झारखंड में न्यायिक संरचना को मजबूती के लिए बार भवन निर्माण की नींव रखी गई.
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान ने मंगलवार को खूंटी जिले में आयोजित एक भव्य समारोह में बार काउंसिल भवन निर्माण योजना का शिलान्यास किया। इस अवसर पर खूंटी कचहरी परिसर में आयोजित कार्यक्रम में तीन बड़े जिलों – खूंटी, चाईबासा और चांडिल – में प्रस्तावित बार भवनों की नींव रखी गई। चाईबासा और चांडिल के भवनों का शिलान्यास मुख्यमंत्री और मुख्य न्यायाधीश ने वर्चुअल माध्यम से किया।
राज्यव्यापी बार भवन योजना.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह पहल झारखंड की न्यायिक प्रणाली को नई दिशा देगी। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी 24 जिलों और 7 अनुमंडलों में बार भवन के निर्माण की योजना बनाई गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर लगभग 132 करोड़ 84 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि अगले तीन वर्षों के भीतर सभी जिलों में बार भवन खड़े हो जाएंगे और चरणबद्ध तरीके से शिलान्यास एवं उद्घाटन पूरे किए जाएंगे।
“न्यायालय एक मंदिर है” – हेमंत सोरेन.
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में न्यायालयों की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक संस्था नहीं, बल्कि एक मंदिर है, जहां आम जनता बिना किसी भेदभाव के न्याय प्राप्त करती है। उन्होंने कहा कि “बेंच और बार न्यायिक व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं। इनके सहयोग से ही आम नागरिकों को त्वरित और सुलभ न्याय मिलता है तथा उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होती है।”
अधिवक्ताओं के लिए विशेष योजनाएं.
सीएम हेमंत सोरेन ने अधिवक्ताओं के हित में राज्य सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि झारखंड देश का पहला राज्य है जिसने अधिवक्ताओं को पेंशन योजना का लाभ देना शुरू किया है। इसके अलावा अधिवक्ताओं के लिए स्वास्थ्य बीमा और स्टाइपेंड जैसी सुविधाएं भी लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की सोच है कि जिला न्यायालय परिसरों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि अधिवक्ताओं और आम लोगों दोनों को सहज वातावरण मिल सके।
समारोह में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी.
इस अवसर पर सांसद कालीचरण मुंडा, विधायक राम सूर्या मुंडा, विधायक सुदीप गुड़िया, महाधिवक्ता राजीव रंजन समेत न्यायिक एवं प्रशासनिक पदाधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम को लेकर अधिवक्ताओं में उत्साह देखने को मिला और इसे न्यायिक प्रणाली को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया।







