परवेज़ आलम व
द न्यूज़ पोस्ट4यू डेस्क.
चाईबासा, झारखंड: उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में झारखंड पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में 10 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। सरेंडर करने वालों में 3 नाबालिग भी शामिल हैं। डीजीपी अनुराग गुप्ता की मौजूदगी में हुए इस आत्मसमर्पण को राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है।
डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस मौके पर कहा कि झारखंड अब निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। पिछले 20 वर्षों से चले आ रहे उग्रवाद विरोधी संघर्ष में अब तक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 500 से अधिक जवानों व अधिकारियों ने शहादत दी है। उनकी कुर्बानी और लगातार चल रहे अभियानों की बदौलत ही आज नक्सलवाद लगभग समाप्ति की कगार पर है।
गुप्ता ने दावा किया कि दिसंबर 2025 तक राज्य पूरी तरह से उग्रवाद मुक्त हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में झारखंड में केवल 40–45 सक्रिय उग्रवादी ही बचे हैं, जिनकी गतिविधियों को पुलिस और पैरामिलिट्री बलों ने सीमित दायरे में बांध दिया है। यही कारण है कि नक्सली या तो मारे जा रहे हैं या आत्मसमर्पण करने को मजबूर हो रहे हैं।
डीजीपी ने चेतावनी दी कि अब नक्सलियों के पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं—
- आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटकर समाज का हिस्सा बनें।
- या फिर पुलिस कार्रवाई में मारे जाएं।
उन्होंने राज्य की सरेंडर पॉलिसी को देश की सबसे सफल नीति बताते हुए कहा कि यह भटके युवाओं को नई शुरुआत का मौका देती है। उन्होंने नक्सलियों से हिंसा छोड़कर शांति और विकास की राह अपनाने की अपील की।
नशाखोरी और संगठित अपराध पर भी होगी सख्ती.
इस दौरान डीजीपी ने मीडिया को बताया कि पुलिस की कार्रवाई केवल नक्सलवाद तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में बढ़ती नशाखोरी और संगठित आपराधिक गिरोहों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी। आने वाले महीनों में विशेष अभियान चलाकर ऐसे सभी अपराध नेटवर्क को तोड़ा जाएगा, ताकि झारखंड शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ सके।
पिछले 10 महीनों का रिपोर्ट कार्ड.
रिपोर्ट के अनुसार, 29 नवंबर 2024 से 23 सितंबर 2025 के बीच सुरक्षा बलों ने राज्य में 33 नक्सलियों को ढेर किया, 20 ने सरेंडर किया और 18 को गिरफ्तार किया गया।
- भाकपा (माओवादी): 21 मारे गए, 7 गिरफ्तार, 4 ने सरेंडर किया।
- जेजेएमपी (JJMP): 8 मारे गए, 16 ने सरेंडर किया, 3 गिरफ्तार।
- टीएसपीसी (TSPC): 2 मारे गए, 6 गिरफ्तार।
इन कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि टीएसपीसी और जेजेएमपी जैसे संगठन लगभग समाप्त हो चुके हैं। भाकपा (माओवादी) अब केवल सारंडा और कुछ इलाकों (हजारीबाग, चतरा) तक सीमित रह गया है।
पुलिस की रणनीति और भविष्य.
डीजीपी गुप्ता ने कहा कि उग्रवाद को खत्म करने के साथ-साथ समाज में जड़ें जमा रहे हर तरह के संगठित अपराध और नशे के कारोबार पर भी लगातार प्रहार किया जाएगा। आने वाले महीनों में चलाए जाने वाले अभियानों का लक्ष्य झारखंड को पूरी तरह शांति और विकास की राह पर लाना है।







