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  • रिश्वतखोर सीओ गिरफ्तार, जानिए कहाँ का है मामला

     

    झारखंड में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सख्त निर्देशों के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने 2025 की पहली बड़ी सफलता हासिल की। गुरुवार को एसीबी की टीम ने रांची सदर अंचल के सीओ, मुंशी राम, को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।

    क्या था मामला?
    जमीन से जुड़े एक काम के लिए रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायतकर्ता ने एसीबी को इसकी जानकारी दी। फिर क्या था? टीम ने पूरी प्लानिंग के साथ जाल बिछाया और भ्रष्ट अधिकारी को धर दबोचा।

    पुरानी शिकायतें भी आईं सामने
    यह पहली बार नहीं है जब इस अंचल में भ्रष्टाचार की शिकायतें आई हैं। जमीन की रसीद से लेकर दाखिल-खारिज तक के मामलों में बड़े पैमाने पर घूसखोरी की खबरें आती रही हैं। अधिकारियों पर आरोप है कि बिना पैसे के कोई काम नहीं होता।

    मुख्यमंत्री की सख्त हिदायत
    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया था। इस गिरफ्तारी से यह संदेश साफ हो गया है कि अब लापरवाही और भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।]
    “देखिए, ये मुंशी राम को लगा कि जमीन का मामला है, पैसों से दबा देंगे, लेकिन एसीबी ने ऐसा दबोचा कि अब रिश्वत का हिसाब जेल में करना पड़ेगा।”

    झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ इस सख्त एक्शन से जनता को न्याय की उम्मीद जगी है। क्या रिश्वतखोरी की ये गाथा यहीं खत्म होगी, या फिर कुछ और खुलासे होंगे?

     

  • झारखंड पुलिस का नया प्लान:‘फ्रेंड्स एंड एनिमी’ लिस्ट”

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………………

     झारखंड पुलिस अब पुरानी फिल्मी स्टाइल में आ गई है! याद है वो डायलॉग? “दोस्ती बड़ी चीज़ है, दुश्मन को माफ़ करना उससे भी बड़ी चीज़ है”। लेकिन यहां मामला उल्टा है। झारखंड पुलिस अब दोस्तों और दुश्मनों की पूरी लिस्ट तैयार करने में जुट गई है।

    दोस्त और दुश्मन का हिसाब किताब

    राज्य के डीजीपी अनुराग गुप्ता ने इस नए प्लान की शुरुआत की है। सभी जिलों के एसपी, डीआईजी, और आईजी को आदेश दिया गया है कि हर थाने में दो लिस्ट बनाई जाए।

    • लिस्ट 1: “नो योर फ्रेंड्स” – मतलब, जो लोग पुलिस का साथ देते हैं, उनकी लिस्ट।
    • लिस्ट 2: “नो योर एनिमी” – यानी, उग्रवादी, अपराधी, और वो लोग जो इनका समर्थन करते हैं।

    इन दोनों लिस्टों का दस्तावेजीकरण डीएसपी और एसपी स्तर पर होगा।

    कैसे बनेगी ये लिस्ट?

    पुलिस थानों में दो श्रेणियों की लिस्ट तैयार होगी :

    1. दोस्तों की लिस्ट में वे लोग होंगे जो पुलिस का समर्थन करते हैं।
    2. दुश्मनों की लिस्ट में उग्रवादी, अपराधी, उनके ओवरग्राउंड वर्कर, और उनके मददगार।

    अब होगा क्या?
    जब ये लिस्ट बन जाएगी, तो पुलिस अपराधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी करेगी।

    क्या है प्लान के पीछे का मकसद?

    झारखंड में उग्रवाद और अपराध पर लगाम लगाने के लिए पुलिस का ये नया कदम लिया गया है। दोस्तों की पहचान से पुलिस को सहयोग मिलेगा, और दुश्मनों की लिस्ट से पुलिस को सीधे ऐक्शन लेने का मौका।

    लोगों का क्या कहना है?

    कुछ लोग कह रहे हैं कि पुलिस अपने दोस्तों की मदद से अपराध पर रोक लगाएगी।

    वहीं, आलोचकों का कहना है कि पुलिस की दोस्ती और दुश्मनी की परिभाषा क्या होगी, ये तो वक्त ही बताएगा।

    अब देखना ये है कि ये “फ्रेंड्स एंड एनिमी लिस्ट” झारखंड पुलिस को अपराध रोकने में कितना मदद करती है। तब तक, गली में सावधान रहिए… क्या पता आप दोस्त की लिस्ट में हों या दुश्मन की!

     

     

  • “सर्दी का झारखंडी कहर: गिरिडीह समेत पूरा प्रदेश ठिठुर रहा, जानिए आगे क्या होगा”

    झारखंड में इस बार ठंड ने रजाई और अलाव की डिमांड बढ़ा दी है। गिरिडीह समेत प्रदेश के ज्यादातर जिलों में ठिठुरन बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में तापमान दो से तीन डिग्री तक गिर गया। गुमला तो ठंड के मामले में सबको पछाड़ते हुए 6.1 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। और गिरिडीह ? यहां भी 8 डिग्री का कांटा थर-थर कांप रहा है।

    सर्द हवा, घना कुहासा और ठिठुरते झारखंडी। 

    मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर और पश्चिम से आने वाली सर्द हवाओं ने माहौल और ठंडा कर दिया है। सुबह-सुबह कोल्हान में घना कुहासा छाया रहा, और दृश्यता सिर्फ 1000 मीटर की रह गई। जमशेदपुर का हाल भी कुछ खास नहीं। यहां का न्यूनतम तापमान 10.4 डिग्री सेल्सियस रहा। चाईबासा का तापमान दिन में 25.4 डिग्री रहा, जो झारखंड में सबसे ज्यादा है। लेकिन फिर भी ये सामान्य से नीचे है।

    अगले तीन दिन का हाल। 

    रांची मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने साफ कहा है, “ठंड अभी कम होने वाली नहीं। अगले तीन दिन और ठिठुरने के लिए तैयार रहिए।”  गिरिडीह का न्यूनतम पारा 8-9 डिग्री के आसपास रहेगा। मतलब, रजाई छोड़ने की गलती मत करना।

    झारखंड की कनकनी और आपकी तैयारी।

    चाहे आप गुमला में हो या गिरिडीह  में, ठंड ने सबको अपनी चपेट में ले लिया है। सुबह-सुबह स्कूल जाना हो या ऑफिस, गुनगुनी चाय और स्वेटर साथ रखना ज़रूरी है।

    अब देखते हैं, तीन दिन बाद ये ठंड थोड़ी नरम पड़ती है या नहीं। तब तक, अलाव जलाइए, गर्म कपड़े पहनिए और ठंड का आनंद लीजिए। क्योंकि झारखंड की सर्दी यूं ही नहीं आती, पूरे स्वैग के साथ आती है!

  • अजमेर शरीफ: ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर पीएम मोदी चढ़ाएंगे चादर

    परवेज़ आलम की रिपोर्ट …………..

    एक बार फिर अजमेर शरीफ से जुड़ी खबर सुर्खियों मे है । इस बार खबर के केंद्र मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी है । मोदी जी इस बार भी ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर चढ़ाएंगे। ये उनकी 11वीं चादर होगी।

    पीएम मोदी की चादर और संदेश।

    हर साल की तरह पीएम मोदी ने इस बार भी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी को चादर सौंप दी है। शाम 6 बजे की औपचारिकता के बाद यह चादर अजमेर शरीफ भेजी जाएगी। मोदी जी ने एक्स पर तस्वीरें पोस्ट कीं और लिखा:
    “मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर पवित्र चादर पेश की। यह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स के दौरान प्रतिष्ठित अजमेर शरीफ दरगाह पर रखी जाएगी।”

    यह परंपरा मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद शुरू हुई और अब तक जारी है।

    उर्स के रंग: बॉलीवुड से लेकर राजनीति तक। 

    दरगाह में चादर पेश करने वालों की लंबी फेहरिस्त है। इस बार केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार के साथ बॉलीवुड के कुछ सितारे भी अपनी चादरें लेकर पहुंचे। हर कोई देश में शांति और भाईचारे की दुआ मांग रहा है।

    विरोध की सियासत। 

    अब कहानी में ट्विस्ट लाने का काम किया हिंदू सेना ने। संगठन के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दावा किया कि दरगाह दरअसल एक प्राचीन संकट मोचन महादेव मंदिर है। उन्होंने पीएमओ को खत लिखकर अपील की है कि जब तक मामला अदालत में लंबित है, तब तक पीएम की ओर से चादर चढ़ाने का कार्यक्रम रोक दिया जाए।

    दरगाह या मंदिर: क्या कहती है अदालत?

    गुप्ता जी का दावा है कि चौहान वंश ने इस मंदिर का निर्माण कराया था और उन्होंने कोर्ट में इसके वैज्ञानिक सर्वे की मांग की है। 24 जनवरी को इस मामले की सुनवाई होनी है।

    राजनीति का नया अध्याय?

    एक तरफ पीएम मोदी का चादर भेजना अल्पसंख्यक समुदाय के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश माना जा रहा है, तो दूसरी तरफ हिंदू सेना इसे धर्म और इतिहास का मामला बता रही है।

    आखिर क्या है अजमेर शरीफ की खासियत?

    ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। पीएम की चादर एक संदेश है कि आस्था और भाईचारा राजनीति से ऊपर है।

    अब देखना ये है कि 4 जनवरी को जब किरेन रिजिजू चादर लेकर दरगाह पहुंचेंगे, तब यह मामला सुलह का रास्ता अपनाता है या और बड़ा विवाद बनता है।

     

     

  • मंईयां सम्मान योजना :1400 करोड़ रुपये की राशि 6 जनवरी को 56 लाख महिलाओं के खाते मे

    झारखंड में इस बार की सर्दी कुछ खास होने वाली है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फिर से साबित कर दिया कि महिलाओं का सम्मान उनकी सरकार की प्राथमिकता है। मंईयां सम्मान योजना की नई किस्त 6 जनवरी को जारी होने जा रही है, और पूरे राज्य की 56 लाख महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान लाने का वादा किया गया है। ये सिर्फ 2500 रुपये की बात नहीं है। ये बात है भरोसे की, जो हेमंत सोरेन ने झारखंड की महिलाओं के साथ बांधा है। कार्यक्रम नामकुम के खोजा टोली मैदान में होगा, और इसे लेकर तैयारियां ज़ोरों पर हैं। करीब तीन लाख महिलाएं इस समारोह में हिस्सा लेने पहुंचेंगी। भव्य कार्यक्रम, भरी दोपहरी, और 1400 करोड़ रुपये की सीधी मदद।

    28 दिसंबर को क्यों टला कार्यक्रम?

    पहले ये समारोह 28 दिसंबर को होना था। लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन के बाद, सरकार ने राजकीय शोक में इसे आगे बढ़ा दिया। लेकिन  इंतजार अब खत्म होने वाला है।

    कैसे होगी शुरुआत?

    26-27 दिसंबर को टेस्ट के तौर पर कुछ महिलाओं के खातों में ये राशि ट्रांसफर हुई थी। अब पूरी 56 लाख महिलाओं के खाते में सीधे 2500 रुपये पहुंचेंगे। विधानसभा चुनाव से पहले ये योजना सिर्फ 1000 रुपये की थी, लेकिन वादा किया गया था कि दोबारा सत्ता में लौटने पर इसे बढ़ाकर 2500 रुपये किया जाएगा। और देखिए, वादा पूरा हो रहा है।

    राजनीति या हकीकत?

    हेमंत सोरेन की ये योजना महज़ वादों तक सीमित नहीं है। महिलाओं के समर्थन ने ही उनकी सरकार को दोबारा सत्ता में लाने में अहम भूमिका निभाई। अब वो उन्हीं महिलाओं का आभार जता रहे हैं।

    झारखंड की महिलाओं को क्या कहना है?

    “हमारे लिए ये सिर्फ पैसे नहीं, ये सम्मान है। सरकार हमारे लिए सोचती है।”
    ये सिर्फ योजना नहीं, महिलाओं के आत्मसम्मान का त्योहार है।

  • नए साल के जश्न के बीच झारखंड का खरसावां गोलीकांड का स्मरण,सीएम ने दी श्रद्धांजलि

    परवेज़ आलम की खास और भावपूर्ण रिपोर्ट……..

    एक तरफ़ जहां पूरी दुनिया 1 जनवरी को नए साल के आगमन का उत्सव मना रही है, झारखंड का सरायकेला-खरसावां गांव हर साल इस दिन को शहीद दिवस के रूप में याद करता है। यह वह दिन है जब इस भूमि ने अपने वीर सपूतों और बेटियों की कुर्बानियां देखीं।

    आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और विधायक कल्पना सोरेन के साथ खरसावां स्थित शहीद स्थल पहुंचे। पारंपरिक तरीकों से शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने झारखंड के महान वीरों के संघर्ष को नमन किया। यह परंपरा पिछले मुख्यमंत्रियों – बाबूलाल मरांडी और रघुवर दास – के समय से चली आ रही है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा,
    “आज नए साल के पहले दिन, हम अपने उन वीर पूर्वजों की शहादत से प्रेरणा लेते हैं जिन्होंने जल, जंगल, और ज़मीन की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह वीर भूमि “झारखंड “असंख्य बलिदानों से सिंचित है। हर साल हम खरसावां के शहीदों की स्मृति में यहां एकत्र होते हैं, उनकी अमर गाथा को याद करते हैं।”

    यहाँ आने से पहले हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार से राजभवन मे जाकर मिले और उन्हें नए साल की बधाई दी ।

    क्या है खरसावां की कहानी?

    यह दर्दनाक घटना 1 जनवरी 1948 को हुई, जब खरसावां के हाट बाजार में सैकड़ों आदिवासियों को गोलियों का सामना करना पड़ा। उस दिन, जो गुरुवार था, आदिवासी ग्रामीण अपने पारंपरिक बाजार में पहुंचे थे। लेकिन वहां उनकी ज़िंदगी खून से लथपथ खरसावां की मिट्टी पर सिमट गई।

    इस जनसंहार की जड़ें आज़ाद भारत के शुरुआती दौर से जुड़ी हैं। 1947 के बाद राज्यों के पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही थी। 14-15 दिसंबर को अनौपचारिक रूप से खरसावां और सरायकेला रियासतों का विलय ओडिशा राज्य में कर दिया गया। इसका विरोध आदिवासी नेता जयपाल सिंह मुंडा ने किया। उन्होंने 1 जनवरी 1948 को एक विशाल जनसभा का आह्वान किया, लेकिन किसी कारणवश वे खुद वहां नहीं पहुंच सके। सभा में हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए। इसी दौरान पुलिस और भीड़ के बीच संघर्ष हुआ और अचानक गोलियां चलने लगीं। इतिहासकारों का कहना है कि सैकड़ों लोग मारे गए, लेकिन मरने वालों की सही संख्या आज तक किसी को नहीं पता।

    शहीद दिवस और गहरे दफन राज। 

    हर साल 1 जनवरी को खरसावां में शहीदों की याद में मेला लगता है। इसमें झारखंड और ओडिशा के आदिवासी समुदाय बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं। यह केवल शोक का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और एकता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री और अन्य नेता इस आयोजन को अपनी उपस्थिति से सम्मान देते हैं।

    आजाद भारत का सबसे बड़ा गोलीकांड।

    खरसावां गोलीकांड भारत का सबसे बड़ा आदिवासी जनसंहार माना जाता है। इसने झारखंड की राजनीति और समाज पर अमिट छाप छोड़ी है। यह दिन सिर्फ़ एक इतिहास नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अदम्य साहस और बलिदान का प्रतीक है।

    आज, जब पूरा देश नए साल के उल्लास में डूबा है, झारखंड का यह छोटा सा गांव उस जख्म को याद कर रहा है जिसने यहां की मिट्टी को रक्त से लाल कर दिया। खरसावां के शहीदों को शत-शत नमन।

     

  • झारखंड : पुलिस का बड़ा दावा माओवाद और अपराध पर 2024 में कसी नकेल!

    परवेज़ आलम की खास रिपोर्ट …………

    झारखंड पुलिस ने 2024 की समाप्ति के साथ अपनी उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किया है। दावा है कि राज्य में नक्सलवाद, अपराध, साइबर क्राइम, और मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में बड़े पैमाने पर सफलता मिली है।

    आईजी (ऑपरेशन) एवी होमकर की मानें तो पुलिस ने माओवादी गतिविधियों पर शिकंजा कसते हुए 244 माओवादियों को गिरफ्तार किया है। इनमें एसएसी सदस्य जया दी उर्फ चिंता, 10 लाख के इनामी जोनल कमांडर शंभू गंझू और सीताराम रजवार जैसे कुख्यात नाम शामिल हैं। इसके अलावा 24 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 9 मुठभेड़ों में मारे गए, और 123 हथियार बरामद किए गए। उन्होंने बताया कि सीपीआई (माओवादी) से अलग हुए समूह तृतीय प्रस्तुति समिति (टीपीसी) के कई उग्रवादियों को भी गिरफ्तार किया गया है। इनपर कुल 36 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस ने 246 किलो विस्फोटक, 13.39 लाख की लेवी के रुपए , और 239 आईईडी भी बरामद करने का दावा किया हैं।

    नक्सलवाद रोकने पर ठोस नीति नहीं ।  

    झारखंड की पहाड़ियों में अब भी नक्सलियों की गतिविधियां खत्म नहीं हुईं। सवाल है कि ये गिरफ्तारियां राज्य के युवाओं को माओवादी संगठन से जुड़ने से कैसे रोकेंगी इस पर  कोई थोड़ प्लानिंग अभी तक नहीं दिखती ।

    साइबर क्राइम और मादक पदार्थों पर नकेल का दावा

    2024 में पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े 1295 मामलों में 971 गिरफ्तारियां कीं और 8.18 करोड़ रुपये जब्त किए। “प्रतिबिंब एप” के जरिए 274 मामलों का समाधान और 77 लाख की वसूली ने तकनीकी अभियानों को एक नया आयाम दिया।
    मादक पदार्थों के खिलाफ 1407 किलो अफीम और 4251 किलो गांजा जब्त किया गया। 3975 एकड़ में फैली अफीम की खेती नष्ट की गई।

    अपराध पर लगाम या सिर्फ आंकड़ों का खेल?

    154 अपराधियों की गिरफ्तारी, 97 संगठित अपराध के मामलों का निपटारा और अलकायदा के 4 आतंकियों की गिरफ्तारी—सुनने में जरूर बड़ा लगता है। लेकिन झारखंड की सड़कों पर बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर पुलिस की चुप्पी सवाल खड़े करती है।

    नया साल, नई चुनौती!

    झारखंड पुलिस ने 2025 के लिए जनता को शुभकामनाएं दी हैं और अपराध व उग्रवाद से मुक्ति का संकल्प दोहराया है। लेकिन क्या यह संकल्प सिर्फ प्रेस बयान तक सीमित रहेगा, या झारखंड सचमुच शांति और सुरक्षा के नए अध्याय की ओर बढ़ेगा? यह सवाल अभी भी बाकी है।

     

     

     

  • नया साल, नई शुरुआत: गुरुद्वारे में सिख समाज का भजन-कीर्तन और लंगर आयोजन!

    गिरिडीह:  सिख समाज ने नए साल 2025 का स्वागत भक्ति और समर्पण के साथ किया। पंजाबी मुहल्ला स्थित गुरुद्वारे में रात 11 बजे से लेकर 12:30 बजे तक शब्द कीर्तन, भजन और गुरु सिमरन का आयोजन हुआ। इस अवसर पर सिख समुदाय के लोग एकजुट होकर प्रभु और गुरु को याद करते हुए सबके सुख और समृद्धि की कामना करते नजर आए।

    कार्यक्रम की खास बात यह रही कि साल के अंतिम क्षणों में, जहां एक तरफ दुनिया पार्टियों और शोर-शराबे में व्यस्त थी, वहीं सिख समाज भक्ति और साधना में डूबा हुआ था। जैसे ही घड़ी की सुई ने रात 12 बजकर एक नया दिन दिखाया, पूरे गुरुद्वारे में “वाहेगुरु” के जयकारे गूंज उठे।

    इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों के लिए लंगर का भी आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन में सिख समाज के प्रतिष्ठित सदस्यों ने भी भाग लिया, जिनमें डॉ. गुणवंत सिंह मोंगिया, सरदार नरेंद्र सिंह शमी, डॉ. अमरजीत सिंह सलूजा, चरणजीत सिंह सलूजा, भूपेंद्र सिंह दुआ, तेजेंदर सिंह  डिम्पल  और अन्य गणमान्य शामिल रहे।

    गौरतलब है कि हर साल गिरिडीह का सिख समाज इस तरह के जागरण का आयोजन करता रहा है। यह परंपरा न सिर्फ धार्मिक श्रद्धा को बढ़ावा देती है, बल्कि समाज में शांति और एकता का संदेश भी फैलाती है।

    इस बार का कार्यक्रम भी एक प्रेरणादायक संदेश के साथ खत्म हुआ— “गुरु का नाम लो और नई शुरुआत करो!”

  • गिरिडीह में नए साल का जश्न और पुलिस का परफेक्ट प्लान!

    गिरिडीह में नए साल का जश्न: पिकनिक, पहाड़, और पुलिस का परफेक्ट प्लान!

    गिरिडीह – झारखंड का वो हिस्सा जो नए साल पर सिर्फ जिले का नहीं, बल्कि बिहार, बंगाल, राजस्थान और गुजरात तक के सैलानियों के दिलों की धड़कन बन जाता है। जंगल, पहाड़ और झरनों के बीच यहां जो सुकून मिलता है, वो शायद ही कहीं और मिले।

    उसरी फॉल का जादू:
    जरा सोचिए, ऊंची-ऊंची चट्टानों के बीच से कल-कल करती पानी की धाराएं, जैसे किसी पुराने गीत की धुन पर नाच रही हों। यही है उसरी फॉल, गिरिडीह का सबसे खूबसूरत जलप्रपात। दूर से सुनाई देने वाली झरने की आवाज मानो सैलानियों को खींचकर बुला लेती है। यही वजह है कि भोजपुरी फिल्म ‘गंगाधाम’ समेत दर्जनों फिल्मों की शूटिंग यहीं हो चुकी है।

    खंडोली का दमदार डैम:
    अगर आपकी रुचि झरनों से हटकर डैम और विदेशी पक्षियों में है, तो खंडोली डैम आपका इंतजार कर रहा है। नौका विहार हो या शांत जल में पक्षियों का प्रवास देखना, खंडोली की हरियाली और पानी आपका दिल जीत लेगा।

    नया साल, नई भीड़, और पुलिस की पैनी नजर:

    अब सवाल ये है कि इतनी भीड़ संभलती कैसे है? नए साल के पहले दिन यहां पैर रखने की जगह नहीं बचती।

    • पुलिस प्रशासन ने 35 पुलिस बल और 35 स्थानीय कार्यकर्ताओं को तैनात किया है।
    • शराब पीकर हंगामा न हो, इसके लिए ब्रेथ एनालाइजर से जांच हो रही है।
    • वाहन तेज चलाने वालों पर पैनी नजर और गोताखोरों की टीम हर वक्त तैयार।
    • मेडिकल इमरजेंसी की भी पूरी व्यवस्था।

    मंत्री जी का जायजा:

    झारखंड के पर्यटन मंत्री और स्थानीय विधायक सुदिव्य कुमार सोनू खुद खंडोली और उसरी फॉल पहुंचे। साथ में गिरिडीह के एसपी डॉ. बिमल कुमार भी मौजूद थे। मंत्री जी ने मीडिया को बताया कि इस बार सुरक्षा और सुविधाओं में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है।

    मंत्री और एसपी दोनों ने नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से शांतिपूर्ण और सुरक्षित जश्न मनाने की अपील की।

    तो गिरिडीह बुला रहा है!

    नए साल की शुरुआत में अगर आपको प्रकृति के बीच, झरनों के पास, या पक्षियों की चहचहाहट में सुकून चाहिए, तो गिरिडीह आपका इंतजार कर रहा है।
    बस याद रहे – जश्न में भी सुरक्षा का ख्याल रखना जरूरी है!

  • पुलिस और प्रशासन में बड़ा उलटफेर: नए साल में नई जिम्मेदारियां!

    RANCHI: 1 जनवरी 2025 से झारखंड के पुलिस विभाग में 6 एसपी अधिकारी डीआइजी रैंक में और 3 डीआइजी अधिकारी आइजी रैंक में प्रमोट हो जाएंगे। विभागीय प्रोन्नति बोर्ड की बैठक में हाल ही में यह बड़े फैसले लिए गए थे।

    कौन कहां जा रहा है?
    आइजी रैंक में प्रमोट होने वाले:

    अनूप बिरथरे: डीआइजी रांची से बने आइजी एसटीएफ।
    सुनील भास्कर: डीआइजी हजारीबाग से बने आइजी पलामू।
    मयूर पटेल कन्हैया लाल: डीआइजी जैप से बने आइजी मानवाधिकार।

    डीआइजी रैंक में प्रमोट होने वाले:

    चंदन कुमार सिन्हा: एसएसपी रांची, डीआइजी पद पर प्रमोट होकर रांची में ही बने रहेंगे।
    अजीत पीटर डुंगडुंग: एसपी देवघर, डीआइजी पद पर प्रमोट होकर वहीं बने रहेंगे।
    प्रियदर्शी आलोक: एसपी एसटीएफ से बने डीआइजी रेल।
    अंबर लकड़ा: जैप-3 गोविंदपुर से प्रमोट होकर बने डीआइजी दुमका।
    अनुरंजन किस्पोट्टा: एसपी सीआइडी से बने डीआइजी विशेष शाखा।
    चंदन कुमार झा: एसपी विशेष शाखा से बने डीआइजी एसआइबी।

    प्रोफार्मा प्रोन्नति में कौन शामिल?

    राकेश बंसल: भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में निदेशक के तौर पर आइजी रैंक।
    जया राय और शिवानी तिवारी: एनआइए और सीबीआइ में एसपी रहते हुए डीआइजी रैंक।
    आईएएस अफसरों का प्रमोशन भी चर्चा में!
    झारखंड में हाल ही में 13 आईएएस अधिकारियों को विशेष सचिव रैंक में प्रमोट किया गया है। इनमें अजय कुमार सिंह और डॉ. नितिन मदन कुलकर्णी को अपर मुख्य सचिव का दर्जा मिला।

    विशेष सचिव बने अफसर:
    रविशंकर शुक्ला, नेहा अरोड़ा, संदीप सिंह, संजीव कुमार बेसरा, अजयनाथ झा और अन्य।

    इसके अलावा गैर-प्रशासनिक सेवा से भी 7 अफसरों को आईएएस में प्रमोट किया गया है। इस फैसले से झारखंड की प्रशासनिक सेवाओं में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।

    तो झारखंड के पुलिस और प्रशासनिक ढांचे को मिलेंगी नई दिशाएं और जिम्मेदारियां।