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बांग्लादेश ने भारत से मांगा शेख हसीना का प्रत्यर्पण, कहा- ‘न्यायिक प्रक्रिया के लिए जरूरी’

बांग्लादेश ने सोमवार को भारत को एक आधिकारिक नोट भेजकर पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि हसीना को वापस लाकर देश में उनके खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।

क्या कहा बांग्लादेश के अधिकारियों ने?

बांग्लादेश के विदेश सलाहकार तोहीद होसैन ने पुष्टि करते हुए कहा, “हमने भारत सरकार को औपचारिक नोट भेजा है। इसमें साफ कहा गया है कि शेख हसीना की उपस्थिति न्यायिक प्रक्रिया के लिए जरूरी है।”

बांग्लादेश के घरेलू मामलों के सलाहकार, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) जहांगीर आलम चौधुरी, ने प्रत्यर्पण पर जोर देते हुए कहा, “हमारे पास भारत के साथ कैदी विनिमय समझौता है। यह प्रक्रिया उसी समझौते के तहत पूरी की जाएगी।”

कैसे शुरू हुआ मामला?

पिछले महीने, बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद युनुस ने घोषणा की थी कि उनकी सरकार शेख हसीना का प्रत्यर्पण भारत से मांगेगी। उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त को शेख हसीना देश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच भारत भागकर  आ गई थीं। इन प्रदर्शनों के कारण उनके 15 साल लंबे शासन का अंत हुआ।

युनुस का बड़ा कदम। 

नोबेल पुरस्कार विजेता और बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद युनुस ने अपने 100 दिन के कार्यकाल में यह स्पष्ट किया कि उनकी सरकार उन सभी के खिलाफ कार्रवाई करेगी, जो छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और जनहानि के लिए जिम्मेदार हैं।

युनुस ने कहा, “हम शेख हसीना को भारत से वापस लाने की पूरी कोशिश करेंगे।” उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस मुद्दे पर उनकी बातचीत अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के मुख्य अभियोजक करीम खान से हुई है।

क्यों है प्रत्यर्पण महत्वपूर्ण?

युनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का कहना है कि जुलाई और अगस्त में छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए कथित “मास हत्याओं” के लिए शेख हसीना को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। सरकार ने भारत के साथ प्रत्यर्पण संधि का हवाला देते हुए इसे जल्द से जल्द अमल में लाने की बात कही।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नजरें टिकीं। 

यह मामला केवल बांग्लादेश और भारत तक सीमित नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की सक्रियता और नोबेल विजेता युनुस की भूमिका के कारण यह मामला वैश्विक स्तर पर भी चर्चा में है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।या मामला अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जाएगा? इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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