‘Broken Promises’ किताब बनी विवाद की जड़
परवेज़ आलम for The News Post4u.
राजनीति और लेखनी के टकराव में अब कानूनी लड़ाई की आहट सुनाई देने लगी है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के साले और चर्चित राजनीतिक शख्सियत अनिरुद्ध प्रसाद उर्फ साधु यादव ने झारखंड भाजपा के चुनाव प्रबंधन प्रमुख मृत्युंजय शर्मा को ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है। यह नोटिस शर्मा द्वारा लिखी गई किताब ‘Broken Promises: Caste, Crime and Politics in Bihar’ और हाल ही में एक पॉडकास्ट में दिए गए बयान के संबंध में भेजा गया है।
क्या है विवाद?
20 जून 2024 को एक पॉडकास्ट में मृत्युंजय शर्मा ने साधु यादव से जुड़ी कुछ घटनाओं का जिक्र किया था, जिन्हें साधु यादव ने “गंभीर, आधारहीन और उनकी छवि को धूमिल करने वाला” बताया है। नोटिस में तीन प्रमुख आरोपों को गलत, बेबुनियाद और अपमानजनक बताते हुए माफी की मांग की गई है।
ये हैं वे तीन विवादित आरोप:
- गौतम-शिल्पी हत्याकांड में साधु यादव की कथित संलिप्तता, जबकि उनका कहना है कि इस मामले में CBI और न्यायालय दोनों ने उन्हें क्लीन चिट दी है।
- छात्र नेता चंद्रशेखर की हत्या के विरोध में JNU छात्रों द्वारा दिल्ली स्थित बिहार भवन पर किए गए प्रदर्शन के दौरान, गोली चलवाने का आदेश देने का आरोप। साधु यादव ने इसे भी पूरी तरह मनगढ़ंत बताया है।
- रोहिणी आचार्य की शादी के समय एक शो-रूम से कार, गहने और फर्नीचर जबरन उठवाने का दावा, जिसे भी वे झूठा और अपमानजनक करार देते हैं।
साधु यादव की मांगें.
मानहानि नोटिस के तहत साधु यादव ने मृत्युंजय शर्मा से बिना शर्त माफी मांगने की बात कही है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो वे कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य होंगे।
मृत्युंजय शर्मा का पलटवार.
इधर, मृत्युंजय शर्मा ने किसी भी प्रकार की माफी मांगने से साफ इनकार करते हुए कहा,
“जो किताब मैंने लिखी है, वह तथ्यात्मक शोध और ऐतिहासिक दस्तावेजों पर आधारित है। साधु यादव जैसे व्यक्ति किस ‘प्रतिष्ठा‘ की बात कर रहे हैं, यह पूरा बिहार जानता है।” मृत्युंजय शर्मा का कहना है कि लालू यादव के साले साधु यादव ने जिन तीन मामलों का जिक्र कर मानहानि का नोटिस भेजा है, उससे हर बिहारी वाकिफ है. इनके पास कौन सी प्रतिष्ठा है जिसको ठेस पहुंची है. यही तो वह संस्कृति है- गुंडागर्दी, डर और परिवारवाद की, जिसने लालू यादव के राज में बिहार को बर्बाद किया था और अब सच बोलने वालों को डराने के लिए कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है.
शर्मा का यह भी आरोप है कि साधु यादव ने उन्हें फोन कर दबाव डालने की कोशिश की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि “यदि मुझे या मेरे परिवार को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी साधु यादव की होगी।”
किताब, चुनाव और राजनीति.
11 मार्च 2024 को प्रकाशित हुई यह पुस्तक उस समय सामने आई थी जब देश में लोकसभा चुनावों का माहौल गर्म था। अब जबकि बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, साधु यादव द्वारा भेजा गया यह नोटिस राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर रहा है।
मृत्युंजय शर्मा का दावा है कि वे सच के पक्ष में खड़े हैं और उनके लेखन का उद्देश्य बिहार की जातीय राजनीति, अपराध और सत्ता के समीकरणों को उजागर करना है। उन्होंने कहा,
“डराने, धमकाने और मानहानि के नोटिस भेजने से सच्चाई नहीं रुकती।”
कौन हैं मृत्युंजय शर्मा ?
- झारखंड भाजपा के इलेक्शन मैनेजमेंट प्रमुख हैं।
- बीआईटी मेसरा और एक्सएलआरआई, जमशेदपुर से पढ़ाई की है।
- पूर्व में एशियन पेंट्स में काम कर चुके हैं और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ भाजपा संगठन में कार्यरत रहे हैं।
- ‘Broken Promises’ किताब के ज़रिए उन्होंने बिहार की राजनीति की कथित काली परतों को सामने लाने की कोशिश की है।
यह मामला केवल एक मानहानि नोटिस का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा, इतिहास के पुनर्पाठ और सियासी समीकरणों के टकराव का प्रतीक बन चुका है। अब देखना यह है कि यह विवाद अदालत की चौखट तक पहुंचता है या सियासत की गलियों में और गहराता है।







