कौन हैं सुशीला कार्की जिस पर जेन-ज़ेड आंदोलनकारी जता रहे हैं भरोसा
परवेज़ आलम.
For The News Post4u.
काठमांडू: नेपाल इस समय बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रहा है। लगातार बढ़ते जनाक्रोश और सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अब देश में अंतरिम सरकार गठन की तैयारियाँ तेज हो गई हैं। सेना और जेन-ज़ेड आंदोलनकारियों के बीच हालात सामान्य करने के लिए बातचीत भी जारी है।
जेन-ज़ेड की वर्चुअल बैठक, सुशीला कार्की बनीं नई उम्मीद.
ताजा घटनाक्रम में जेन-ज़ेड आंदोलनकारियों ने एक ऑनलाइन बैठक की जिसमें 5,000 से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। इस बैठक में उन्होंने नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अपना नेता चुनने का ऐलान किया। माना जा रहा है कि कार्की अब अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर सकती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्की ने युवाओं के इस फैसले पर सकारात्मक रुख दिखाया है, हालांकि उन्होंने साफ किया है कि किसी भी औपचारिक घोषणा से पहले वे सेना प्रमुख से मुलाकात करेंगी। बताया जा रहा है कि अब तक 2,500 से अधिक समर्थक औपचारिक तौर पर उनके साथ खड़े हो चुके हैं।
कौन हैं
- उन्होंने 1979 में वकालत की शुरुआत की थी।
- 2009 में वे सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता न्यायाधीश बनीं।
- 2010 में उन्हें स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
- 11 जुलाई 2016 से 6 जून 2017 तक वे नेपाल की मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहीं।
मुख्य न्यायाधीश बनने के एक साल के भीतर, 2017 में, उन पर महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। राजनीतिक दलों ने उन पर पूर्वाग्रह और कार्यपालिका में हस्तक्षेप का आरोप लगाया था। हालांकि, उस समय भारी जन समर्थन और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से यह प्रस्ताव वापस लेना पड़ा। इस विवाद ने कार्की को जनता के बीच एक साहसी और निष्पक्ष चेहरा बना दिया।
नेपाल में हालात तनावपूर्ण, कर्फ्यू लागू.
राजनीतिक अस्थिरता के बीच देश में कानून-व्यवस्था बिगड़ गई है। बीते दो दिनों में उपद्रव और हिंसा की घटनाएँ लगातार सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सुप्रीम कोर्ट और कई राजनीतिक दलों के दफ्तरों व नेताओं के घरों में आगजनी और तोड़फोड़ की।
स्थिति नियंत्रण से बाहर न जाए, इसके लिए सेना ने मंगलवार रात से ही देशभर में कर्फ्यू लागू कर दिया। प्रतिबंधात्मक आदेश बुधवार शाम 5 बजे तक प्रभावी रहे और गुरुवार सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू जारी रहेगा। राजधानी काठमांडू की सड़कों पर सेना का पहरा है और लोग घरों में कैद होकर रह गए हैं।
नेपाल की राजनीति इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। एक ओर जनता बदलाव की मांग पर अडिग है, वहीं दूसरी ओर सेना स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। इस बीच, यदि सुशीला कार्की अंतरिम सरकार की कमान संभालती हैं तो यह नेपाल की राजनीति में नई दिशा की शुरुआत हो सकती है।








