता The News Post4U

    गिरिडीह : झारखंड सरकार की नई उत्पाद नीति लागू होने के बाद गिरिडीह में भी शराब दुकानों की ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। इस संबंध में उत्पाद विभाग अधिकारियों ने नई व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ मीडिया से साझा कीं।

    उत्पाद अधीक्षक महेंद्र देव सिंह, निरीक्षक रवि रंजन और कुमार महेंद्र ने बताया कि आगामी तीन दिनों के भीतर जिले में शराब दुकानों के लिए ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

    बाहरी लोगों पर लगेगी रोक, स्थानीयों को प्राथमिकता.

    अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस बार टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और स्थानीय सहभागिता आधारित बनाने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए विभागीय स्तर पर कड़ी निगरानी की व्यवस्था की गई है ताकि बाहरी लोगों की भागीदारी को सीमित किया जा सके।

    45 समूहों में होंगी 100 शराब दुकानें शामिल.

    जानकारी के अनुसार, जिले में इस बार 7 देशी शराब दुकानें और 93 कम्पोजिट दुकानें चिह्नित की गई हैं, जिन्हें 45 समूहों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक समूह में दो दुकानें शामिल होंगी। विभाग ने अनुमान जताया है कि एक समूह की औसत टेंडर राशि 4 करोड़ रुपये के आसपास हो सकती है।

    राजस्व लक्ष्य 109 करोड़ रुपये.

    उत्पाद विभाग ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 104 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी, जबकि इस वर्ष 109 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, नई नीति लागू होने से पहले ही चार महीने की राजस्व वसूली हो चुकी है, जिससे लक्ष्य को हासिल करना संभव लगता है।

    बिक्री पर 12% कमीशन, कोटा पूरा न करने पर जुर्माना.

    अधिकारियों ने बताया कि इस बार शराब दुकान संचालकों को बिक्री पर 12 प्रतिशत तक का कमीशन दिया जाएगा। हालांकि यदि कोई संचालक निर्धारित कोटा पूरा नहीं करता, तो उस पर 5 प्रतिशत का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

    नई नीति से पारदर्शिता.

    उत्पाद अधीक्षक ने उम्मीद जताई कि इस पूरी प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को आर्थिक अवसर मिलेंगे। साथ ही, नीति के बेहतर क्रियान्वयन से राजस्व वृद्धि और व्यवस्थागत सुधार संभव होगा।

  • राधास्वामी संगठन का सामाजिक परिवर्तन का संकल्प

    गढ़वा और पलामू से ‘आपकी संगठन, आपके द्वार’ अभियान की शुरुआत

    संवाददाता The News Post4U

    राधास्वामी संगठन ने अपने विशेष जनसंपर्क कार्यक्रम ‘आपकी संगठन, आपके द्वार’ के तहत आज झारखंड के दो ज़िलों – गढ़वा और पलामू – से इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अभियान की अगुवाई झारखंड प्रदेश अध्यक्ष मुकेश कुमार सिन्हा ने की, जबकि इसे सफल बनाने में संगठन के सभी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

    हर अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का लक्ष्य.

    इस अवसर पर संगठन की मीडिया प्रभारी अनीशा सिन्हा ने बताया कि राधास्वामी संगठन का उद्देश्य है कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े हर व्यक्ति तक संगठन की योजनाओं की जानकारी पहुँचे, जिससे वह आर्थिक रूप से सशक्त बन सके।

    उन्होंने कहा कि आज भी कई ग्रामीण परिवार आर्थिक तंगी, बेटियों की शादी, बच्चों की पढ़ाई और आवास जैसी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में राधास्वामी संगठन कन्यादान योजना, आवास योजना, छात्रवृत्ति योजना, वाहन योजना, गैस सब्सिडी योजना, और एफएमसीजी योजना जैसी योजनाओं के ज़रिए उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहा है।

    आजादी के 78 साल बाद भी हालात जस के तस

    अनीशा सिन्हा ने कहा, “देश को आज़ाद हुए 78 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी गाँवों में झोपड़ियां हैं, बेटियों की शादी में कठिनाइयाँ हैं, बच्चों की शिक्षा अधूरी है। इन सबके बीच राधास्वामी संगठन आर्थिक और सामाजिक रूप से लोगों को मज़बूत करने में जुटा है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि संगठन का मुख्य उद्देश्य केवल योजनाएं देना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है — जहां सामाजिक कुरीतियों का अंत हो और हर नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन मिले।

    20 से 30 करोड़ सदस्यों का लक्ष्य.

    अनीशा सिन्हा ने बताया कि संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक शर्मा के नेतृत्व और मार्गदर्शन में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उनका सपना है कि पूरे भारतवर्ष में 20 से 30 करोड़ लोगों को संगठन से जोड़ा जाए, जिससे एक सशक्त सामाजिक आंदोलन खड़ा किया जा सके।

    उन्होंने कहा, “हम सभी कार्यकर्ता पूरी निष्ठा के साथ इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम पहले भी तैयार थे, आज भी तैयार हैं और भविष्य में भी हर चुनौती के लिए तैयार रहेंगे।”

    एक सशक्त समाज की ओर बढ़ता कदम.

    राधास्वामी संगठन का यह अभियान केवल योजनाओं की जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जनचेतना आंदोलन बनकर उभर रहा है, जिसका लक्ष्य है — सशक्त, समृद्ध और कुरीति-मुक्त भारत।

  • राशन डीलरों का फूटा आक्रोश, आपूर्ति विभाग के खिलाफ धरना

    संवाददाता, The News Post4U

    गिरिडीह : जिले के राशन डीलरों ने शुक्रवार को जिला आपूर्ति विभाग की नीतियों और कार्यशैली के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए समाहरणालय परिसर में एकदिवसीय धरना दिया। डीलरों ने सात सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया और विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए।

    समय पर स्टॉक नहीं, फिर भी दबाव में वितरण.

    डीलर संघ के प्रतिनिधि राजा बंसल और पंकज पांडेय के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में डीलरों ने स्पष्ट कहा कि विभाग केवल वितरण के आंकड़ों को लेकर सख्ती करता है, लेकिन उन्हें समय पर स्टॉक ही उपलब्ध नहीं कराया जाता। इसके अलावा, वर्षों से लंबित बकाया कमीशन का भुगतान न होने से डीलरों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।

    उन्होंने कहा कि, “जब तक कम से कम एक महीने का राशन स्टॉक एडवांस में उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, तब तक शत-प्रतिशत वितरण संभव नहीं है। केवल टारगेट देना समाधान नहीं है।”

    कोविड काल से लंबित हैं कमीशन की राशि.

    डीलरों ने आरोप लगाया कि कोविड-19 महामारी के दौरान राशन वितरण के कार्यों में भाग लेने के बावजूद अधिकांश डीलरों को अब तक कमीशन का भुगतान नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ खास डीलरों को ही आंशिक भुगतान मिला है, जबकि शेष डीलर लगातार विभाग के चक्कर काट रहे हैं।

    आधुनिकीकरण के दावे, लेकिन व्यवस्था अब भी जर्जर.

    डीलर संघ के एक सदस्य ने व्यंग्य करते हुए कहा, “देश 5जी की ओर बढ़ गया है, लेकिन झारखंड में अब भी राशन व्यवस्था 2जी की तरह धीमी और अपारदर्शी बनी हुई है।“ उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणाली के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर डीलरों को अभी भी मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

    मांगे नहीं मानी गई तो होगा उग्र प्रदर्शन.

    धरना में राजेश बंसल, अमित कुमार, राजेश राज, कैदन बरनवाल समेत दर्जनों राशन डीलर मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अगली बार जिला स्तर पर उग्र आंदोलन करेंगे और आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह ठप करने पर भी विचार करेंगे। डीलरों की सात सूत्री प्रमुख मांगों में शामिल हैं, बकाया कमीशन का शीघ्र भुगतान,प्रत्येक माह राशन स्टॉक की समय पर आपूर्ति,कार्य संचालन में पारदर्शिता,डीलरों पर अनावश्यक दबाव बंद किया जाए,कोविड काल के सभी लंबित भुगतान निपटाए जाएं,तकनीकी खामियों को शीघ्र दूर किया जाए,विभागीय संवाद प्रणाली को प्रभावी बनाया जाए.

  • झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुरू, पहले दिन शोक प्रस्ताव

    सदन के बाहर SIR पर चलती रही सियासत.

    रांची ब्यूरो रिपोर्ट The News Post4u.

    रांची : झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से प्रारंभ हो गया। सत्र की शुरुआत विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो के संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने लोकतंत्र के मूल मूल्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि सदन में अल्पमत का भी उतना ही सम्मान होना चाहिए जितना बहुमत का। उन्होंने रचनात्मक बहस, लोकतांत्रिक संवाद और जन आकांक्षाओं की पूर्ति पर जोर दिया।

    सत्र 7 अगस्त तक चलेगा और इस दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 का पहला अनुपूरक बजट सदन में पेश किया जाएगा।

    पहले दिन दिवंगत आत्माओं को दी गई श्रद्धांजलि.

    सत्र की शुरुआत शोक प्रस्तावों के साथ हुई। पूर्व सांसद चंद्रशेखर सिंह, तिलकधारी सिंह और वैज्ञानिक डॉ. के. कस्तूरीरंगन सहित हाल में दिवंगत कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सदन ने याद किया। इसके अलावा अहमदाबाद विमान हादसे और जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों को भी श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने उनके योगदानों को याद किया। सदन में दो मिनट का मौन रखकर शोक प्रकट किया गया, जिसके बाद कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    स्पीकर ने दी संवैधानिक मूल्यों की याद.

    अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने कहा, “हमें संविधान सभा की उस भावना को हमेशा याद रखना चाहिए, जिसमें यह कहा गया था कि हमने इस संविधान के माध्यम से देश की जनता को अपनी तकदीर खुद लिखने की ताकत दी है।” उन्होंने दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और उनके राज्य के लिए योगदान को स्मरण किया।

    सत्र के दौरान स्पीकर ने पांच सभापतियों — स्टीफन मरांडी, सीपी सिंह, निरल पूर्ति, रामचंद्र सिंह और नीरा यादव — के नामों की घोषणा की। कार्यमंत्रणा समिति में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी समेत कई सदस्य शामिल हैं। दीपक बिरूआ और मथुरा महतो जैसे कई लोगों को विशेष आमंत्रित सदस्य भी नामित किया गया है।

    सदन के बाहर गरमाई सियासत SIR और अटल क्लीनिक पर घमासान.

    विधानसभा सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन के बाहर राजनीतिक माहौल गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए ‘अटल मोहल्ला क्लीनिक’ का नाम बदलकर ‘मदर टेरेसा क्लीनिक’ किए जाने को “राजनीतिक गुंडागर्दी” बताया। उन्होंने कहा कि यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा है और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता का अपमान है, जो झारखंड के निर्माता माने जाते हैं।

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भी भाजपा के बांग्लादेशी घुसपैठ के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार भी ऐसे दावे झूठे साबित हुए थे और राज्य में एक भी बांग्लादेशी घुसपैठिया नहीं मिला। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह SIR के माध्यम से आम जनता का मतदान अधिकार छीनना चाहती है।

    अगले हफ्ते सदन में बढ़ेगी राजनीतिक गरमी.

    सत्र का पहला दिन भले ही शोक प्रस्तावों और श्रद्धांजलियों के साथ शांतिपूर्ण रहा हो, लेकिन सदन के बाहर जिस तरह से SIR और नाम परिवर्तन जैसे मुद्दों पर टकराव दिखा, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही तीखी बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से भरपूर रहने वाली है।

     

     

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आईआईटी-आईएसएम के दीक्षांत समारोह में की शिरकत, छात्रों को दिया प्रेरणादायक संदेश

    परवेज़ आलम.

    व धनबाद ब्यूरो रिपोर्ट, The News Post4U.

    धनबाद : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज धनबाद पहुंचीं और बरवाअड्डा एयरपोर्ट पर उतरने के बाद सीधे आईआईटी-आईएसएम के 45वें दीक्षांत समारोह में भाग लेने रवाना हो गईं। यह समारोह न केवल संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, बल्कि सैकड़ों छात्रों के जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का प्रतीक भी बना।

    राष्ट्रपति का स्वागत.

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के धनबाद हवाई अड्डा पर पहुँचने पर राज्यपाल संतोष गंगवार और झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार ने बुके देकर उनका स्वागत किया। इस मौके पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई बड़े अधिकारी और आईआईटी-आईएसएम के छात्र – छात्रायेँ भी उपस्थिथ थे ।

    छात्रों को मिला राष्ट्रपति का मार्गदर्शन.

    दीक्षांत समारोह के मंच से राष्ट्रपति ने उपस्थित छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि यह दिन छात्रों की वर्षों की मेहनत, संघर्ष और सफलता का उत्सव है। उन्होंने सभी पदक और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और कहा, “यह समारोह जीवन के एक अध्याय की समाप्ति नहीं, बल्कि नए सफर की शुरुआत है।”

    राष्ट्रपति ने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग समाज, देश और पूरी दुनिया की जटिल समस्याओं के समाधान के लिए करें।

    संस्थान की 100 वर्षों की उपलब्धियां.

    राष्ट्रपति मुर्मू ने आईआईटी-आईएसएम की सदी भर की गौरवपूर्ण यात्रा को याद करते हुए कहा, “यह संस्थान मूल रूप से खनन और भूविज्ञान के क्षेत्र में विशेषज्ञ तैयार करने के उद्देश्य से स्थापित हुआ था, लेकिन आज यह उच्च तकनीकी शिक्षा और शोध का एक वैश्विक केंद्र बन चुका है।” उन्होंने तकनीकी नवाचारों और समाजोपयोगी अनुसंधानों में संस्थान के योगदान की सराहना की।

    जनजातीय समाज और महिलाओं के लिए संस्थान की पहल.

    उन्होंने विशेष रूप से संस्थान के उस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की प्रशंसा की, जो झारखंड के आदिवासी युवाओं के सशक्तिकरण में लगा है। डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास, और रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से यह केंद्र नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर बना रहा है।

    साथ ही, उन्होंने महिलाओं के लिए चल रहे “फाउंडेशन स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम” की भी तारीफ की, जो आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण में सहायक हो रहा है।

    विकसित भारत 2047: युवा बनें परिवर्तन के वाहक.

    राष्ट्रपति ने ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को साझा करते हुए कहा कि भारत आत्मविश्वास के साथ इस लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदार बनें। “विकसित भारत वह है जहां प्रत्येक नागरिक को गरिमा, अवसर और समृद्ध जीवन मिले,” उन्होंने कहा।

    वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अहम भूमिका.

    अपने संबोधन में उन्होंने जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों की कमी और डिजिटल असमानता जैसी वैश्विक समस्याओं का उल्लेख किया और कहा कि आईआईटी-आईएसएम जैसे संस्थान इन समस्याओं के स्थायी और प्रभावी समाधान प्रदान कर सकते हैं।

    शिक्षा का नया दृष्टिकोण.

    राष्ट्रपति ने यह भी रेखांकित किया कि तकनीकी शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, नवाचार-केंद्रित और उद्योगों के अनुकूल बनाने की जरूरत है। उन्होंने इंटर-डिसिप्लिनरी अप्रोच अपनाने की सलाह दी ताकि छात्र बहुआयामी चुनौतियों का समाधान ढूंढ सकें।

    राष्ट्रपति मुर्मू ने छात्रों से कहा, “अपने ज्ञान को न केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए, बल्कि समाज के लिए उपयोग करें। ग्रीन इंडिया के निर्माण में सहभागी बनें और मानवता की सेवा को अपना ध्येय बनाएं।”

    अपने प्रेरणादायक भाषण के अंत में उन्होंने सभी छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी और आशा जताई कि वे भारत के ऐतिहासिक बदलावों के निर्माता बनेंगे।

     

  • डीसी ने नवोदय विद्यालय का किया निरीक्षण, शिक्षा व्यवस्था व छात्रों की सुविधाओं का लिया जायजा

    The News Post4u.

    गिरिडीह: उपायुक्त रामनिवास यादव ने गांडेय प्रखंड स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय का आज औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय की संपूर्ण शैक्षणिक और भौतिक व्यवस्था का गहन अवलोकन किया और छात्रों की शिक्षा, सुविधाएं, उपस्थिति और भोजन व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा की।

    शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों से संवाद.

    निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने कक्षाओं में जाकर छात्रों से उनकी पढ़ाई, परीक्षा की तैयारी और सीखने में आ रही चुनौतियों को लेकर संवाद किया। उन्होंने शिक्षकों से भी शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा की। उपायुक्त ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ समुचित मार्गदर्शन भी मिले।

    मूलभूत सुविधाओं पर विशेष ध्यान.

    उपायुक्त ने विद्यालय परिसर में उपलब्ध पेयजल व्यवस्था, शौचालयों की स्थिति, स्वच्छता, रसोईघर (किचन शेड), और भोजन की गुणवत्ता का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों को मिलने वाले भोजन को स्वयं परखा और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि पोषणयुक्त भोजन छात्रों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत जरूरी है।

    अभिलेखों की जांच और उपस्थिति पर नजर.

    निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त ने विद्यालय में रखे उपस्थिति पंजी, सामग्री पंजी, स्टॉक रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की जांच की। उन्होंने कहा कि सभी अभिलेख अद्यतन और पारदर्शी तरीके से संधारित होने चाहिए, जिससे प्रशासनिक निगरानी में किसी प्रकार की बाधा न हो।

    शिक्षा को बताया देश के भविष्य की नींव.

    उपायुक्त रामनिवास यादव ने विद्यालय के शिक्षकों से कहा कि छात्रों का मानसिक, बौद्धिक और नैतिक विकास सुनिश्चित करना सिर्फ स्कूल की नहीं, बल्कि पूरे समाज, अभिभावकों और प्रशासन की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “शिक्षा ही वह मजबूत आधार है जिस पर राज्य और देश का भविष्य टिका है। इसलिए हर छात्र तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारा कर्तव्य है।”

    अधिकारियों की उपस्थिति.

    निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा पदाधिकारी, गोपनीय प्रभारी और अन्य संबंधित अधिकारी भी उपायुक्त के साथ मौजूद रहे। सभी को विद्यालय की आवश्यकताओं और सुधार की संभावनाओं पर मिलकर कार्य करने के निर्देश दिए गए। यह निरीक्षण न सिर्फ विद्यालय के संचालन की निगरानी का हिस्सा था, बल्कि छात्रों के संपूर्ण विकास के लिए प्रशासन की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।

  • रांची को मिलेगा ताज होटल का तोहफा, 400 करोड़ की लागत से विश्वस्तरीय होटल

    परवेज़ आलम.

    The News Post4u.

    राजधानी रांची में बहुप्रतीक्षित ताज होटल के निर्माण का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो चुका है। झारखंड सरकार के नगर विकास विभाग ने इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) — जो टाटा समूह की एक प्रमुख इकाई है — को धुर्वा स्थित स्मार्ट सिटी के कोर कैपिटल क्षेत्र में 6 एकड़ जमीन 60 वर्षों की लीज पर दे दी है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार को स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्क के रूप में लगभग 4.20 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।

    लीज प्रक्रिया संपन्न, नवंबर 2025 में संभावित शिलान्यास.

    लीज से संबंधित सारी औपचारिकताएं रजिस्ट्री कार्यालय में पूरी की गईं। इस अवसर पर नगर विकास विभाग के संयुक्त सचिव ज्ञानेंद्र कुमार और IHCL के उपाध्यक्ष की उपस्थिति में अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए। ताज होटल के निर्माण का शिलान्यास नवंबर 2025 में प्रस्तावित है और निर्माण कार्य को चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    400 करोड़ रुपये की लागत, 200 कमरे और अत्याधुनिक सुविधाएं.

    करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट रांची के आतिथ्य उद्योग में एक मील का पत्थर साबित होगा। प्रस्तावित भवन की ऊंचाई लगभग 27 मीटर होगी और यह 40 प्रतिशत भू-आवरण (ground coverage) में निर्मित किया जाएगा।
    होटल में लगभग 200 कमरे, एक भव्य बैन्क्वेट हॉल, वेलनेस सेंटर, स्विमिंग पूल, और सज्जित गार्डन जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    रोजगार और आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा.

    सरकारी आकलनों के अनुसार, इस परियोजना से रांची और आसपास के क्षेत्र में लगभग 1000 लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। इससे न सिर्फ क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य के पर्यटन और व्यवसायिक परिदृश्य को भी नई दिशा मिलेगी।

    पहले से हो चुका है एमओयू.

    गौरतलब है कि 24 जुलाई 2024 को इस परियोजना को लेकर झारखंड सरकार और इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। उस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और टाटा स्टील के सीईओ एवं एमडी टी.वी. नरेंद्रन भी उपस्थित थे।

    यह परियोजना रांची की स्मार्ट सिटी पहल को मजबूती देने के साथ-साथ झारखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेवाओं से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ताज होटल के आगमन से राजधानी रांची को एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है।